इनके नाम से आतंकवादियों के उड़ जाते हैं होश Bada Bharat Dr Vivek Bindra
[प्रशंसा] तो फिर जिनसे आज हम आपको मिलवा रहे हैं यह शहीद भगत सिंह के बड़े भक्त हैं इसीलिए इ इनको जिंदा शहीद भी कहा जाता है स्वागत करेंगे चेयरमैन ऑफ ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट श्री मनिंदरजीत सिंह बिट्टा जी का मैं सबको कहना चाहता हूं जो लोग भारत को बड़ा भारत बनाते हैं उन्हीं की कहानियां हम आप तक पहुंचाते हैं पहुंचाते हैं तो जैसे हर बुधवार हम आपके पास ऐसे लोगों से मिलवा हैं आज की कहानी थोड़ी अलग है आज बड़ा भारत शो अलग प्रकार से शूट किया गया है आज हमने हमारे ऑफिस के लाइव ऑडियंस के बीच में हम चाहते हैं कि इनको लाइव वो इंस्पिरेशन देखने में 28 के लगते हैं पर ब लाइफ का इस बॉडी में एक्सपीरियंस लंबा चौड़ा है और मैंने पूछा बैठ के बात करोगे खड़े हो के बोला खड़ करूंगा दोनों पांव में खाली लोहा ही लोहा है 14 साल की उम्र में पॉलिटिक्स जवाइन किया 14 बार बॉम ब्लास्ट गोलियां बम इन्होंने खाए 14 बार इतनी मतलब शरीर में खाली लोहा ही लोहा है और भगवान ने हर बार इनको बचा के किसी तरह से निकाला है और इतने बड़े करेज की कहानी है और आज भी टेररिज्म के खिलाफ बड़ी बुलंद आवाज से बात करते हैं कॉलेज के बच्चों से यूनिवर्सिटी से लोगों से बात करते हैं किसी से रुपया नहीं लेते एक सब सेवा की भावना से करते हैं और दूसरी शहीदी दिवस को ये अलग प्रकार से मनाते हैं जितने भी शहीदों के परिवार है उनको कैसे उनको उत्साह बढ़ाना इनकरेज करना कि भाई आपके परिवार से एक बंदा चला गया है तो यह उनका परिवार बन जाते हैं तो ऐसे व्यक्ति एम एस बेट्टा जी से आप मिलने जा रहे हो आप यह सोचो कि जो डर को डरा देने वाले आदमी आपके अंदर आज यह मन में सोचना चाहिए कि एक लेश मात्र का भी किसी भी चीज का डर है वो कैसे खत्म होगा वो आपसे सुनकर आज हम सीखेंगे य मेरा शरीर एक बोनस है मैं मर चुका कई बार और बार-बार आतंकवादियों को यही चैलेंज करता हूं एक शाम चिरागों में सजा रखी है शर्त लोगों ने हवाओं में लगा रखी है अंजाम की भी हम परवाह नहीं करते जान हमने भी हथेली पर उठा रखी है बचपन के अंदर अपने ग्रैंडफादर के साथ जल वाला बाग जहां हिंदू मुस्लिम सिख ईसाइयों का खून बहा सा साल की उम्र होगी सैर करने जाते थे एक तरफ हरिमंदिर साहब एक तरफ जले वाला बाग इधर हमारी हवेली थी एक दिन पूछा निशान किस चीज के तो ग्रैंडफादर ने बताया जनरल डायर की गोलियों के निशान है क्यों कैसे पूछा किताब लेकर दी पढ़ी और कुछ समय बाद उसी लाल मिट्टी पर शपथ ली कि कभी जिंदगी में वक्त मिला तो इस आजादी की रक्षा करने के लिए हम भी खून देंगे वह वक्त आया कई वर्षों के बाद शहीदों ने हमारा इम्तिहान लिया उन बहादुर धों ने भगत सिंह राजगुरु सुखदेव मंगल पांडे तफा कुल्ला खान सुभाष चंद्र बोस उन्होंने इम्तिहान लिया जब 15 अगस्त आई सामने आतंकवादी एे 47 और सुबह कहते थे गड़े से पर्ची निकाल र आज दिल्ली के अंदर आज बंबे के अंदर आज जयपुर के अंदर फलाने को मारना तो मार दिया जाता था मैं तो सामने था एक छोटा सा व्यक्ति बच्चा था मैं आजादी का दिन आया एक पुलिस ऑफिसर आता है उसका नाम अभी तक याद है मुझे चमनलाल एसएचओ कहते थे क ये रास्ता बदलो लो क्यों कहते आतंकवादियों का चैलेंज आया बम फेंक अगर तिरंगा झंडा लहराया तो आजादी का दिन मनाया तो मैंने जिद्द की उसी जगह पर तरंगे झंडे का इंतजाम किया और उस वक्त आप तो छोटे बच्चे होंगे भाई साहब को पता होगा लाल पीले रंग के सयाने होते थे 5:00 बजे हम लगाने लगे थोड़ा सा घर के अंदर आए तो एकदम ब्लास्ट की आवाज आती है क्यों किया ब्लास्ट आजादी का दिन ना मना सके खून से बने शहीदों के तरंगे झंडे को ना हम लहरा सके बाहर गए बहुत दुआ था पर लोग नहीं थे किसी से पूछा कोई देखे तो नहीं लोग एक वाइफ हस्बैंड मथा टेक के आ रहे थे हरमंदर कते इस गली में गए गली के अंदर हरमंदर साहब इतना जोश था राष्ट्र के लिए तरंगे झंडे का आजादी का हमने अपने जीवन की परवाह नहीं की उनके पीछे भागे खैर हम उनकी हदूद में जा चुके थे वापस पहुंचे उनका एक ही मकसद था कि आजादी का दिन ना मना सके तिरंगा झंडा ना लहरा सके 12 बजे तिरंगा झंडा लहराने लगे बड़े-बड़े लीडर थे उस वक्त वो आने से डर गए के थे किसी की टांग खराब है कोई बीमार है खैर किसी को पकड़ा सीनियर को बिठाया फिर आवाज आती है कि अब तरंगे झंडे को उतार के आग लगाएंगे उस वक्त उनकी तादाद बहुत ज्यादा होती थी अंदर हम तो बच्चे थे मोहल्ले के लोग थे स्टूडेंट थे अपने दोस्त व अंदर से कपाने लेकर आ जाते वो दुका एरिया सारा किरपान और कपड़ों की दुकान का होता था हम भी निकाल लेते वह भी निकाल लेते खैर बीएसएफ वालों का होता है को तरंग एक झंडा लाल झंडा गाट देते इधर से उधर जाएगा हम गोली मारेंगे खैर हम तिरंगा झंडा लहरा करके 5 बजे तक जब तक सूरज डूबता नहीं वंदे मातरम भारत माता की जाए पहरा देते रहते हैं तरंगे झंडे को सूरज डूबने लगता है सीने पर लगाते और ले जाते यह है भारत माता की शक्ति वंदे मातरम की शक्ति और तरंगे झंडे की शक्ति हमने देखी उसके बाद उसके बाद रास्ते में कई गोलियां चलती कई बार हुआ वो छोटी चीजें हैं गोलिया गोलियां तो बहुत छोटी चीज जब 92 में मैं मिनिस्टर बनता हूं एक कार्यक्रम था हमारे मिनिस्ट्री डिपार्टमेंट का किसी ने कहा यहां पर कार्यक्रम है तो आपने चीफ गेस्ट आना है उससे पहले गोलियां चल रही थी मैं क्रस पर चलता था कई सालों से सुबह कार्यक्रम था सर्कट हाउस के अंदर मैंने अपने कसेस को थोड़ा थोड़ा सा चला मैं पंजाबी में अपने दोस्त को बोला चल गए भाई सुबह इही जांगे आप सुबह निकले मुझे याद है मटका सिल्क बिहार का होता है क्रीम कलर का वो पहना तिल्ले की जूती पहनी और क्रस छोड़ दिए और बड़ा एक आजाद लग रहा था कि भा मजा आएगा अब तो बड़े सालों बाद ऐसे ही जा रहा हूं जैसे मैं बुलेट फू गाड़ी में बैठने लगा मेरा जो मिनिस्ट्री गाड़ी का ड्राइवर था उसने तरंगे झंडे को खोल दिया अब तरंगे झंडे के साथ मेरी बहुत प्यार है मोहब्बत है सिर झुकाता हूं तो इसमें बैठो मैं पता था कि कुछ हो सकता है पर वो तिरंगे झंडे के प्यार में मैं बुलेट गाड़ी छोड़ के मनिस्ट की गाड़ी में बैठ गया गाड़ियों का काफिला चला आगे वाइट रंग की एक पायलट थी लाल रंग की ड्डी टर बज रहा था मन में आवाज आई कि होटर तुम्हें मरवाएगी आईपी आ गया वीआईपी नहीं पर मैं ट प्रोटेक्ट हूं जैसे अमृतसर का पुल नीचे हुआ किसी ने एक कार में 45 किलो आरडी एक्स जो आधी दिल्ली में एक एक किलो लगा दो तबाह कर देगा वो मेरे टूटे से शरीर के लिए उन्होंने फिट कर दिया और जैसे काफिला निकला रिपोर्ट दबा दी मेरे आगे सीआरपी का जवान था एलएमजी ऐसे जैसे फौज वालों की होती वो गाड़ियां मेरे साथ चलती थी उसका शरीर और और जवानों के शरीर और एलएमजी की उड़ती हुई उनके शरीर को उड़ते हुए आधे को मैंने अपनी आंखों से देखा और छोटे-छोटे बच्चे सुबह स्कूल में जा रहे थे आठ या नौ बच्चे होंगे उनको तारों में लटकते हुए देखा गोड़े टांगे वाले गोड़ों को लटकते हुए देखा हर तरफ खून देखा मेरे पांव में थोड़ी सी दर्द हुई मैं उस वक्त भी कहा बच गए भाई मेरे साथ कुछ ऑफिसर थे वो भी बच बुच गए किसी को चोट लगी मैं नीचे उतरा नीचे जैसे ऐसे किया तो पांव तो मेरा है ही नहीं ऐसे लटका हुआ और यह पैर रात को कसी छोड़ा इधर गोलियां थी ऐसे मुझे नहीं पता था कि मुझे दूसरा भी पाव जाएगा तो मेरे गन आए उन्होंने मुझे पकड़ा और जैसे पकड़ के ले जाने लगे सड़क बहुत चौड़ी थी ऊपर से उन्होंने फिर गोलियां चलाई बम चलाने के बाद यह बच ना जाए फिर गोलियां चलाई मेरे गणमन के गोलियां लगी पर वह बड़े बहादुर थे उन्होंने मुझे एक दुकान थी बहुत बड़ी पूरा ऐसे गिलास थे सब टुकड़े टुकड़े हो गए मुझे लेटा दिया एक गनम वही चला गया दूसरा बच गया अब कोई पुलिस नहीं कुछ नहीं सारों तरफ खून खून था फिर मेरे पीछे पीए उठ थे जो बच गए थे बुलेट फू गाड़ी ने मुझे उठाया उठा के मुझे बुलेट फू गाड़ी में बिठाया बड़ी मुश्किल से मेरे अंकल थे उन्होंने पांव पकड़ा जोड़ के रखा खून बह रहा था अब बुलेट व गाड़िया उस वक्त नई टेक्नोलॉजी भाई जगाड़ोद्धारणा ड़ के रखा उसम बिठाया मैं होश में था बस इतना कहता रहा वंदे मातरम भारत माता की इतना भलता रहा मैं कहा मुझे ककड़ हॉस्पिटल लेकर चलो सरकारी में मत लेकर जाना वहां से 10 किलोमीटर होगा 10 किलोमीटर का फासला कितना है खून टूटे से शरीर में कितना है निकलता क्या निकलता क्या हॉस्पिटल लेकर गए मुझे इंजेक्शन लगाया पर जो डॉक्टर बोलते हैं मुझे कि जब बेहोश था तब भी यही मैं बोलता रहा मेरा धर्म भारत मा मेरी मवी में सिनेमा हॉल में देख के आया था बड़ा जजबा हुआ भारत माता की जय वंदे मातरम बड़ा शोर मचा गदर पिक्चर में बड़ा छोटा हुआ करता था जब आई थी संदेश जब पिक्चर आई सनी पाजी की जो मूवी थी बड़ा उसम भी भारत माता की जय वंदे मातरम गदर टू आई तो भी सिनेमा हॉल में बड़ी आवाज आई जब बाहर आ जाते हैं फिर लेफ्ट सेंटर राइट इसकी पार्टी उसकी पार्टी सब भूल जाते हैं भारत माता की जय दोबारा सुनाई पड़ता है ना वंदे मातरम या कम सुनाई पड़ता है ऐसा नहीं कहू नहीं सुनाई पड़ता पर जो मूवीज ने एक किया वोह फीलिंग को कैसे कंटिन्यू रखा जाए तो ये आखिरी मैसेज अगर आप सबको देना चाहते तो क्या देंगे आप इतना बड़ा संघर्ष कर रहे मैं सूरत में हर जगह पर आपको देखता हूं हम भी अपने कर्तव्य को पूरा कर जितनी देर तक हिंदुस्तान का पॉलिटिशियन देखो आजादी से पहले भी पॉलिटिशियन थे मैं तो पहले पॉलिटिक्स का नाम नहीं समझ पाया मुझे एक मूवर एंड शेखर में काफी वर्ष पहले बुलाया गया मूवर शेखर एक कार्यक्रम आता था तो मैं ऐसे कपड़े पहने थे बिल्कुल ऐसे ही था शायद मिनिस्टर भी हो सकता हूं उस वक्त तो मुझे उसने एक सवाल पूछा कि आपके ऊपर इतने बम चले नहीं पहला सवाल पूछा आपने खद्दर क्यों नहीं पहना अब सवाल का जवाब देना बड़ा मुश्किल था अंदर से आवाज निकली ये खद्दर शहीद आजम भगत सिंह राजगुरु सुखदेव मंगल पांडे स्फाक उल्ला खान जल वाला बाग के हिंदू मुस्लिम सिख ईसाइयों से लाल खून से खद्दर बुना गया उस वक्त राजनीतिक लोग जब घर से निकलते रे राष्ट्र भक्त आ गए कहते अब मैं अब हम कहते कते चोर आ गए ठग आगे मैंने खद्दर पहनना छोड़ दिया अब क्या जवाब जो था खर कपड़ों का शौकीन था ददर सब हटा दिया मैं कहा मुझे भी चोर कहेंगे उसके बाद उसने एक सवाल पूछा आपके ऊपर इतने बम चले कि आपको कभी डरने लगता मैं कहा ना मौत मेरी दोस्त है जो आज भी कहता हूं मैं कहा मौत मेरी दोस्ती है हां एक चीज से डरता हूं जब मौत दोस्त है तो फिर किस चीज से डर मैं कहा जब मेरी बमो गोलियों से मौत आएगी मेरे बच्चे मेरे दोस्त कहेंगे हमारा पापा हमारा दोस्त देश के लिए शहीद हुआ पर मैं राजनीतिक गिरावट से राजनीतिक आतंकवाद से बड़ा घबराता हूं अगर राजनीतिक आतंकवाद से मेरी मौत आती है तो एक जानवर और बिट्टे की मौत में फर्क नहीं रहेगा तो हमें राजनीतिक लोगों को चाहिए जैसे पहले बोला सरकार बने या ना बने मकसद अपना होना चाहिए प्रथम राष्ट्र आपने अभी यूक्रेन में देखा होगा हमारे बच्चे फस गए वहां इधर गोलियां इधर बम इधर रॉकेट लंचर कहते जिसके हाथ में तिरंगा झंडा होगा वहां गोली नहीं चलेगी पाकिस्तान दुश्मन देश के बच्चे कहने लगे उनके मां-बाप हुए सुने कि अगर तिरंगा झंडा ना भारत का होता तो हमारे बच्चे जिंदा ना होते आज ऑस्ट्रेलिया के अंदर जाकर देख लीजिए बड़े-बड़े राष्ट्रपति हमारे प्रधानमंत्री राजनीति नहीं मैं बात कर रहा मैं कोई किसी पार्टी में नहीं हूं एक अपनी जो एक इमेज है अपनी जो एक शक्ति है ताकत है व एक राष्ट्र के लिए बनानी चाहिए ताकि आने वाली जनरेशन अब्दुल कलाम जैसे बने आज भी आपके आदर्श अब्दुल कलाम अभी मैं राम सेतु होकर आया उनके म्यूजियम में गया उनके घर में गया क्या थे बेचारे गरीब थे पर आज वह चले गए आज ही हमारे पास जिंदा है एक मिसाल है अब्दुल कलाम कहां से कहां बने डॉक्टर मनमोहन सिंह जी देख लीजिए हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री 10 साल रहे हमें एक ऐसा एक अपने अंदर जजबा पैदा करना है कि जरूरी नहीं हम सरकार में है नहीं है तो हमें अपनी जिम्मेदारी बगैर वर्दी से निभानी मैं अपनी बगैर वर्दी से हूं बगैर वर्दी से वर्दी नहीं है पर अपनी जिम्मेदारी को निभाते जिस तरीके से बड़े भाई साहब एक जजबा पैदा करते अभी आपको आपने शबा जीी महाराज की इनकी स्टोरी देखी हो आज हमें यह यूथ के अंदर य जजबा भरना है आजादी तो हमें मिलगी आजादी की रक्षा कैसे कर तरंगे झंडे की अहमियत क्या है यह यूथ के अंदर एक जजबा पैदा करना हमारे पॉलिटिशन का और सबका काम है कि उनके अंदर जजबा पैदा कर राष्ट्र प्रथम है बाकी सब बा बेटा जी ने भारत को निश्चित रूप से बड़ा भारत बनाया आप आए आपने हमारे मंच की शोभा बढ़ाई और आपसे भी मैं रिक्वेस्ट करूंगा कि अगले बुधवार आप किससे मिलना चाहते हैं जरूर बताइए कमेंट बॉक्स में और श्री एम एस बिट्टा जी से आपने क्या सीखा यह जरूर बताइए हमको कि आपकी क्या लर्निंग रहनी से मैं कमेंट बॉक्स में पढ़ने आऊंगा क्यों हो सकता है मैं कुछ मिस कर गया हूं ऐसे व्यक्ति जो कैबिनेट मिनिस्टर बनने के बाद इनको कई दफा दोबारा पॉलिटिक्स में आने के लिए बुलाया गया पर इनका पॉलिटिक्स से बहुत ऊपर है य क्या कहते हैं जहां राष्ट्र की बात आए वहां किसी पॉलिटिकल पार्टी की बात नहीं होनी चाहिए वहा देश को एक करने की बात होनी चाहिए टेररिस्ट लोगों के खिलाफ आपने जो जंग छेड़ी है इसमें आपको लगातार सफलता मिले यूथ को आप इंस्पायर कर रहे हैं वो बहुत सरानी है इस मंच की शोभा बढ़ाने के लिए एक बार और आप सबका हृदय की गहराई से प्रेम पूर्वक बहुत बहुत धनवाद [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत]
Comments
Post a Comment