पानी पीने तक का नहीं था अधिकार DR. B.R. AMBEDKAR CASE STUDY DR VIVEK BINDRA

[प्रशंसा] कि यह आपका फिर से स्वागत है मैं विवेक बिंद्रा मोटिवेशनल स्पीकर लीडरशिप कंसल्टेंट और बिज़नेस कोच आज बात करूंगा इस महान व्यक्ति के विषय में 1791 में रत्नागिरी नाम का स्थान महाराष्ट्र की वह भूमि जहां जन्म हुआ किसका अरे प्रोफाउंड पावरफुल दलित लीडर का एक जैसे शक्तिशाली पॉलिटिशन वूमेन इन थिस एप बेटर है कि कौन मिस्टेक प्रोलिफिक राइटर एक्यूरेट एक ऐसे महान व्यक्ति जो कि बुद्धिज्म कार्रवाई व निष्ठा ह्यूमन राइट प्रोफाउंडर और एमिनेंट स्कॉलर रेंजर शार्प इंटेलिजेंट नाम था इनका डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर छोटी उम्र में ही यह रत्नागिरी से तब तारा नाम के स्थान तक महाराष्ट्र के पुणे के नजदीक पहुंचे तो उनकी माता का देहांत हो गया छोटी उम्र में बचपन से ही बड़ी मतलब दिल को दहला देने वाली दुखी कर देने वाली एक बच्चे को आतंकित पीड़ित कर देने वाली तंग करने वाली परेशान करने वाली कठिनाइयों के दौर से यह लुट छोटे थे पढ़ना चाहते थे इनके अपने पिता से एक पहुंच रिक्वेस्ट करते थे लेकिन क्योंकि दलित समाज में एक महार जाति में का जन्म हुआ तो कोई को पढ़ने की सुविधा नहीं चाहिए वहां पर आम बच्चों के साथ इन को बढ़ने नहीं दिया जाता था पिता ने इनको बड़ी किसी तरह जुगाड़ लगा करके किसी महानदी कि स्कूल में एडमिशन कराया तो उसको बैठने दिया क्या बोला बाहर बैठे पड़ेगा तो छोटा बच्चा उसको बाहर बैठा कर अच्छा पढ़ाई में तिरुचि के बाहर बैठ कितना ध्यान से पड़ता एक बार मास्टर ने कुबूला इधर आओ यह ब्लैक बोर्ड पर सवाल तो सॉल्व करके दिखाओ अरे यह ब्लैक बोर्ड पर सवाल सॉल्व करने गया तो अचानक बच्चे चला है मास्टर जी मास्टर जी नीची जाति का है और इतना ही नहीं बच्चे चिल्ला के भागने लगे ब्लैक बोर्ड की तरफ़ यह हैरान हो क्यों भागे तभी देखा सारे बच्चे ने प्रतिफल उठाए वहां से उठाकर पीछे करने लगे धक्का मारने लगे क्यों उनको डर था इसकी परछाई से इनका खाना अपवित्र न हो जाए वैसे कई छोटे धक्के इसको लगी पानी एक बार करें इससे चाय पी लिया इतनी मार पड़ी इसको इतना थिक छोटे कि बच्चे को सहनी पड़ी इतनी मार्क एक बार रिक्शेवाले निरीक्षक उतार दिया बोला तू नहीं बैठेगा रिक्शा में क्यों क्योंकि रिक्शे वाले को बीच में पता लगा कि नीची जाति का है और उसके बाद उससे बोला तुझे डबल पहचान लूंगा और फिर रिक्शा भी अब तू चलाएगा वह नीचे लगा रिक्शा भी जानते हैं उस समय केवल छूने से नहीं परछाई सबसे दिक्कत थी और परछाई तो छोड़िए इनकी आवाज सुनने से भी लोगों से लेकर पवित्र हो जाए यह जो आवाज से अपवित्र परछाई से अपवित्र छूने से अपवित्र यह दर्द जो उनको सहना पड़ा यह दर्द की जिंदगी में बहुत बड़ा रोल प्ले किया आगे चलकर ही लीडरशिप को फोल्ड करने में जानते हैं पड़ा संस्कृत की पढ़ाई जा रही थी बोलते चलकर तो ब्राह्मणों के पढ़ने के लिए तेरी पढ़ने के लिए तो है नहीं स्कूल से निकाल दिया जाता तो शायद जी महाराज गायकवाड़ नाम के एक राजा हुआ करते थे जिन्होंने इस की तकलीफ को समझा और वह इतनी तकलीफ को पहचानते बार हल इनकी पढ़ने की इतनी इच्छा को देखकर उन्होंने कुछ पंचर किया स्कॉलरशिप दी तक यह जाकर अपनी लंबी पढ़ाई कर सकें स्थिति ध्यान दीजिए बात आज की नहीं है बात 110 साल पुरानी है 1968 1999 उस समय एक कौन सबसे निचले पायदान से उठा हुआ महार जाति का लड़का जा करके इंटर करके आया इंग्लिश में मुंबई से उसके बाद ही बेकरी पॉलीटिकल साइंस एंड इकोनॉमिक्स में रुका नहीं तो उसको यह नहीं पड़ने दोगे मैं जाऊं दुनिया के बेस्ट यूनिवर्सिटी में रोककर तो दिखाओ और वह इसका पुष्प लेकर के निकल गया न्यूयॉर्क कोलंबिया यूनिवर्सिटी जा करके उसने पहले तो है मैं खरीद पॉलीटिकल साइंस इकोनॉमिक्स हिस्ट्री और सोशियोलॉजी में इसके बाद पीएचडी करने निकला यह नहीं रुका लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स चला गया लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के वहां एमएससी किया उसके बाद ब्लॉक की पढ़ाई किया फ्रेंड्स के बाद डॉक्टरेट किया किताब के ऊपर अपनी चीज़ लिखी यह किताब थी कि डोह पर आगे जाकर के रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया को बनाया गया महाराज और बड़ौदा से उनका प्रेम इतना था ना वह यौन जो स्कॉलरशिप दिया था पढ़ने उनकी मदद करें कि दुनिया भर में पड़कर उनका प्रेम भूले नहीं वापिस उनके पास आ गए गुलाब दुनिया भर के की सेवा में आना चाहता हूं तो उनको मिलिट्री सेक्रेटरी की नौकरी दे दी गई और उस समय यह नौकरी बड़ी मर जाती थी तब यह बड़ी पदवी पर तो आ सकते लेकिन वह छुआछूत दिन का पीछा छुड़ा वहां भी जो सरकारी पीओन होता था वहीं प्रोफाइल दूर से फेंक दिया करता था बड़ा 19 जाता है वह जगह पर बैठ गया तो क्या दूर से पानी पीते तो उसके पास नहीं जाते थे उनको उनको खाने के लिए बूते के बाहर जाकर खाता आज भी वह कुएं से पानी नहीं पी सकते थे इतनी एकजुट प्रदर्शन पर बाबा साहब अंबेडकर की तकलीफों का सिलसिला थमा थोड़े अभी तो रमाबाई जिनसे उनका विवाह हुआ था उनके साथ उनकी पांच संतानें हुईं लेकिन चार संतानें ने एक के बाद एक के बाद में इलाज की सुविधा ठीक से ना मिल पाने के कारण उनके जीवन से चलती चली गई चार बच्चों का देहांत हुआ फेंक बच्चा-बच्चा लेकिन पत्नी भी आगे चलकर लंबा साथ नहीं दे पाए वह भी लंबी बीमारी चलते उनका निधन हो गया बाबा साहब अंबेडकर जो कि अब इस समय कोई भी आदमी टूट सकता था जिसका अपना स्वाभिमान खत्म हो जाए लेकिन यह क्या कि यह साथ-साथ अपने देश के लिए लड़ते रहे और घर की तकलीफों से अपने आप को रोकने नहीं दिया शक्तियां ग्रह पर निकल गए 1947 के इस महान सत्याग्रह में यह जिद पर अड़ गए के सब दलितों को कुएं से पानी पीने का अधिकार दिलाकर हुआ है सार्वजनिक स्थान है किसी प्राइवेट नहीं है जो सरकारी संस्था ने वहां पर एक इंसान दूसरे के साथ पानी क्यों ना पीए एक देखिए गलत तो एक्चुअली हो रहा था जो दलित और थी ना उनको साड़ी भी पहनने का पावडर कि उठाकर साड़ी पहननी पड़ती थी शिविरों में पहली बार अधिकार दिलाया पूरी नीचे तक आम औरतों की तरह पाउडर के साड़ी पहनने का अधिकार उसके बाद ब्लैक कम्यूनल इलेक्टोरेट की मांग करते हुए कमी इलेक्ट्रोलाइट में ही चाहते थे कि कमेटी के आधार पर हमारी रोटी की सुविधा अलग को उसमें थोड़ा गांधी जी अड़ गए क्योंकि गांधी जी जानते थे यह अंग्रेज लोग मिलकर के हमारे हमारी सारी जातियों को तोड़ कर अलग कराना चाहते गांधी जी ने को समझाया कि इसलिए को क्या बोले अंबेडकर जी मैं आपको रिज़र्वेशन दिला दूंगा मैं आपको बाकी सब मदद करूंगा सब करूंगा लेकिन अलग नहीं करते सभी जातियों के आधार पर प्रदेश को अलग किया तुम मुझे स्वतंत्रता नहीं मिल पाएगी मैं अंग्रेजों से लड़ने पाऊंगा मेरे साथ खड़े होंगे हमारी ताकत बनो वह जब हम बैठकर नहीं मैंने तो गांधी जी ने तुमको रिक्वेस्ट की और उसके बाद अनशन पर बैठ गए गांधी ढल आंबेडकर उसने में उनके सामने बड़ी दुविधा गई वह सोच एक तरफ मेरी अपनी जाति के लोग उनकी मदद करूं और एक तरफ देश में आंदोलन लड़ रहे हैं गांधी उनका जीवन इनके जीवन का त्याग ना हो जाए कहीं ऐसा जीवन खत्म हो जाए उन्होंने गांधी जी को समझाया बोला ठीक है आप अपना अनशन छोड़िए पूना पैक्ट मा साइन किया गया और पूना पैक्ट वेबसाइट किया उस समय इन्होंने अब रिजर्वेशन तो कम से कम कंट्रोल में कर लिया डेविल्स टर्न ऑफ प्रिवेंटिव फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया नाम की किताब ज्यादा प्रॉब्लम रूपी नाम की दो किताबें जिसके आधार पर आरबीआई की स्थापना हुई मध्य बिंदु क्या जो किताब लिखी उसके आधार पर आरबीआई की स्थापना कर दी गई थी हत्या हुई मैं जेंट्स भारत के सबसे निचले पायदान से आया एक यंग लड़का था जिसकी कोई मदद करने वाला नहीं था आज उसकी बुद्धि पर आधारित हमारे कॉन्स्टिट्यूशन की स्थापना भी की जाएगी थैंक यू ज्ञान बुद्धि और कौशल का लोहा इंडियन लीडर्स ओं इट्स लीडर्स दोनों मानते थे 1947 में भारत आजाद हुआ और गांधी जी के पास नेहरू अपनी पूरी कैबिनेट के लिए ले करके आए जब नेहरू जो कि स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री होने वाले पूरी फेवरेट प्लेलिस्ट लेकर पहुंचे और बताया कि देखो इनको मिले तो तभी गांधी ने पूछा इसके अंदर बाबा साहब अंबेडकर का नाम कहां है और रखवा वहीं थोड़ी उनकी बहस हुई और गांधी ने बोला कि नेहरू यह तुम्हारी क्या बेल्ट नहीं है यह आजाद भारत के अभिनेता तभी उनको कानून मंत्री के रूप में लिया गया और न केवल कानून मंत्री कुसुम बल्कि तुरंत जो ड्राफ्टिंग कमेटी इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन कि उसका चेयरमैन जगजीत सिंह की इंटेलीजेंस के आगे कुछ बोल नहीं सकता था जो इनसे सहमत थे और सहमत दोनों शांति दें और बुद्धि बहुत है बहरहाल मन तो है कि मैं घंटों तक इनके विषय में बात क्रॉच नहीं मन भरता नहीं है के विषय में बात करते हुए इतने बुद्धिमान व्यक्ति आगे चलकर उन्होंने हिंदू कोड बिल और महिलाओं के लिए बने कानूनों के अंदर कई बदलाव लाए थे यह वह पॉलीटिकल लीडर नहीं थे जो सत्ता के लिए लड़ते थे यह लड़ते थे उनके लिए कि देश में कम दूर हिस्से को उठाना देश के हर लीटर की जिम्मेदारी एक मोटा ज्ञान लीजिए चाहे वह महिलाएं हो चाहे वह जाति धर्म के आधार पर वह कम दो हिस्से को आगे बढ़ाना सपोर्ट करना तभी दे साले चलेगा खुशहाली आएगी तो फायदा सप्ताह वक्त मजा लीजिए पूरे देश में खुशहाली आएगी तभी फायदा सकता होगा इनकी भाषा में इनके भाषणों में इनकी चर्चा में इनके आचरण में इनकी किताबों में और ड्राफ्टिंग कमेटी में चेयरमैन होते वक्त कॉन्स्टिट्यूशन को लिखने में सहनशीलता लगातार देखती रही है कुंठा परमो धर्म बौद्ध धर्म को अपनाने लगे आत्मवत् सर्वभूतेषु बुखार में बताया गया कि बौद्ध धर्म में आत्मवत् सर्वभूतेषु सभी जीवात्मा को अपनी तरह देखना चाहिए जो समान दृष्टि देने का प्रयास किया उसके बाद यह बौद्ध धर्म को स्वीकार करने के आखिरी तक काम प्रेम करते रहे थे कि आपके लिए क्या मैसेज में एक मैसेज भेजो कि पूरी जिंदगी में सबसे निचले तबके के बल पर खड़ा किया लगातार जो लोगों के लिए जो कृष्ण के चलते थे कोलंबिया यूनिवर्सिटी आगे चलकर नंबर वन इन द वर्ल्ड की उपाधि से नवाजा गया को भारत रत्न दिया एक बात समझ लीजिए इंच के बराबर लीडर पृथ्वी में गिनती की परसेंटेज नहीं होते थे एंटरटेनमेंट चैनल युटुब यहां पर मैंने एजुकेशन कप चाय बनाएं कोई एंटरटेनमेंट नहीं है इधर फोर्थ देश को भीमराव रामजी आंबेडकर के विषय में एजुकेट करना आफ उनके संघर्ष के बारे में बताना मेरी आपकी पूरे देश की जिम्मेदारी है बताइए तो सही लोगों को कैसे संघर्ष उठकर खड़े हुए हैं शेयर करिए वीडियो जिसको हो सकता है इसको इस पर इस मिल सकती है उस कमेंट बॉक्स में बताइए अगर किसी और लीटर का वीडियो देखना चाहते लाइक करिए अगर थोड़ा भी वीडियो पसंद आए तो जितने लाइक उतना मेरा उत्साह बढ़ेगा इस बताइए कि आपको कैसा लगा यह वीडियो सब्सक्राइब करिए बेल आइकॉन हिट करके दूसरों से भी करवाए है मेरे साथ जुड़े रहने के लिए 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