असल ज़िंदगी में भी जेल जाना पड़ा Pankaj Tripathi Case Study Dr Vivek Bindra
आज मेरे फेवरेट सुपरस्टार की बात करूंगा यह पब्लिसिटी में नहीं सिंपलीसिटी में बिलीव करते हैं सिल्वर स्क्रीन हो या ओटीटी प्लेटफार्म भी आज हर फिल्म की पहली चॉइस है वासेपुर का कुरेशी मिर्जापुर के कालीन भैया लोग कहां नहीं भूल जाते इनका कैरेक्टर नहीं भूल सकते ये ट्रेंड सेटर इंस्टिट्यूशन इन हिमसेल्फ सुप्रीमली ग्राउंडेड पंकज त्रिपाठी जय हो आज ये एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं घर में एक बड़ी दुर्घटना हुई है भगवान से प्रार्थना करते हैं इनकी बहन और जीजा का जो अभी एक्सीडेंट हुआ बहुत बड़ा भगवान उनको हिम्मत दे पंकज त्रिपाठी ये एक ऐसे व्यक्ति है कोई ऐसे ही पंकज त्रिपाठी नहीं बन जाता है एक वक्त था जब धर्मपत्नी के जन्मदिन पे केक खरीदने के लिए इनके पास केवल ₹10 थे पैसा नहीं था और आज एक फिल्म के लिए 1010 करोड़ से ज्यादा चार्ज कर लेते हैं पांचवीं क्लास तक कोई स्कूल की बिल्डिंग ही नहीं थी जहां पढे ये पेड़ के नीचे बैठ के पढ़े थे घर में टीवी नहीं था पर इन्होंने एक चीज देखी कि मूवी थिएटर में जाने के लिए लोग जो है दो घंटे की मनोरंजन के लिए 10 10 किलोमीटर पैदल जाया करते थे खुद मूवी नहीं देखी लेकिन मन में आया यार ऐसा क्या होती है एक्टिंग क्या मैं भी एक्टर बन सकता हूं क्या वहां से ये सवाल चालू हुआ इनके मन में 20 साल तक इन्होंने कोई फिल्म नहीं देखी पहली फिल्म तो 1994 में देखी थी लेकिन और जब अपने यहां गांव मोहल्ले में रामलीला होती थी तो लड़की का रोल प्ले इन्होने किया लोगों ने खूब मजाक उड़ाया आज लर्निंग के इस youtube3 की चार कमाल के लेसंस दूंगा 94 में पहली फिल्म करने से पहले 1993 की कहानी सुनाता हूं जब ये कॉलेज में पढ़ते थे उस समय मधुबनी में स्टूडेंट्स पर गोलियां चलाई गई थी तो उस समय का जो चीफ मिनिस्टर थे लालू प्रसाद यादव उनके खिलाफ उन्होंने कैंपेन और प्रोटेस्ट चालू कर दिया खूब हो हल्ला किया सड़कों पे पुलिस ने उनको सात दिन के लिए बेऊर नाम की जेल थी पटना में 8 बा आठ का छोटा सा कमरा खाना पना उसी में टॉयलेट उसी में और वहीं पूछताछ के नाम पर टॉर्चर बहुत हुआ करता था पॉलिटिकल प्रिजनर थे इसलिए सेपरेट सेल में रखा जाता था कि वहां ऐसा ना हो जेल के अंदर भी हो हल्ला चालू कर दे जिंदाबाद मुर्दाबाद तो पॉलिटिकल जो प्रिजनर होते हैं उनको अलग-अलग छोटे-छोटे सेल में रखा जाता है और जब आप जेल में होते हो खाली होते हो समय बहुत होता है तो यह भाई क्या बोले यहां पे जो कैरेक्टर जी रहे हैं ना लोग रह रहे हैं इनके कैरेक्टर को मैं बाहर नहीं मिल पाऊंगा उस मुश्किल समय में पंकज त्रिपाठी जेल ऑफिसर के पास जाकर रिक्वेस्ट करते हैं कि मुझे दिन में एक घंटे के लिए जो उमर कैद काटने में सबसे बड़ी अप हुआ करते थे उनसे एक घंटा मिलने तो जेल ऑफिसर को समझ में नहीं आया पुलिस वाला बोला भैया ऐसे अपराधियों से काहे मिलोगे तुम हा वो समझ नहीं पाए पंकज त्रिपाठी उस समय पंकज त्रिपाठी बनने की प्लानिंग कर रहे थे ऐसे कैरेक्टर से मिलूंगा ये यहां मिल सकते बाहर मिलेंगे नहीं दोबारा मुझे शराबी से लेकर ठग से लेकर माफिया से लेकर बड़े बड़े क्रिमिनल तक उन्होंने सारे कैरेक्टर से मिलना शुरू किया अलाव कर दि पंकज त्रिपाटी एक्चुअली बहुत शरीफ थे और पुलिस वाला ख घबराया हुआ था इतना शरीफ आदमी ऐसे बड़े-बड़े माफिया और क्रिमिनल से मिलेंगे लेकिन हर कैदी में कक्टर ढूंढते थे बड़े विजुलाइज करने में बहुत तेज थे स्कूल में नहीं सलाखों में रह कर के इन्होंने सीखा वो मानते हैं सब कैरेक्टर से मिलकर के पंकज त्रिपाठी बनाया चाहे वो गैंगस ऑफ वासेपुर के सुल्तान कुरेशी हो या मिर्जापुर के कालीन भैया हो या सीक्रेट गेम्स जो बाद में आई उसके गुरुजी का कैरेक्टर हो तो बोले मैंने वहीं से सीखा था और जो ये सीखने की इच्छा थी इनमें जो चाह थी वो आज सीखना चाहता हूं मैं कि मैं आप सबको सिखा सकूं और शेयर कर सकूं 1999 की कहानी सुनाता हूं आपको मौरिया होटल है पटना में मैं कई बार रहा हूं वहां जाकर जब पटना जाता हूं उसमें रुकता हूं तो व आलू प्याज छीलने का काम पंकज त्रिपाठी 99 की बात कर रहा हूं मैं एक दिन को पता लगा मनोज बाजपेई उस होटल में आए हुए थे पंकज ने सबको बोला भाई इस कमरे से कोई ऑर्डर आए मैं ही दूंगा जाक इस कमरे से ऑर्डर आ जाए तो मुझको जाने देना जय हो भैया इतना मानते थे मनोज बाजपेई को य तो मनोज बाजपई ने एक सेव ऑर्डर किया यह सबसे बढ़िया क्वालिटी का चमकता हुआ लाल लाल लाल लाल सेव ले ु पहुंच गए अगले दिन मनोज त्रिपाठी चेक आउट करके निकल गए इनको पता नहीं चला इनकी शिफ्ट देर की थी बाद में चला मनोज बाजपई अपनी चप्पल गलती से छोड़ गए व हवाई चप्पल पहना करते थे बाथरूम जाने के लिए तो टॉयलेट की जो हवाई चप्पल थी इन्होंने रिक्वेस्ट करके एडमिन को बोला कि चप्पल मुझे दे दो आप सहेज करके उन्होंने अपने पास उस चप्पल को ऐसे चरण पादुका मान के भले मनोज ने उनको एक्टिंग की ट्रेनिंग नहीं दी लेकिन पंकज ने मनी मन उन्होने अपना गुरु मान लिया और ऐसा गुरु माना कई साल के बाद बताया कि उन्होंने अपने गुरु की चप्पल को क्यों रखा अगर अर्जुन नहीं बन पाया तो एक लवे तो बन ही जाऊंगा यह जो चाह थी ना ये चाह बहुत मजबूत थी पिक्चर नहीं देख पाए बचपन में कभी लेकिन पिक्चर का हीरो बनना चाहते थे ना ऑटोग्राफ ना फोटोग्राफ चप्पल ने बदला लाइफ का इनका चैप्टर और जिस इंस्पिरेशन से चप्पल को उन्होने रखा था ना उन्हीं के साथ मिलकर के अपनी जिंदगी की सबसे पहली हिट फिल्म दी थी गैंग द वासेपुर मनोज बाजपई ने एक इंटरव्यू में पंकज को वन ऑफ द बेस्ट एक्टर ऑफ टुडेज टाइम बताया आपकी डेडिकेशन बन जाती है आपकी मेनिफेस्टेशन लीडर्स आर नॉट बर्न दे आर मेनिफेस्टेड और ऐसे धीरे-धीरे मेनिफेस्ट हुए पंकज त्रिपाटी डेडिकेशन जाती है मेनिफेस्टेशन वो असलियत के रूप में सामने रियलिटी के रूप में आती है ये इतने जबरदस्त व्यक्ति तीसरी कहानी सुनिए फटाफट हमेशा अपने काम से जवाब दो केवल शब्दों से नहीं 1994 में हम आपके हैं कौन इन्होंने पहली मूवी देखी थी उसके बाद उन्होंने कहा कि अब समझ में आ गया कि लोग इन्हें क्यों देखना चाहते हैं मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में भर्ती होना चाहता हूं दो बार गए नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा रिजेक्ट हो गए 2001 में तीसरे अटेंप्ट में अंदर जाकर के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में सिलेक्ट नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहले समझ लेते हैं होता क्या है जैसे से डॉक्टर बनने के लिए एम्स है इंजीनियरिंग के लिए सबसे बड़ा आईआईटी है एमबीए के लिए सबसे बड़ा आईएम है ऐसे ही एक्टिंग के लिए सबसे बड़ा नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा है और पंकज त्रिपाठी पहली बार जब एक्टिंग करने के लिए मुंबई आए 2003 में अपनी एनएलडी से पूरी ट्रेनिंग लेकर के तो 000 का उनको एक रोल मिला जिसमें एक्शन सीन था तीन चार पांच रिटेक किए लेकिन एक्शन डायरेक्टर खुंदक खा गए किसको पकड़ लाए हो भैया किस गधे को पकड़ लाए हो पंकज त्रिपाठी खूब बुरा भला बोला और असिस्टेंट को बोल के इसको धक्के मार के बाहर निकाल दिया पंकज त्रिपाठी धक्के मार के जब बाहर निकाले जाने लगा तो जो सीनियर एक्टर था वो उनसे पूछ लिया भैया 000 के लिए इतनी गाली सुनक तुम्हें गुस्सा नहीं आ रहा है 000 के लिए इतनी गाली का सुन रहे हो पंकज ने कहा यह सारी गालियां मिलक के मेरे फोकस को बढ़ा रही है सूरज की इतनी सारी किरणों में से थोड़ी सी को भी अगर लेंथ से लेकर लगा के कागज पर आग लगा सकती है ना यह सारी गालियां इकट्ठी कर रहा हूं अपने फोकस को मजबूत करूंगा देखना ये एक यही आदमी एक दिन जिसने आज मुझे धक्के मारे मेरी डेट्स मांग और डांट पर नहीं अपनी आठ पर ध्यान दिया उन्होंने जो आज गाली दे रहा है कल वो मेरे लिए ताली बजाएगा मैं अंदर से पहले से ही क्लेरिटी इज पावर पहली फिल्म थी इनकी रन 2004 में उसमें 8000 मिले पा वाला चिकन बिरयानी भैया वो कौवा बिरयानी है अब खाइए कौवा बिरयानी तो मोहम्मद रफी जैसा आवाज थोड़ा ही आएगा लेकिन 8 साल के बाद वही हुआ इनकी एक बड़ी फिल्म की स्क्रीनिंग हो रही थी उस स्क्रीनिंग में सब लोग आए हुए थे बॉलीवुड के हुज आए थे तो वो एक्शन डायरेक्टर भी आया हुआ था स्क्रीनिंग में थिएटर पर स्क्रीनिंग चल रही खत्म होते ही एक्शन डायरेक्टर ने खड़े होकर तालियां बजाई और बोला वाह सर क्या काम किया कोई डेट्स मिल जाएंगे आपसे वही दिन वापस आ गया जिसका पंकज त्रिपाठी ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी पंकज ने बड़ी पोलाइट उनको कहा असिस्टेंट से बात करके डेट ले लीजिएगा पंकज ने गुस्से का रिएक्शन लाइट कैमरा एक्शन से दिया जो आप पर सवाल उठाए उसे जुबान से नहीं काम रह करके अपनी कामयाबी से जवाब दीजिए बिजनेस में जब एक्सपेंड करना होता है ना जो अपने गोल पर पर भयंकर शुरू से क्लियर फोकस रहता है पंकज त्रिपाठी की तरह शांत रहकर अपने प्लान को एग्जीक्यूट कर जाता है मैं भी एक रॉयल एलीट क्लब जहां शांत रह के प्लान को एग्जीक्यूट कैसे किया जाए आराम से कुर्सी पर बैठ कर के पूरे देश दुनिया के ऑपरेशंस को कैसे बिजनेस एक्सपेंशन किया जाए रॉयल लीग क्लब थोड़ा अलग तरीके का प्रोग्राम है सबके लिए नहीं है मैं बता देता हूं इसमें खाली 50 सीटें होती है केवल बड़े बिजनेसमैन आते हैं ये दो दिन का प्रोग्राम है 1819 मई बाय चांस अगर आप ऑलरेडी अच्छा बिजनेस कर रहे हैं किसी को जानते हैं उनको रॉयल एलीट क्लब के बारे में बता दीजिएगा फाइव स्टार सेवन स्टार में होता है बिल्कुल एलीट क्लब होता है जो बड़ा बिजनेस ऑलरेडी कर रहे जि खाली एक्सपेंशन करना उन 50 लोगों को इकट्ठे बैठता हूं मैं और दो दिन उनके साथ में ऑपरेशन एग्जीक्यूशन की स्ट्रेटेजी पर डिस्कशन करता हूं वापस आ रहा हूं मैं पंकज त्रिपाठी प गो फैंसी ओनली इफ इट ब्रिंग्स एफिशिएंसी फैंसी नहीं है यह य आज भी क्या कपड़े पहनते गैंग वासेपुर का नाम बढ़ने के बाद प्रोडक्शन हाउस इनको सब सब काम करना चाहते थे लेकिन उस टाइम पर 2012 की बात बताता हूं उनकी गाड़ी छोटी थी और छोटी गाड़ी होने के कारण कई बार चौकीदार जो था फिल्म सिटी का वो गार्ड गेट नहीं खोलता था उसको लगता पता नहीं कौन आ गया य पर छोटी सी गाड़ी और जो जूनियर आर्टिस्ट थे इनके लंबी लंबी लगजरी गाड़ी में आते थे ऐसे गेट ऑटोमेटिक खुलता था उनके लिए तो कई बार इनको जो है गार्ड को समझाना पड़ता था अरे भैया कहे दरवाजा नहीं खोल रहे हो शीशा खोलते रहते यू य घुमा घुमा के घुमा घुमा के विंडो पावर विंडो भी नहीं थी 2013 में एक बार अपनी छोटी गाड़ी से आए लो पहचाना नहीं और लगातार हन बजाए जाए और गार्ड उठे भी नहीं गार्ड अपना बतिया रहे वहां बीड़ी पी रहे इन्होंने शीशा घुमा घुमा के तुरंत खोला गार्ड आया पहचाना हुआ शर्मिंदा होगा अरे पंकज त्रिपाठी क्षमा चाहते क्षमा चाहते गेट खोल दिया और गार्ड जाला शर्मिंदा ये खुद हो गए कि गाड़ी की इतनी वैल्यू है मैं इतना काम करता हूं वो थोड़े दिन के बाद 2014 में भी ऐसा बड़ा इंसिडेंट हो गया कि फिल्म सिटी के बाद वीआईपी मूवमेंट चल रहा था तो पंकज त्रिपाठी की गाड़ी को पीछे कर दिया और सारी लग्जरी गाड़ियां आगे निकले जा रही है वीआईपी मूवमेंट है अच्छा लग्जरी गाड़ी को कोई रोके नहीं शाम को पंकज त्रिपाठी को पहुंचना था सनसेट का शूट था बिल्कुल सूरज डूबने से पहले का वो शूट इनको शूट कर ही नहीं पाए क्योंकि इनकी गाड़ी रोक दी गई थी प छोटी गाड़ी थी उस दिन उन्होने एहसास हुआ उन्होने कि गाड़ी की क्या इनकी जिंदगी में कोई अहमियत नहीं हुआ करती थी रोज रोज से गार्ड से बहस ना करना पड़े टाइम वेस्ट ना हो इसलिए पंकज ने पहली बार 2014 में जो बड़ी लगजरी गाड़ी खरीदी आज भी वही चलाते हैं 10 साल में बदली नहीं गाड़ी उन्होने पंकज स्टारडम के नहीं सिंपलीसिटी के फैन है मुझे पंकज त्रिपाठी पर्सनली बहुत पसंद है ये हल्का सा जो गर्दन हिलाते हैं ना वोय येय ये वाली एक्टिंग मुझे बहुत पसंद हैकी यह बड़ी बहुत गहराई के साथ आंख बंद करके यूं गर्दन हिलाते हैं फिल्मों में सफलता मिलने के बाद भी व ना चाहते हुए भी लग्जरी गाड़ी खने उ खरीदनी पड़ी क्योंकि छोटी कार उनके लिए सफिशिएंट तो थी पर एफिशिएंट नहीं थी एफिशिएंसी पे खर्च करना है लग्जरी पे खर्च नहीं करना पंकज इतने सिंपल है कि बॉलीवुड के वन ऑफ द बिज एस्ट स्टार होते हुए भी आज अरमानी और गुची जैसे सारे ब्रांड अफोर्ड कर सकते हैं लेकिन फिर भी खादी के कपड़े पहनना पसंद करते हैं पंकज कपड़ों को नहीं काबिलियत को जरूरी समझते हैं घड़े का पानी पीते छुट्टी मनाने के लिए गोवा नहीं जाते अपने गांव में जाते आते हैं बच्चों को गांव का संस्कार देते हैं गांव में खटिया पसोना पसंद करते हैं रेस्टोरेंट में लास्ट टाइम कब खाना खाया इनको याद भी नहीं फिल्मी पार्टीज में तो कभी गए ही नहीं लर्निंग क्या शो ऑफ को नहीं सादगी को चुनो बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो सक्सेस में उछलते नहीं और फेलियर में फिसलते नहीं पंकज त्रिपाठी उनमें से एक है ऐसे ही कम समय में बड़ी-बड़ी कमाल की कहानियां लाते रहूंगा इस youtube2 करता रहूंगा हमारे साथ जुड़े रहने के लिए पंकज त्रिपाठी के इस वीडियो को देश भर में उनकी इन खास गुणों को पहुंचाने के लिए ताकि ये गुण हमारे अंदर में विकसित हो आप सबका हृदय की गहराई से हाथ जोड़ के बहुत-बहुत धन्यवाद [संगीत]
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