19th Episode Fearless Leadership from #GitaInAction Dr Vivek Bindra

[संगीत] एक कम बुद्धि के व्यक्ति ने मेरे ऊपर अभी एक वीडियो भी बना दिया की विवेक बिंद्रा बिजनेस बिजनेस कर रहे हैं गीता में बिजनेस बिजनेस कर भैया मेरे तुम तो सन लो पहले भगवा गीता से जो चाहिए सब मिलेगा यह कल्पवृक्ष आपको शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक भौतिक संसार एक व्यापारिक जैसा जीवन सुधारने का सुधार है क्योंकि भागवत गीता संपूर्ण है [संगीत] धन्यवाद आज का जो श्लोक है वो अर्जुन का एक प्रश्न है और आज के श्लोक में अर्जुन आपसे एक प्रश्न पूछने वाले हैं और कृष्ण से पूछेंगे उससे पहले थोड़ी बात हुई कर बनने वाली karastema पर इशू कदाचन वो अपने एपिसोड देखा होगा की कर्म करो फल की इच्छा मत करो बड़ा पॉप्युलर श्लोक है ये भगवत गीता का ये पिछला एपिसोड था लेकिन अर्जुन ये बात सोचते सोचते अब सोचने लगे की इतने इंटेलिजेंट लोग होते कौन है जो भागवत गीता को अप्लाई कर लेंगे कहां मिलते हैं कहां से आते हैं कौन होते हैं कैसे लोग होते हैं तो अर्जुन के मैन में प्रश्न ए गया सका भाषा समाधि स्थल ही भगवान इंटेलिजेंस वाला आदमी होता कैसा है अगर आप किसी लीडर को जानना चाहते हो देखना चाहते समझना चाहते उसका बिहेवियर क्या है रतन टाटा मुकेश अंबानी गौतम भाई अदानी बिजनेस कैसे करते हैं क्या उनका व्यवहार है कैसे मुझे सीखना है उससे जिसको बिजनेस सीखना है वो बिजनेस सिख रहा है भागवत गीता में सब कुछ सिखाया जाता है एक कम बुद्धि के व्यक्ति ने मेरे ऊपर भी एक वीडियो भी बना दिया की विवेक बिंद्रा बिजनेस बिजनेस कर रहे हैं गीता में बिजनेस बिजनेस कर भैया मेरे तुम तो सन लो पहले भगवा गीता से जो चाहिए कल्पवृक्ष है किसी को जवाब देने की वीडियो के लिए लेकिन भागवत गीता कल संपूर्ण अपने आप में आपको शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक भौतिक संसार एक व्यापारिक जैसा जीवन सुधारने का सुधार है क्योंकि भागवत गीता संपूर्ण [प्रशंसा] गीता के अंदर बाहर इंटेलिजेंस का व्यक्ति दूसरा अध्याय चल रहा है हान वो कहते बिहेव करता है सिद्ध प्रज्ञा का भाषा कैसा व्यक्ति वो कैसे बोलता है उसकी भाषा क्या है किस प्रकार बैठता है किस प्रकार चलता है वो होता है अर्जुन पूछ रहे हैं उसकी देखिए हर एक व्यक्ति के नाम एक कुछ सितम धोते हैं धनी व्यक्ति के लक्षण होते हैं उसे उसे लक्षणों से पता चलता है की वो धनवान कहलाता है और रोग ग्रस्त व्यक्ति के कुछ लक्षण होते हैं जिनसे prachalata की वो रोगी है ठीक उसी प्रकार विद्वान व्यक्ति के कुछ लक्षण होते हैं जिससे पता चलता है की वो विद्वान है उसकी वाणी उसका लक्षण है उसकी वाणी से पता चलता है की वो विद्वान है ऐसे ही अर्जुन जानना चाहता है उसके क्या लक्षण है वो व्यक्ति जो स्थित प्रज्ञा टेबल इंटेलिजेंस हर व्यक्ति को पूरे भारतवर्ष ने पुरी पृथ्वी में सब कुछ टेबल इंटेलिजेंस बिल्ट करने इसीलिए भागवत गीता की शरण लेनी चाहिए तो कृष्ण इसका उत्तर देना शुरू करेंगे श्री भगवान वॉच सरवन अर्थ मनोगत आन तनमन लेंगे लेकिन शॉर्ट में समझ लेते हैं यहां भगवान कहते हैं की मैंने मैन गिव्स अप ऑल वैराइटीज ऑफ सेंस डिजायर विच आरिस फ्रॉम मेंटल कोनकोक्शन यानी की मैन में ना बहुत सारे मनगढ़ंत विचार होते हैं की जब कोई मानसिक मनगढ़ंत कहानी से उत्पन्न होने वाली कामनाओं को त्याग देता है उनको त्यागना है उसके बाद भगवान कहते हैं उससे क्या होगा है इसमें एक और नई बात भगवान ने ऐड कारी वह क्या बोला वीतराग भाया क्रोध स्थित ही मुनीर uchhte की वीतराग यहां से शुरू करेंगे मतलब फ्री फ्रॉम अटैचमेंट जिसको अटैचमेंट नहीं है उसको दो रिजल्ट मिलते हैं वह भाई और क्रोध उसको नहीं ए सकता और ऐसा व्यक्तित्व मुनीर uchhte की ऐसा मुनि वो स्थित थी मतलब इंटेलिजेंट प्रज्ञा और दी एक ही अर्थ है इसको थोड़ा और सारी समझते हैं नहीं मिला तो गुस्सा कब आता है जब मेरी बात नहीं मणि गई दर कब लगता है जो मेरे पास है मेरे हाथ से छीन जाए मिल गया तो खोने का दर नहीं मिला तो एंगर तो यह भगवान ने दो चीज बताई की जो टेबल इंटेलिजेंस का आदमी उसको डरने लगता डरता कौन है अनस्टेबल इंटेलिजेंस का आदमी भाई किसको आता है अनस्टेबल इंटेलिजेंस का आदमी तो यह उसके बिहेवियर का एक लक्षण है की जिसका टेबल इंटेलिजेंस होगा जो वीतराग वीतराग मतलब इसको अटैचमेंट नहीं होगा उसको दर नहीं लगता एक बार की बात नहीं एक राजा जो अपनी पुरी की पुरी साम्राज्य के साथ इतना टेस्ट इतना टेस्ट इतना टेस्ट है की वो जीते चले जा रहे और वो राजा के उनके साम्राज्य से बहुत बड़े गुरु निकलने वाले द पता लगा वो गुरुवार है ए रहे हैं ए रहे हैं वो दिन ए गया जिस दिन वो गुरु पहुंच गए राजा ने सोचा इन गुरु को अपने आप बुलाने से अच्छा मैं खुद ही गुरु के दर्शन करने जाता हूं उनकी शरण दूंगा तभी मैं उनसे कुछ सिख पाऊंगा तो राजा जिस दिन वो गुरु आए जिस कुटिया में विश्राम करने लगे वहां जाकर के बाहर इंतजार करने लगे की मैं आज गुरु से कुछ प्रश्न करूंगा जैसे ही गुरु मिले उनसे बोला की मेरी बड़ी आज तक थी यह बहुत अटैचमेंट है जिसके कारण बड़ा परेशान रहता हूं मैं देता कैसे हो जाऊं इसका मुझे उपाय दीजिए मैं बड़ा खुश हो जाता हूं कुछ जीत जाऊं बड़ा दुखी हो जाता हूं कुछ हर जाऊं तो बड़ा इमोशनल प्लेटफार्म पे जीवन जी रहा हूं गुरु ने कहा कोई बात नहीं दो कागज के टुकड़े लाओ दो कागज के टुकड़े गुरुजी के सामने ले गए गुरु जी ने एक कागज का टुकड़ा लिया उसे पे कुछ लिखा बंद कर दिया फोल्ड कर दी दूसरा कागज का टुकड़ा लिया उसको भी फोल्ड कर दिया राजा बैठकर लिख रहे हैं मैं बड़ा सीरियस प्रश्न पूछ रहा हूं ये कोई चिट्ठी बना रहे तभी गुरु ने कहा राजन तुम बहुत खुश हो ना ये पहली चिट्ठी मेरी खोल के पढ़ लेना राजा बोले गुरु ने बड़ा कस्टमर टेलिविज़न दिया है दोनों चिट्ठी बड़ी संभाली बड़े-बड़े एनवेलप बनाए खुश होने के ऊपर लेवल लिख दिया यह खुशी वाली चिट्ठी है दुखी पे दुखी का लेवल लिख दिया दुख वाली चिट्ठी लेके राजा निकल पड़े जब अपने साम्राज्य में वापस लौटे कुछ दिन महीने हफ्ते बढ़िया बाईट एक दिन अचानक ऐसा हुआ की उनका राठी राठी के ऊपर होता आधी राठी उसके ऊपर महारथी बड़ा छोटा यूनिट होता है किसी दिन samjhaunga राठी अति मराठी में क्या अंतर उनका एक राठी पड़ोस के एक साम्राज्य को जीत लाया राजा बहुत खुश हुए उनको याद आया गुरु की बात जब बहुत खुश होंगे तो खुश वाले चिट्ठी खोल लो और जैसे ही उन्होंने खुश वाले चिट्ठी खोली खुश वाले चिट्ठी खोलते ही अचानक पड़ा तो उसमें क्या लिखा उसमें लिखा इट इस टेंपरेरी ये थोड़े समय के लिए राजा हैरान मैं तो साम्राज्य जीता गुरु ने कहा इट इस टेंपरेरी थोड़े समय के लिए साम्राज्य हरा उन्होंने कुछ लोगों की सी और बाजू के साम्राज्य जोड़े इनको चुनौती दी इस बार इनके राठी आधी राठी महारथी सारे के सारे चले गए युद्ध करने और फिर भी हर गए बोला गुरुजी ने कहा था टेंपरेरी वही हुआ यह थोड़े समय के लिए निकल गया मेरे हाथ से अब तो राठी भी गया हाथी रति भी गया महारथी बी या फिर भी हर गए उन्होंने कहा चलो दूसरी चिट्ठी खोलते हैं दुखी होने पर दूसरी चिट्ठी खोली और जैसे ही दूसरी छुट्टी खोली राजा हैरान हो गए दूसरी चिट्ठी में लिखा था [प्रशंसा] तब उनको यह समझ में आया की यह सब कुछ टेंपरेरी है और वहां से मुझे अपनी अटैचमेंट को तोड़ के वापस ले करके आना है हमारे पास जीवन में शास्त्र बताते हैं तीन प्रकार के दुख होते हैं एक होता है आदि दैविक दूसरा होता है आदि भौतिक और तीसरा होता है आध्यात्मिक रहा तो पढ़ लाइए आदि देव यूनिवर्स देता है आदि बहुत एक सामने वाला देता है आध्यात्मिक वह मेरा मैन मुझे खुद ही देता है तीन प्रकार के दुख होते हैं संसार में एक प्रकार का दुख क्या होता है एक शक्तियों के द्वारा जो किसी कंट्रोल से बाहर है जिनका मैं कुछ नहीं कर सकता सड़क में रास्ते में एक्सीडेंट हो गया ट्रैफिक जाम हो गया या कोई बहुत ज्यादा गर्मी हो गई बहुत सर्दी हो गई अर्थक्वेक ए गया तो यह सब क्या है मेरे हाथ में आधी बहुत सामने वाला मेरे को दुखी करता है मेरे बारे में आप शब्द बोलता है वो आदि भौतिक है लेकिन मैं दुखी हो जाता हूं वो आध्यात्मिक प्रकार के दुख होते हैं भगवान ने क्या बताया की आपको कमल से सीखना चाहिए जो कीचड़ के बीच में परमानेंट रहता है और कमल ही एक ऐसा फूल है की कीचड़ के बीच में रहने में पानी के बीच में जीवन भर रहने में उसे पर पानी की एक बूंद टिकती नहीं है उसे पर पानी की बूंद तुरंत नीचे गिर जाती है क्या अर्थ हुआ इसका इसको ऐसे समझते हैं की भगवान राम को जब वनवास दिया गया भगवान राम को जब वनवास दिया गया तो कब दिया गया उससे पिछली रात चर्चा करके जिस दिन ही वो अबाउट तू गेट क्राउन डी किंग जब उनका राज्य अभिषेक होना था राज्य अभिषेक से जस्ट पहले उनको बोल दिया गया अयोध्या से उनकी बहुत अटैचमेंट थी पर राजति सुख से उनकी अटैचमेंट नहीं थी और दूसरे सेकंड उन्होंने चार शब्द कहे कितने शब्द अंग्रेजी में कहें तो तीन शब्द हिंदी में कहे चार शब्द आप इतने गहरे हैं चार शब्द जब उनको बताया गया की अब तुम को वनवास दिया जा रहा है और तुम्हारे छोटे भाई भारत को साम्राज्य दे दिया जाएगा तो उन्होंने चार शब्द कहे बस इतनी सी बात अंग्रेजी में इस डेट ऑल इतनी छोटी सी बात भगवान राम का भयंकर डिटैचमेंट इतना भयंकर अटैचमेंट की वह उनको इन्हेरिटेंस नहीं चाहिए ayodhyawasiyon से प्रेम था अपने पिता और माता के कंफर्ट के लिए था| और उसी को बोला अर्जुन ने पूछा थित प्रज्ञा भगवान ने बोला अर्जुन ने पूछा किम प्रभात श्वेता की मसीत रचयिता की वो कैसे होते हैं प्रज्ञा वाले तो भगवान उत्तर दिया करोड़ जिसको कोई अटैचमेंट नहीं ना तो उसको भाई आएगा ना क्रोध आएगा मतलब क्या है हमारा क्या है हमारा है मिल गया तो खोने का दर नहीं मिला तो एंगर और भगवान राम का क्या है ना खोने का दर नहाएंगे यह हमने और भगवान राम में अंतर एन होने का डरना एंगर क्या उनको क्रोध आया की मुझसे सब कुछ छीन लिया क्या उनको दर लगा मुझसे सब कुछ छीन लिया वीतराग भाया कूड़ा लेकिन क्या हमारी बुरी आदतों से इतनी भयंकर अटैचमेंट होती है इतनी भयंकर बुरी आदतों से अटैचमेंट होती है की हमसे छीन लिया जाए तो बहुत दिक्कत होती है वैसे एक आदमी आजकल तो आप सन ही रहे हैं की जो है ना लीवर खराब हो जाता है शराब पीने से तो अखबार में बड़ी लंबी चौड़ी खबर एक लंबा आर्टिकल आया हुआ की कल ही कल केवल दिल्ली शहर के अंदर शराब पीने के कारण लीवर खराब होने से 8 मौतें हो गई तो आदमी अखबार पढ़ रहा था शराब पीने से लीवर खराब हुआ 8 मौतें केवल दिल्ली में हो गई छोड़ दे अखबार बंद किया और पत्नी के सामने चला आज से बंद पत्नी बड़ी खुश हूं बहुत अच्छा किया [प्रशंसा] अत्यंत धनी और उसका जो घर था वह इतना सुंदर घर बनाए इतना महल जैसा घर बना के पूरे शहर में ऐसा घर किसी का नहीं vishuice करो सुंदर-सुंदर बात बगीचे बड़े-बड़े दरवाजे अंदर खुलने पे ड्राइंग रूम डबल हाइट का रूप महल जैसा घर बना है और सब सोचते द की अपना पैसा लगा करके मैं इतना बढ़िया घर बना नहीं पाएंगे उसको बोलते द आप पैसा बताओ आप से ले लेंगे आपका घर वो अपना घर भेजता नहीं था उसने बहुत मैन से बनाया था अपना घर बड़ा प्रेम से बनाया घर अपना रियल एस्टेट वाले समझ सकते हो जब कोई दिल से अपना घर बनाता है ना उसमें कितना समय लग जाता है कितने साल लग जाते हैं कारपेंटर अंदर घुसता है ऐसा लगता है अगले जीवन में बाहर निकलेगा बड़ा अच्छा घर बना लेकिन अभी तीन बेटे और पत्नी के साथ आनंद से वहां रहता था व्यापार करता था एक दिन व्यापार के कारण उसको विदेश जाना पड़ा बहुत दिन बाद जब विदेश से वापस लौटा और घर के सामने आया तो बड़ी भीड़ लगी हुई घर के बाहर ऑन के ये क्या हो रहा है आग लगी पड़ी पूरे मकान में और आग बढ़ती गई बढ़ती गई पूरा मकान जल गया उसका और खड़ा होकर जोर-जोर से रोने लगा जोर-जोर से लगाया भगवान ये क्या हो गया मेरे साथ बाकी लोग तो देख रहे द उनका घर नहीं जल रहा इसका घर जल रहा ये रोने लगा बहुत रोया वहां पे अचानक भगत हुआ उसका सबसे बड़ा बेटा आया पिताजी पिताजी क्यों रो रहे हैं आप बोले घर जल गया रहूंगा नहीं तो क्या करूं मत रो ये बोले क्यों आपके पीछे से मैंने आपको बताया नहीं यह मकान में एक आदमी आया है मुझे बोला मकान चाहिए मकान नहीं दूंगा बोलो चाहिए मगर नहीं दूंगा बोला दो गुना दम में क्या नहीं दूंगा बोला तीन गुना दम मैंने कहा चल ले ले आपके आने से पहले तीन गुना दम पर मकान बेच चुका था मैं पिता बहुत खुश हुए [प्रशंसा] मकान बेच आया अब हमारा नहीं है किसी और का जल रहा है आराम से बाकी सैकड़ो लोगों की तरह देखने लगा तभी दूसरा बेटा भगत हुआ है हमारा नहीं जल रहा है उसका जल रहा है अरे नहीं पिता जी हमारा ही जल रहा है बोलो कैसे बोला इसलिए जिसको बेचा है उससे खाली बयाना लिया है 10% जली हुई रात का कोई 90% देगा नहीं यह फिर रोने लगा फिर रोना चालू और आप बहुत लोग देख रहे हैं और ये रो रहा इतना जोर-जोर से चिल्लाने लगा इतना जोर-जोर से हे मेरा मकान जल गया 10% पेमेंट आई है 90% जल गया मेरा मकान जल गया इतने में भगत हुआ तीसरा बेटा जी रो क्यों रहे हैं बोले मेरा मकान जल रहा है नई-नई पिताजी अभी बताता हूं वो आदमी इतना ईमानदार निकाला की मैं उससे अभी फोन पे बात करके आया बोला किसको पता था मकान जलेगा वो लोग कमिटमेंट इस कमिटमेंट अभी ये मकान जला होता या नहीं जला होता मुझे पूरे पैसे देने द मैं अभी भी पुरी पैसे दूंगा और अभी लेकर के ए रहा हूं वो वापस खुश हो गया बोला किसी और का जल रहा है इतनी सारी देर में बदला क्या कुछ भी नहीं बदला ना मकान बदला ना आग बदली navakhade में लोग बदले ना खरीददार खरीदने वाला बेचने वाला बदला बदला तो सिर्फ मैन में भावना ये मेरा नहीं है ये मेरा है यह केवल भावना बदल रही थी जिसके कारण वो रो रहा था वही भगवान का रहे हैं वीतराग भाया क्रोध ही मुनीर uchhte यह जो अगर भागवत गीता पढ़ लेगा तो जिंदगी से भाई नाम की कोई चीज कंपलीटली समाप्त हो चुकी होगी कैसे इंसान फीयरलेस बन जाता है कैसे इंसान पावरफुल बनता है ये आदमी आग अपने मकान जलने पर कभी रो रहा कभी हर कभी रो रहा है दूसरी तरफ महाराज जनक की कहानी सुनाता हूं महाराज जनक अपने गुरु यज्ञ बोलता के पास बैठे हुए द और महाराज जनक मिथिला नरेश द मिथिला के राजा द और उनको इतना शक्तिशाली ईमानदार और ऐसा एक इंटीग्रिटी वाला राजा माना जाता था वो गुरु की शरण में बैठे हुए और तभी कोई आया वहां से भाई हुआ और बोला महाराज महाराज की जय हो एक बुरी खबरदार बोले कहो महाराज आपका पूरा महल जल गया है मिथिला नरेश आपका पूरा महल जल गया है और वो क्या जवाब में बोलते हैं कहते हैं मिथिला यह नमकीन chitranshti पूरा मिथिला का महल जलने पर भी मैं इतना सभी कुछ नहीं खोया नथिंग डू आय लूज एवं दो माय पैलेस में भी कंज्यूम तू एशेज हान और फिर भगवान कृष्ण इनकी तारीफ कर रहे हैं तीसरे अध्याय के 20वें श्लोक के अंदर भागवत गीता में एक ही राजा का नाम लिया वो महाराज जनक का नाम लिया क्यों क्योंकि वह क्या कहते हैं की जब मैं अपनी गुरु की शरण में बैठा हूं तो मुझे तीनों लोगों का सुख अपने आप मिल जाएगा इसको बोलते हैं कंपलीटली फ्री फ्रॉम डिटैचमेंट वित राघव भैया क्रोध मिल गया तो खोने का दर नहीं मिला तो अंगार और दूसरी तरफ महाराज जनक ना खोने का दर नहीं हैंगर भागवत गीता में यही चर्चा हो रही है की कैसे आप जब फीयरलेस अटैचमेंट के कारण बन जाते हैं इत्तेफाक जब 14 वर्ष का ना जब वनवास पांडवों को दिया गया था पांडु लोग जब वनवास में चल रहे तो एक समय ऐसा था की दवाई वैन में चल रहे द और दवाई वैन में चलते चलते महारानी कुंती को प्यास लगी पांचो पुत्र पांचो पांडु पुत्र साथ-साथ चल रहे तो उन्होंने सबसे छोटे भाई सहदेव को बोला की सहदेव तुम जाओ जरा मैन कुंती के लिए जल लेकर के सहदेव घूमता घूमता घूमता एक जलाशय को मिल गया वो जलाशय पे पहुंचा जलाशय पे पहुंचा जैसे ही पानी पीने लगा वहां एक बगुला पेड़ पर बैठा और बोला सहदेव रुक जाओ उसने हाथ जोड़ा बोलो क्यों रुक जाऊं बोला तुम्हें मेरे प्रश्नों का उत्तर देना होगा नहीं तो जल पीने से तुम बेहोश बगुले को देख के सहदेव हंसने लगा उसने जल पी लिया बेहोश हो गया ये कथा सब लोगों को पता होगी कई लोगों ने सुनी होगी कथा ये पर इस कथा में था क्या युधिष्ठिर वेट करते रहे सहदेव नहीं लौटा तो नकुल को भेजा नकुल नहीं लौटा तो भीम को भेजा भीम नहीं लौटा तो अर्जुन को भेजा और चारों के साथ यही हुआ उसे बगुले ने बोला मेरे प्रश्नों का उत्तर दो नहीं तो तुम मारे जाओगे उन्होंने बगुले पे ध्यान नहीं दिया जल पीने लगा और चारों बेहोश हो गए वहीं खत्म हो गए चारों की मृत्यु हो गई महाराज युधिष्ठिर हैरान हो गए चारों भाई लौटे नहीं मैन कुंती को कम aakunti आप जरा यहीं बैठी आराम करिए मैं तुरंत आया यह भी नजदीक का जलाशय वही तमाम पहुंच गए जैसे ही पहुंचे चारों भाई इनको देखें और तभी आवाज़ आई एक बगुले की बोला मैं यक्ष हूं युधिष्ठिर जो तुम्हारे भाइयों के साथ हुआ वही तुम्हारे साथ भी होगा अगर तुमने मेरे प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया तो महाराज युधिष्ठिर ने प्रणाम किया बोला पूछिए मुझसे क्या पूछना चाहते हैं महाराज युधिष्ठिर में कोई भाई नहीं पूछिए मुझसे क्या पूछना चाहते हैं उन्होंने कई प्रश्न पूछे की सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है संसार में बोले कहानियां भूटानी जा रहे हैं अरे जा रहे संसार में या मलयालम गच्चाती सब यह आले यानी की यमराज यानी उनके घर भी जा रहे हैं लेकिन फिर भी पश्चिम अपीन अब पश्चिम थी कोई भी देख के भी नहीं देख रहा है की मैं भी मरने वाला हूं हर एक को लगता है ये मारा लेकिन मैं नहीं मारूंगा एक-एक करके उन्होंने कई प्रश्नों के उत्तर दिए उनको उत्तर देते गए जैसे-जैसे युधिष्ठिर ने सारे उत्तर दिए तो यक्ष ने कहा की युधिष्ठिर तुम सभी धर्म के सभी मार्मो के तुम ज्ञात हो मैं तुम्हारे सारे उत्तरों से संतुष्ट हूं इसलिए मैं अब तुम्हारे संतुष्टि के बाद के लिए एक ही भाई को जीवित कर सकता हूं ध्यान दीजिएगा तो जैसे उन्होंने कहा किसको जीवित करूं महाराज युधिष्ठिर ने तुरंत कहा के ही यक्ष आप ऐसा करें नकुल को जीवित कर दें उसको जीवित कर लेते अर्जुन गांधी उधारी मेरे भाई अर्जुन और भीम और दूसरी महारानी थी माधुरी के दो पुत्र नकुल और सहदेव ही यक्ष अगर जब माता कुंती का सबसे जेस्ट पुत्र जीवित है तो धर्म के अनुसार मात्री का भी सबसे जेस्ट पुत्र जीवित होना चाहिए यानी की आपको नकुल को जीवित करना होगा भीम और अर्जुन से मुझे प्रेम है परंतु वो धर्म के विरुद्ध होगा जैसे यक्ष ने बात सुनी यक्ष मुस्कुराए और बोले युधिष्ठिर तुम नहीं जानते मैं ही तुम्हारा धर्म पिता हूं और मैं तुम्हारी परीक्षा ले रहा था और इस परीक्षा में तुम उत्तीर्ण हुए और आज से तुम्हें धर्मराज युधिष्ठिर के नाम से जाना जाएगा ना खोने का दर ना एंगर वही पूछा अर्जुन ने प्रश्न के प्रज्ञा का भाषा किस टेबल इंटेलिजेंस के लोग कैसे होते हैं तो भगवान ने उत्तर दिया वीतराग भाया करो अरे भाई डरता वही है जिसका टेबल इंटेलिजेंस नहीं जिंदगी में जो दर दर के कम करता है कुछ छूट गया तो दर जाएगा किसी ने बुरा बोल दिया तो दर जाएगा उसके साथ कुछ गलत हो गया तो घबरा जाए ऐसा कैसा वैसा कैसा कैसा इस सोचते रहते हैं हाथ से कुछ फिसल गया तो उनको लगा मैं बर्बाद हो गया खत्म हो गया ये सब वही लोग हैं जो भागवत गीता की शरण कभी नहीं है और समझे नहीं तो धर्मराज युधिष्ठिर द ये जो रिश्तो की अहमियत में भी धर्म को ऊपर लेकर के आए अपने भाई दोनों छोड़ दिए नकुल की बात का आजकल के रिश्ते अलग है आजकल के रिश्ते में मनोहर नाम का एक आदमी उसकी पत्नी बीमार पद गई बहुत तो भाग अस्पताल डॉक्टर के पास गया बोला डॉक्टर डॉक्टर मेरी पत्नी बीमार हो गई पत्नी बेहोश हुई है डॉक्टर थोड़ा चेकअप करने लगे सब कुछ किया और बोला मैं क्षमा चाहता हूं मार गई तो यह आराम से सन रहा था मैं जीवित हूं जैसे ही बोली मैं जीवित हूं पति बोलो आजकल के रिश्ते अलग है ये अलग टाइप के रिश्ते वाले रिश्ते नहीं है पर यह जो फीयरलेस नेचर है यह मैंने श्रीमती मीराबाई में सुना मीराबाई के जीवन में देखा श्रीमती मीराबाई चार साल की थी तो एक शादी का जो प्रोसेशन जा रहा था तो अपनी मैन से पूछा ये कौन है बोले दूल्हा जा रहा है श्रीमती मीराबाई ने कहा मेरा दूल्हा कौन होगा तो मैन थोड़ा पीछे घूमी और बोली ये कृष्ण जो देख रहे हैं तुम्हें यही तुम्हारे दूल्हे यही तुम्हारे पति है वह बात श्रीमती मीराबाई के दिल में बैठ गई की यही मेरे पति हैं परंतु और इतना भक्ति करने लगी इतनी अनन्या अनन्या का अर्थ होता है ना कोई अन्य ना कोई इसको बोलते अनन्या भक्ति ना कोई अन्य ऐसा नहीं अलग-अलग शेल्टर ले रहे हैं मीराबाई केवल कृष्ण की शेल्टर लिटन जैसे बड़ी हुई इच्छा के विरुद्ध सिसोदिया वंश के महाराज भोजराज से उनका विवाह कर दिया गया श्रीमती मीराबाई इतनी प्रेम में विलीन थी इतनी प्रेम में विलीन तीनों ने बहुत प्रयास किए उनके नजदीक जाने के लिए उनको दूर कर देती वह भी सिसोदिया वंश के राजा और धीरे-धीरे ना केवल बुरा माने बल्कि बात इतनी खराब हो गई इतनी खराब हो गई की उनको लगा की अगर तुम मेरे नहीं तो तू किसी की नहीं और जब ये बात हो गई तो किसी की नहीं तो उन्होंने बड़ी यातना आई दी उन्हें किलों के बड़े-बड़े शरिया पे लेता दिया वो फूलों की सैया बन गई छत से ऊंची नीची धक्का दे दिया तो ऐसा फूलों का गद्दा बन गया जिस पे वो गिरी जब उनको फूलों की टोकरी के अंदर बड़ा कोबरा सांप भेजा तो वो भगवान कृष्ण की मूर्ति में फूलों से लिप हुए परिवर्तित हो गया जहर का प्याला पिलाया तो वो अमृत बन गया इनको तो दर नहीं श्रीमती मीराबाई को और सिसोदिया वंश के महाराज को देखकर के इतनी हैरानी हुई उनका वैराग्य देख कितनी हैरानी हुई की उन्होंने उसके बाद उनका भी हृदय परिवर्तित हो गया और आजीवन उनको अपना मित्र मैन लिया और आजीवन मित्र मानकर के जीवन भगवान शिव के साथ में भी यह कथा आती है जब जिससे मैं हला-हल का उत्पन्न हुआ था 14 रतन के 14 रतन में से कहां पे हुआ था ये जब क्या किया गया था समुद्र मंथन में 14 रत्न उनमें से एकता हलाहल यानी की विश और जब विश्वास आया तो नहीं लगते और इतनी आग निकली उसमें से इतनी आग निकली के एक तरफ देव एक तरफ दानव सब जलने लगे और सबने भगवान शिव से प्रार्थना कारी दोनों ने भी कारी देवताओं ने भी कारी सूर्य सपने प्रार्थना करिए प्रभु आप लिए और भगवान शिव ने आकर के उसे जहर को अपने कंठ में धारण कर लिया यहां तक सबको पता है देखता हूं और जब उनको धन्यवाद किया बोला आपने बहुत बड़ा कम कर दिया हमारे लिए बोला मैंने कुछ खास नहीं किया आई डिड'टी दो एनीथिंग ग्रेट इट वाज आईडी तू डाइजेस्ट दिस प्वाइजन इस प्वाइजन को डाइजेस्ट करना आसान है parntu इस पृथ्वी के जीवन में जो अनुभव करने से जो विश सामने आता है और किसका भाई और क्रोध का उसको डाइजेस्ट करना संभव है और उसी को भगवान कृष्ण ने भागवत गीता में बताया जो भगवान शिव ने करके दिखाया उसको भगवान ने एक्शन में बताएं इसलिए हम बोलते हैं कम ऑन गीता एवरीबॉडी कम ऑन गीता एंड ये इस संसार में भी आपको ऐसे बहुत लोग मिलेंगे यह केवल ऐसा नहीं देवी-देवताओं की कथा सुना और थॉमस अल्वा एडिसन थॉमस अल्वा एडिसन के बारे में सब जानते हैं 1914 की बात थी उनकी सबसे बड़ी फैक्ट्री में आग लग गई और आज इतनी भयंकर लगी जोर से अपने बेटे को तुमने ऐसी आंख देखी लाओ अपनी मैन को अपने दोस्तों को उनको भी दिखाओ मैंने भी ऐसी आग नहीं देखी बोला पिताजी आप खुश हो रहे हैं खुश हो रहा हूं क्योंकि हमारी सारी गलतियां यहां जल के बर्बाद हो जाएंगी बेटा हैरान हो गया सारी गलतियां जल के बर्बाद हो जाएंगे और वही इतना बेटा कंफ्यूज था और वही उन्होंने आग लगने के बाद जब जाकर के न्यू यॉर्क टाइम्स को इंटरव्यू दिया तो बोला मेरी गलतियां चली है फैक्ट्री नहीं चली है फैक्ट्री यहां पर है मुझे सब गलतियां जलने से थोड़ी दर लगेगा गलती जल्दी से मैं खुश हो रहा हूं और अगले 2 साल के अंदर एक मिलियन डॉलर वाली कंपनी को उन्होंने 10 मिलियन डॉलर 2 साल में कन्वर्ट कर दिया क्योंकि उन्होंने वादा किया था आग बुझाते ही मलबा हटके मैं वापस जुट जाऊंगा ये है वीतराग भाया क्रोध ना खोने का दर और ना अंगार जो देता है ना वो सिर्फ संसारी हो या देवी लोक से आर हो उसको किसी का दर नहीं ये आदमी डरता तभी है जब उसको अटैचमेंट होता है वही गौतम बुद्ध ने भी बताया की अटैचमेंट ही सब चीजों का कारण इन सारे दुखों का कारण है और अगर ये सीरीज में चलेगा भी आगे भी भगवान और बताएंगे किस तिथि प्रज्ञा सका भाषा इसीलिए गीता इन एक्शन के सारे एपिसोड देखिए अपने बच्चों को दिखाइए अपने मित्रों को दिखाइए गीता है ना एक्शन ये हमारा एक ऐसा प्रयास है जहां पे हम आपको ये वो सारे के सारे गुण जो भगवान कृष्ण ने बताए हैं ammanitv महिमा शाम तीरथ जब हम सारे के सारे गुण व्यक्ति विकसित कर सकता है और जीवन के हर हिस्से में अपनी सफलता को प्राप्त कर सकता है ना केवल आध्यात्मिक जीवन पर लोग बल्कि इस लोक को भी दुखी बना सकता है गीता इन एक्शन के तारे एपिसोड को देखने के लिए इस वीडियो को पूरा समझने के लिए वीतराग भाया करो स्टेबल इंटेलिजेंस सबको चाहिए हमारे साथ जुड़े रहने के लिए आप सब का हृदय की गहराई से प्रेम पूर्वक बहुत-बहुत धन्यवाद ग्रंथ श्रीमद् भगवत गीता की [प्रशंसा]

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