Controversial Stories of Mahatma Gandhi Hindi Biography Dr Vivek Bindra
झाल हैं जिनके कहने पर चली थी आधी की आंधी फिर क्यों कहते हैं मजबूरी का नाम महात्मा गांधी ना इस बार किन्नर उस पार कि आज बात करेंगे गांधी के विचार की ना left-wing किन्नर राइट विंग की था और ना ही सेंटर के ट्विन कि आज तो बात करेंगे आजादी के उस मेंटर केविन चीज नमस्कार में विवेक ओबरॉय फाउंडर एंड सीईओ आफ wordpress.com वापिस आ चुका हूं फॉर्म में चल रहा हूं वॉच कोई सरदार पटेल रतन टाटा मारवाड़ी अब्दुल कलाम सुभाष चंद्र बोस राधा कृष्ण मानी स्टीव जॉब्स मैरिकॉम विधेयक के बाद रिक्वेस्टेड और वैसे भी आपने अगर इस चैनल का एक भी वीडियोस देखे बगैर छोड़ दिया समझ लेना अपने बौद्धिक विकास से नाता तोड़ दिया पहले साउथ अफ्रीका की कहानी शुरू करते हैं मैं दस कहानियां बताऊंगा मजबूरी का नाम महात्मा गांधी क्यों कहते हैं किसी को नहीं पता है बोध बहुत कम लोग जानते हैं मजबूरी का नाम महात्मा गांधी लिखित अब बोलते हैं मजबूरी का नाम महात्मा गांधी मजबूरी क्यों है यह कि मैं 10 कारण बताता हूं आपको एक ही वैसे तो मैं सो बता सकता हूं लेकिन केप्लर वीडियो बहुत लंबा हो जाता है गुजराती बिजनेसमें हुआ करते थे उनका नाम दादा अब्दुल्ला बात यह लगभग 1905 1906 की और वह बहुत परेशान थे साउथ अफ्रीका मैच इंडिया में गांधी को इज्जत नहीं मिल रहा था गांधी की हत्या में बहुत खराब थी तो उन्होंने कहा कि आप साउथ अफ्रीका जाएं मेरा केस लड़ यहां पर मुझे बिजनेस कर लॉस हो गया है और इनकी उन्होंने टिकट करा दी और फर्स्ट क्लास में जब गांधीवाद ट्रेवल करने से साउथ अफ्रीका अंग्रेजों को वहां पर बड़ा बुरा लगा उसने गांधी कैसे काला आदमी पहुंचता है बैठेगा इस बार निकल जाते तो गांधी को जब डिपार्टमेंट वहां से कंपार्टमेंट बाहर फेंका गया आप गांधी को बुरा लगा लेकिन कुछ बोले नहीं अ गांधी को मारा पीटा भी गया वहां पर जब कोर्ट में जज ने उनको बोला भाई आपने टर्बन गुजराती पगड़ी उतार नीचे रख तो गांधी ने वहां पर पगड़ी उतार दी गांधी वही रहे तो क्यों का एक साल का कॉन्ट्रैक्ट था और सहते रहे वहां पर उनकी कई बार बेइज्जती हुई सहते रहे दो कारण एक पैसे की कमिटी दूसरा एक साल का था ज्यादा करते हुए थे दादा बदला को चिट्ठी के तमाम लिए एक साल तक क्रिकेट लूंगा गांधी हेयर ऑइल बाद में हीरो की तरह निकल करके आए उन्होंने बाद में एक साथ कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट पहली बार साउथ अफ्रीका में चालू किया पूरा दुनिया बाद में गांधी की बहुत तारीफ करें वैसे गोपाल कृष्ण गोखले ने उनको वापस बुलाया कि वह इंडिया में है इंडिया में मूवमेंट करो 1915 में गांधी वापस लौटे तो उस दिन का प्रवास की है दिवस के रूप में मनाया जाता है देखो दिए वचन को पूरा करने के लिए वहां पर अपनी पगड़ी भी नीचे गिरा ही ट्रेन से निकाले गए खूब बेइज्जती हुई सब कुछ हुआ वह कहते रहे लोग थे मजबूर थे अब वह मजबूत थे कि मजबूत थे उन्होंने न्याय कुछ आर्थिक तंगी सिंह के पास उनकी नौकरी चली जाती वहां से काम खत्म हो जाता है और 1 साल का दिया हुआ वचन जो था वह भी टूट जाता कमेंट बॉक्स मुझे बताओ कि चांदी मजबूर थे यह मजबूत थे दूसरे कहानी लेते खिलाफत मूवमेंट की खिलाफत मूवमेंट कहा था कि 1919 1924 तक यह 5 साल चला था यह एक धर्मगुरु हुआ करते थे खलीफा टर्की में अंग्रेजों ने उनको कि हटा दिया पॉवर से हटा दिया जिसके कारण दुनियाभर के मुसलमानों को बड़ा धैर्य रखते थे बहुत बड़ा धर्म गुरु मानते थे खलीफा जी को तो फिर उन्होंने कहा भैया ही तोमर को आप सारे मुसलमान एक हो गए देश में खलीफा मूवमेंट चालू हुआ समा जाता हूं खिलाफत मूवमेंट चालू हुआ गांधी जी ने सोचा वैसे तो समय नहीं होता है लेकिन देश के मुसलमानों को अगर देश के लिए मुझे एक साथ ले रहा है तो उनका दिल जीतना पड़ेगा तो उन्होंने भी खिलाफत मूवमेंट में बड़ा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया गांधी ने किसी तरह से मुसलमानों को भी साथ में ले लो मुद्दा तो देश का देश को बचाना अगर याद मेरा दिल जीत लिया मैंने का तो मेरे साथ मदद करेंगे तो खिलाफत मूवमेंट बढ़ने लगा बढ़ने लगा इंडिया में उसी दौरान साउथ इंडिया में 1921 की बात रही होगी लगभग तब वहां पर लगभग पंद्रह सौ हिंदुओं को अब मार दिया गया मुसलमानों के द्वारा और 2000 हिंदुओं को जबरदस्ती उनका धर्म परिवर्तन भी कर दिया जबरदस्ती उनका धर्म परिवर्तन किया गया गांधी चुप रहे क्योंकि गांधी सच में मुसलमानों का दिल जीतना चाहते थे और रहता है हिंदू ही परेशान हुए थे गांधी क्यों नहीं बोल रहे हैं जबरदस्ती हिंदुओं के धर्म परिवर्तन यह तो गलत है ना वह हिंदू का धर्म पर इन अपने हिसाब से जीवन जीने तो उनको लेकिन यार गांधी जी ने एक परपस पकड़ रखा था कि मुझे मुसलमानों को अपने साथ लेना है कि वह देश में मेरी मदद करेंगे मैं अब पूरा देश इंपोर्टेंट यह 1502 हजार हिंदू इंपोर्टेंट है तो गांधी ने देश को आगे रखा 1502 1000 हिंदू मारे गए या उनका जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन हुआ इधर क्या कहते हुए को पॉलीटिकल एडवांटेज चाहिए नहीं ऐसा तो है नहीं कि मुसलमान उसको वोट देते हैं प्रधानमंत्री बन जाऊंगा मेरे को कोई पॉलिटिक्स में तो जाना नहीं है मुझे तो देश को बचाना है जाने दो 2015 में हिंदुओं को गांधी उनको इग्नोर किया तो धर्म के आधार पर हत्याएं हुई धर्म परिवर्तन के खिलाफ गांधी करना बोलना यह धांधली के लिए जरूरी था यह मजबूरी था वो आप कमेंट बॉक्स बताइए गांधी ने सही किया कितना गलत किया वह आप कमेंट बॉक्स बताइए जो कि मैं बात करूंगा लेफ्ट विंग की नाइट विकिरण सेंटर केविन कि मैं बात करूंगा जिसके मीटर केबिन की हिस्सेदारी पर काम किया अब सही है गलत है वह मजबूर थे या मजबूत थे यह आपके और मेरे बीच की बात नहीं है यह कमेंट बॉक्स की बात है मैं आऊंगा और आपके विचार देखूंगा तीसरी कहानी non-cooperation मूवमेंट कि यह यह बैठक 19 के बाद जिन्होंने एक असहयोग आंदोलन शुरू किया क्या अंग्रेजों का संयोग मत करो वह जहां हमसे कमाने आए हैं किसलिए हाइट अंग्रेज पैसा कमाने आए थे पावर लेने आए थे उन्होंने कहा कि इनका पैसा खत्म कर दो जहां से कम आते हैं इनको कोई को ऑपरेशन नहीं देना है तब कपड़े अपने सब कुछ अपना स्कूल अपना कॉलेज अपना वर्कर्स स्ट्राइक पैदा होंगे जो के लिए काम मत करो अगर मिनट बिल्कुल बर्बाद कर दो अंकित ब्रिटिश गवर्नमेंट बहुत दुखी हो गई थी उन्होंने अपना रिवेन्यूज करना शुरू कर दिया को टैक्स नहीं मिल रहे थे अब स्टूडेंट्स के लिए लीडर से इंडियन अपने ही कॉलेज अपने विद्यापीठ बनाने शुरू कर दिए गुजरात विद्यापीठ बिहार विद्यापीठ तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ काशी विद्यापीठ बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया जो मोती लाल नेहरु पंडित नेहरू सरदार सरदार पटेल इन सब ने कोर्ट के लो हुआ करते थे बड़े लौटे थे उन्होंने कोर्ट में जाना छोड़ दिया हर स्वदेशी प्रोडक्ट्स यूज करेंगे अपने देश का यूज करेंगे तभी तरीके से आई आजादी बोलते थे ना चरखे से आजादी वही तो चरखा चलाया गांधी ने केवल इनका कप पानी लेंगे अपना चरखा चलाओ कमेंट के इनकम एक्सपेंडिचर खराब हो गए पूरे जब सोनू निगम का हो गई एक्सपेंडिचर बढ़ गई अंग्रेजों के इसको ब्रिटिश बहुत डिस्टर्ब हो गए थे उस पेपर नहीं 1922 की बात थी उस समय अब हम लोग बहुत डिस्टर्ब हो गए थे यहां पर सर्च और चौरीचौरा में बाद में पुलिस वाले जो बहुत तंग कर रहे थे थाने को आग लगा दिए और उसमें बाइक्स बेचारे पुलिस वाले मारे गए कि वह सही तो नहीं था किसी भी तरीके से मारना नहीं चाहिए था हुकुम लेकिन फिर उसके कारण बहुत दिक्कत बड़ी 228 लोगों को कोर्ट में ले जाया गया और 172 को डेथ पेनल्टी दे दी गई 40 को जेल में डाल दिया गांधी दुखी हुए गांधी बोले मैं अहिंसा से चाहता था बाई non-cooperation मूवमेंट है पुलिस वालों को क्यों मारा तुमने क्यों मारा इस तरह तो है फॉर आई फॉर न आई विल एंड अप मेकिंग थे व्होल वर्ल्ड ब्लाइंड बुला अगर कितने तो मेरी आंख खुली तो उसकी आंखों तो पूरा दुनिया अंधी हो जाएगी गांधी ने बोला मेरे को तरीका ठीक लगा मे non-cooperation मूवमेंट वापस ले रहा हूं और ब्रिटिश गवर्मेंट यह क्योंकि ब्रिटिश गवर्नमेंट लोगों को मारने के लिए राष्ट्रीय मार्शल लॉ लगा दिया गया था मार्शलों का मतलब है 2 जहाज और उसे गोली मार दो खत्म कर दो गांधी ने बोला इसे लेगा मेरे non-cooperation मूवमेंट खत्म इससे देश में बहुत लोग दुखी हुए उड़द तो यह क्या चक्कर है जब तुम्हारा मन करे चालू जो तुम्हारा मन करे बंद क्योंकि ना एक मुमेंट चालू हो गया था बेसिक खट्टा हो चुका था और गांधी के इस बात को कहीं ने पसंद नहीं किया अब गांधी कहते थे कि ब्रिटिश कैलीबरेशन कभी भी गोली मार देंगे हम उनको एडिटेड तुमने कर दिया इस समय अब गांधी बखूबी जेल में डाल दिया गया था गांधी तक परेशान थे उन्हें को बंद कर दिया सब कुछ लेकिन यहां पूरा का पूरा कॉन्फिडेंट कहां गया स्वराज की भावना को मजबूर कर दिया गया जमनालाल बजाज उनको गांधी का पुत्र माना जाता है वह स्पॉन्सर करते थे गांधी के सारे इनिशिएटिव उन्होंने खादी उद्योग स्कूल कॉलेज काफी पैसा खर्च किया था वह सभी बंद हो गया तो वह बोले वही मतलब हलूकअप इनटोलरेंट हो गए बहुत बड़ी गलत किया आपने और वहां पर जो भगत सिंह यह लोग अपना पूरा टीम लेकर गांधी का सपोर्ट करना चाहते थे क्योंकि non-cooperation सही टूट चुके थे तब यह गांधी का गेंद नीचे तक यह गांधी के साथ हुआ करते थे अब उन लोगों के बिलों किया और फिर तो उसके बाद पूरा देश एक दम पूरा मूवमेंट टीचर डे आधे को क्या लगता है यह गांधी ने non-cooperation मूवमेंट बंद किया यह उनकी मजबूरी थी यह जरूरी थी बार-बार को कमज़ोर दिखाया गया है बताया गया वह कमजोर है गांधी कभी विचार था कि बिना लड़े बिना करें मेरे को थप्पड़ मारो इधर भी थप्पड़ मारो लेकिन मैं ऐसे ही आजादी लूंगा तो लोग कहते थे कि यह बड़े मजबूर व्यक्ति देखते हैं मजबूत नहीं देखते आपको डिसाइड करना है यह मजबूरी थी मजबूत थे क्योंकि उनको डर था कि काफी लोग मारे जाएंगे और सब लोग मारे गए तो फिर आजादी की लड़ाई कैसे लड़ेंगे 34 कहानी में लूंगा डांडी मार्च की पहले अभी समझ डिमांड था क्या अंग्रेजों ने नमक गिर पड़ा इसको बहुत बड़ा गया था प्राइस को क्या बोलेगा टेस्ट को समझ लो आप ऑफिस को पर्सेंट टैक्स बढ़ा दिया उस समय नमक बहुत महंगा कर दिया गांधी बोले नमक तो प्रकृति दे रही है तुमको चौबीस सौ पर्सेंट टैक्स लगा रहे हो अरे 24 पर सेंट ठीक कर चौबीस सौ परसेंट एक अंग्रेजों लगा दिया नमक इतना महंगा कर दिया रानी ने बोला नमक तो अपना बना सकते हैं दांडी मार्च गांधी ने डिसाइड किया लेकिन चौरीचौरा से ठीक कह उठें तो 200 उन्होंने बोला मेरे साथ चलेंगे केवल से ज़माने लुट लिया था कि तुम मार खाने को तैयार हो अंग्रेज मारेंगे रास्ते में बहुत दर्द होगा तुम्हें बहुत पिटोगे पक्का नहीं है वापस जिंदा आएंगे कि नहीं आएंगे मार डालेंगे मैं रास्ते में से आठ लोगों ने मान लिया कि हम मरने को भी तैयार है वह गांधी के साथ टूटने के लिए चले और दांडी मार्च में 12 मार्च 1938 को चालू हुई थी यह और कई दिन तक चलिए 5 अप्रैल तक चली थी क्योंकि उनको टैक्स हटाना था और उस गांधी मां दांडी मार्च 358 किलोमीटर की गांधी चलते चले गए और खुद भी पटेल चुपचाप कतार में लगे सबको पिटवाते रह अपने मार खा यह लेकिन हुआ क्या आगे चलकर 108 लौंग आते गए रस्ते में जुड़ने लगे और आप आराम देने के बीच हजार लोग जॉइंट करके बोलो हमको भी मारो हम कोई मारो और डांडी मार्च में आ गया है अब देखो इससे आंदोलन को मजबूती मिलेगी लेकिन खुद भी पेट एक औरों को भी पिटवाया खुद भी मांग उठाई कि दूसरों को मार खुलवाइए आपको क्या लगता है मजबूरी थी कि मजबूती थे क्योंकि आपको पता है ना मैं ना इस पर की ना उस पार की बात करूंगा गांधी के विचार की बैलेंस ट्विटर व कमेंट बॉक्स में को मुझे बताना होगा पांचवी कहानी पेट की इतने में पहले से जानता हूं कि आप लोग एक ही तरह का विचार रखेंगे इसमें ज्यादा गांधी को नहीं पसंद करें क्योंकि यह वह इनवेंटेड द के कारण भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव को फांसी भी दी गई और गांधी ने को बचाया नहीं प्ले इरविन पैक्ट समझ लो किया है वह इस रॉबिंस है उनको गांधी जी ने कनविंस कर लिया कि अगर हम लोग बिल्कुल हाथ जोड़ के लड़ रहे हैं आपसे आपके ऊपर हाथ नहीं उठा रहे आपको तंग नहीं कर रहे कुछ नहीं कह रही थी कुछ बोलते अहिंसा तो जो भी जरा हिंसा किसी आंदोलन में है उसको जेल में मत डालो वह वह विमान के इस बात को मुझे ठीक है इन सवालों नहीं डालूंगा इनका क्या करूं भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव का घृणित इन्हें तो पांडेय की हत्या कर चुके हैं गांधी ने जैसे आपको ठीक लगता है कर लो गांधी ने को बचाया नहीं उनको फांसी की सजा सुना दी गई और गांधी ने कोई विशेष नियम को बचाने के लिए क्योंकि गांधी ने कहा जब मेरी वॉइस और से बात हो गई भैया के जो बिना लड़े करेगा उसी को बचाएंगे इस चक्कर में सुभाष चंद्र बोस वह बहुत पर आज वही लोग नाराज वह जानती थीं कि वह चाहते थे कि इन्होंने बहुत बड़ी शहादत दे रहे हैं बचाओ उनको गांधी देखा नहीं भाई मैंने अग्रीमेंट में टाइम्स में नहीं आता कि मैं केवल उन्हीं को बताऊंगा जो non-violently मृतक रखेंगे तो बेसिकली गांधी का तरीका क्या था इधर मां हुए और हाईवे यह तुम मेरे साथ चल यार तू बस समझ लो बात को स्ट्रोंग यह बात से काफी लोग नाराज़ हुए गांधी से और यहां तक कि एक बात तो यह हिस्टोरियंस में से कुछ इतिहासकार बताते हैं कि गांधी को इरविन यह कहते थे कि तुम अगर भगत सिंह की कमिटमेंट लेकर मेरे को दे दो कि दोबारा हरकत न करें तो बैंक को भी छोड़ दूंगा गांधी ने बोला नहीं भैया मैं रिपीट करता हूं कि ब्रेवरी कि मैं रिस्पेक्ट करता हूं मैं दूसरा कोई मना करूं अ बिल्कुल इस तरह से कोई हरकत न करें और आगे चलकर पता नहीं वह बदले ना बदले अब क्योंकि उसकी आदत बन चुकी है non-violence मेरा बिल्कुल क्लियर है मैं इनका साथ नहीं दूंगा समय क्योंकि मेरा अपना मानना है कि हाथ जोड़कर के लड़ाई लड़ेंगे हम लोग और वैसे फिर इसके बाद कई विकास कार्य भी मानते थे कि गांधी कहते कि चलो छोड़ो मत लेकिन फांसी माफ कर दो 20 साल की सजा दे दो जरूर ऐसा करो भगत सिंह 10 साल की सजा दे दो पांच साल की सजा दे दो कुछ पर ने को सेट कर लेते हैं लेकिन गांधी यह अश्योरेंस लैटर नहीं दिया लिख करके ए बीटिंग चलेगा पीछे अब आप बताइए कि गांधी के लिए मजबूरी था कि जरूरी था यह मजबूरी का नाम महात्मा गांधी इसमें कहना ठीक है यह गलत है क्योंकि उन्होंने भगत सिंह को बचाया नहीं बिल्कुल भी भगतसिंह चले गए हमारे देश से इतना वीर सिपाही आप डिसाइड आपको करना कमेंट बॉक्स में बताएंगे छटा था कि अ कांग्रेस में अब कांग्रेस बिल हो गई थी कांग्रेस बड़ी हो रही है ठीक ही समझो अब काफी कार्य इनके जो मर्जी प्रोविंसेस हुआ करते थे प्रोविंशियल इलेक्शंस हुए बिहार उड़ीसा बंगाल मुंबई महाराष्ट्र सेंट्रल प्रोविंस आफ तो इसमें कांग्रेस जीतती चली गई और मुस्लिम दिखती वह आसानी होती चली गई कांग्रेस बहुत मजबूत हो गई लेकिन कांग्रेस में अगर करप्शन और करप्शन का बढ़ने लगा और सब लोगों ने बोला कि आखिर कांग्रेस में करप्शन आफ कि कांग्रेस में करप्शन डालनी है क्या बोला बड़ी विनम्रता के साथ उस कांग्रेस को जमीन के अंदर गाड़ दूंगा खत्म कर दूंगा और दोनों को समझाया पटेल नेहरू सबको समझा कांग्रेस को बंद कर दो किस्म का ऑप्शन आ गया है पटेल नेहरू बोले नहीं गांधी जी अगर इस समय हमने ऐसा किया और करप्शन के चक्कर में इसको बंद किया तुम लिखी आगे निकल जाएगी बहुत समस्या हो जाएगी पंडित नेहरू ने पोस्ट किया पंडित मैंने बोला सोंग्स तो बिल्कुल नहीं दे दूंगा ऐसी चलेगी डांगी ने बोला लेकिन करप्शन बहुत है फिर क्या किया जाए उन्होंने कहा इस समय अगर हमने कांग्रेस तोड़ दिया तो पूरा देश टूट जाएगा मुस्लिम दिखा के आ जाएगी हमें परेशान हो या बच अलार्म को चलाने दो जितना मर्जी करप्शन हो रहा गांधी जी अभी नहीं छोड़ेंगे हम कांग्रेस मैं डिलीट कर रहा हूं डिलीट करूंगा नेहरू उस समय बिल्कुल तो फिर बाद में उन्होंने बोला ठीक है साब करो तुम्हें जो करना है तुम करूं गांधी उस समय भी छूट गए गांधीनगर में करेक्शन पर कोई निर्णय नहीं लिया आप और उसे नेहरू स्कूल लिस्ट करते चलेगा यह ऊपर गांधी यह काम करना जब शादी हो जाएगी तब कांग्रेस को तोड़कर दोबारा चालू करेंगे ध्यान रखें ठीक है ठीक कर रही है मुझे बाद में देखेंगे हम लोग तो कांग्रेस में फैल रहे भ्रष्टाचार के बावजूद कांग्रेस को खत्म न करना यह कोई बड़ा मजबूत निचे न ले पाना इसमें भी कारण था यहां पर उक्त अभियान ग्रेजुएट जाएगा यह मजबूरी थी यह जरूरी थी क्यों कहते हैं मजबूरी का नाम महात्मा गांधी ऐसे इंसान जैसे चलाई थी आजादी की आंधी तात्विक कहानी जाने-अनजाने में ब्रिटिश अर्थ का अवार्ड वार्डो में भी सपोर्ट कर दिया गांधी जी लें अब बलमुअ किया था खिलाफ नेताजी चंद्र बोस और बहुत से लोग सरदार पटेल भी नहीं चाहते थे कि हम भी टेस्ट के साथ अवार्ड और तुम्हारी लड़ाई दुनिया से अबे तुम हमको प्यार मार रहे हो पेन रहे हैं सूत्रों और फिर हम तुम्हारा साथ दें गांधी फतेहपुर में तो मना कर रहे थे लेकिन गांधी अपने मूवमेंट में लोगों को अट्रैक्ट नहीं कर पाए तनख्वाह देने पर इतने पैसे थे नहीं है 25 लाख लोग भारत के अंग्रेजों ने अपने साथ जोड़ लिए उन्होंने काफी तो हमारे हम तुम को तनख्वाह देने हमारे साथ आ जाओ इन लोगों के साथ जानेंगे गांधी का मूवमेंट इतना कमज़ोर था यहां भी मारोगे यह बीमार हूं कि आप बीमार हैं यह भी मारो और इस चक्कर में यूज उनके तरह ब्लास्ट हुए ने हालांकि गांधी ने बाद में एक नया मूवमेंट कबूतर क्विट इंडिया मूवमेंट शुरू किया लेकिन जाने-अनजाने में फेल होने वर्ल्ड व्हाट टू में उनको सपोर्ट कि अंग्रेजों को उनको बोला मजबूती से यहां नहीं खड़े हुए उन्होंने उनको समझाया कि अगर हम आपका साथ देंगे अब हमारा भारत छोड़ देना प्लीज लाइक आजादी दे देना अंग्रेजों ने बोला ठीक है अगर तुम मेरा साथ दोगे तो आगे चलकर तुम्हे चाहेंगे गांधी फ्री कर गए कि ठीक है यह हम साथ देंगे इनका विनम्रता से क्योंकि हम को आजादी देने वाले हैं इन दोनों को पसंद दिया है अब गाना कि प्रेम से चलते थे गांधीस मार-पिटाई में बिलीव नहीं करते थे अपने शत्रुओं का भीख देने में बिलीव करते थे शुद्र हृदयदौर्बल्यं जगत व उच्च परंतप आ ऐसा अर्जुन को कृष्णा ने बोला था हृदय दौर्बल्य एवं दुर्बल हृदय मत बनाओ अर्जुन प्रत्यक्ष उत्तिष्ठ परंतप आयुक्त पेस्ट मतलब खड़े हुए व्यक्तियों में तप त्याग के हृदय की दुर्बलता को लेकिन साथ में फिर कृष्ण ने यह भी कहा कि तुम्हारा हृदय कोमल है गांधी भी कुछ ऐसा ही थे अर्जुन की तरह उनका हृदय बहुत कोमल था और कोमल हृदय के चक्कर में शत्रु का हिसाब देने को तैयार जाते थे सेकंड वर्ल्ड वॉर में अंग्रेजों की मदद करना यह गांधी जी की मजबूरी थी यह उनके लिए जरूरी था यह मजबूरी है जरूरी थी यह निर्णय आप लेंगे लेकिन आठवीं कहानी यह मैंने पीछे भर बताई थी उन्होंने पंडित नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के लिए चुना जबकि सब ने वोट सरदार पटेल को दिया सबको पता है सारे इतिहासकार जानते हैं यह बात कहीं पर की जा चुकी सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद ब्रिटिश सरकार कमजोर हो तो किसी बहुत कमजोर हो चुकी थी उन्होंने बोला ठीक है अब इतना कमजोरों काम छोड़कर जा रहे हो सुभाष चंद्र बोस का भी टाइप कर चुके थे इंडिया में तो कि सरकार ने का ठीक है जाते छोड़कर के अंतरिम सरकार बना लो अंतरिम सरकार में सब ने वोट दिया किसको वाचक पंडित नेहरू ने पटेल भी थे आचार्य कृपलानी पर राजेंद्र प्रसाद खान अब्दुल गफ्फार खान सब थे लेकिन वोट किसके पेयर में गया वोट गया सरदार पटेल के फेवर में प्रांतीय 15 प्रांतीय कमेटी की सबने मिलकर के वोट दिया फिर भी मना कर दिया गांधी ने सरदार पटेल को तुम पीछे हो जाओ नेहरू को प्रधानमंत्री बना देते हैं आगे चलकर प्रधानमंत्री वही बनता है जो कांग्रेस का अध्यक्ष बनना था उसने प्रधानमंत्री बनना था यह तय हो चुका था उन्होंने नेहरू को बना दिया लोगों ने पूछा गांधी आप नेहरू को क्यों बनाया मुझे नेहरू नाराज ना हो जाए अगर निर्णय राज योग है तो कांग्रेस तोड़ देगा कांग्रेस टूट गई तो अंग्रेज फिर से में कंट्रोल कर लें कोई दिक्कत न आ जाए और नेहरू वैसे भी नंबर वन की पोजीशन पर रहना चाहता है नेहरू अंग्रेजी जानता है न विदेश से बात कर सकता है नेहरू यह नेहरू व है तो यह उस चक्कर में नेहरू को फिर से आगे लिया जनता के खिलाफ जाकर के सरदार पटेल को आगे बढ़ाने की जगह वह जानते थे सरदार पटेल मेरी बात मान जाते हैं उनको साइट की नेहरू पर अपना स्टाइल हो बढ़िया सफारी सूट कि आप हाथ में पाइप लेकर गुलाब का फूल टांग के अंग्रेजी में बात करते हुए अंग्रेजों के साथ में कुछ सीन करते थे तो गांधी ने का देखो इंटरनेशनल फिर यह संभाल लेंगे कोई बात कि सरदार पटेल भारत में तुम संभाल में तो विरोध के बावजूद पंडित नेहरू को कांग्रेस में आगे बढ़ा देना विरोध के बावजूद नेहरू को फाइनल कर देना इसलिए कि कांग्रेस हट जाइए गांधी की मजबूरी थी एक गांधी के लिए जरूरत है जरूरी था वह निर्णय आप लेंगे क्योंकि गांधी के लिए हमेशा है पहुंचता है जिससे वह जस्टिफाई करते थे उसको गांधी वैसे बहुत मजबूत आदमी है जो बीमार खाता खोल क्यों खाता है अच्छा आप समझो कि से 20 करोड़ लोग आपके फेवर में उसके बावजूद भी गांधी मार खाने को तैयार एक मिनट और इन चीन में उन्हें बहुत अच्छे गुण थे पर इन बातों के कारण कई बार गांधी का ब्रांड देश में वॉर्डन हुआ गांधी आज भी हमारे देश के युवाओं के बीच में बड़ी इंस्पिरेशन है नौवीं कहानी सुभाष चंद्र बोस को उन्हें बाहर कर दिया सुभाष चंद्र बोस बीत चुके थे तो वह सेलेक्शन ग्रेड कांग्रेस में अतिथि रमैया के आगे थी ना रमैया गांधी बोले मेरा कैंडिडेट है सुभाष चंद्र बोस उनके कैंडिडेट को गहराई 1375 उठकर मैया को मिले और 1355 ट्रस्टी बोर्ड सुभाष चंद्र बोस को मिले तो जब इतने वोट मिले सुभाष चंद्र बोस जी का गांधी बोले तो मेरी हार है सीतारमैय्या की हार मेरी हार है जो कि मैं अच्छी तरह के फेवर में हूं सुबह-सुबह तो गांधी पसंद नहीं करते सुभाष चंद्र बोस क्या-क्या अपने फेवरेट हो चुके हैं और वह थोड़ा तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा टाइप से और गांधी जी का तेज धार भी माल उधर भी मान लो लेकिन आराम से लड़ेंगे हम लोग इस तरह नहीं लड़ेंगे उन्होंने बीतने के बावजूद पूरी जान लगाकर सुभाष चंद्र बोस कहा कि रमजान लगाई थी जान लगाने के बावजूद सुभाष चंद्र बोस जी गए तब बोला रुको खत्म प्रदान कर दो यहां से निकल जाओ सुभाष चंद्र बोस संघीय क्षेत्रों में बोला मैं जानता हमारे रास्ते अलग हो सके पर मकसद एक है सुभाष चंद्र बोस बातें विदेश चले गए मंत्री के स्टडी बनाई वह सुभाष चंद्र बोस को जबरदस्ती भी कराया था इसमें मैं गांधी को मिले नहीं दिखा रहा हूं मैं उनकी विचारधारा बता रहा हूं कि विचारधारा है कि देश में जो देश की टॉप लीडरशिप इस उसके हिसाब से चलना चाहिए ऐसा नहीं सुभाष चंद्र बोस अपनी डफली बजा है और नेहरू-पटेल अपनी डफली बजा और मत बोलो तो वो चाहते थे कि भई इसलिए उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को बाहर किया ऐसा करना उनकी विचारधारा यह मजबूरी था जरूरी ही गलत कि आपको इतने तस्वीर खरीद लेते हैं पार्टीशन का टाइम कुछ पार्टीशन में क्या हुआ पार्टी के टाइम आपको बता जिंदा आ गए थे मेरे फलक पाकिस्तान चालक पाकिस्तान चालक पाकिस्तान चाहिए तो सारे इतिहासकार बताते हैं कि गांधी ने शुरू में अलग पार्टीशन का अलग पाकिस्तान का विरोध किया सबको खूब समझाया भी अलग नहीं कर वाला नहीं करूंगा 22 राय बच्चन चलेगा सबमिट बटन को समझाने चले गए भाई माउंटबेटन तो ऐसा कर तू इंडिपेंडेंट कर दे बंटवारे का मामला से बाद में देख लेंगे माउंटबैटन ने बोला नहीं साथी कितने भी साथ-साथ करना पड़ेगा अच्छा वह नहीं सुन रहे थे कि उसके बाद योजना के भाई जमुना तू मेरी बात सुन पहले अलग कर लेते हैं बाद में पूछेगा जीना भूल ना जना अभियान ग्रेट कार्यकर्ता क्लिक कर चुके थे 5,000 लोग मारे जा चुके थे कईयों को त्याग कर चुके हैं बहुत लोग बेघर हो चुके थे तो जिन्ना इस समय बिल्कुल क्लियर है वही अंग्रेज है तो पाकिस्तान मिल जाएगा एक बार इसको इंडिपेंडेंट करा दिया बाद में पाकिस्तान देंगे नहीं देंगे सुनिए मेरी कोई सुन लेगा वह माउंटबेटन को पकड़ कर बैठ कर देख भैया ऐसा न बैठ जाए इस चौकड़ी मार के मेरे को तो पाकिस्तान अलग चाहिए अभी चाहिए इस बच्चे स्क्रीन से लड़ते हैं वह पाकिस्तान के लग रहा था अब उस चक्कर में गांधी व की बात न सुनी जिन्ना पर गांधी ने बोला मेरे दो बड़े प्यार से शैल करन अर्जुन नेहरू-पटेल इनको समझा देता हूं मैं ऐसा करो अलग नहीं करूं तुम इसी को दो पाकिस्तान पाकिस्तानी मतलब पूरा हिंदुस्तान पूरा पाकिस्तान समिति के दिलों श्रुति प्रधानमंत्री बन जा उन्हें रूकवाए दिमाग हिल गया ओए ऐसे थोड़ी होता है इसको बना दो है जी तो सरदार पटेल भी फेवर में नहीं थे कि ना जिन्होंने बर्फ उन्होंने बोला बनाने जिन्ना को प्रधानमंत्री बनने से कोई फर्क नहीं पड़ता कम से कम भारत तो एक रहेगा भारत तय करेगा टूटेगा नहीं तो उन महान नेहरू ने बोल दिया देखिए यह हमारी विरासत ये अलग-अलग है बहुत सारी इतनी पास चाहिए 500 या सकते हैं और सब के सब नाराज विधायकों के हिंदू पहले रहा जाए यह बिलकुल या गड़बड़ हो जाएगी तो पूरा का पूरा समय जिसके पास जाए गांधी के कोई बात न माने गांधी की लीडरशिप वहां थोड़ी कमजोरी दिखाई पड़ी गांधी अपना हर बात पर अबे बैठ जाते हैं अरे मेरे को सुनने में मेरी कोई सुन नहीं रहा वहीं हुआ उसके बाद फिर पाकिस्तान को अलग होना पड़ा पार्टीशन को ना रुको वाला पन्ना यह गांधी के लिए क्या था मजबूरी था के जरूरी था गांधी जो पूरा आज तक लड़ते आ रहे थे यहां कुछ चुप बैठे कई इतिहासकारों का मानना है कि वह चाहते थे कि नेहरू को सत्ता मिल जाए इसीलिए उन्हें अलग करवाया और इसके लिए कोई लड़ाई नहीं लड़ी थी कि मुझे कोई शोर नहीं मचा क्योंकि वह जानते थे कि अगर जिन्ना को पाकिस्तान दिया तो यहां नेहरू आप आएगा और कई लोग मानते नहीं उन्होंने प्रयास किया अलग इतिहासकारों के अलग-अलग बातचीत है पर आप लोगों के लिए क्या हमारा चैनल एक जिम्मेदार चैनल है हम एक तरफ की बात नहीं करना चाहते गांधी की ही विशेषता थी आइंस्टाइन को अपना गुरु मानते थे आइंस्टाइन को ग्रेटेस्ट मेन आफ कंट्री सेंचुरी मानते थे टैगोर ने उनको महात्मा की उपाधि दी सुभाष चंद्र बोस ने उनको फादर ऑफ नेशन बोला मार्टिन लूथर किंग को अपना गुरु मानते थे यह सिंह के सम्मान में सरदार पटेल ने पीएम का पद त्याग दिया 150 से अधिक देशों में आज फिर से जरा डाक की पोस्टल टिकट सिंह के नाम पर है 70 देशों में दो अच्छा जी की मूर्ति बना रखे 90,000 किताबे इनके ऊपर लिखी गई है आज 45 से ज्यादा फिल्में इंच ऊपर बन चुकी है 500 डाक्यूमेंट्री धर्म नारायण मूर्ति से पूछा कि इंफोसिस कांसटीपेशन को है तो वह गंदी है वर्गीज कूरियन ने कोऑपरेटिव मूवमेंट अमूल गांधी को देखकर के शुरू किया राजकुमार हिरानी ने संजय दत्त के साथ मूवी लगे रहो मुन्ना भाई गांधी पर बनाई थी रिचर्ड वह बड़े वह साथ ऑस्कर जीत चुके और बोले यह सब गांधी के कारण जीता था जो मजबूत व्यक्ति कौन होता है मजबूत हुए इसे फैशन सेट और इसे मॉडेस्टी है और यही बात आगे से भगवान बुद्ध का भी जवाब गोली मार के साथ आमना सामना हुआ था अंगुलिमाल सबको मार के अंगुली काट कर माला पांडे तथा और भगवान बुद्ध को मारना चाहता था वो रुक जा रुक जा रुक जा भगवान बुद्ध बोले मैं तो बहुत साल पहले रूप चुका हूं तेरे रूठने का टाइम है और वह अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तित कर दिया और वह अंगुलीमाल से ही मैं यहां पर यहां गांधी को भी रिलेट करना चाहता हूं इस कहानी में कि वह भी हृदय परिवर्तित करने के लिए सब कुछ है को तैयार थे हिंसक डाकुओं को भी जैसे बदला गया ऐसे ही व हिंसा अंग्रेजों को बदलना चाहते थे गांधी के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए होंगे लेकिन उस सत्य और अहिंसा के संग अपने किया एक जिम्मेदार चैन होने के नाते मैंने दोनों तरफ की बात रखी यही उनकी सबसे बड़ी मजबूती टिप्स सत्य और अहिंसा के थे वह पुजारी कभी नहीं जिन्होंने अपनी हिम्मत हारी ईएस दी हमें आज़ादी की झन-झन है उनका आभारी यह थे महात्मा गांधी आपको निर्णय लेना है कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी है मजबूती का नाम महात्मा गांधी मेरा काम है जिम्मेदार चैन होने के नाते दोनों तरफ के पक्ष को रखकर के आपको न्यूट्रल प्वाइंट दे सकूं वर्ल्ड क्लास कंटेंट्स शोल्ड कॉन्टैक्ट मे कभी भी इधर-उधर की बात नहीं करता अगर आपने मेरा बजट के ऊपर वीडियो नहीं देखा है वह जाकर देखिएगा हमेशा न्यूट्रल बात ना पक्ष की न विपक्ष की बात करेंगे एकदम निष्पक्ष की हापा यह कमेंट बॉक्स में मेरे साथ जुड़ी आज में लोगों कमेंट करना चाहता हूं आपका क्या विचार है नहीं है तो सब्सक्राइब नहीं किया गेम कैसे चेंज होगा अगर बिजनेस वर्ल्ड करना चाहते हैं तो मैंने अपने सपोर्ट बोडी नंबर बनाया था जहां विशेष क्लिक कर सकते हैं बड़ा ट्विस्ट को में आपका बिजनेस बिल्कुल हैं व्रत करते हैं अब तक हजारों की कर चुके हैं अब तक लाखों पार्टिसिपेट अपने फैंस को कुरु कुरु हमारे साथ में हमारे साथ जुड़े रहने के लिए कमेंट बॉक्स में यही बताने के लिए अपना वीडियो कैसे बनाएं आप में का हृदय की गहराइयों से प्रेमपूर्वक बहुत-बहुत धन्यवाद अ [संगीत]
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