Deep Leadership Principles of Narayana Murthy Tycoons of India Dr Vivek Bindra

पूरा का पूरा स्टेडियम भरा हुआ था ईया टू आईपीओ में कमाल कर दिया आप लोगों ने इतने सारे लोग आए जो अपने बिजनेस को आईपीओ की तरफ लेके जाना चाहते हैं ये इवेंट बहुत शानदार हमारा गया उसके लिए मैं आप सबको हाथ जोड़ के बधाई करना चाहता हूं लीडरशिप फन भी बहुत अच्छा रहा नमस्कार मैं विवेक बिंद्रा फाउंडर एंड सीईओ आपका अपना बड़ा बिजनेस 11वां एपिसोड है टाइकून ऑफ इंडिया हर संडे आप इंतजार करते हैं किसका ब्रिलियंस जो कि देंगे कई बिलियंस चैनल में हमने प्लेलिस्ट का सेक्शन दिया है प्लेलिस्ट को जरा मैं इंट्रोड्यूस कर देता हूं youtube1 वहां पे नंबर होता है जिसको बोलते हैं प्लेलिस्ट वहां जाओगे पहला एपिसोड आनंद महिंद्रा फिर अजम प्रेम जी लक्ष्मी मित्तल इंदिरा नुई पेप्सी कोवाली फिर इंडिगो धीरू भाई अंबानी फिर शिव नाडर जो तीसरे सबसे अमीर आदमी उदय कोटक सबसे अमीर बैंकर उसके बाद दुनिया की सबसे बड़ी बाइक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ब्रिज मोहन मुंजाल और पिछला जमशेद जी टाटा तो आप लोगों ने इतना पसंद किया प लेकिन अब जो आप डिमांड कर रहे हैं ना गौतम भाई अडानी अडानी जी ने मेरे को परेशान किया हुआ है उनके धंदे इतने सारे हैं पोर्ट का भी धंधा है कोल का भी धंधा है पावर का भी धंधा है गैस का भी धंधा है सीमेंट का भी धंधा है एफएमसीजी का धंधा है इसके अलावा 24 और धंधे हैं इतने सारे धंधे उन्होंने कैसे खड़ा किए खुद तो बनाए नहीं इधर से खरीदे उधर से खरीदे एकएक स्ट्रेटेजी बहुत डेप्थ में दूंगा वो मेरा अब तक का सबसे लंबा वीडियो होने वाला है एक्चुअली ये बंदा ही अलग है इनको तो यह था चाय पे बैठे हैं चलो 1 लाख करोड़ का नया धंदा कैसे बनाए 2 लाख करोड़ का नया धंदा कैसे बनाए एक के बाद एक एक के बाद एक कैसे इन्होंने बना है लेकिन आज का वीडियो मैं थोड़ा अलग रखूंगा ये वाले सारे एपिसोड जो मैंने पीछे किए हैं ये सब मैंने स्ट्रेटेजी पे बात की है आज मैं लीडरशिप पे डेडिकेट किया है स्ट्रेटेजी इन डेप्थ की बात तो हमेशा करते हैं आज लीडरशिप इन डेप्थ की बात करेंगे वो भी सीखना आपके लिए बहुत ज इस पूरे देश को लीडरशिप सीखना है आज नौ लीडरशिप के प्रिंसिपल देने वाला हूं ये वीडियो लीडरशिप की इंसाइक्लोपीडिया है बिजनेस स्ट्रेटेजी के साथ-साथ बिजनेस लीडरशिप कैसे आप पकड़ेंगे आईटी सेक्टर की जो बातें करी थी स्ट्रेटेजी मैंने अजीम प्रेम जी में शिव नाडर में कवर कर लिए लेकिन आज केवल लीडरशिप की बात आईटी के एक जाइंट के साथ बात कर रहे हैं तो आज हम किसकी बात कर रहे हैं आज बात करेंगे एक ऐसे आदमी की जिसने भारत के अंदर क्रांति लादी इनटू ग्लोबल सॉफ्टवेयर हब फादर ऑफ इंडियन आईटी सेक्टर वन ऑफ द ग्रेटेस्ट इनोवेट ऑफ हिज टाइम रिसेंटली न्यूज़ फॉर 70 आवर्स जिसमें उन्होंने बोला कि हफ्ते के अंदर 70 घंटा काम करना चाहिए खुद रिटायरमेंट तक 90 घंटा काम करते रहे बात किसकी कर रहे हैं एनआर एन श्री एनआर नारायण मूर्ति की पद्म विभूषण 2008 में इनको मिला 11 लोग थे परिवार में आठ बच्चे लोअर मिडिल क्लास परिवार में और फोसिस इन्होंने 1981 में फाउंड किया था इंडिया की पहली रजिस्टर्ड कंपनी जो अमेरिकन स्टॉक एक्सचेंज में पहुंची इंडिया की पहली कंपनी जिसने अपने एंप्लॉयज को एंप्लॉई स्टॉक ऑप्शन यानी कि शेयर होल्डिंग देना शुरू किया तीसरी सबसे बड़ी प्राइवेट एंप्लॉयर है भारत में 35 लाख एंप्लॉयज 55 देशों के अंदर काम कर रहे हैं एवरी सिंगल पर्सन फ्रॉम अ स्वीपर टू सीईओ वो कहते हैं कि हर आदमी ने वैल्यू ऐड किया है नारायण मूर्ति की इस कंपनी फोसिस के अंदर मैं आज आपको नौ कहानियां बताऊंगा ऐसी अद्भुत कहानियां जो हर बच्चे हर बड़े को पता होनी चाहिए पहली सिंपलीसिटी लाइक अ सेंट राज ऋषि ऐसा राजा जो ऋषि के समान हो कुछ लोगों की आदत होती है जेब भले ही खाली हो लेकिन कपड़े ब्रांडेड पहनेंगे खाने को एप्पल ना हो पर दिखाने को एप्पल चाहिए उन्हें लगता है टेक ऑफ करना है तो शो ऑफ करना पड़ेगा लेकिन साधारण होना सस्ता नहीं है मूर्ति इसके सटीक एग्जांपल है नारायण मूर्ति जो आज भी स्कोडा लरा चलाते हैं एक बेडरूम उन्होंने अपने घर में पूरी केवल लाइब्रेरी बना दी है मैशन अफोर्ड कर सकते हैं पर तीन बेडरूम के मकान में रहते हैं फोसिस में आज भी और कैफेटेरिया का खाना खाते हैं और जब बच्चों की शादी हुई तो बच्चों की शादी में जितना पैसा आया वो सारा अक्षय पात्र इस कन को गरीब बच्चों को खाना खिलाने के लिए दान कर दिया आज भी खाना खाने के बाद अपने बर्तन खुद धोते हैं अपने टॉयलेट को खुद साफ करते हैं जब एक दिन कॉन्फ्रेंस रूम में शॉर्ट सर्किट हो गया तो इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे खुद ही जाकर के शॉर्ट सर्किट फटाफट ठीक कर दिया बोला इससे पहले कि कोई इलेक्ट्रिशियन आएगा खुद ही ठीक कर दूंगा लास्ट पिक्चर इन्होने 1983 में देखी थी कुली कुली मूवी क्योंकि उसमें अमिताभ बच्चन को बेचारे बहुत चोट गई उस चक्कर में जाकर मूवी देख कर के आए अपनी वेडिंग एनिवर्सरी 1994 में अपने बच्चों के लिए बच्चों ने इनके लिए एक सरप्राइज मूवी रखी थी हम आपके हैं कौन बड़ी फेमस पिक्चर थी मूर्ति ने क्या किया अपनी धर्म पत्नी के साथ उनकी एक सहेली को भेज दिया खुद नहीं गए जॉब से रिजाइन करके इन्होंने सॉफ्ट्रॉनिक्स नाम की कंपनी चालू करी थी जो कि फेल हो गई थी बाद में पटनी कंप्यूटर इंफोसिस इन्होने एक के बाद एक जवाइन किया इनके बारे में मोहन दास पाई जो उनके कोफाउंडर है वो कहते हैं कि इफ यू परफॉर्म यू एसिस्ट इफ यू डोंट परफॉर्म यू डोंट एजिस्ट फॉर हिम अगर परफॉर्मर है तो मूर्ति आपको रोज आपसे मिलेंगे रोज बात करेंगे अगर परफॉर्मर नहीं है तो मूर्ति को पता ही नहीं आप एजिस्ट भी करते हैं ऐसे लीडर की कहानी सुना रहा हूं जिसमें पैशन भी था और कंपैशन भी था रिस्पांसिबिलिटी भी थी और ह्यूमिडिटी भी थी इन दोनों का कॉम्बिन हर कहानी एक एंटरप्रेन्योर के लिए कैसी लर्निंग सुनते जाओ सीखते जाओ पावरफुल लर्निंग दूसरी चीज चूज नॉलेज ओवर मनी ये मूर्ति से मैंने बहुत सीखा श्री नारायण मूर्ति लोग अक्सर पैशन के बदले पैसा चुनते हैं सपनों को छोड़ के सैलरी चुनते हैं मूर्ति ने पैसे के ऊपर लर्निंग को चुना क्योंकि वो जानते थे कि एक्सीलेंस होगी तो अर्निंग झक मार के पीछे आएगी 1969 में आईआईटी कानपुर से एमटेक बड़ी मुश्किल से करी तनखा देने का पैसा नहीं था ना मिडिल क्लास परिवार से पिता ने मना कर दिया खुद जुगाड़ करके गए यंग ग्रेजुएट इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में जवाइन किया बाद में ने आईटी समझ में आया तो आईटी में मूव कर गए दो-तीन महीने बाद खत्म हुई इनकी एमटेक तो उनको तीन नौकरियां मिली वहां पे टेल्को में मिली 00 महीना टेस्को में मिली 00 महीना एयर इंडिया में मिली 000 महीना लेकिन इन्होंने तीनों छोड़ दिए इन्होंने आईएम अहमदाबाद में रिसर्च एसोसिएट जवाइन किया 50 महीना हां क्यों जानते हैं उस समय कंप्यूटराइजेशन का जमाना था और ये आईटी से बहुत ज्यादा एक्साइटेड थे बोला 000 महीना छोड़ के 50 महीने की नौकरी जॉइन कर लूंगा क्यों क्योंकि मैं इस समय कंप्यूटराइजेशन सीखना चाहता हूं और ये बोले मैं पूरे के पूरे बैच में केवल मैं ही ऐसा था जो आधी से कम तनखा पे जाकर के मॉडर्न ऑपरेटिंग सिस्टम सीखना चाहता था और उन्होंने बाद में सॉफ्ट्रॉनिक्स नाम की कंपनी चालू करी जो डेढ़ साल में में फेल हो गई सॉफ्टोनिक उनके लिए एक एक एक स्टेपिंग स्टोन बना अब इसके बाद क्या हुआ यह कन्फ्यूज्ड कम्युनिस्ट थे पहले कम्युनिस्ट मतलब क्या हम सब बराबर हैं हम सब बराबर हैं मजदूर यूनियन जिंदाबाद यह बाद में कंपैशनेट कैपिट इस्ट बने यह कब हुआ जब यह कभी-कभी तरक्की का रास्ता जो टॉर्चर से होके गुजरता है इनको यूरोप में बहुत टॉर्चर सहना पड़ा था एक बार लोग धक्का खा कर के ही धमाकेदार बनते हैं इनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ 1974 में मूर्ति एक बार अ जो है लेफ्ट वैल्यू के साथ में उन दिनों ये वेस्ट गए थे यूरोप में गए थे बल्गेरिया में इनका पर्स चोरी हो गया बैग चोरी हो गया अब बैग चोरी हो गया पर्स चोरी हो गया मूर्ति परेशान क्या करें रेलवे स्टेशन पे सोए रात भर बड़ी मुश्किल से किसी से टिकट लेकर के इन्होंने एक फ्रेंच कपल के साथ ट्रेन के अंदर कन्वर्सेशन कर रहे थे फ्रेंच कपल में वो जो लड़की के साथ कन्वर्सेशन कर रहे उसके बॉयफ्रेंड को लगा ये मेरी बीवी को या मेरी गर्लफ्रेंड को छेड़ने की कोशिश कर रहा है उसने पुलिस बुला ली पुलिस ने तीन दिन तक मूर्ति को 8/8 के कमरे के अंदर उस समय 7 डिग्री टेंपरेचर में लगभग बिना कपड़ों रखा ना खाना दिया ना पीने को दिया बहुत बुरा हालत कर दिया और बोला टॉयलेट भी करना है तो इसी कमरे में करना है मूर्ति कहते हैं कि मेरी जिंदगी का सबसे बुरा समय मैंने नर्क देखा था उस समय और तीन दिन के बाद बल्गेरिया की सरकार ने उन्हें बोला कि हम तुम्हें इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि तुम हमारी फ्रेंडली कंट्री इंडिया से आते हो इंडिया उस समय कम्युनिज्म इंडिया में बहुत चल रहा था तो मूर्ति ने सोचा कि अगर फ्रेंड के साथ एक कम्युनिस्ट कंट्री ऐसा बिहेव कर रही है तो सोचो एनिमी के साथ कैसा करेगी उस दिन उन्होंने कम्युनिज्म छोड़ कर केप पिलिज बोलो एंटरप्रेन्योरशिप प काम करूंगा मैं और तब से वो एंटरप्रेन्योर बनने निकले लेकिन बोला ऐसा एंटरप्रेन्योर बनूंगा जिसमें मैं सबका ध्यान रखूंगा फेयरनेस रखूंगा और ये फेयरनेस इन्होंने अपने परिवार में भी रखा चौथी कहानी फटाफट सुनते जाइए बैलेंसिंग वर्क लाइफ पैसा और परिवार साइकिल के दो पहियों की तरह है सिर्फ एक को प्रायोरिटी दो को दूसरा पंचर हो जाता है मूर्ति इस बैलेंस को अच्छे से इसकी वैल्यू को समझते थे बैलेंस के बिना सब बिगड़ जाता है मूर्ति बात समझते थे तो एक दिन ऐसा था कि इनको अपनी कंपनी फोसिस के लिए लोन की जरूरत थी और बैंकर लोन देने के लिए टाइम नहीं दे रहा था बैंकर बिल्कुल टाइम नहीं दे रहा था मूर्ति बहुत दिन से उस बैंकर के पीछे पड़ा हुआ था और जिस दिन टाइम दिया उस दिन इनकी धर्मपत्नी और बेटी दोनों बीमार पड़ गए दोनों को बहुत तेज बुखार हो गया अब मूर्ति परेशान बैंकर से मिलूं तो मैं पीछे बीवी बच्चों को कौन देखेगा और बीवी बच्चों को देखूं तो बैंकर से जो लोन मिलना था जिससे फोसिस को खड़ा करना था वो खड़ा नहीं कर पाऊंगा मूर्ति ने क्या किया अपनी धर्म पत्नी सुदा मूर्ति को दवाई खिलाई उनको बोला तुम सो जाओ बेटी को दवाई खिलाकर गोद में साथ में लेकर के बैंकर के पास चले ग दो घंटा बैंकर के सामने बेटी को लेकर के हिलाते रहे और दवाई खिलाते रहे और बातचीत करते रहे बैंकर इतना इंप्रेस हुआ ना केवल बैंकर ने उनको लोन दिलाया बल्कि और भी इन्वेस्टर्स से मिलाया पांचवी कहानी बहुत अद्भुत है जो मेरे दिल को छू गई सोल्ड बैंगल्स फॉर सैलरी अभी इनकी इंफोसिस चल रही थी 15 नवंबर था 1982 इसको ध्यान से सुनना दिवाली आने वाली थी दो दिन के बाद और यह 12 नवंबर को सबको तनखा दिया करते थे हर बार मतलब 12 नवंबर 12 दिसंबर 12 जनवरी 12 फर 12 तारीख को तनखा दिया करते थे वेंडर की पेमेंट 12 तारीख की रात को आई अब 13 तारीख को धनतेरस अब उस समय बैंक में ऐसा तो है नहीं कि ऑनलाइन ट्रांसफर हुआ करता था 1982 की बात बता रहा हूं उस साथ मेरा जन्म हुआ था 1982 में उस टाइम पर ट्रांसफर इतनी तेज होते नहीं थे 13 तारीख धनतेरस के दिन पूरी दुनिया जब सोना खरीदती है य अपने पत्नी के सोने को गहने को जाकर के गिरवी रखा और 13 तारीख को जाकर के पैसा लेकर के आए और हर एक को चिट्ठी लिखी कि 12 की जगह 13 को आपको तनख्वाह दे रहा हूं उसके लिए मुझे माफ करिएगा अपने गहने गिरवी रख कर के इन्होंने सबको तनख एं दी 13 तारीख को 13 तारीख की सुबह-सुबह दिवाली से पहले सबको तनख मिल गई और साथ में उन्होंने चिट्ठी लिखी उस समय इनके पास केवल 21 एंप्लॉयज थे फोसिस शुरुआत की बात कर रहा हूं मैं 21 एंप्लॉयज थे और वो 21 एंप्लॉई इनको आज तक कभी छोड़ के नहीं गए वो 21 एंप्लॉई आज तक इनके साथ में है या तो वो रिटायर हो गए या उनका देहांत हो गया पर वो फोसिस कभी छोड़ के नहीं गए जब उनको पता चला कि मूर्ति बहुत कम लोग होते हैं जो खुद का त्याग करते हैं ताकि दूसरों की तरक्की ना रुके बिकॉज योर बिहेवियर रिवील्स योर कैरेक्टर आपका बिहेवियर ही डिसाइड करता है कि लोग आपको ट्रीट करेंगे या टॉलरेट करेंगे यह जो मैं आपको कहानी सुनाता हूं ना अ कंपनी इज इट्स स्ट्रांगेस्ट व्हेन इट इट इज इट स्टैंड्स शोल्डर टू शोल्डर विद इट एंप्लॉयज स्टारबक्स के सीईओ बोलते हैं जब कंधे से कंधा मिला कर के अपने एंप्लॉयज के साथ में एंटरप्रेन्योर चलता है तब कंपनी मजबूत होती है सही लीडर की पहचान क्या है उसमें तीन चीजें होनी चाहिए एक होता है क्लेरिटी दूसरी होती है एनर्जी और तीसरा होता है एग्जीक्यूशन आपको पता होना चाहिए क्या करना है बहुत एनर्जी होनी चाहिए वो करने के लिए और पूरी टीम के साथ करवाने की क्षमता होनी चाहिए नारायण मूर्ति में तीनों चीजें थी चैलेंज को एस्केप नहीं फेस किया क्राइसिस में हमेशा कम बैक किया ये था नारायण मूर्ति जब मैं लीडरशिप फनल करता हूं ना मैं इन सारे एग्जीक्यूशन फ्रेमवर्क को सिखाता हूं लीडरशिप फंड मेरा आज तक का सबसे पावरफुल सबसे पॉपुलर सबसे सॉलिड प्रोग्राम है ऐसा प्रोग्राम है जिसकी लोग कस में खाते हैं लीडरशिप फ जबरदस्त सेशन मतलब 10 से 11 घंटे का सेशन है एक मिनट भी ऐसा नहीं लगा कि हम लोग को एजर्स हो रहा है ये जो लीडरशिप फनल प्रोग्राम है सभी को लेना चाहिए इंडिया में एंटरप्रेन्योर्स के लिए ज्यादा हेल्पफुल होगा जो लोग अभी तक इस प्रोग्राम को नहीं अटेंड कर पाए हैं जो लोग सोच रहे हैं वो देरी ना करें आप अपने दिमाग से ढक्कन हटाना चाहते हैं अपने धंधे को बिजनेस बनाना चाहते हैं तो आंख बंद करके बिना सोचे समझे चले आइए लीडरशिप फनल पे यहां आगे पता चला कि हम अपने बिजनेस को स्केल कैसे कर सकते हैं जो लोग ये चाहते हैं अपने बिजनेस को 10 से 10 गुना बनाना चाहते हैं उनके लिए ये लीडरशिप फनल फनल प्रोग्राम है लीडरशिप फनल प्रोग्राम जैसे मैंने सोचा था उससे भी और अच्छा लगा मुझे मैं और मेरी पूरी टीम आज ही मैं कमिटमेंट कर लिया हूं मेरे जो कोर कमेटी जो है जो पांच लोग है वो सबको मैं लॉन्ग टर्म के लिए यहां पे ट्रेनिंग का प्लानिंग कर लिया है अभी आते हैं नारायण मूर्ति पर छठी कहानी एथिक्स कम्स फर्स्ट मैं नारायण मूर्ति से क्यों इतना ज्यादा इंस्पायर्ड हूं फेमस होने का फायदा कौन नहीं उठाना चाहता है बट इंटीग्रिटी इज ऑल अबाउट डूइंग द राइट थिंग व्हेन इवन नो वन इज वाचिंग यू कोई नहीं देख रहा है मूर्ति भी ऐसे ही थे उनके लिए भी पावर से ज्यादा उनकी पॉलिसी मैटर करती थी एक समय की बात थी कि उनको कोलकाता ऑफिस के काम से ट्रेवल करना था अपनी पत्नी के साथ गए और पत्नी के साथ में गए उनको एक बड़ा रूम दिया गया होटल में मूर्ती सोचे पत्नी कोलकाता घूमने आई है इंफोसिस के पैसे पर पत्नी मेरे कमरे में रहे इंफोसिस पैसा दे रही है और पत्नी मेरे साथ मेरे कमरे में रहे उस कमरे का किराया जिसका इंफोसिस दे रहा है उन्होंने मना कर दिया उन्होंने बोला एक और कमरा लो उसके पैसे मैं दूंगा मेरी तनखा से कटेंगे फोसिस से नहीं कटेंगे होटल का मालिक बड़ा घबरा गया क्या बा कर रहे हैं उन्होंने कहा ठीक है दूसरा रूम देते हैं वो कंप्लीमेंट्री कर देते हैं मूर्ति गुस्सा खा गए बोला कोई चक्कर नहीं पैसे दूंगा मैं हा और उसका रिजल्ट क्या हुआ आने वाले समय में जितने भी फेक बिल्स हुआ करते थे ना कंपनी में वो 80 पर इनके को फाउंडर्स ने बताया वो घट गए क्यों क्योंकि वो मूर्ति का एग्जांपल देखते थे यद यदा चरती श्रेष्ठ तत एवतन जैसा जैसा श्रेष्ठ व्यक्ति करेगा वैसा वैसा फॉलोअर करेगा जैसा जैसा लीडर करेगा वैसा वैसा फॉलोवर करेगा इसलिए आज इंफोसिस जायंट है दुनिया में हां आप जानते हैं रतन टाटा की मैंने केस स्टडी बनाई थी उस समय 18 मिलियन व्यूज थे बच्चों ने पेरेंट्स को दिखाया पेरेंट्स ने बच्चों को दिखाया सबको शेयर कराया सिमिलरली नारायण मूर्ति की इंस्पिरेशन स्टोरी मैं चाहता हूं कि हम ये लेसन सबको देखें और दिखाएं ताकि लोगों के अंदर वो संस्कार जागृत हो ये एक अन बायड एंप्लॉयर थे मेरी साथ भी कहानी अन बायड एंप्लॉयर मां-बाप अपने बच्चों के लिए क्या नहीं करते चाहे कुछ भी करना पड़े लेकिन ये ऐसे एंप्लॉयर थे जिन्होंने अपने बच्चे के लिए कुछ नहीं किया अपने बच्चे को बोला अपने दम पर खड़ा होगा तू मूर्ति की पेरेंटिंग फिलोसोफी बहुत अलग थी उनको लिए उनके अपनों से बड़े उनके अपने उसूल थे हावर्ड से उनका बेटा रोहन पढ़ कर के वहां से एमबीए करके आया और मूर्ति ने बोला तू मेरा एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट बन पहले अपने आप को प्रूफ करके दिखा उसके बाद तुझे कोई नौकरी दूंगा फोसिस में और और तब बोले जब तक मेरा एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट रिटायर नहीं होता तब तक तू खाली बैठा रहेगा खाली बिठा के रखा 3 साल जब एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट रिटायर किया तब मूर्ति का बेटा रोहन उनको एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट जवाइन किया और उसके बाद में आगे चलके आगे बढ़ा यू बिकम स्टार नॉट बिकॉज ऑफ योर पोजीशनल पावर कि मेरी पोजीशन है मेरे बाप नारायण मूर्ति है नो नॉट पोजीशन यू बिकम पावरफुल व्हेन यू हैव योर पर्सनल पावर जब इधर पावर होती है ना तब आदमी आगे जाता है हां अमिताभ बच्चन के पास क्या है पर्सनल पावर अभिषेक बच्चन पोजीशनल पावर विद ऑल ड्यू रिस्पेक्ट सचिन तेंदुलकर पर्सनल पावर अर्जुन तेंदुलकर पोजीशनल पावर सुनील गावसकर क्या पर्सनल पावर रोहन गावसकर क्या पोजीशनल पावर यसे मेरी बात सुनो इंदिरा गांधी के पास थी पर्सनल पावर लेकिन आज बाकी कोई जरूरी नहीं है कि उनके पास पर्सनल पावर है कि नहीं है हां मैं किसी पॉलिटिकल बात नहीं कर रहा मैं बात कर रहा हूं अपने अंदर दम बिल्ड करना चाहिए इसको बोलते हैं मेरीटोक्रेसी मूर्ति ऐसे व्यक्ति थे जिनके अंदर ह्यूमन टच बहुत पावरफुल था इंसानियत बहुत ज्यादा थी एक बार एक दफा वो बिजनेस क्लास एयर इंडिया में ट्रेवल कर रहे थे और एयर इंडिया में ट्रेवल करते वक्त उनके जस्ट पीछे इकॉनमी में एक प्रेगनेंट वमन बैठी हुई थी अब क्या है जब वमन प्रेग्नेंट होती है तो उसके ना यूटरस प प्रेशर होता है जिसके कारण उसको बार-बार वॉशरूम जाना होता है अब वो बिजनेस क्लास में क्योंकि बिल्कुल नजदीक है टॉयलेट वहां जाने की कोशिश करे तो एयर होसेस रोक दे बोला पूरा पीछे तक जाओ इकॉनमी की टॉयलेट में लास्ट तक जाओ और और वहां जाक के वहां वॉशरूम करके आओ क्योंकि बिजनेस क्लास में तो हम आपको एंटर करने नहीं देंगे जब मूर्ति ने देखा कि उस औरत को इतनी तकलीफ हो रही है तो वहां किसी और ने कुछ नहीं ऑफर किया मूर्ति खड़े होकर के अपनी सीट ऑफर की और खुद इकॉनमी में चले गए और मैडम को जाकर के बिजनेस क्लास ने बैठा दिया अब मैडम बिजनेस क्लास में भोजन भी कर रही हैं और वॉशरूम भी जा रही है जब मूर्ति को एयर होस्टेस ने देखा इतनी इंप्रेस हुई तो उसने बिजनेस क्लास का भोजन लाकर मूर्ति को दिया मूर्ति ने मना कर दिया नारायण मूर्ति बोले नहीं बिल्कुल गलत है ये क्योंकि अगर मैं इकॉनमी में बैठ के बिजनेस ना खाऊंगा तो आजूबाजू के लोग बुरा मान सकते हैं तो उन्होंने इकॉनमी का भोजन किया अब ये सारी बात जाकर के एयर होस्ट ने पायलट को बताई पायलट ने अनाउंसमेंट कर दी पूरे की पूरी फ्लाइट ने खड़े होकर तालियां बजाई पायलट ने आक के पूछा मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं बोला बस एक काम कर देना इसके बदले में बोला क्या मुझे सबसे पहले निकलने दे रहा बोला टाइम के बहुत पंक्चुअल है टाइम बचाना चाहते हैं बोले नहीं नहीं टाइम की बात नहीं है पहले इसलिए निकलने देना क्योंकि मेरे को बड़े शर्मिंदगी महसूस होगी अगर किसी ने रोक करके मुझे इसके लिए धन्यवाद किया तो हां मेरे लिए एंबेरेसमेंट हो जाएगी ऐसे थे मूर्ति ऐसे ऐसे मूर्ति जिनके अंदर इतना ह्यूमन टच था अमीर होना बड़ी बात नहीं है आदमी अपने बैंक बैलेंस से नहीं अपने बिहेवियर से बड़ा बनता है बड़े होने में और बड़पन में कंपैशन का फर्क है हां तो दो तरह के लोग होते हैं कुछ अपनी बातों और अपने काम से दिल में उतर जाते हैं और कुछ दिल से उतर जाते हैं पूरी तरीके से उतर जाते हैं मूर्ति जैसे लीडर्स ने जनरेशन को और आने वाली कई जनरेशन को इंस्पायर किया है आज मूर्ति की ही टीम से निकले हुए कई लीडर है जिन्होंने भारत को बदला है हां ऐसे लीडर्स जो और वही सार लीडरशिप के वो सारे फ्रेमवर्क्स मैं लाइफ लेसंस जो कि एमबीएस से कम नहीं है मैं एग्जीक्यूशन बल फ्रेमवर्क्स को सिखाने की हमेशा कोशिश करता रहा हूं यही मेरा मुद्दा रहा है और यही मेरा मुद्दा रहेगा अगला लीडरशिप फनल वैसे इस समय हो रहा है 89 10 नवंबर को होता है बीच-बीच में इस बार 89 10 नवंबर को हो रहा है तो आपको तो क्या करना है कॉल नाउ कॉल नाउ कॉल नाउ कॉल नाउ कॉल नाउ कॉल नाउ वीडियो भी देख लो उसके बाद कॉल कर लो वीडियो रोक के पॉज करके चाहे अभी कॉल कर लो पता लगा लो लेकिन अभी आता हूं मैं मूर्ति के आपको अगली बात मॉडेस्ट मास्टर एक बार क्या हुआ मडिस्ट मास्टर क्यों बोलूंगा मैं इनको एक बार य जब फ्लाइट में ट्रेवल कर रहे थे तो ट्रू कॉलर ट्रू कॉलर आप सब यूज करते अपने मोबाइल में ट्रू कॉलर का सीईओ उनके साथ में बैठा हुआ था वो मूर्ति को देख के पहचान नहीं पाया 2015 की बात थी अब मूर्ति इतने सिंपल से व्यक्ति है ऐसा बिल्कुल एकदम सिंपल सी पैंट कमीज पहनते हैं उनकी पत्नी ने भी 17 साल से कोई साड़ी नहीं खरीदी है तो उन्होंने पूछा आप क्या करते हैं मूर्ति बोले मैं समाज सेवक हूं फिलांथस हूं तो उन्होंने मूर्ति को देखा अच्छा फिथ फि समाज सेवक बहुत समाज सेवक घूम रहे हैं आजकल देश दुनिया में ट्रू कॉलर का सीईओ उन्होंने देखा मूर्ति के हाथ में वो जो लैपटॉप बैग नहीं होता पिट्ठू बैग उसपे इंफोसिस लिखा हुआ तो ये इसका नाम था सीईओ का आलम मामे आलम मामे बोले अरे आपके पास फोसिस का बैग है बोले हां जी बोले आलम बेडी बोले अरे मैं तो जिंदगी भर सपना था मेरा फोसिस में नौकरी करने का आज मैं ट्रू कॉलर का सीईओ हूं पर मैं फोसिस में नौकरी करना चाहता था बोले क्यों नौकरी करना चाहते थे फोसिस में बोला एक दिन मेरे घर में कंप्यूटर खराब हो था मैंने फोसिस के एक आदमी को बुलाया और उसने इतना प्रेम से इतना बढ़िया से मेरे यहां आकर के पूरा कंप्यूटर पूरी मशीन सब कुछ फिक्स कर दिया बोला इतना इंप्रेस हुआ मैं सोचा जिस कंपनी का इतना छोटा एंप्लॉई इतना पावरफुल है और इतना सिंसियर है वो कंपनी कैसी होगी तो मेरी इच्छा थी वहां काम करने की तो आपके पास यह फोसिस का पिठू बैग है आप पिट्ठू बैग लेक फोस का घूम रहे हो पिठू बैग समझते पीछे ब बैक पैक तो आप क्या करते हो तो उन्होंने बताया मैं फोसिस का फाउंडर हूं ओ इतना घबरा गया आलम में मेरी बोला और क्या बोले उन्होंने अखबारों में आर्टिकल आ गए नेवर मेट समवन लाइक हिम ऐसा इंसान मैंने कभी देखा ही नहीं है मैंने ना एक कैंपेन रन किया था भाई लोगों जहां मैंने आप सबसे अपील की थी एक बार रतन टाटा जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए आज वही इमोशन को मैं दोबारा फील कर रहा हूं श्री नारायण मूर्ति के बारे में छोटा वीडियो क्विक लर्निंग पावरफुल लर्निंग्स लेकिन मैं चाहता हूं नारायण मूर्ति हम सब के लिए क्योंकि एक बहुत बड़ी इंस्पिरेशन है और ऐसी इंस्पिरेशन और पैदा हो इसीलिए अगर भारत रत्न मिले ना तो केवल पॉलिटिकल सोशल लीडर्स को ना मिले एंटरप्रेन्योर्स को भी मिले मैं एक कैंपेन रन करना चाहता हूं आपके साथ # भारत रत्न फॉर नारायण मूर्ति अगर आप मेरा साथ देना चाहे तो twitter4j नहीं होना चाहिए एजेंडा ऐसे लोगों का होना चाहिए जिन्होंने एक्चुअली भारत को खड़ा किया है और ऐसी कुछ इंस्पायरिंग स्टोरीज के साथ आता रहूंगा आपको लगातार कुछ ना कुछ सिखाता रहूंगा आपको आज का वीडियो मेरा कैसा लगा कमेंट बॉक्स में बताइए कौन सी कहानी आपको सबसे अच्छी लगी और किसका वीडियो नेक्स्ट देखना चाहते हैं इस वीडियो को सब तक पहुंचाने के लिए खास तौर से हर बच्चे को दिखाने के लिए आप सबका हृदय की गहराई से प्रेम पूर्वक बहुत-बहुत [संगीत] धन्यवाद हम [संगीत]

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