Ep 26 Won 60 Medals In Wrestling Divya Kakran Commonwealth Bada Bharat Dr Vivek Bindra
[संगीत] हार से घबराना कैसा हार तो जीत की तैयारी है जो इस हार यानी कि हार जाने वाली हार जो इस हार के हार को गले में पहन लेने वाला हार जो इस हार के हार को जीत का मेडल डाल दे वही असली खिलाड़ी है हार से घबराना कैसा यह तो जीत की बड़ी तैयारी है आज एक ऐसी दिव्या देवी से आपको मिलवा जाएंगे जो एक बहुत बड़ी जीत लेकर के हमारे देश में वापस लौटी नमस्कार विवेक बिंदरा बोल रहा हूं फाउंडर एंड सीईओ bab.com आपका बड़ा भारत शो में बहुत-बहुत स्वागत है इंडियाज ग्लोबल ब्रांड एंबेसडर ऐसे लोग जो भारत को बड़ा भारत बनाते हैं उन्हीं की कहानियां हम आप तक पहुंचाते हैं तो आज की जो हमारी मेहमान इन्होंने देश का बढ़ाया है मान आज की हमारी मेहमान इन्होंने देश का बड़ा है मान सिर्फ अखाड़े में नहीं सोच के खिलाफ भी लड़ी है यह पहलवान हमारे सामने आज है दिव्या काकरान आपका बहुत-बहुत स्वागत है थैंक यू सर अच्छा लगा आपको बड़ा भारत में आज देख के कॉमनवेल्थ गेम में आपने 20188 2022 में दोनों दफा मेडल जीता आपने एशियन गेम्स में भी मेडल जीता दो अपने गोल्ड जीते हैं एशियन चैंपियनशिप में भी और अर्जुन अवॉर्डी है आप इस समय बड़ा भारत में तो आपका बहुत स्वागत है वो कहते हैं कि पड़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया हां तो पड़ेगी बेटी तभी बढ़ेगी बेटी ये सब तो हमने सुना है लेकिन लड़कों से लड़ेगी बेटी तभी नए नई सब सफलताओं की सीढ़ी चढ़ेगी बेटी तो मैंने आपका एक इंटरव्यू देखा जिसमें आपने कहा कि लड़कियों को हराने में तो अच्छा लगता है लेकिन लड़कों को हराने में ज्यादा अच्छा लगता है तो खुले अखाड़ों में लड़कों की कुश्ती तो आम बात है लेकिन लड़कियों के लिए इनके दरवाजे थोड़े बंद रहते हैं बड़ा मुश्किल होता है तो लड़कों के सामने ताल ठोक करर दंगल में खड़े होने का फैसला आपने पहली बार कब कैसे और क्यों लिया सर 20091 के बीच की बात है ये तो तब मेरी जो पहली कुश्ती हुई थी वो लड़की से हुई थी तो सिर्फ मेरे पर मात्र ₹ आए थे तो ₹ में तो कुछ भी नहीं होता है तो चलो मैंने वोह भी बहुत क्योंकि मेरी पहली कमाई थी तो मैंने चचका थ लड़की के साथ कुस्ती हुई थी तो जो मेरे पे ₹ आए थे मैं आपको बताऊंगी मैंने ₹ का किया था क्या 10 में बजरंग बली को बहुत मानती हूं ₹ का बजरंग बली को प्रसाद चढ़ाया था र छोटे भाई को दिए थे पा बड़े भाई को और र मम्मी को जाके दिए थे खत्म ₹ कुछ दिन बाद फिर मैं एक दंगल में गई रामपुर वो दंगल था 2009 की बात में बहुत छोटी थी मेरी वीडियो भी है तो मैं हम दंगल में गए हम कम से हम एक डेढ़ घंटा दो घंटे जाने के लगे और वहां पर कुश्ती ना होके देख क्य कि लड़की नहीं आई थी और जिन्हें बोला था कि उन गुरुजी की लड़की आएगी वो लड़की नहीं आई तो मैं और मेरे पापा तो बहुत परेशान हो गए पापा ने बोल दिया कि भाई लड़ियो की कुश्ती करवाओ तो वो बोले कि नहीं होगी तो फिर पापा बोले कि दिव्या लड़कों से लड़ लोगे मैंने कहा हां जी पापा जी मुझे क्या दिक्कत है मैं तो लड़ लूंगी फिर पापा जी ने दंगल में ये भी बुलवा दिया कि दिव्या लड़कों से भी लड़ सकती है तो दंगल में हा का मच गया तो वहां पे एक मतलब ताऊ से ऐसे ही अंकल टाइप घूम रहे थे तो उन्होंने कहा कि मैं इस लड़की को 00 दूंगा अगर इसने मेरे लड़के को हरा दिया तो तो मुझे तो ये हो गया 00 ऐसे 5 लाख के बराबर 20091 की बात है ये तो फिर मैंने पापा ने कहा लड़ेगी मैंने कहा हां जी पापा ने कहा बेज्जती ना हो जाए मैंने पाबा जीी टेंशन मत लो आप और जो हमारी कुश्ती स्टार्ट हुई वो बेचारा लड़ा तो बहुत कॉन्फिडेंस से था पर लेकिन उससे ज्यादा जुनून मेरे अंदर था तो उस टाइम पे जब हमारी कुश्ती स्टार्ट हुई तो अच्छे से होती रही होती रही फिर जो वो नीचे आया तो मैंने ईरानी दाव है जो हम टांग प टांग चढ़ा के डालते हैं तो मैंने उसको रानी डाली और चित कर लिया 00 की कुस्ती थी और पब्लिक ने मुझे 0 ₹ रप एक रप भी मिलाया मुझे और तब जाके 000 हुए थे तो वो 000 मेरे लिए तो वो 3000 मेरे लिए पता नहीं कितने थे मैं तो हम तो ग गिन रहे थे ऐसे ऐसे करके इतने सारे व आज लड़का खुश होता व ये कॉमनवेल्थ जीत के आई इसने हराया मुझे ऐसे किसी से नहीं हरा मैं कहते हैं कि हौसला जिद और कुछ कर दिखाने का जुनून यह वो तीन मूल मंत्र है जिसने आपको मड से मैट तक पहुंचाया हां लेकिन जब आपने लड़कों से लड़ना शुरू किया तो बहुत समस्याएं आई होंगी चेंजिंग रूम नहीं है लड़कियों के लिए कॉस्ट्यूम वो लंगोट पहन के और आप उनके साथ लड़ रहे हैं और बहुत बारी उसके बाद ना लोग कहीं भद्दी भद्दी बातें भी करते हैं तो क्योंकि लड़ाई आपकी केवल लड़कों से नहीं थी आपकी लड़ाई तो एक तरह से समाज के साथ थी जो लड़कियों को कमजोर मान रहा है और इतनी कम उम्र में इतना बड़ा काम करते वक्त आपको डर नहीं लगा समाज के जिन लोग लोगों ने बनाए समाज के रूल उनको चटाई आपने जबरदस्त धूल तो कैसा महसूस किया आपने इस समय क्या तकलीफें आई सर जब उस टाइम प पहले तो कुश्ती नहीं कराते थे इतना डिफिकल्ट होता था ना कि नहीं कराएंगे लड़की और लड़की की कुश्ती कैसे हो सकती है तुम खुद सोच के दिखाओ मेरे पापा को बोलते थे कि थोड़े पागल हो क्या आप कि अपनी लड़की कुस्ती लड़की से करा रहे हो खुद तो सोचो हम दंगल ही नहीं होने देंगे पहले तो यही बोलते थे फिर मेरे पापा ने कहा हम इतनी दूर से आए हैं तो आप और जब लड़की करने को त तुम्हें क्या दिक्कत है चेंजिंग रूम नहीं होते थे बिल्कुल सही कहा आपने तो जब हम आसपास के दंगल होते थे दो-तीन घंटे का रास्ता होता था तो मुझे घर से अपना कॉस्ट्यूम पहन के जाना पड़ता था और कितनी बार ऐसे होता था कि वॉशरूम भी जाना है पर लेकिन वहां पे इतनी सुविधा नहीं होती थी तो पांच-पांच छछ घंटे कॉस्ट्यूम पहन के रखना और फिर जब लड़कों के साथ कुश्ती होती थी तो कितने लड़के अदारी मत पदारी करते थे मतलब मतलब मुझे डिस्टर्ब करते थे कभी टीशर्ट खींच दी कभी शॉर्ट्स खींच दिया कि जिससे मैं डिस्टर्ब हों पर उस टाइम पे तो थोड़ा डिस्टर्ब होती थी पर लेकिन मेरा पूरा फोकस मेरी कुश्ती पे होता था उसका फोकस होता था मुझे डिस्टर्ब करने पे और मेरा फोकस होता था उसको हराने में तो जब मैं उनको उसको हराती थी तो तब पब्लिक को बहुत मजा आता था क्योंकि एक लड़की और लड़की हराए कोई दिक्कत नहीं है सेम पावर होती है लड़की और लड़कियों में और एक ही हम मतलब ठीक है लड़ रहे कोई दिक्कत नहीं पर एक लड़की और लड़का जब लड़ते थे तो बत इत इतना डिफरेंस होता था कम से कम कि लड़का यहां है और लड़की यहां और मैं तो थी भी उस टाइम पे छोटी तो तब मैं हराती थी तो उस टाइम पे मतलब काफी पब्लिक उस टाइम पे खुश भी होती थी और कितनी बार मुझे इतना लड़ना पड़ा है ना कि मैं चित कर देती थी तब भी वो चित नहीं देते थे और मैं बोलती थी कि जब मैंने इसको चित कर लिया तो आप चित क्यों नहीं दे रहे हो बिहार की बात है जब मैं बिहार में दंगल लड़ने गई थी एक बार तो मैंने कहा जब मैंने इस लड़के को चित कर लि तो आप चित करने क्यों नहीं दे रहे हो बोले ये हमारे यहां का दंगल और ये लड़का भी हमारे यहां का हम कैसे च दे दे वो ये बोलने लगे क्योंकि उनको इतनी शर्म आती थी इस चीज में तो पहले तो मैं इस कारण लड़ती थी फिर मैंने क्यों मुझे पहले तो लड़कियों के साथ तो मजा मतलब अच्छा लगता था पर लड़कों के साथ ज्यादा अच्छा क्यों लगता था उनकी सोच के कारण क्योंकि उनको लगता था कि लड़कियों में कम पावर होती है तो और लड़कों में ज्यादा पावर होती है पर लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है लड़कियों में ज्यादा पावर होती है तभी मैं उनको मारती थी क्या बात है हां ये झांसी की रानी है हां इतिहास सुनाता है हमें झांसी वाली रानी की कहानी पर जब आन मान प आ जाए तो मर्द से कम नहीं मर्दानी तो आपने साबित कर दिया कि लड़कियों को अगर मौका दिया जाए तो वो लड़कों से कम नहीं लेकिन शुरुआत में संघर्ष रहा मैंने सुना आपके पिताजी काफी कठोर जीवन जिया उन्होंने लंगोट बेचने का भी काम किया मैंने सुना कि पैसे की दिक्कत थी बैलेंस डाइट नहीं मिल पाना आपको घी चाहिए आपको ड्राई फ्रूट चाहिए नट्स चाहिए आपको आपको प्रोटीन चाहिए लोगों ने आपका मजाक भी उड़ाया होगा पर आपने चुनौतियों में भी आपने आपदा में अवसर ढूंढा है हर बार और आज आप मेडल लेकर के आई हैं इस समय मेडल लेकर के लौटी हैं तो बहुत अच्छा लगा तो मैं आपसे अगला प्रश्न पूछना चाहता हूं कि जिस उम्र में सब ढूंढते हैं बेटी के लिए ससुराल उस समय आपकी आपके पिता बने आपकी सबसे बड़ी ढाल हां तो मैं बार-बार आपके पिताजी का नानाम सुन रहा हूं पापा कहते थे लग जा निकल जा आगे बढ़ जा तो आसान नहीं होता बेटी के लिए पूरे समाज से लड़ना महावीर फोगाट ने जैसे अपनी गीता फोगाट और भविता फोगाट के लिए लिया लेकिन वो थोड़े हानिकारक बापू थे जी तो आपके पिता भी क्या हानिकारक बापू थे वो अपोजिट थे थोड़ा मैं आपको बताऊं कि पहले हम बात करते हैं कि मेरी स्टार्टिंग कहां से हुई पापा ने मुझे कैसे कराई समाज से पापा बाद में लड़े पहले पापा को घर में लड़ना पड़ा मेरी मां से मेरी मां मना करती थी मेरी मम्मी बोलती थी कि क्योंकि मेरा भाई पहलवानी करता था तो इतनी डाइट नहीं हो पाती थी क्योंकि एक जो जांग लंगोट बनाते हैं तो हमारा उस टाइम प लंगोट ₹1 का ₹10 का बिकता था और जो जांग होती थी वो 30 से 0 की इतनी बिकती थी और वो भी दिन में बहुत कम तो मम्मी ने बोली कि देव पहलवानी करेगा तो फिर मेरे पापा बोले कि नहीं दिव्या में वो टैलेंट है मैंने उसको देखा है ये अखाड़े में जाती है सिर्फ दाल रोटी खाती है और उसके बाद भी इतनी मेहनत कर रही है तो मैं अखाड़े में गई सिर्फ मैंने मात्र छह या सात दिन करी होगी और पापा ने हमको मट्टी में मतलब छोड़ दी कि तुम दोनों जोर करके दिखाओ मेरा दिमाग पता नहीं ऑटोमेटिक इतना चलता था मैंने उसको हरा दिया अखाड़े में एकदम यह हो गया कि दिव्या तो भी आना स्टार्ट हुआ है और मेरा भाई डेढ़ दो साल से जाता था तो पापा ने कहा कि दिव्या को पहलवान बनाना है दिव्या में वो काबिलियत है तो पहले तो मेरी मां से ही लड़े क्योंकि मां का मोह जो होता है वो ज्यादा बेटों में होता है तो मेरे पापा तो फिर उस टाइम प मेरे भाई ने भी बहुत समझदारी दिखाई भई ने कहा कि मेरे मम्मी को समझाए कोई बात नहीं हम दिव्या को पहलवानी कराएंगे और दिव्या भी हमारा भाई है आप ये मत सोचो कि भाई कर रहा है बहन कर रही है फिर जो मेरी दादी है उन्होंने कहा पराया धन है इसके ऊपर तू इतना पैसा लगा रहा है और अभी तो तुझे गांव में भी सबसे लड़ना पड़ेगा गांव में नहीं पता था कि तू इसको पहलवानी कराएगा हमारे गांव में तो आज तक क्योंकि उस टाइम पे पांचवीं तक का स्कूल था कि अब तक स्कूल की इतनी सुविधा नहीं हुई है तू अभी से इसको मट्टी के खड़े में कहां उतार रहा है जहां लड़कों से कुश्ती करनी पड़ती है तो घर में ही बहुत इस चीज का ऑब्जेक्शन हुआ मेरे दादा ने कुछ कुछ बोला मेरी दादी बोली कल को शादी भी नहीं होएगी इसके तो कान टूट जाएंगे लग जाएगी तो इतना सब कुछ मेरे मम्मी पापा को कहा तो फिर पापा ने कहा नहीं अब मैं पहलवानी कराऊंगा तो जब स्टार्टिंग हुई तो पापा ने मुझे बोला कि बाहर की चीज नहीं खानी है उसके ऊपर बोला यह खट्टा मीठा जो तू खाती है यह सब नहीं खाना है तो मैंने कहा बिल्कुल भी नहीं खाना बोले खाना है मैं खिलाऊंगा खुद लाके तो पापा उससे एकदम अपोजिट थे बल्कि कुछ भी अगर कभी प्रैक्टिस करने का मन भी नहीं करता था ना तो मैं पापा को बताती थी कि पापा आज मेरा मन नहीं है और पापा उससे डबल कराते थे पर अपने अंदाज में मुझे कभी पापा से डर नहीं लगा और जब कभी बाहर का खाने का मन करता तो मैं पापा को बोलती थी कि पापा मन कर रहा है पापा ने कहा तेरा टाइम रख रखा है ना 10 दिन का 15 दिन का मतलब उस टाइम पे तो बोलते थे कि दिव्या को आज बाहर का खिलाएंगे ये कर कर के इतनी मेहनत कराते थे फिर मेरा मन ही नहीं करता था बाहर जाने का फिर महीने दो महीने में जब उनको लगता था कि अब तो ज्यादा ही मैंने बच्चे को खींच दिया जब जाके खुद साइकिल पे मैं आगे मेरे दोनों भाई पीछे और पापा साइकिल चला के जाते थे और गोलगप्पे और टक्की जो जो खाना सिर्फ दोदो दो ये खाएगा दो देख तुझे तो पता ही है पैसे कम है मैंने कहा मुझे पता ही है ₹ का ही आएगा जब भी आपको नहीं खिलाना तो बिल्कुल अपोजिट थे तो प्रैक्टिस भी कराते थे और एक दोस्त की तरह जो वो रहे जो सबसे बड़ी जो चीज है आज मैं यहां पर क्यों हूं सबसे बड़ा कारण यह है कि लड़कियां ना एक टाइम प आके भटक जाती है उनको वो राह नहीं मिलती कोई दोस्त ऐसा नहीं मिलता पर मेरे पिताजी ऐसे थे कि दोस्त थे मेरे उनको मैं खुलकर सब कुछ बात बताती थी कुछ गलत किया सही किया या आगे क्या करूं तो मेरे फदर ने मुझे आज यहां तक पहुंचाया है कुछ गलती हुई है तो वो सब सब चीज का समाधान उनके पास होता था फैंटास्टिक गा लवली राउंड ऑफ अपलॉज फॉर हर फादर कॉमनवेल्थ में भारत ने अच्छा परफॉर्म किया ि ओलंपिक्स में भारत का प्रदर्शन खास नहीं रहा केवल सात ही मेडल रहे तो आपको क्या लगता है कि कमी कहां नजर आती है कहां भारत पीछे रह गया आपका अगला बड़ा टारगेट क्या है क्या अचीव करना चाहते हैं इंटरनेशनल मैचेस में क्या कभी रेसलिंग में आपके साथ चीटिंग हुई है आज मैं डिस्ट्रक्शन की बात करना चाहता हूं अब इतने मेडल जीतते जा रहे हैं आप एक के बाद एक दुनिया के नंबर दो रेसलर जो हमारे अपने बजरंग पुनिया जी हैं वो डिस्ट्रक्शन से बचने के लिए उन्होने 2008 से 2017 तक मोबाइल इस्तेमाल नहीं किया जितना मैं जानता हूं कि उन्होने मोबाइल को हाथ तक नहीं लगाया बहुत मुश्किल है आज के जमाने में सोशल मीडिया से दूर रहना तो आप अपनी लाइफ में ऐसा क्या करती है एडिशन या सबक्स जिससे आपके फोकस को कोई नहीं हिला सकता और कभी नहीं होता डिस्ट्रक्शन पहली बात तो कि जब से मैं पैदा हुई हूं और जब मेरा रिश्ता हुआ कुछ महीने रिता हो बधाई हो बई हो थैंक य तो वो भी पहलवान है वो बॉडी बिल्डर है बडी बिल्डर हा जी पहलवान पहलवान भिर जाएंगे दोनों मत बुद्धि फिर तो पता नहीं क्या होगा तो बॉडीबिल्डर है तो उनको भी काफी दिक्कत आ रही है वैसे एक पहलवान के साथ तो जब मेरा जनवरी में रिश्ता हुआ तो मुझे फोन ही तभी मिला तो मेरा वैसे मैंने कहा मैंने तो डाली नहीं है तो सबको पता था वैसे कि मुझे मैं 22 साल की हो गई थी तब से मुझे फोन नहीं दिया गया था तो सबसे पहले तो यही था और कितनी चीजें मेरे छोटे बाल मेरे बहुत ही छोटे बाल रहते थे बल्कि मैं कहती गुदीदो छोड़ दो बोलते थे नहीं तो जब मैं कभी मेरे बाल कटते थे तो मैं बस अपनी आंख बंद कर ही थी मुझे रोना मैं थोड़े-थोड़े से तो थोड़े-थोड़े से दिखे मैं नीना को बोलती थी तू भी तो दोस्त है मेरी तू भी तो लड़की है तू भी तो बाल बढ़ा रही है कह रही मैं पहलवान नहीं हूं आप पहलवान हो और अभी कोई भी चीज आपके सामने नहीं आनी चाहिए बना रखा फोकस के लिए तो बाहर की चीज खाना तो यही था कि अब तो खुद में एक पैशन बन जाता है कि वो तो हमें पता ही चल जाता बड़े होने के बाद कि हमें क्या खाना है क्या नहीं खाना तो बाल छोटे करना और फोन नहीं था और कितने तरह के मतलब मैं आज तक रिश्ते से पहले रिश्ते के बाद में एक बार गई हूं मैं कभी अपनी 23 साल की उम्र में हॉल में नहीं गई मैंने हॉल देखा भी नहीं है हॉल मतलब सिनेमा हॉल सिनेमा हॉल हां जी और ये क्या होते हैं वो उस परे जाते नहीं है वो कॉफी कफी पीते हैं कैफे वो जो वैसे होते हैं जिनमें लाइट वाइट जलती है कौन से होते हैं वो डिस्को विस्को हां जी हां जी उसमें कभी नहीं गई हूं तो इन चीजों से मुझे काफी दूर रख रखा था मुझे एक आईपॉड दिला रखा था मेरे भाई ने और मेरी दोस्त ने कि मैंने कहा मैं गाने भी ना सुनू ऐसा जिंदगी खराब कर दी तुमने मेरी पहलवान क्या बना दिया तुमने मुझे तो इन्होंने मुझे फिर वो आईपैड दिलाया था उसमें मैं सॉन्ग सुनती थी तो उसमें ही मुझे हां चलो ये तो कम से कम तो यह चीज बहुत जरूरी होती है आप पहलवान आपके फिंस बॉडीबिल्डर पूरे मोहल्ले को डरा के रखेंगे आप बहुत अच्छा एक्साइटिंग एक्साइटिंग कॉमनवेल्थ में एक प्रश्न करना चाहता हूं थोड़ा अलग प्रश्न है कॉमनवेल्थ में भारत ने अच्छा परफॉर्म किया मैंने देखा कि मतलब 114 मेडल रहे जिसमें लगभग 50 के आसपास गोल्ड मेडल भी रहे ि ओलंपिक्स में भारत का प्रदर्शन खास नहीं रहा केवल सात ही मेडल रहे और गोल्ड नहीं रहा जिस एरिया में आप खास तौर से जिस स्पोर्ट्स में आप है क्योंकि बड़े जो प्लेयर्स है इस समय रशिया के हैं ईरान के जापान के उनके आगे हम हार जाते हैं अच्छा नहीं कर पाते तो आपको क्या लगता है कि कमी कहां नजर आती है कहां भारत पीछे रह गया देखिए ये कमी पहले थी पर लेकिन अब जब से हमारे कुश्ती संध के ब्रिज भूषन चरण सिंह सर जी तब से वो आए हैं तब से हमारी कुश्ती पहले यहां थी मतलब ये धरती हो गई यहां थी पर अब हमारी कुश्ती यहां है अब बाहर के रेसलर ये सोचते हैं कि ये ऐसा क्या कर रहे हैं अभी कडिट में सब जूनियर में जूनियर में हमारे लड़कियों के भी लड़कों के भी बे आठ गोल्ड मेडल आए हैं नरेंद्र मोदी जी ने भी हमारे सर को ट्वीट करके बधाई दिए कि आप बहुत अच्छा परफॉर्मेंस कर रहे हो उन्होंने मतलब जब वो वो ऐसे है कि वो हमसे मीटिंग करते हैं सीनियर पहलवानों से कि आपके साथ जो जो दिक्कतें आई थी वो आप हमें बताओ जो बच्चों के साथ ना आए तो हम भी उन्हें बताते और वो भी अंडर 11 अंडर 12 15 उन सब बच्चों को बाहर विदेश में भेजते थे और बल्कि जब हमारे टाइम में सिर्फ अंडर 20 होता था जब हम 16 साल के भी जीतते थे तब भी हमें हार का सामना करना पड़ता था क्योंकि अपनी एज से ज्यादा ही करते थे तो वो अब सिस्टम में मुझे लग रहा है कि सुधार है और जो सात मेडल आए हैं 2024 में इसका डबल ही रिजल्ट होगा और गोल्ड भी कहीं दूर नहीं है जैसे हमारी जी को मैं जानता हूं मेरी अच्छी मित्रता है 2018 में उनके जन्मदिन 8 जनवरी को उन्होंने मुझे अपने गांव बुलाया था वहां हजारों हजारों बच्चे थे उनको सेमिनार देने के लिए तो काफी कुश्ती के पहलवानों को बहुत मदद करते हैं बहुत उत्साह बढ़ाते हैं जी ये तो ब्रिज भूषण जी ने आपका उत्साह बढ़ाया आपको लाइफ में कोच भी चाहिए रहता है मेरे ख्याल से खिलाड़ी के जीवन में सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट अगर कोई होता है तो उसका कोच होता है जो उसको हाथ पकड़ के आगे लेकर चलता है शुरू में आपके भाई देव जो जिनको आपने हराया भी लेकिन उन्होंने आपको ट्रेन भी किया आपकी मदद भी करी बाद में आपको एक फॉरेन कोच मैंने सुना रशियन व्लादिमीर वो आपको मिले थे और बाद में फिर विक्रम कुमार सोनकर और प्रेमनाथ जी ने आपका काफी सपोर्ट किया तो कोच केवल टेक्निक नहीं सिखाता मोटिवेट भी करता तो आपको क्या लगता है कि कोच का क्या रोल है जीवन के अंदर कोच हमारे मैट प भी होते हैं और जो उस टाइम प हम मैट प ट्रेनिंग कर रहे हैं पर लेकिन हम फ्री टाइम में भी हमें मोटिवेट होना है तो वह कैसे तो जैसे कि मैं यह बात नहीं बना रही हूं पर मैं हकीकत बोल रही हूं कि जब मैं अभी 2022 की बात है कॉमलल गेम्स में जा रहे थे हम 1 अभी अगस्त को 1 तारीख को जा रहे थे तब मैंने आप की वीडियो देखी थी और मेरे पास एक पर्चा भी है वह मैं जब दिखाऊंगी जब जो मैंने उस परे लिखा है वह पूरा हो जाएगा तो आपकी एक वीडियो है आपने भाग मिल का सर पे वीडियो बना रखी है कि वह डिस्ट्रेक होने के लिए या फिर जो जो उन्हें करना है उन चीजों के लिए उन्होंने वो चीज लिखी थी वाहेगुरु के पास छोड़ी थी और तो इन चीजों पर भी मैंने फोकस किया ये भी मेरे सर ने ही बताई थी तो जब देव मुझे कराता था तो उसको सिर्फ टेक्निक का अनुभव था जब मेरे पापा कराते थे उन्हें दुनियादारी का अनुभव था क्योंकि इनसे भी लड़ना पड़ता है मैट के अंदर मिट्टी के अंदर और जब मेरे कोच विक्रम कुमार या लाद मर कोच आए तो ये हमें मैट की और मिट्टी की ट्रेनिंग देते थे पर लेकिन जो मेंटली जो देते हैं वो सर आपने दी है अरे अरे अरे अरे थैंक यू सो नाइस ऑफ यू सो नाइस ऑफ यू मैं टीचर प्रनर करने जा रहा हूं कि टीचर का जीवन कैसे अच्छा हो सके कल को क्योंकि कुश्ती लड़ने के 5 सा 10 साल बाद 15 साल बाद आप भी एक बड़ी कोच बनेंगी देश में आप भी और पहलवानों को आगे बढ़ाएंगे जो आपके फिंस हैं आज वो बॉडी बिल्डिंग करते हैं तो कल को वो भी कोच बनेंगे तो एक कोच एक टीचर एक मेंटर एक गाइड एक काउंसलर एक एक वीडियो प्रनर एक अंत्रप्रेनोर कैसे बन सकता है क्योंकि आज एक टीचर जो है वो जितना सिखाता है उतना ही पैसा कमाता है उससे ज्यादा नहीं तो मैं एक सेमिनार करने जा रहा हूं आप सबको भी बता देता हूं तो आप लोग सब आइएगा मेरे youtube2 वेबीनार कैसे लिया जाए इस तरीके से पैसा कैसे कमाया जाए तो आज टीचर की बात हुई तो मैंने आपको ये गुड न्यूज़ दे दी फ्री सेमिनार है सबके लिए फ्री है इसमें कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है किसी से और यह मुझे उम्मीद है मैं अब तक 10 विश्व रिकॉर्ड बना चुका हूं ये मेरा 11वां विश्व रिकॉर्ड होगा आप सब आइएगा टीचर प्रेन्योर के इस प्रोग्राम को अटेंड करिएगा बहरहाल बात करते हैं दिव्या से और आमिर खान की दंगल आई मूवी और आपको भी मैंने सुनाया दंगल क्वीन बोला जाता है हां तो उससे मेमन पार्टिसिपेशन बढ़ा महिलाएं और आगे आई हर लड़की अपने आप को अपने अंदर गीता बबीता को देखना शुरू किया हर लड़की ने तो क्या लगता है दंगल क्वीन के ऊपर भी कोई मूवी आएगी जी बिल्कुल आएगी क्योंकि अभी इतनी बातें मैंने बोली है पर लेकिन इससे ज्यादा भी दबी रखी है यह समझ लीजिए मेरी किताब में मेरे मन में तो दंगल क्वीन जरूर आएगी और आपने बोला है तो अब तो जरूर आनी चाहिए तो दिव्या जी हम आपके साथ ड फायर राउंड करें हां जी मैं जल्दी जल्दी सवाल करूंगा आपको जल्दी जल्दी एक लाइन का आंसर देना है तो मेरा पहला सवाल है अब तक कितने लड़कों को दंगल में धूल चटाई सर 100 से ऊपर 100 से ऊपर कभी किसी लड़की ने बोला है दीदी एक लड़का परेशान कर रहा है फिर आपको आपने उसको अपने तरीके से सेट कर दिया हांजी सेट उसको बहुत अच्छे से किया था मारा है मैंने एक लड़के को कोई ऐसी चीज आपको बहुत पसंद हो लेकिन फिटनेस के लिए आपको छोड़नी पड़ी हो हां जी गोलगप्पे बहुत पसंद है पर छोड़ने पड़ते हैं बहुत ज्यादा तो आप रेसलिंग में अपना आदर्श किसको मानती है सुशील पहलवान जी जी क्योंकि मैं ने उनकी वजह से ओलंपिक का सपना देखा है अखाड़े की मिट्टी पर दंगल लड़ना या मैट के ऊपर कुश्ती करना ज्यादा मुश्किल कहां आती है मैट पे एक रेसलर तो जब मैट प लड़ रहा होता है तो बड़ा अग्रेसिव होता है नीली जिंदगी में पर्सनल लाइफ में दिव्या अग्रेसिव है या सॉफ्ट है सर बहुत कूल हूं मैं तो मस्त हूं और कभी कुछ बात हो जाए तो सबसे ज्यादा अग्रेसिव भी मैं ही रहती हूं एक बार में दिव्या कितने पुशअप मार सकती है एक बार में कम से कम 220 मैंने मार रखे हैं 220 हां जी और वैसे मैंने 2000 मार रखे 2000 हां जी बहुत सारे रेसलर होते हैं वो बड़े अनयूजुअल रिचुअल को फॉलो करते हैं अनयूजुअल रिचुअल मतलब एक टोटका हां तेंदुलकर को हमने देखा कि वो बाया पैड पहले पहनते हैं हमेशा तो दिव्या का भी कोई ऐसा टोटका है जो मैच से पहले करती है मैं जब भीरी कुश्ती होती है तो मैं सीधा पैर ज्यादा आगे रखती हूं सबसे पहले और दूसरा मैं टीशर्ट बचपन से ही मतलब एक बोलना था कि जब भी कुश्ती में जाओ तो टीशर्ट हमेशा सीधी निकालो तो ये चीज मैं बहुत ज्यादा फॉलो करती हूं क्या ये सच है कि पहलवानों की कान की हड्डी टूट जाती है उसका रीजन क्या है सर हमारे कान क्योंकि थोड़े ना यहां पे सेंसिटिव होते तो जी लगते है ना तभी टूट जाते है देखो मेरे दोनों टूट रहे हैं ओके आपका अगला बड़ा टारगेट क्या है क्या अचीव करना चाहते हैं ओलंपिक ओलंपिक का गोल्ड वो भी जो 2024 में हो रहा है पेरिस में तो वहां पे ओलंपिक गोल्ड आएगा बिल्कुल आएगा सर ट्स वेरी गुड दिव्या को गुस्सा कब आता है ये मुझे ही नहीं पता मुझे गुस्सा कब आ जाए पर लेकिन आ जाता है मुझे कभी भी गुस्सा मुझे खुद भी पता नहीं चलता मुझे इतनी सी चीज प भी गुस्सा आ जाता है और कभी-कभी इतनी चीज प भी गुस्सा नहीं आता क्या दिव्या आगे चलकर पॉलिटिक्स में नजर आएंगे अगर दिक्कत आई कुश्ती करने के बाद तो मैं वहां भी उठक पठक कर सकती हूं वाह क्या बात है दिल्ली या यूपी किसको अपना कर्म भूमि मानती है आप यूपी हस्बैंड से जब कभी कहा सुनी होगी या होती है तो बातों से मंगल होता है या फिर हाथों से दंगल होता है सर हाथों से ही होता है बातों से नहीं होता हा तो सही होता है तो वहां कौन जीतता है मैं जीतती हूं वो तो सिर्फ ये दिखाते हैं मैंने कहा इधर आओ तुम पहले तो आपको वैसे एक पिक्चर आई थी व कहती है कि थप्पड़ से नहीं प्यार से डर लगता है तो आपको ना थप्पड़ से डर लगता है ना प्यार से फिर भी कोई ऐसी चीज जिससे आपको डर लगता हो अंधेरे से बहुत डर लगता है भूत से कि इधर को छोटी सी भी आवाज आएगी ना गु तो जब नीना मेरे साथ होती है ये होते हैं तो मैं 5:00 बजे रहे सुबह वोशरूम जाना तब भी मैं इनकी उंगली पकड़ के जाती हूं मुझे अंधेरे से बडर लगता है इंटरनेशनल मैचेस में क्या कभी रेसलिंग में आपके साथ चीटिंग हुई है हां जी सर हुई है 2013 में मेरे साथ चीटिंग हुई थी मंगोलिया का ही मैच था तो तब अगर मैं वहां प जीत जाती मेरा गोल्ड आ जाता परले उन्होने इतनी चीटिंग कर दी थी मेरे साथ मुझे एक पॉइंट नहीं दिया था तो मेरा सिल्वर मेडल आया था पर लेकिन उस लड़की से बदला मैंने 2015 में अपने इंडिया में लिया था आके अच्छा फिर मैंने उसको हराया था वाह क्या ये सच है कि स्कूल से बचने के लिए आपने अखाड़ा जाना शुरू किया हां जी सर आज भी पढ़ाई का तो मुझे बिल्कुल भी शौक नहीं है तभी मैं कुश्ते में आई हूं आज भी कहीं मैं जाती हूं ना स्कूल में तो बच्चे देखते हैं कि पेन लेके आ रहे हैं उसके लिए क्या बोलते हैं उसको ऑटोग्राफ के लिए तो मैं कहती हू इधर आ जाओ नहीं नहीं नहीं मुझे नहीं दे रहा मैं उनको बोलती हूं दीदी प्लीज आप नाम ही लिख दो मैंने बा मेरे अंगूठे में चोट लग रही है क्योंकि मेरे पा सिग्नेचर अभी अच्छे करने नहीं आते ओके ओके वैसे देखिए दंगल शब्द को अगर तोड़ा जाए तो दंगल ये ऐसा लगता है दम इन गर्ल दम इन गर्ल तो आपके अंदर बड़ा दम है और आपकी भी कमजोर से दम जोर बनने की जो जर्नी है यह सफर आपका काबिले तारीफ है मैं आशा करता हूं कि आप ऐसे ही जीतती रहे पेरिस के ओलंपिक में आप निश्चित रूप से गोल्ड ला करर के दें और देश का एकदम नाम रोशन करें मैं विवेक बिंदरा और हमारे साथ पूरा देश आपके साथ खड़ा है क्योंकि देखिए जीत कभी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं होती है जीत होती है कोच की ट्रेनिंग की जीत होती है आप अपनों के आशीर्वाद की जीत होती है देश की जीत होती है भारत की जनता की जीत होती है हम सबकी और आपकी जीत की माशा लगाए बैठे हैं ऑडियंस को मैं कहना चाहता हूं जिस भी बच्चे के अंदर कोई सपना हो आगे बढ़ने का जिस लड़की के अंदर सपना हो आगे ब बढ़ने का कितनी प्यारी है दिव्या कितना अच्छा लगा कितना दिल से बोलती है दिव्या हां तो ये वीडियो आप उन तक पहुंचाए जो दिव्या की जिंदा दिल्ली है उससे हो सकता है कई बच्चों को इंस्पिरेशन मिले जो मेन गोल से अपने डिस्ट्रक्ट हो रहे हो और नीचे कमेंट बॉक्स में बताइए दिव्या से मिलकर आपको कैसा लगा अगले एपिसोड में किससे मिलना चाहते हैं बस थोड़ा सा और इंतजार आ गया बड़ा बुधवार तो बड़ा भारत शो को पूरा देखने के लिए इस वीडियो को सही व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए आप सबका हृदय की गहराई से प्रेम पूर्वक बहुत-बहुत धन्यवाद दिव्या आपका विशेष धन्यवाद
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