Ep1 धर्म परिवर्तन और हिंदू राष्ट्र पर क्या बोलीं देवी चित्रलेखा जी The Vivek Bindra Show Podcast

क्या सामने वाला हमारे खिलाफ षड्यंत्र प्रपंच रचता रहे और हम हमेशा ऐसे रहे या फिर कभी-कभी जवाब भी दे देना जहां भारत सरकार इंटरकास्ट मैरिज को प्रमोट करने की बात कर रही है दो लाख रप का इंसेंटिव भी देती है वहा आप इसे गलत मानते हैं आपके गलत मानने का क्या आधार हुआ आप सनातन धर्म बोलते हैं कई लोग बोते हिंदू राष्ट्र बनाना है करके य दोनों में अंतर क्या है आप कह रहे हिंदू राष्ट्र पर जदा फोकस मत करो सनातन धर्म फकस देवी चित्रलेखा जी आप इमोशनल है या लॉजिकल है कहते कि अच्छे संस्कार और अच्छी संगत किसी सिनेमा हॉल में या किसी मॉल में नहीं मिलती बल्कि परिवार के माहौल में मिलती है नमस्कार मैं डॉक्टर विवेक बिंदरा फाउंडर ए सीओ बड़ बिजनेस क वेलकम टू द विवेक बिंदरा शो हमने एक नया शो प्रारंभ किया है जिनसे भी कुछ इंस्पिरेशन मिल सकती है सीखने को मिल सकता है उन सबको लेकर के आ रहे हैं और इस शो के सीजन में पहला एपिसोड हम करने जा रहे हैं देवी चित्रलेखा जी के साथ में ऐसे लोग जो आपको इंस्पिरेशन दे सकते हैं जो हमारी आज की मेहमान है वह गुणों की खान है गुणों का घराना है और इतना कह सकता हूं मैं चित्रलेखा जी आपके विषय में कि जब कहानी सुनने की उम्र हुआ करती थ तब आप कथा सुनाया करते थे और तब से लेकर आज तक सोशल मीडिया और टेलीविजन हो आपने अपने ज्ञान से अपने प्रवचन से अपनी कथाओं से अपने मधुर संगीत से आपने सत्संग के महत्व को समझाने से भागवत का सार समझाने से कहीं वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने से यंगे स्पिरिचुअल रेटर होने से श्रीमद् भागवत की कथावाचक होने से आपने बहुत लोगों को इंस्पायर किया तो स्वागत करते हैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद इवन मुझे भी बहुत खुशी है कि फाइनली हम कुछ बात कर पा रहे हैं और कुछ अच्छा बात करें ताकि लोगों तक पहुंचे और लोगों के लिए हेल्पफुल हो चर्चा की जब शुरुआत हुई थी भगवत गीता की और आपके साथ चर्चा की शुरुआत हो रही है मैं भगवत गीता की चर्चा की शुरुआत हम पहले अध्याय के पहले श्लोक से करते हैं धृतराष्ट्र वाच धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र हमने कई बार चर्चा करी लेन आज हम दुर्योधन से शुरू करेंगे थोड़ा हम अलग प्रकार से शुरू करना चाहते हैं दुर्योधन कहते हैं कि अपर्याप्त तस्मा बलम भीष्म रक्षित कहते कि पर्याप्त बलम भीष्म बरतम वह क्या बोल रहे कह रहे कि जो हमारी ताकत है अपने गुरुओं को बता रहे हैं वह बहुत ज्यादा है और सामने पांडवों को देख लो तो कुछ भी नहीं है यह तो हम लोग के पास तो भीष्म पिता मा है इनके पास तो ले दे के खाली भीम है पांडवों के पास तो ऐसी शुरुआत हुई भगवत गीता की जहां पर दुर्योधन जो है इतना ज्यादा कॉन्फिडेंट फील कर रहे हैं अपने आप को लेकर के कि हम लोग बहुत पावरफुल है ये तो कुछ भी नहीं इनको तो अभी खत्म कर देंगे और आपका तिलक देख के आपकी कंठी देख के समझ में आता है क्योंकि आप एक गड़िया वैष्णव संप्रदाय से आती हैं जहां श्री चैतन्य महाप्रभु को माना जाता है जी चेतन्य महाप्रभु ने शिक्षष्टकम नाम का एक शास्त्र हमको दिया जिसमें मुझे लगता है केवल अष्टकम मतलब आठ ही श्लोक थे आठ श्लोक अष्टकम हां जी मैं भी गडिया वैष्णव संप्रदाय को बहुत मानता हूं इसलिए एक नेचुरल जुड़ाव होगा इनका हमारे साथ भी है जी जी जी जी इस बारे में मैंने कोई बात नहीं करी आपने बोल दिया मैं कंफर्म करके हा बोलता हूं बड़ी प्रसन्नता के साथ में महाप्रभु ने बोला त्रिना पी सुनी चना रीवा सहि ना अमानी ना मान देना कीर्तनीय सदा हरी वो कहते हैं कि अपने आप को तिनके से नीचे मानो अपने आप को पेड़ की तरह सहनशील मानो जो जिसके ऊपर कठिनाई से कठिनाई आती है फिर भी ऐसे ही रहता है वो कहते कि अमानी मान दिन सबको सम्मान दो और मान की इच्छा मत रखो कीर्तनीय सदा हरी तो यहां दुर्योधन य श्री चैतन्य महाप्रभु या श्री कृष्ण जो ज्ञान दे रहे हैं हमारे को दुर्योधन कह रहे मैं बड़ा पावरफुल हूं और भगवान कह रहे इतने विनम्र बन जाओ तो यह जो इसके बीच का रास्ता इस संसार में आज कैसे ढूंढा जाए क्या सामने वाला हमारे खिलाफ षडयंत्र प्रपंच रचता रहे और हम हमेशा ऐसे रहे या फिर कभी कभी जवाब भी दे देना चाहिए जवाब देने के लिए जिस भगवत गीता की हम बात कर रहे हैं श्री कृष्ण ने जवाब देने के लिए यही कहा है कि अर्जुन तू युद्ध कर वहां श्री कृष्ण कह सकते थे कि नहीं तू शांत हो जा तू चुप हो जा तू उत्तर मत दे तेरे बड़े सामने खड़े हैं तू लड़ मत अर्जुन कह रहा है मेरे गुरुजन सामने खड़े और कृष्ण कह रहे नहीं युद्ध लड़ महाप्रभु जो कह रहे वो एकदम अलग चीज है महाप्रभु कहते णा सुनी च मतलब एक होता है किसी चीज को पा लेने का अभिमान किसी चीज की ईगो इवन आप एक भक्त भी है जैसे भाई मैं तो कंठी पहनता हूं मैं तो तिलक लगाता हूं मैं तो भजन करता हूं तो ये भी एक अ ईगो हो गई तो जब आप ईगो के मान के अभिमान वाले रास्ते पर चलते जो भक्ति का जो दरवाजा है बहुत छोटा है वहां ऐसे अकड़ के नहीं चला जा सकता वहां आपको झुक के ही एंट्री मिलती है तो इस संसार में कौन सा दरवाजे में घुसे भक्ति के दरवाजे में या जो भगवान कृष्ण ने बताया नहीं नहीं अ तस्मा उत्तिष्ठ परं तप और धर्म दोनों अलग है मतलब जहां आपके कर्म की आवश्यकता है जहां आपका श्री कृष्ण ने युद्ध करने के लिए कर्म के लिए कहा है कि तेरा कर्म है क्योंकि तू क्षत्रिय है क्षत्रिय का काम है लड़ना तो तुझे वो करना पड़ेगा लेकिन जहां बात आएगी तेरे अपने सद्गुणों को लेकर के तेरी अपनी अच्छाइयों को लेकर के तू कितना बड़ा योद्धा है वहां अगर अर्जुन यह कहता कि मैं बहुत बड़ा योद्धा हूं वहां अभिमान है वहा चेतन्य महाप्रभु की यह फिलोसोफी काम आती है कि होनी चाहि क्योंकि अर्जुन ने कहा मैंने तुम पर छोड़ दिया अर्जुन ने यह यं नहीं रखी कि मैं लडूंगा तो उन्होंने ऑटोमेटिक महाप्रभु की वचन को फॉलो किया लेकिन कर्म के लिए कभी भी पीछे हटना ना तो महाप्रभु कभी कहते हैं ना दुनिया का कोई भी महापुरुष आपको नहीं कहेगा श्री कृष्ण ने कभी नहीं कहा कि कर्म के लिए आपको अपने राइट्स के लिए अगर आपको युद्ध करना है और आप सही है तो वो पाप नहीं वो अपराध नहीं है क्योंकि आप एक सही रास्ते पर चल रहे हैं तो ये दोनों जैसे मैंने कहा कनेक्टेड है अपने आप को अगर अर्जुन समझता कि मैं युद्ध कर रहा हूं तो फिलोस फी खराब हो जाती महाप्रभु की लेकिन उन्होंने दोनों चीज को साथ में लेकर के चलती बहुत सुंदर भगवान ने यहां पर एक श्लोक में यह भी कहा था कि राज सुख लोभे तुम राज सुख के लिए लड़ रहे हो राइट पर्पस के लिए लड़ रहे हो बकुल बिल्कुल तो क्योंकि यह थोड़ा मेरे भी दिल के इतना करीब है सब्जेक्ट तो कन्वर्सेशन वैसे ही रहेगा आपने छोटी उम्र में बहुत कथा करनी शुरू करी आजकल देख रहे पहले तो ऐसा होता था बड़ी बड़ी उम्र में लोग करते थे ऐ भगवान ने भी एक श्लोक बोला है गीता में कि ये यथा माम प्रपद्यंते तम स्व भजामि हम जो जो जितनी मात्रा में मेरा भजन करता है हा यह यथा ताम तथा जो जैसा मैं उसको वैसा कि ताम स्तव भजामि अहम मैं खुद भी उसका उत भजन करने लगता हूं जो मेरा भजन कर रहा है आज देख रहे हैं कि समय बदल रहा है 20 2 साल पहले की बात करें तो स्पिरिचुअल रेटर कथावाचक का अर्थ होता था देवी जी के कोई बहुत बूढ़ा सा व्यक्ति होगा आज हम देख रहे हैं कि युवा भी क्षेत्र में उतरा आए हैं श्रीमती जया किशोरी जी या फिर श्री बागेश्वर बाबा महाराज या फिर आप भी है हम सबको देख रहे हैं बहुत सब छोटी उम्र में आ रहे हैं तो इसके विषय में मैं जानना चाहता हूं यह परिवर्तन अचानक कैसे आया है कलयुग बढ़ रहा है और आप लोग सब कलयुग का प्रभाव घटाए जा रहे हैं फटाफट नहीं नहीं पहली बात तो देखो यह हमारी अपनी गलत सोच थी कि कथा सुनना भी कहने की तो हम बात कर रहे लेकिन सुनना भी एक गलत मिसकनसेप्शन था कि भाई बुजुर्ग ही सुनेंगे बूढ़े लोगों का ही काम है भाई तुम्हारा घर में कोई काम नहीं जाओ कथा में चले जाओ वही सुनेंगे वही सुनाएंगे वही सुनेंगे वही सुनाएंगे लेकिन अब दोनों चीज बदल चुकी है अब सुनने वाले भी युवा है यंगस्टर है सुनाने सुनाने वाले भी युवा है और यह कहीं ना कहीं बहुत अच्छा चेंज है समाज के लिए क्योंकि हमने हमेशा से पढ़ा इस चीज को जाना है कि आध्यात्मिकता की शुरुआत मतलब जिस दिन जन्म होता है उस दिन से ही बच्चे को यह सिखाना शुरू कर देना चाहिए उसको लाइफ का पर्पस बताना शुरू कर देना चाहिए हम गलती क्या करते हैं कि अभी तो बच्चा है अभी क्या सिखाना अभी तो पढ़ेगा लिखेगा कमाई करेगा फिर जब बड़ा हो जाएगा तब करेंगे लेकिन तब तक चीजें उसके उसके थॉट्स भी एकदम फम हो चुके होते हैं होते तो ये कथा सुखदेव जी युवा थे 16 वर्ष की आयु थी सुखदेव जी की जब कथा उन्होंने करी तो मतलब मैं तो जिस भागवत की कथा करती उसका प्रवक्ता ही युवा है वहां कोई बूढ़ा नहीं था और जब सुखदेव जी आए तो भागवत में लिखा है कि तत्र भवत भगवान व्यास पुत्रो यद स गाम तमान न अपेक्षा अलक्ष लिंगो निजला तवाले तवे अब 16 वर्ष के थे उनको यह भी नहीं पता था कि उन्होंने शरीर पर कोई कपड़ा कोपिन कुछ पहन रखा है नहीं कोई उनको पहचान नहीं पा रहा था बच्चे तो समझ रहे कि पागल है 16 साल का एक आदमी अगर ऐसे ही घूमेगा बिना वस्त्रों के तो पागल ही समझे लेकिन जब उनकी एंट्री हुई व्यास जी खड़े हो गए परास जी खड़े हो गए जय हो तो अगर वह खड़े हुए तो इसका मतलब है हमारा देश जो है ना उसने हमेशा से सम्मान ज्ञान का किया है आयु का नहीं सम्मान ज्ञान का किया है जाति का नहीं सूत जी सूत जी भागवत के प्रवक्ता है यह देश एक ऐसा देश है जिसमें इंसान छोड़ो पक्षियों ने कथा करिए काक भूसुंडी जी कौए के रूप कहते कौवा जब बोलता कड़वा बोलता है लेकिन काक भूसुंडी जी जब राम कथा बोलते तो इतनी मधुर हो जाती है कि सब थम जाता है हो सुखदेव जी सुख है तोते आज भी कथा होगी तो उसमें साइड में है सुखदेव जी मनुष्य रूप पर सुखदेव जी का आज भी पूजा होती है तोते वाले स्वरूप की तो तो मतलब आप सोच के देखिए मैं कभी-कभी सोचती हूं कि ये देश ये धर्म कितना महान है कि य पक्षी कथा कर रहे हैं और इंसान बैठ के सुन रहे हैं तो ये मुझे लगता है कथा कहना सुनना इसका ना उम्र ना जाति इन सब से कोई लेना देना नहीं है हरि का भजे सो हरि का होई जाति पाति देखे नहीं कोई हरि का भजे सो हरि का हरि का होई तो उस हिसाब से मुझे लगता बहुत अच्छा चेंज है युवाओं को आना चाहिए लोग कहते हैं आजकल बच्चे पहले तो यह कहते थे हम डॉक्टर बनेंगे आज आजकल ये कहने लगे कि हम कथावाचक बने मैं कहा ये तो बड़ी अच्छी बात है अगर इस देश का युवा कह रहा अभी भी कम है अभी भी कह र है हमको यूटर बनना है नहीं फिर भी हम जैसे मुझे लगता है हम जैसे लोग को देख के कुछ परसेंटेज बढी है लोगों की जो चाहते हैं कि देखो इसमें दोनों चीजें मैं स्पष्टता से बोलती हूं कि इसमें दोनों चीजें इसमें भगवान की कृपा से हमें सम्मान भी मिलता है आदर मिलता है और हमारी जीविका चलती है और सबसे बड़ी बात जो मोस्ट सबसे मोस्ट इंपोर्टेंट बात है वो यह है कि हमें पता है कि हम भगवान के पास जाने का वाला जो रास्ता है उस परे चल रहे हैं बहुत खूब हम गलत नहीं कर रहे हम लोगों को हम समाज को हम अच्छी चीजें और भगवान की भक्ति बता के उनको भगवान के रास्ते पर ले जा कितना साल में वैसे आप कितनी कथा कर लेती हैं साल में कितना दिन आप समझ लीजिए महीने में तीन कथा तीन कथा इनटू सेवन डेज सेवन डेज दैट मीन 21 डेज इन अ मंथ हां 20 डेज फिर थोड़ा ट्रेवलिंग वगैरह सबका आना जाना तो पूरा पूरा महीना बिजी हो गया पूरा महीना बिजी भजन करना कथा करना जी और ट्रेवल करना ट्रेवल करना आपके मैंने तीन चार भजन सुने मैंने आपके मैं को मैं बोला भाई मुझे youtube1 था कि मोहे ब्रज की धूल बना दे जी एक था आपका कि जगत के रंग क्या देखूं एक था कि जब याद तुम्हारी आती है ऐसा कुछ करके भगवान को संबोधित करते हुए आपने और एक था कि भाई मैंने सारे आपके सहारे छोड़ दिए हम कुछ ऐसा भजन मैंने सारे सहारे छोड़ दिए सारे सहारे छोड़ दिए हां मतलब सर सारे सहारे छोड़ दिए मेरा सहारा काफी है अरे वाह आपका फेवरेट कौन सा चारों में से मोहे ब्रज की धूल और जगत के रंग मेरे खल इन दोनों में से कोई एक सुना सकते हैं ये दो लाइन गाते जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है करूं मैं प्यार किस किस से तेरा एक प्यार काफी है नहीं चाहिए ये दुनिया के निराले रंग ढंग मुझको तेरे भक्तों से हो प्रीति तेरा परिवार काफी है करूं मैं प्यार किस किस से तेरा एक प्यार काफी है जय हो जय हो लेट्स एक्नॉलेज गाइ कम ऑन ब्यूटीफुल आपको समझाए भगवान एक्चुअली ऐसा ही चाहते हैं करूं मैं प्यार किसकिस से तेरा एक प्यार काफी क्योंकि भगवान कहते हैं अनन्य अनन्य ना कोई अन्य भगवान बहुत जेलस व्यक्ति है हमारे ब्रज में कहते एक शब्द है मैं कथा में भी उसका यूज करती हूं नंद को लाल बहुत चिड़े है चिड़े मतलब उसको चाहिए दिल में अकेला राज करूं कोई दूसरा ना रहे मैं ही मैं रहू और जो उनको बसा लेगा हृदय में तो फिर उसको सब मिल जाता है भजन ही आपका इतना अद्भुत है वही भगवान ने भी बोला है अनन्य चिंत मुझे और किसी कोई और अन्य नहीं चाहिए सर्व धर्मानना में कम ऐसा खाली भगवान बोल सकते हैं है कि नहीं हम तो अपनी गर्लफ्रेंड धर्मपत्नी को भी बोल दे ना खाली मां में कम केवल मेरे साथ रहने का और किधर उधर नहीं देखना उतने में झगड़ा हो जाएगा ये तो मेरे देखने को भी पूछोगे अभी लेकिन भगवान का स्टाइल है वो भगवा भगवान का प्यार करने का तरीका है मुझे एक संत ने बताया था अंग्रेजी में दैट ही इज एन अरिस्टो क्रेटिक जेलस लवर भाई एक तो अरिस्टो क्रेसी है उनकी ऊपर से जेलस लवर है प्रेम खाली मुझसे ही करना है तेरा एक प्यार काफी है और कोई नहीं चाहिए अच्छा सब तो आपकी तरह बनने में समय लेंगे आज हम भगवान के कर्म के विषय में च श्लोक सुनते हैं कर्म निवाद कारते मा फलेशु कदाच कि कर्म पर फोकस करो फल पर फोकस मत करो भगवान कहते हैं है ना क्या आए दिन ऑफिस में हम देखते हैं कि लोग रिजाइन करने आ जाते हैं कि भाई हमारे को फल अच्छा दे दोगे तो हम रिजाइन नहीं करेंगे आपके साथ कंटिन्यू करेंगे नहीं तो लोग आते हैं भगवान कह रहे मा कर्म फल हे तुभ माते संग भाई आप चिंता युक्त होक नहीं चिंता मुक्त होकर काम करो भाई आप जो है माइंड का स्विच ऑफ करके नहीं स्विच ऑन करके काम करो आप जो है हर समय कराय मत करो ट्राई करो भगवान क रहे कर्म पर फोकस करो मैं चाहता हूं कि आपकी अपनी अंडरस्टैंडिंग लोक को लेकर क्या क्योंकि इसको लेकर लोग बड़े कंफ्यूज रहते हैं कर्म करो फल की इच्छा मत करो आप क्या कहते हैं अगर आपको जो आप कर रहे हो अगर उस कर्म से प्यार होगा तो स्वाभाविक है आप फल पर फोकस नहीं करोगे फल ऑटोमेटिक आएगा मान लीजिए मेरा काम है कथा करना यह मेरा इंटरेस्ट है और अगर मैं कर रही हूं तो उसका फल तो मुझे मिलेगा ही मिलेगा अब क्या होता है जब जिस काम में आपका इंटरेस्ट नहीं होता जैसे आपने एग्जांपल दिया अब आदमी का काम में इंटरेस्ट नहीं है उसका फोकस सीधा जा रहा है फल पे मतलब वो कर्म को स्किप करके फल पर फोकस है क्यों क्योंकि बीच वाली जो चीज है उसमें उसका काम उसका इंटरेस्ट नहीं है अगर वो आप करोगे तो दोनों चीज आपको ऑटोमेटिक मिलेंगी अपना कर्म ऐसा चुनिए जिसमें आपको अच्छा लगता हो जिसमें करने में अच्छा लगता हो फिर श्री कृष्ण ने कहा कि जो मैं दूंगा वो तेरी सोच से परे होगा वो तू सोच भी नहीं सकता उस फल को हम कोई नहीं सोच सकते और श्री कृष्ण ने दिया भी है वो अर्जुन ने अगर कर्म किया तो फल देखो एक तरफ अक्षण से है ना जी जी और एक तरफ पांच पांडव मतलब अगर कंपेयर करोगे दिमाग लगा के लॉजिकली अगर सोचोगे तो इंपॉसिबल चीज थी अक्षण सेना जिसके सामने इंद्र नहीं टिक पाता था पांच पांडव जीत गए क्यों क्योंकि उन्होंने कृष्ण को चुना मैं हमेशा एक बात कहती हूं यह भगवत गीता और महाभारत के संदर्भ में कि क्वांटिटी नहीं क्वालिटी को चुनो कौरवों को लगा दुर्योधन को लगा जितने ज्यादा बटोर लूंगा उतना ज्यादा मैं लड़ लूंगा पर अर्जुन ने कहा तू अकेला काफी है मेरे लिए क्योंकि अगर तू कृष्ण साथ है मैं हार भी गया मैं तब भी जीत गया मेरी हार में भी उसमें जीत है क्योंकि कृष्ण साथ खड़ा है तो चुनाव मतलब बहुत जरूरी है हम कई बार गलतियां जब करते हैं ना तो चूज करने में करते हैं अपना काम या अपना दोस्त या अपना कोई संबंधी तो वहां अगर आप चूज सही करोगे स्टार्टिंग से ही तो मुझे लगता है फिर फल पे फोकस की जगह आपका फोकस कर्म पे जाएगा और मैं वापस सबका ध्यान लेकर जाना चाहता हूं इस उत्तर की शुरुआत में जो देवी जी ने बात कही अगर आपको अपने कर्म से प्रेम हो जाएगा ना तो फिर आपको फल का टेंशन नहीं होगा और थक भी नहीं आप आप टायर्ड भी नहीं होंगे आप हमेशा इंस्पायर्ड रहेंगे है ना और एक श्लोक मुझे याद आता है जिता मन प्रशांत स्य परमात्मा समाहित जिसने मन को जीत लिया जिता मन जिसने मन को जीत लिया परमात्मा समाहित उसको परमात्मा रेडी मिल गए अब क्या होगा शीतोषण सुख दुखे तथा मान अपमान सर्दी होगी गर्मी होगी सुख दुख वो अपना आगे बढ़ सकता है पर आज सोशल मीडिया का जमा और यहां पर भी हम देखते हैं लोग कंपटीशन की जगह कोलबेन करने लगे हैं मिलकर के चर्चा करते हैं है ना एक्सपेंशन या रीच बढ़ाने का भी प्रयास करते हैं कि हम लोगों तक अपना मैसेज पहुंचा सके कोलैबोरेट कर सके आध्यात्मिक बातों को भी लोग ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके तो तो क्या आप भी कोलैबोरेट करते हैं किसी के साथ में स्पिरिचुअल लीडर्स के साथ में कि हम लोग मिलकर के आध्यात्मिक चर्चा को आगे बढ़ाए हां जी बिल्कुल करते हैं हमारी भाषा में उसको सम्मेलन कह देते हैं भाई सबको मिलाओ या डिजिटली भी जहां लगता है कि इस चीज से उनकी बात भी लोगों तक पहुंचेगी हमारी बात भी लोगों तक पहुंचेगी देखो क्या है ना आजकल हम थोड़े से टेक्निकली थोड़े से ठीक हो गए हैं हमने नए-नए वर्ड्स पकड़ लिए तो हमको लगता है हमने कुछ नई चीज इवॉल्व कर दी है कोई नया इन्वेंशन हुआ है नया कुछ भी नहीं है ये जो कोलबेन है ये आज से नहीं गुरु वशिष्ठ विश्वामित्र जी का कोलबेन हमेशा से था उनमें कभी ये नहीं होता था कि भाई हम दो साथ नहीं बैठ सकते की बात कर य भी होए हमारी इंडस्ट्री में इसको बोलते हैं कंपट कोबोट एडवांटेज अच्छा जब कंपटीशन आपस में कोलबेट कर लेते हैं तो जो एडवांटेज मिलता है बहुत बड़ा होता है मान लो दो फार्मा की कंपनी इकट्ठे मिल जाती है तो दोनों का मार्केट शेयर है ना व क्या बोलते हैं कि इससे जो है ना खाली एक प्लस एक दो नहीं बनते फिर वो 11 बन जाते हैं उनको मल्टीप्लायर ट मिलने लग जाता है बहुत तेजी के साथ पर मुझे लगता है धर्म में कंपटीशन वाला शब्द ही नहीं होना चाहिए क्योंकि हर एक का उद्देश्य क्या है कि आप भगवान का नाम समाज तक पहुंचाए तो उसमें तो मैंने अब तक जितने भी संतों को इनवाइट किया है बड़े खुशी खुशी आते हैं इवन यहां तक यह भी रहता है कई बार कि कुछ लोग ऐसे होते हैं कुछ तथाकथित की भाई लड़की है हम कैसे जाए इतने बड़े पद पर हम है लेकिन नहीं मेरे ऊपर बचपन से एक बहुत बड़ी कृपा रही है मैं कहती हूं मुझे अवार्ड कम मिले हो पर संतों का आशीर्वाद बहुत मिला हमारे पर ये कृपा है कि आज हमारे लीडरशिप फ प्रोग्राम में आप आई आपने आखर के अंत प्रनर से चर्चा करी कैसा लगा आपको सबसे मिलके मुझे बहुत अच्छा लगा सारे लोग बहुत अच्छे थे बहुत सारे क्वेश्चंस भी किए उन्होंने धर्म को लेके बिजनेस को लेके तो मेरा एक्सपीरियंस अच्छा रहा बहुत अच्छा रहा नॉर्मली आप बिजनेसमैन के साथ इस तरह प्रोग्राम नहीं करते हां मैं कथाओ में तो बिजनेसमैन बहुत आते हैं लेकिन ऐसे कभी स्पेश जो बिजनेसमैन के लिए कथा हो थी कर आपने चर्चा करी आज हमारे साथ हा बट अच्छा एक्सपीरियंस था क्योंकि ये लीडरशिप फनल बड़े सीरियस पार्टिसिपेंट मैंने आपको भी सुना भी बड़े अच्छे तरीके से मतलब ऑडियंस को एक जगह उनका ध्यान एकाग्र करने वाली जो होती है कला टैलेंट बड़ी अच्छी है थ हमारी भी तारीफ होती रहनी चाहिए धन्यवाद जी तो मैं एक भगवत गीता का एक श्लोक मुझे ध्यान आ रहा है जहां से मैं अगले प्रश्न की तरफ चलूंगा हां कृष्ण कहते हैं अर्जुन कहते हैं चंचल मन कृष्णा प्रमा बलवा तस निग्रहम म वायु वास दुष्कर हे भगवान मेरा मन इतना चंचल है है ना क प्रमा थी पागल है बलव दम बलवान है दम दृढ़ है बहुत जिद्दी है तस हम निग्रहम म इस मन को कंट्रोल करने से आसान है मैं तूफान के बवंडर को अपने तीरों से कंट्रोल कर लूंगा ऐसे ऐसे तीर चलाऊंगा के चक्रवर्ती तूफान भी कंट्रोल कर सकता हूं पर मन को कैसे कंट्रोल करू भगवान कहते कि असं महाबाहु मन दु निग्रहम चलम कि भाई अभ्यासन त कोनते वैराग्य न चहते कि अभ्यास और वैराग्य दोनों चीजें चाहिए आपको अभ्यास भी चाहिए वैराग्य भी चाहिए आपके जीवन में मैंने देखा मैं आपके जीवन में जानना चाहता हूं कि बचपन से आपने अपने मंत्र को मन को नियंत्रित करने के लिए बहुत से अभ्यास भी किए वैराग्य भी किया अभ्यास हो गया हरि नाम लेते हैं आप जाप करते हैं वैराग्य हो गया आप नियमों का पालन करते हैं जितना मैं आपको समझता हूं अंडा मीठ मास मछली प्याज लहसुन ना किसी प्रकार के नशीली पदार्थ का सेवन नहीं करना तो ये जब आपने ये किया थोड़ा संसारी से सवाल पूछ रहा हूं 7 साल की उम्र में आपके 70 साल के लोग आपको सुनने लग गए तो बचपन में दोस्त तो बन ही नहीं पाए होंगे दोस्त बस्त कैसे बने मतलब कोई अब दोस्त तो बचपन में सहेलिया तो टापू खेलती है या और अपने जो गेम होते हैं वो खेलते हैं मैंने बचपन में भी बोलने का गेम खेला है मुझे याद है पिताजी ने एक लकड़ी का स्टैंड बना के दिया था उसपे कॉटन का माइक क्योंकि माइक अवेलेबल नहीं था बच्चों को सामने बिठा लेती भाषण देती मतलब एक रुचि टाइप का दोस्त था मेरे उस समय भी कोई नहीं थे स्कूल में भी कोई नहीं रहे और अभी भी कोई ऐसा नहीं है जिसको क्या कारण कि आपके दोस्त नहीं बने मैं टाइम भी कम ही था पर टाइम को भी नहीं कहूंगी क्योंकि जब करना होता तो आदमी कर ही लेता है मुझे नीड नहीं लगी मुझे जरूरत कभी ऐसी लगी नहीं मुझे लगा किने सास्त्र को दोस्त बना लिया हां कह सकते हैं आप ये क्योंकि बचपन से ही जब से मुझे थोड़ा पढ़ना आया हमेशा मेरे जीवन में घर में गाड़ी में कहीं भी रहूं किताबें रहेंगी ग्रंथ रहेंगे फिर मम्मी पापा हमेशा साथ रहते थे तो उनसे दोस्ती थी फिर ठाकुर जी हैं उनसे मित्रता है तो घर भगवान के विग्रह है भगवान की हां वि है राधा माधव दोनों है तो अब कभी लगाने की इस चीज की जरूरत है दोस्ती क्यों चाहिए होती है कि भाई कोई आपको सुने कोई आपकी बातों को समझे मुझे लगता है वो हमेशा सुनते हैं देवी चित्रलेखा जी आप इमोशनल है या लॉजिकल है दोनों जहां जैसी जरूरत पड़े रेशो में कहेंगे तो शायद इमोशनल शायद ज्यादा इसलिए आप अपनी कथा में कई बारी खुद ही रो भी पड़ती है जो बातें आती है मन में और मुझे ऐसा लगता है भागवत में ऐसा लिखा है एक श्लोक है कथम बिना रोम हर्षमण ये उस टाइम का है जब व्यास जी सत्र पुराण लिखे पर उनको तसल्ली नहीं हुई कि मैंने लिख तो दिया पर अब कुछ रह गया है तो नारद जी ने उनको कहा कि अब तक तुमने कोई ऐसा ग्रंथ नहीं लिखा जिसको सुनके आंख में से आंसू बहे रोंगटे खड़े हो जाए गद गद गिरा नैन बह नीरा इसलिए तुमको अभी तक वो एक सेटिस्फेक्शन नहीं मिला है तो कोई एक ग्रंथ लिखो जिसम भक्ति की बात करो प्रेम की बात करो रस की बात करो तब व्यास जी ने फिर लास्ट अंतिम जो ग्रंथ लिखा है वो है श्रीमद् भागवत 18वां पुराण और वो पूरा पुराण प्रेम से भरा हुआ भक्ति से भरा हुआ है तो ऑटोमेटिक जब आप उसे पढ़ते हैं तो आप इमोशनल और होना चाहिए देखो मुझे लगता है जब आप भगवान के लिए एक एक व्याकुलता होनी चाहिए जब आपका अपना कोई बिछड़ जाता है तो आप कितना उसे याद करते दिन रात आप उसके लिए रोते हैं आप चाहते हैं आप उससे मिले आप उससे बात करें भगवान भी तो अपने हैं कहीं ना कहीं उनसे दूरी है तो मिलने की चाह तो रहनी चाहिए आपको सब चीज चाहिए लेकिन बस भगवान नहीं चाहिए तो आप जब तक भगवान भगवान ने स्पष्ट कहा जब तक मेरे लिए रोगे नहीं मैं मिलूंगा नहीं मेरे लिए तुमको पहले पुकारना पड़ेगा हमारे ब्रज में गाते कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे लताओ में ब्रज की गुजारा करेंगे कहीं तो मिलेंगे वो बांके बिहारी चरण पढ उन्हें हम मनाया करेंगे कभी तो मिलेंगे हम रो रो के पु मीरा की भक्ति क्या थी रोना और नाच के भगवान को रिना तो और महाप्रभु महाप्रभु जब रोते हरी होरी कहे प्रभु गोमन करीला कृष्ण बोली उठी व्या ग्र नाची ते लगीला महाप्रभु जब नाचते दोनों उर्द बाहु होके हरि बोल करते हुए तो सिंह या सब साथ में नृत्य करते हो रोते हुए बताओ शेर हरे कृष्ण महामन में रो रहा है नाच रहा है सुनने में कितना महाप्रभु जब रात को सोते तो सुबह जागते उनकी तकिए को निचोड़ जाता था इतने अश्रु तो हमारी संप्रदाय में ही भगवान को रो रो के पुकारना महाप्रभु ने सिखाया है जय हो तो मुझे लगता है यह सबके भीतर एक होना चाहिए य एक पार्ट कि जहां भगवान के लिए उनको इमोशनल फील हो हमने देखा कि आजकल लोग हल्दीराम बीकानेर वाला चाय उसकी पूरी व्रत की थाली निपटा देते हैं और व्रत की थाली बढ़िया से खा कर के अपने हिसाब आपके हिसाब से व्रत रखने का सही तरीका क्या है भगवान का अर्थ क्या है कहते शादी का वो लड्डू है जो खाए वो पछताए जो ना खाए वो भी पछताए तो क्या करना चाहिए खा के पछताना चाहिए या बिना खाए पछताना चाहिए स्पिरिचुअल लाइफ को लेकर सबसे बड़ा मिसकनसेप्शन क्या है इतना मीठा बोलने वाली देवी चित्रलेखा जी को गुस्सा आता है एक सेंसिटिव मुद्दा भी मेरे मन में चल रहा था मैं थोड़ा माइंड स्विच कर रहा हूं ये सेंसिटिव मुद्दा है बेसिकली भगवान ने भी इसके कर गीता में चतुर्वर्ण मया सृष्ट गुण कर्मा विभाग चार वर्णों की मेरी सृष्टि है जिसमें गुण और कर्म के आधार पर विभाजन होना चाहिए इससे पता चलेगा कि व ब्राह्मण है कि क्षत्रिय के वैश शूद्र है इस मैंने एक बार चर्चा करी थी ललन टॉप पर तो उसम वीडियो काट के लोगों को लगने लगा कि मैं शायद यह कहना चाह रहा हूं कि यह ऊंचे नीचे जबक मैंने कहा था कि गुण और कर्म के आधार पर भगवान कन्फर्म करते हैं जन्म के आधार पर नहीं कि आप कौन सी जाति के हो आपकी जाति क्या है साइको फिजिकल नेचर साइकोलॉजी कर्मा फिजियोलॉजी साइको फिजिकल नेचर के हिसाब से क्योंकि भगवान तो कहते कि विद्या विनय संपन्न ब्राह्मण गवित चाहे ब्राह्मण हो चाहे गाय हो चाहे हाथी हो शनी एव शपा केच चाहे कुत्ता हो या कुत्ते को मार के खाने वाला हो पंडिता सम दर्शना सबको समान दर्शन से देखा जाना चाहिए पर मैंने इस सेंसिटिव विशू पर आपको बात करते हुए सुना कहीं पर कि जहां भारत सरकार इंटरकास्ट मैरिज को प्रमोट करने की बात कर रही है दो लाख रप का इंसेंटिव भी देती है वहा आप इसे गलत मानते हैं तो आपके गलत मानने का क्या आधार हुआ मेरा आधार मुझे लगता है जस्ट कि ना हम जिस घर में जन्म लेते हैं उस घर की अपनी कुछ विचारधाराएं होती है कुछ रूल्स होते हैं कुछ धार्मिक भावनाएं होती है अब मान लीजिए मैं एक सनातन धर्म को हम फॉलो करते आ रहे हैं अचानक से आपको एक ऐसा परिवार मिल जाए या आप ऐसे परिवार में शादी कर लेते हैं जहां सनातन की बात ही नहीं होती हो जहां राम और कृष्ण की बात ही ना होती हो या अगर सिर्फ जाति वाली भी बात हम करें तो जाति में भी हर एक जाति ब्राह्मण क्षत्रिय सबके अलग-अलग तरीके हैं पूजा के रिचुअल्स जितने भी है सबके अलग-अलग है अब आपको एकदम सब कुछ चेंज करना अपनी आदतें अपनी पूजा पद्धति वो आपके लिए बहुत डिफिकल्ट हो जाएगा क्योंकि आप बचपन से सिखाया गया है भाई सुबह उठ सब कहां करते हैं पूजा पाठ तो सब कपल्स बोलते डिंक्स डिंक्स का मतलब है डबल इनकम नो किड्स तो करना चाहिए ये अब मतलब ऐसा तो नहीं है ना कि मेजोरिटी फॉलो कर लेती है तो सही हो जाता है गलत गलत है चाहे कितने भी लोग उसको सही करने में लग जाए तो इस आधार पर मुझे लगता है कि बहुत सारे नियम चेंज हो जाते हैं जो कई बार आप बाद में फॉलो नहीं कर पाते हो चाहे वो इंटरकास्ट में आप यह ले लीजिए कोई हिंदू लड़की है किसी मुस्लिम लड़के से शादी हो जाती है वहां सब कुछ अलग है खाना अलग है पहनना अलग है दिन चर अलग है लाइफ स्टाइल अलग है तो अब एकदम से वह चेंज कर पाना और कर भी ले मान लीजिए मुझे कोई कहता है कि जो तूने अब तक 20 से 25 साल तूने जिया है तूने या भगवान में आस्था रखी है या उनको माना तू अब छोड़ दे क्यों क तेरा धर्म खत्म अब तू यह वहा वहां की नहीं रही तो कितना बड़ा लॉस है हमारे लिए जब आप अपना अस्तित्व खो देते हो इस दुनिया में सबसे बड़ा लॉस पैसे या उसका नहीं है अपनापन खो जाना अपना अस्तित्व खो देना मुझे लगता है वो दुनिया का सबसे बड़ा लॉस है एक श्लोक आता है गीता में जिसको मैं आपको समर्पित करना चाहूंगा यद यद आच रती श्रेष्ठ तत एव तरो जना जैसा जैसा श्रेष्ठ लोग करेंगे वैसा वैसा बाकी लोग भी करेंगे तो आपने विवाह किया और जो आपने विवाह किया तो लोग डेस्टिनेशन वेडिंग में बिलीव करते थे लेकिन आपने जो है गौ सेवा धाम एक समझो कि एक तरह से आपने गौशाला में विवाह किया है ना और ये आपने अ ये मैं ठीक जानता हूं ठीक सुना मैंने हां बिल्कुल बिल्कुल यह जो गौसेवा धाम है यह हमारे ही द्वारा चलाया हुआ एक हॉस्पिटल है गायों का उसी का परिसर है उसी में विवाह हुआ था और उसका कारण भी यही था लोगों को इस चीज को आप थोड़ा सा घर के पास जाए ब्रजमंडल के पास में तो आगरा के अंदर रोय अमर विलाज है ताज होटल है सब है तो आपने सोचा नहीं वहां बड़ी पार्टी रखते हैं नहीं नहीं ऐसा हम हमारा पहले से ही मन में विचार था परिवार का कि ऐसा कुछ क्योंकि मैं कथा में पहले से बोलती आई थी मैं पहले से ही शादी में दहेज लेना देना इसके खिलाफ थी मुझे यह था कि भाई आप जिन लोगों को शादी में बुलाते हो खिलाते हो वो ऑलरेडी फुल जो है ना अपने घरानों से भी समर्थवादी में डाल के चले जाते हैं और आप कहते हो आपने अपने जीवन की शुरुआत एक बड़े अच्छे तरीके से करी दुआएं लेके की ये कैसी दुआ ये कैसा आशीर्वाद है आपने सोचा कि मैं उस पैसे को बचा के गायों की सेवा में लगा दूं मैं हां बिल्कुल कथा में भी हम मैं बोलती हूं कि जैसे आप शादी में करोड़ों रुपए खर्च करते हो पार्टी देते हो एक पार्टी गौशाला में गायों को जाके दे दीजिए आप कहिए कि आज यह शादी की पार्टी गायों के लिए गौ माता क्योंकि वोह भूकी है उनको जरूरत है हमको जरूरत आवश्यकता उतनी नहीं है जितनी उनको है कोई अनाथ आश्रम है कोई ऐसी जगह जाकर के आप कुछ दसवां हिस्सा जो अक्सर कहते हैं वह जाकर के कर दीजिए और फिर बात यह आती है कि भाई अगर आप लोगों को करके दिखाएंगे शायद उससे वह लोग ज्यादा इंस्पायर होंगे तो पहले भाई की शादी थी वो भी हमने ऐसे ही वहीं पे उसी स्थान पर करी हां और लोगों को अभी भी वहां बहुत सारे लोग आते हैं वहां बोलते हैं कि हमें यहां पर अब वहां थोड़ा स्थान कम है पर उनकी इच्छा जरूर रहती है कि हम भी ऐसे ही यहीं पर इसी परिसर में करें मुझे भी लेके चलिए वहां मैं जरूर देखना चाहूंगा सेवाधाम आपके साथ में गायों का जो अस्पताल आपने बनाया है शादी से पहले आप व्रत वगैरह रखते थे आप पर्सनल लाइफ में व्रत फस्टिंग जी मैं बचपन से बचपन से एकादशी व्रत एकादशी वत र एकादशी महीने में दो बार आती है हम समझते राधाष्टमी जन्माष्टमी राधाष्टमी जन्मा कुछ कुछ मुख्य बाकी एकादशी एकादशी का व्रत रखते एकादशी साल में मतलब 24 व्रत हो गए हां महीने में दो आती है भगवान भी वैसे बोलते हैं रेगुलेटेड लाइफ होनी चाहिए युक्ता हार विहारस युक्त कर्मस सब कुछ युक्त होना चाहिए रेगुलेटेड होना चाहिए फास्टिंग को लेकर के हमने देखा कि आजकल लोग हल्दीराम बीकानेर वाला चाय उसकी पूरी व्रत की थाली निपटा देते हैं और व्रत की थाली बढ़िया से खा करके अपने हिसाब आपके हिसाब से व्रत रखने का सही तरीका क्या है देखिए पहली बात तो यह है कि भूखा रहना व्रत नहीं होता उपवास उपवास का मतलब होता है उप माने नजदीक निकट वास मतलब रह भगवान के नजदीक रह ये उपवास हो गया अब आप भूखे रह के सकते तो अच्छा है नहीं तो हल्दी राम की थाली खाने में दिक्कत नहीं है नहीं दिक्कत मतलब व्रत वाली थाली जो व्रत वाली थाली लेकिन किसी को शरीर में कोई परेशानी है कि भाई हम तो कई लोग होते हैं हम तो व्रत इसलिए नहीं रख रहे क्योंकि हमको भूखे नहीं रह सकते उसके लिए एक ऑप्शन है स्टेप बाय स्टेप चलिए पहले कुछ ऐसा ऑप्शन रखिए कि आप दूध चाय ये जो है ये ले रहे हैं या उसके बाद थोड़ा फ्रूट्स ले रहे हैं फिर कोई और कहता है नहीं जी हमें तो बीमारी हमें तो ये है तो उसमें आप खाना थोड़ा भी ऐसा रख सकते लेकिन कम से कम रखिए यह तो ठीक नहीं है कि आप व खाए जा रहे खाए जा रहे भूखे रहने का मतलब क्या भूखे आप मतलब अन्न नहीं खाओगे तो आपको आलस नहीं आएगा अन्न में खाने में ज्यादातर आलस होता है तो वो नहीं आएगा नींद कम आएगी नींद कम आएगी तो उतना देरा भगवान का भजन ज्यादा करो इसलिए कम खाइए यह बनाया गया लेकिन अब तो मुझे लगता है और दिन में इतना नहीं खाते होंगे जितना व्रत में खाते ऐसे लगता है कोई त्यौहार आ रहा है एकादशी नहीं कोई त्यौहार आ रहा है तो ये नहीं होना चाहिए नवरात्रों में भी नवरात्रों में भी नवरात्रों में भी वही सिस्टम चल रहा है कि बस खाते ही जा रहे हैं खाते ही जा रहे नहीं आपको अपने शरीर थोड़ा शरीर को भी तो पेट को भी तो रेस्ट सिस्टम को रेस्ट मिलना चाहिए अगर आप महीने में दो एकादशी करते तो दो दिन पेट रेस फड पर जाएगा तो इसलिए कम खाइए और ज्यादा से ज्यादा भजन करिए वो असली व्रत है बड़ा अच्छा बात बताया कि भाई उपवास का अर्थ है उप का मतलब निकट वास का मतलब रहना भगवान के नजदीक रहना अब भगवान के नजदीक रहने में आजकल धार्मिक चर्चा भी बहुत होती है और अभी तो इलेक्शन का टाइम रहा है और ज्यादा होने लग गई है तो आप सनातन धर्म बोलते हैं और कई लोग बोलते हैं कि हिंदू राष्ट्र बनाना है करके ये दोनों में अंतर क्या है अंतर मुझे नहीं लगता इसमें कोई अंतर है दोनों ही संबोधन है हां एक समय के बाद हिंदू राष्ट्र कहना उसको शुरू कर दिया गया सनातन एक शाश्वत जो रहता है इटरनल जो रहता है उसके रूप में कहा जाता है मैं जब भी संबोधित करती हूं तो ज्यादातर सनातन ही करती मुझे लगता है वह कहीं ना कहीं हमें भीतर से एक जोश देता है कि आप उस सभ्यता से जुड़े हो आप उस सनातन से जुड़े हो जो किसी के द्वारा बनाए गए नहीं है वो चलता आ रहा है वो इटरनल है उसका जन्म नहीं हुआ उसका अंत नहीं होगा वह हमेशा चलता रहेगा इसलिए उसको सनातन शाश्वत कहा जाता है तो उस रूप में मैं संबोधन को ज्यादा उपयोग करती बाकी हिंदू राष्ट्र भी वही है हिंदू और सनातन कोई भेद नहीं है साहब सुना है मैंने मैं कंफर्म नहीं कह सकती कि भाई एक हिंद देश के लोग रहते थे तो उसको हिंदू नाम से ज्यादा वो प्रचलित हो गया था बाकी मुझे लगता है सनातन कहना ज्यादा बेहतर है बेहतर है हां तो आप कह रहे हैं हिंदू राष्ट्र पर ज्यादा फोकस मत करो सनातन धर्म प फोकस कर नहीं नहीं मैं मुझे उसमें थोड़ा सा ज्यादा अपनापन फील होता अंतर नहीं है दोनों में अगर हिंदू राष्ट्र बनेगा तो भी सनातन की जय है और सनातन होगा तो भी सनातन की जय है तो तो बात है दोनों हाथ में लड्डू है वो कोई अलग थोड़ी है तो हिंदू राष्ट्र के विषय में जो बात चलती है वो कहीं ना कहीं सनातन को ई गौरव देता है लेकिन अगर कोई दूसरे धर्म के लोग भी साथ में रह रहे हैं और को एजिस्ट कर रहे हैं तो यहां लड्डू है तो व वो भी कोई जहर थोड़ी है वो भी तो बकुल नहीं है मैं तो हमेशा इस चीज का सत्कार करती हूं अ कि भाई सब समान है सबको अब आपका जन्म जिस धर्म में भगवान ने दे दिया है आप सनातन में जन्म लिए हो तो पूरे ईमानदारी से उसको निभाए अगर आपका जन्म भगवान ने सि धर्म में दिया है तो आप उसको पूरे ईमानदारी से निभाए भगवान जहां आपको जन्म देते हैं आप आप उस चीज के लिए बने हो मतलब अब मैं वैसे तो सनातन धर्म में हूं लेकिन मैं अपने धर्म का सम्मान नहीं करू यह गलत है य आप गलती कर रहे हैं मैं ये नहीं कहती मैं उस चीज में बिलीव नहीं करती कि भ आप अपना धर्म छोड़ के दूसरे धर्म में चले जाइए मैं छोड़ के दूसरे धर्म में चले जाऊ भगवान ने आपको य भेजा तो कुछ देके भेजा होगा ना कुछ सोच के भाई इसको इस घर में जन्म दो तो फिर वहां मुझे लगता सबका सम्मान होना चाहिए क्विकली क्योंकि अब बहुत समय होता जा रहा है अब मेरा इच्छा तो चलता रहे चलता रहे चलता रहे उससे पहले एक रैपिड फायर कर सकते हैं आपके साथ हां जी लेकिन इसमें अलाउड आपको मैक्सिमम एक वर्ड से एक सेंटेंस तक बोलना है इससे ज्यादा आप नहीं बोल सकते करी जी प्रवक्ता को कम बोलना बड़ा मुश्किल है बट कोशिश एक शब्द बहुत जरूरत पड़े तो एक सेंटेंस ठीक है ल गो वेरी फास्ट कटक टक टक टक कक आपको एक शब्द में डिफाइन करना है मैं लोगों के नाम लूंगा उनका नाम सुनता ही पहला शब्द आपके मन में क्या आता है जी ओके दिवंगत श्री राजीव दीक्षित देशभक्त ओ बागेश्वर बाबा महाराज सनातन धर्म प्रचारक श्रीमती जया किशोरी एक अच्छी सहपाठी जो भगवन नाम प्रचार कर रही है एक परिवार से बाबा रामदेव [हंसी] बड़ी क्रांति लाए भगवान कृष्ण भगवान कृष्ण चोरा ग्र गणम चित चोर सबसे बड़ा दुनिया का चोर मन चुराने वाला वाह डॉक्टर विवेक बिंदरा डॉक्टर विवेक बिंद्रा एक वास्तविक समाज के मार्गदर्शक ओके मैं अगले प्रश्न की तरफ मूव करता हूं आपकी स्ट्रेंथ के बारे में तो दुनिया जानती है और आपने आज बहुत सुंदर भजन सुनाया मैं इतना मंत्र मुख दुआ आपकी कोई कमजोरी एक जो आप बताना चाहे कमजोरी तो बहुत हो सकती है कमियां तो कहीं ना कहीं बहुत रहती है पर वो पॉजिटिव भी हो सकती है नेगेटिव भी हो सकती है मैंने अलाउड नहीं बोलना मैंने माना है कि मैं थोड़ा सा जल्दी विश्वास कर लेती हूं जल्दी विश्वास कर ठीक तो वो कभी कभी अच्छा और कभी बुरा दोन कोई ऐसा भजन जो आप खुद रोज सुनती हो भजन वैसे तो मैं महामंत्र सुनती हूं ज्यादातर तो लेकिन जैसे जय राधा माधव ये कुछ ऐसे संकीर्तन है जो मैं रोज सुनती जय राधा माधव जय कुंज बिहारी गोपी जन वल्लभ गिरिधर आज एक आदमी की जिंदगी में सबसे बड़ा डिस्ट्रक्शन होता है स्मार्टफोन या सोशल मीडिया आपकी लाइफ में डिस्ट्रक्शन कौन है सोशल मीडिया या आपके अपने पति या कोई और कोई नहीं कोई नहीं इतना मीठा बोलने वाली देवी चित्रलेखा जी को गुस्सा आता है हां कभी-कभी पर एक्सट्रीम नहीं कभी देखो सिचुएशन से कभी भी हो जाती है कभी टीम से कोई फॉल्ट हो जाता है पर मुझे नहीं लगता मेरी टीम कभी यह मतलब ईगो नहीं घमंड नहीं बट यह कहे कि हमको इस बात के लिए मुझसे पर्सनली डांट पड़ी या तो ये कह लीजिए मेरे आगे टीम इतनी है कि वो खुद हैंडल कर लेती है बट सिचुएशंस के हिसाब से बट ऐसा नहीं आता कि मुझे उसको बाद में रिग्रेट करना पड़े ओके भगवान का अर्थ क्या है ऐश्वर्य समग्र जिसके भीतर छह षड गुण संपन्न हो जो यश हो बल हो जिसके भीतर जो कंप्लीट पैकेज हो ठीक है ओके अगर आपके पतिदेव गुस्सा हो जाए जी तो आप उन्हें कैसे मनाते हैं आप उन्हे गीत सुना के मनाते हैं या गीता का श्लोक सुना के मनाते हैं वैसे ऐसी कभी जरूरत पड़ती नहीं है कभी ज्यादा ऐसा कुछ होता नहीं है कि आप दोनों में ज्यादा गुस्सा किसे आता है आपको या आपके पति को ऐसा कभी गुस्सा नहीं होता कि भाई कभी-कभी मुझे किसी चीज से नाराजगी होती है तो वो मना लेते जब उनको होती है तो मैं मना लेती कहते हैं शादी का वो लड्डू है जो खाए वो पछताए जो ना खाए वो भी पछताए तो क्या करना चाहिए खा के पछताना चाहिए या बिना खाए पछताना चाहिए नहीं ये मुझे लगता है ये एकदम बेकार कहावत है ये आपके अपने दिमाग पर निर्भर करता है आप जो रास्ता चुनना चाहो आप आप अकेले खुश हो अकेले रहो आपको शादी कर शादी करो सन्यास लेना सन्यास लो ग्रस्त रहना वान प्रस्त लेना सब कुछ आप पर निर्भर है आपने बोला आपकी चॉइस है कौन से आश्रम में जाना चाहते हैं स्पिरिचुअल लाइफ को लेक सबसे बड़ा मिसकनसेप्शन क्या है इसके लिए घर छोड़ना पड़ता है ठीक है ओके आपका फेवरेट कथावाचक कौन है बागेश्वर महाराज जया किशोरी देवकी नंदन ठाकुर जी राम भद्राचार्य जी महाराज या कोई और सभी सम्माननीय है सब मैं कथावाचक नहीं लेकिन जिनको ज्यादा सुनती हूं श्री प्रेमानंद म जी भगवत गीता में जब भगवत गीता पूर्ण होने लगती है तो संजय कुछ कहते हैं मैं उनकी बातों को आज रिपीट करूंगा इस वीडियो को पूर्ण होने से पहले व क्या कहते हैं संवाद मशम अदभुतम रोम हर्षण तो इतना अद्भुत संवाद हुआ आपके साथ कि रोम हर्षण हो रहा है वो कहते कि राजन सम स्मृत्य सम स्मृत्य राजन इस कथा को याद कर कर के संवाद ममम अदभुतम बड़ा अद्भुत संवाद रहा बहुत लर्निंग मिली आपके साथ केशव अर्जुन पुण्यम हरि श्यामी च मोहर मोहर तो वो भजन भी सुनके आपकी चर्चा सुनके मैं इतना हर्षित महसूस कर रहा हूं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं देवी चित्रलेखा जी आप पॉजिटिविटी का वो एयर कंडीशन है जो जहां जाती है वहां की हवा में संस्कार और सत्संग की शीतलता को घोल देती हैं कैसा भी स्ट्रेस हो कोई एक बार भी आपकी बात सुन ले तो उस अपने आप में ठंडा ठंडा कूल कूल हो जाता है और जहां भी यत्र योगेश्वर कृष्ण यत्र पार्थ धनुर्धर जहां भी यह भगवत गीता का ज्ञान मिलता हो वहां पर हमें हमेशा विजय होगी और व्यक्ति आगे बढ़ता चला जाएगा तो आज के यूथ को आप मोटिवेट करती हैं धर्म के राह पर आप उनको नेविगेट करती हैं अपने इस उद्देश्य में ऐसे ही लगे रहिए हमारे साथ जुड़ने के लिए इस मंच की गरिमा को बढ़ाने के लिए आपका हृदय की गहराई से प्रेम पूर्वक बहुत-बहुत धन्यवाद और हमारे सारे व्यूवर्स को बहुत धन्यवाद कि उन्होंने इस अध्यात्मिक चर्चा को सुना नीचे कमेंट बॉक्स में बताइए द विवेक बिंद्र शो में आप अगली दफा किससे मिलना चाहेंगे न बहुत बहुत धन्यवाद राधे राधे और [संगीत]

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