India's Waiting Prime Minister Lal Krishna Advani Case Study Dr Vivek Bindra
[संगीत] नए हफ्ते से पहले कुछ नया बताऊंगा चाहे वीक डे हो या वीकेंड हो उसको सीख एंड बनाऊंगा वीकेंड को सीख बनाऊंगा नमस्कार आपका अपना विवेक बिंद्रा फाउंडर ए स bab.com करने आ गया हूं आपसे काम की बात आज एक बहुत बड़ी बात आज एक ऐसे आदमी के बारे में बात करूंगा जिसने भारत का नैरेटिव बदल दिया भगवत गीता में कृष्ण कहते हैं राज सुख लोभे न राज सुख के लिए जीवन नहीं जीना है अर्जुन तू युद्ध जो करने जा रहा है ये राज सुख के लिए नहीं ल रहा है मेरी हर वीडियो में लाइफ लेसन छिपे होते हैं आज बात करूंगा श्री एल के आडवानी जी के लिए आज की केस स्टडी एक ऐसे भारत रत्न की जो पैदा पाकिस्तान में हु एक पाकिस्तानी सिंध परिवार से हो करके पूरा जीवन हिंद के लिए लगा दिया जो आरएसएस से 14 साल की उम्र में जुड़ गए थे पार्टीशन के समय रिफ्यूजीस के रिलीफ के लिए उनके रिहैबिलिटेशन के लिए उनको खड़ा करने के लिए अपना दिन रात अपना खून पसीना एक कर दिया एक ऐसे किंग मेकर जिसने आरएसएस और पार्टी के विरोध में जाकर के पीएम कैंडिडेट के लिए अपनी जगह अपने दोस्त का नाम आगे दिया इसे बोलते हैं राज सुख लोब ने कपार जाना इसको बोलते हैं नया नैरेटिव पैदा कर देना हां इसको बोलते हैं एक ऐसा व्यक्ति जो जब सब कुछ आपके हाथ में हो तब छोड़ने को तैयार हो जाना लोग तरक्की के लिए दोस्त को त्याग देते हैं इन्होंने दोस्त के लिए तरक्की को त्याग दिया आज तक इनको वेटिंग प्राइम मिनिस्टर बोला जाता है जिसने आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को टैलेंट को उस समय आइडेंटिफिकेशन दारिया दी आज उनके यंग लाइफ में उनके उस समय के पोटेंशियल को आइडेंटिफिकेशन के आडवानी एक ऐसे संस्कारी व्यक्ति हम जिनको सारी पॉलिटिकल पार्टी से ऊपर देखा जाना चाहिए 11 बार सांसद रहे चार बार राज्यसभा सात बार लोकसभा साथ ही लेजस लांगेस्ट सर्विंग बीजेपी चीफ रह चुके हैं समय का मोल इन्होंने बहुत सिखाया मेरा पहला अध्याय समय से पहले समझ गए थे समय को हां मीटिंग या कोई भी इवेंट प पहुंचना एक आम बात है लेकिन अगर कोई सेलिब्रिटी हो कोई नेता हो कोई सुपरस्टार हो कुछ स्पोर्ट्समैन हो तो ये एक्सपेक्ट किया जाता है वो समय पे नहीं आएगा वो लेट आएगा आडवानी इस बात के लिए पॉपुलर पसे के अपोजिट थे 50 साल से ज्यादा के करियर में आडवानी कभी भी अपनी जिंदगी में किसी भी मीटिंग या किसी भी रैली में एक सेकंड भी लेट नहीं हुए जितने महान लोग हुए ना उनके कॉमन ट्रेट में एक कॉमन ट्रेट रहा है टू वैल्यू द टाइम मैंने बिलिनियर हैबिट के ऊपर एक वीडियो बनाया था उसमें मैंने डिटेल में बात करी थी आडवानी जी के टाइम को लेकर के डिसिप्लिन के पीछे एक बहुत बड़ी कहानी है जो उनका ट्रिगर पॉइंट था उस समय पाकिस्तान में ये छुट्टियों के बाद बचपन में अपने दोस्त के साथ में टेनिस खेल रहे थे उसका नाम था मुरली मुखी और बढ़िया टेनिस खेलते खेलते अचानक मैच के बीच में दोस्त ने घड़ी देखी और मैच छोड़ के निकल गया बोला मैं जा रहा हूं अडवाणी ने पूछा तुम अपना सेट तो पूरा कर ले भाई ऐसे कैसे बीच में जा रहा है दोस्त ने बोला नहीं नहीं मैंने आरएसएस जवाइन किया है शाखा में लेट नहीं जा सकते बहुत डिसिप्लिन सिखाया जाता है वहां छोटे से लेकर बड़े तक सभी टाइम से पहुंचते हैं ये वो मोमेंट था जो ट्रिगर हुआ था उनके लाइफ में छोटी उम्र में ना ऐसे संस्कार मिलने बहुत जरूरी होते हैं वो जो डिसिप्लिन टाइम का सीखा उन्होंने आडवानी आरएसएस के बारे में उनको क्यूरियोसिटी पैदा हुई उन्होंने आरएसएस जॉइन कर लिया आडवानी ने डिसिप्लिन और पंक्चुअल का ये सबक जिंदगी भर अपने साथ रखा है चाहे डेप्युटी प्राइम मिनिस्टर हो होम मिनिस्टर हो बीजेपी के चीफ हो या लीडर ऑफ अपोजिशन रहे हो आडवानी अपने करियर में कभी जिंदगी में लेट नहीं हुए एक ऐसा नया नैरेटिव पैदा किया वही मैं भारत के लिए करना चाहता हूं एक ऐसा नैरेटिव देना चाहता हूं हर बच्चा हर बड़ा इन सारे वीडियोस को देख करके इतना कुछ सीखेगा दो उस के लिए उन्होंने अपनी कुर्सी छोड़ दी थी ये मेरा दूसरा अध्याय खेल में ना दो प्रकार के खिलाड़ी होते हैं एक होता है जो रिकॉर्ड और माइल स्टोन के लिए खेलते हैं और दूसरा अपनी टीम के लिए खेलते हैं ये टीम प्लेयर थे आडवानी बीजेपी के ऐसे टीम प्लेयर थे जिन्होंने हमेशा पार्टी को प्रायोरिटी पे रखा अपने आप को पीछे रखा इसका एक एग्जांपल 1995 का बताता हूं आपको आडवाणी को प्रधानमंत्री पद के लिए सब बहुत पसंद करते थे आरएसएस से लेकर के पार्टी से लेकर सबकी पहली पसंद लाल कृष्णा आडवानी विजनरी आडवानी के मन में कुछ और ही चल रहा था चुनाव जीतने से लेकर के सरकार बनाने तक सरकार को ठीक से चलाने तक उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया और यह फैसला था जिसने आरएसएस और बीजेपी को उनके सबसे अच्छे दोस्त अटल बिहारी वाजपेई को सरप्राइज कर दिया क्या फैसला था ये मालूम मुंबई की बात है ये मुंबई में पार्टी सभा चल रही थी हजारों लोग बैठे थे आडवाणी ने उस समय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे उस टाइम प वह प्रेसिडेंट थे अचानक घोषणा कर दी अगले चुनाव में अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री के उम्मीदवार होंगे आरएसएस और पार्टी के सारे लीडर हैरान हो गए एकदम आश्चर्य चकित इनफैक्ट अटल जी को भी अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ कर देंगे अटल ने कहा अटल जी ने कहा कि आडवाणी जी आपने मुझसे पूछा नहीं मैं इस फैसले को मानूंगा नहीं आपने मुझसे पूछे बिना मुझे कैसे प्रधानमंत्री घोषित कर दिया आडवाणी मुस्कुराते हुए बोले मैं पार्टी का अध्यक्ष हूं पार्टी में डिसिप्लिन है इस नाते आपको मेरा डिसीजन मानना पड़ेगा क्योंकि वैसे भी मैं अगर आपसे पूछ लेता तो आप मना कर देते और आप मना कर देते तो बात बनती नहीं आडवाणी जी ने कहा कि आप मुझसे बेहतर कैंडिडेट है इसको बोलते हैं मेरीटोक्रेसी राज सुख लोभे जो कृष्ण ने अर्जुन को सिखाया था कि राज सुख के लिए काम नहीं करना है जो बेहतर हो उसको आगे लेकर जाना है इस फैसले के बाद 1996 में अटल बिहारी वाजपेई पहली बार प्रधानमंत्री बने थे अटल आडवाणी की जोड़ी राम लक्ष्मण की जोड़ी जैसी मानी जाती न साल छोटे थे आडवाणी अटल जी से हमेशा छोटे भाई की तरह उनका साथ दिया जिंदगी राज भी पॉलिटिक्स में इनकी बेस्ट जोड़ी अटल आडवाणी जी को माना जाता है और उन्हीं दिनों इनके ऊपर एक दोष लगा और बोले जब तक निर्दोष नहीं तब तक चुनाव नहीं राजनीति में कुर्सी पाना मुश्किल है लेकिन कुर्सी छोड़ना उससे भी बहुत ज्यादा मुश्किल है एक बार कुर्सी मिल जाए तो चस्का लग जाता है वो स्वाद लग जाता है अपोजिशन ने एक्यूजेशन इनके ऊपर लगाया और उन्होंने जो है ना अपने आप को पद से दूर रखने का काम बहुत कम लोग कर पाए आडवाणी जी ने किया 1996 के चुनाव से पहले कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरसिंहा राव हुआ करते थे नरसिंहा राव ने आडवाणी के ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया आडवाणी ने ₹ लाख रप लिए किसम हवाला कांड में जैन हवाला कांड में ऐसे में आडवाणी ने पहले नेता ऐसे थे जिन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया लो भैया मैं चला जब तक प्रधानमंत्री के चुनाव से सिर्फ तीन महीने पहले अनाउंस कर दिया कि इस मामले में जब तक क्लीन चिट नहीं मिलेगी तब तक सदन में कदम नहीं रखूंगा सदन में कदम नहीं रखूंगा इसको बोलते हैं बियोंड राज सुख लो बेना हां इसको बोलते हैं भगवत गीता को जीवन में उतारना आचरण पहले आचार फिर प्रचार 1996 का वो चुनाव जिसमें भाजपा पहली बार जीत करके आई थी प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेई लेकिन आडवाणी ने चुनाव ही नहीं लड़ा आडवाणी ने अपना केस हाई कोर्ट में जाकर चैलेंज किया अगले साल कोर्ट की कार्यवाही चली आडवाणी ने फैसले का इंतजार किया एक साल के बाद 97 में हाई कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी को बाइज्जत बरी किया उसके बाद 98 से लेकर के 2019 तक लगातार ये सांसद रहे एग्जांपल दो नहीं एग्जांपल बनो हां ये मेरा अगला लेसन है आडवाणी जीसे मैंने सीखा आडवाणी उन चुर लीडर्स में से एक थे जो अपनी पार्टी में अपने कल्चर को एस्टेब्लिश करने के लिए अपने एग्जांपल को खुद सेट करते थे ये मेरिटोरियस पॉलिटिक्स नहीं चाहिए डायनेस्टी पॉलिटिक्स क्या है बाप बेटा अब अगर पिता है तो उसका पुत्र भी सांसद बनेगा ही बनेगा वो लड़ पड़ता है कि भैया इसको टिकट दिलाऊंगा मैं डायनेस्टी पॉलिटिक्स के विरोधी आडवाणी ने अपने परिवार में कभी भी अपने कद का फायदा उठाने नहीं दिया किसी को भी 1991 में एक ऐसा एग्जांपल सेट करके भी दिखाया था 91 में आडवानी दो सीटों से चुनाव लड़े थे नई दिल्ली से भी और गांधीनगर से भी नई दिल्ली पर सुपरस्टार राजेश खन्ना उस समय कितने बड़े सुपरस्टार थे ऐसे हरा दिया और गांधीनगर में भी जीत गए तो सबने उनको बोला यार आडवाणी जी अब तो दोस्तों ने समझाया कि आपका बेटा जयंत आडवाणी उसको पार्टी में लच करने का बेस्ट टाइम में जयंत आडवाणी का खुद का मन था कि मैं भी पार्टी में आ जाता हूं भाई जिंदगी सेट हो जाएगी मेरी पर आडवानी जी ने इस प्रपोजल को साफ मना कर दिया उन्होंने कहा कि अगर मैं अपने बेटे को सीट दे दी तो जिंदगी में कभी डायनेस्टी पॉलिटिक्स का मैं विरोध ही नहीं कर पाऊंगा इसी को तो कहते हैं नेपोटिज्म नेपोटिज्म मतलब पूरी लेनेज बाप बेटा पोता सबके सबको अपने आप फायदा मिलता चला जाएगा डेप्ट प्राइम मिनिस्टर रहे या मिनिस्टर रहे आडवानी ने अपने परिवार में पॉलिटिक्स में एंट्री या किसी भी प्रकार की पोस्ट किसी भी प्रकार की छोटी सी भी पोस्ट नहीं लेने दी बेटे जयंत आडवाणी आज भी पॉलिटिक्स से दूर अपना बिजनेस कर रहे हैं जहां आज लीडर्स एक बार राजनीति में आकर के दूर दूर के रिश्तेदारों को लाइफ सेट कर देते हैं आडवानी अपने एक लते बेटे को राजनीति में आने ही नहीं दिया कोई फेवर ही नहीं होने दिया पांचवी बात इनके बारे में जो मैंने सीखी इनसे है वो कारगिल में लाल कृष्ण आडवाणी कैसे काम आए कैसे उन्होंने स्ट्रेटजी बनाई 1998 में इंडिया ने पोखरण टेस्ट किया बड़े चुपके से इसके ऊपर मूवी आई थी आपने जरूर देखी होगी नहीं तो देखिएगा पोखरण का टेस्ट बहुत चुपके से करा दिया इंडिया एक न्यूक्लियर स्टेट है उस समय और उससे पूरा यूरोप और यूएस यूरोपियन यूनियन और यूएस इतना चिढ़ गया कि उन्होंने सारी डिफेंस डील कैंसिल कर दी कि हम आपको डिफेंस में कोई सपोर्ट नहीं करेंगे पाकिस्तान को लगा मौका मिल गया भैया मौके पर मारो चौका पाकिस्तान को गलतफहमी हो गई कि टर्मल की सिचुएशन है कश्मीर पर हमला कर देते हैं यूएस और यूरोपियन यूनियन इनकी मदद करेगा नहीं ऐसे में आडवानी जी ने देश को पहले तैयार कर रखा था 1999 में जब कारगिल पर हमला हुआ उस समय स्ट्रगल कर रहे थे हम लोग इतनी ऊंचाई के कारण पाकिस्तान के बंकर्स का पता लगाना मुश्किल था आडवानी जी ने डिप्लोमेटिक रिलेशंस का यूज किया इजराइल के प्रेसिडेंट उस समय थे एजर वाइजन वाइजमैन को उनका सपोर्ट जाकर के लिया और इजराइल से अपने सबसे एडवांस लेजर डेजिग्नेटर सिस्टम क्या होता है लेजर डेजिग्नेटर सिस्टम जिससे दुश्मन को इनविजिबल बीम ऐसी बीम जो कि दिखती ना हो उससे टारगेट करके पिन पॉइंट एक्यूरेसी के साथ हमला किया जा सके ये इजराइल से जाकर के ले आए बहुत स्मार्ट थे इनको इनके पास हमेशा ना बांटना होता था बेटर अपॉर्चुनिटी टू नेगोशिएट एग्रीमेंट यूरोप नहीं आएगा यूएस नहीं आएगा इजराइल से दोस्ती कर लूंगा जिसके बाद इंडिया ने 3000 पाकिस्तानियों को उस समय इनविजिबल लेजर बीम से एक्यूरेसी के साथ मारा और हजारों सैनिकों को खदेड़ के बाहर निकाल दिया वॉर के बाद इंडिया ने इजराइल को अपना मित्र देश बनाया सन 2000 में इजराइल से डिफेंस डील के लिए डिफेंस मिनिस्टर उस समय जॉर्ज फर्नांडीस थे लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि भारत का होम मिनिस्टर जाकर के डिफेंस की डील करके आए वरना होम मिनिस्टर जाक डिफेंस डील नहीं करते डिफेंस मिनिस्टर डिफेंस डील करते हैं और आडवाणी जी के से मैंने एक और चीज सीखी कि ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे ये दोस्त के जाने का इनको दुख बहुत था 2004 के बाद जब अटल जी की तबीयत खराब रहने लगी तो वो एक्टिव पॉलिटिक्स से वो दूर हो गए तब से आडवानी जी उनकी तबीयत पूछते रहते थे उनकी हेल्थ के लिए प्रार्थना करते रहते थे अलग-अलग मंदिर जाते थे 20181 में आडवानी जी की तबीयत भी खराब रहने लगी अ इतनी ज्यादा खराब रह डॉक्टर ने उनको घर से बाहर निकलने को मना कर दिया लेकिन जब अटल जी को एम्स में एडमिट होते हुए देखा तो आडवानी जी जिनको खुद को अलाउड नहीं था घर से निकलना वो खुद उनको खड़ा होकर के चलना अलाउड नहीं था वो रोज एम्स पहुंच जाते थे किन से मिलने अटल बिहारी वाजपेई जी से उनको अपने भाई की तरह राम लक्ष्मण की जोड़ी 16 अगस्त 2018 की व सुबह उनकी बेटी है प्रतिभा और प्रतिभा के साथ वो अटल जी से मिलने के लिए हॉस्पिटल पहुंचे अडवाणी घंटों बाहर वेटिंग रूम में वेट करते रहे थोड़ी देर के लिए उनसे मिल पाए लेकिन पूरे रास्ते रेस्टस रहे उस दिन उस दिन ना उनको कुछ अजीब सी बेचैनी लग रही थी वो एक शब्द भी नहीं बोले किसी से मिलने से मना कर दिया कुछ खाने से बंद कर दिया अपने आप को कमरे में बंद कर लिया और उनको ऐसा लगा कि जैसे मैं दोस्त से आज आखिरी बार मिल कर के आ रहा हूं और आडवानी जी की ये बेचैनी सच्चाई में बदल गई उस दिन शाम को 5:00 बजे अटल जी ने अपनी जीवन की इस शरीर में आखिरी सांस ली 90 साल की आडवानी जो पिछले कई सालों से फिक्स्ड और स्ट्रिक्ट डाट और रूटीन फॉलो किया करते थे उन सुबह से कुछ भी खाने पीने को मना कर दिया दवाई ले नहीं रहे थे कई घंटों बेडरूम में खुद को बंद किया हुआ था डॉक्टर्स ने दवाई लेने के लिए फोर्स किया डॉक्टर्स की सुनी नहीं उसके बाद में उस समय जो फॉर्मर फाइनेंस मिनिस्टर हुआ करते थे जसवंत सिंह उनकी वाइफ आ कर के उनको हाथ जोड़ करके दवाई खिलाई आडवानी जी ने बोला एक कंडीशन पर दवाई खाऊंगा अगर मुझे अटल जी के पार्थिव शरीर के पास जाने दिया जाए बेडरूम से निकले कृष्णा मेनन मार्ग पहुंचे वहां जाकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी के पार्थिव शरीर को जहां रखा गया था वहां पहुंच गए अपने सबसे खास दोस्त और पॉलिटिकल पार्टनर अटल के जाने के बाद आडवाणी जी ने पॉलिटिक्स से सन्यास ले लिया और 2019 के बाद कभी चुनाव में वो लड़े नहीं आडवाणी जी एक ऐसे व्यक्ति थे जो गलत को उतनी ही सच्चाई से हमेशा गलत कहते थे यह गलत है तो गलत है सही है तो सही है उनके ऊपर कई बारी बदनामी का नाम लगा किस बारे में आप जानते हैं 1992 में जो कांड हुआ था आडवाणी जिने हमेशा हाड लाइनर बताया गया था उनकी एक सॉफ्ट साइड भी थी वायलेंस को सपोर्ट नहीं किया उन्होंने जहां गलत हुआ बड़ी सच्चाई से बोला कि ये गलत है 1990 में आडवानी रथयात्रा शुरू करी थी उनका आईडिया था कि वायलेंस से दूर जैसे गुजरात में सोमनाथ का मंदिर है सुंदर ऐसे ही अयोध्या का मंदिर भी बनना चाहिए बहुत सुंदर 6 दिसंबर 1992 वो खास दिन जब कार सेवकों ने प्रोटेस्ट का वायलेंस हो गया वहां जाकर के आडवाणी वो व्यक्ति थे जिसने उनका खुल के विरोध किया कि नहीं होना चाहिए वायलेंस आडवानी उस उस समय अयोध्या में वहीं पर ही थे पर सिक्योरिटी को खूब रिक्वेस्ट किया कि मुझे कार सेवकों से मिलने दो मैं रोक दूंगा वो मेरी बात मान जाएंगे वो नहीं करेंगे वायलेंस पर पुलिस सिक्योरिटी रीजन के कारण वो कार सेवकों से नहीं मिल पाया उस दिन उस घटना के बाद आडवाणी ने सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली और अपोजिशन पद के लीडर से लीडरशिप की पोजीशन से उन्होंने इस्तीफा देने के लिए भी बोल दिया क्या लीडर्स ने उनको मना कर दिया ऐसा करने के लिए बहरहाल 2020 में कोर्ट ने बाबरी विध्वंस मामले में फैसला सुनाया आडवाणी को बाई जत बुरी किया लेकिन आज भी मोरल रिस्पांसिबिलिटी लेते हुए आडवाणी ने उस दिन को अपने जीवन का सबसे का काला दिन बताते हैं उसकी जिम्मेदारी आज भी वो मोरली अपने ऊपर लेते हैं इसको बोलते हैं कैरेक्टर एंड कॉम्पटन इसको बोलते हैं प्रिंसिपल बिफोर प्रॉफिट और ये प्रिंसिपल बिफोर प्रॉफिट आप में से जो जो लोग लीडरशिप फन में आए वो हमेशा याद रखते हैं कि हम सबसे पहले प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं लास्ट में प्रॉफिट पर फोकस करते हैं प्रॉफिट गोल नहीं होता प्रॉफिट आउटकम होता है आडवानी के जीवन में भी ऐसा ही रहा राज सुख लोभे ना आउटकम है इसीलिए वेटिंग प्राइम मिनिस्टर बोलते हैं ये ऐसे व्यक्ति इतने डिसिप्लिन व्यक्ति रहे कि 90 साल की उम्र में भी 90 से ऊपर इनकी अटेंडेंस थी 90 से ऊपर मतलब क्या हुआ एज इनके लिए नंबर था ओल्डेस्ट मेंबर ऑफ पार्लियामेंट 16वीं लोकसभा 86 साल की उम्र से लेकर 911 साल की उम्र 911 साल की उम्र समझते हैं आप आज आप 3035 साल के लड़के को बोल दो भाग के दिखाओ थोड़ी देर तो हाफ जाएगा एल के आडवाणी ने उस समय रिकॉर्ड बनाया था पार्लियामेंट में 92 पर अटेंडेंस का 90 साल से ज्यादा उम्र थी 92 पर अटेंडेंस था 2014 से 19 में से उससे भी ज्यादा इनकी अटेंडेंस रही 2014 से 19 में जो थी वो कम थी वो 91 थी शायद और आप जानते हैं कि ये ये बाकी सारे मिनिस्ट इसको ऐसे समझो 922 पर अटेंडेंस अपने आप में आइसोलेशन में समझ में नहीं आएगा कंपैरिजन में समझ में आएगा भगवंत मान जो आज चीफ मिनिस्टर है इनकी अटेंडेंस 56 पर रहा करती थी हां सुवेंदु अधिकारी जो बंगाली है उनकी अटेंडेंस फॉर्मर मिनिस्टर 21 पर अटेंडेंस रहा करती थी अभिषेक बैनर्जी उनकी वो नेशनल सेक्रेटरी टीएमसी के अटेंडेंस 28 पर देवे गौड़ा जी की 55 पर अखिलेश यादव फॉर्मर चीफ मिनिस्टर 32 % अमरिंदर सिंह फॉर्मर चीफ मिनिस्टर 6 पर अटेंडेंस और ये 92 पर ऐसे इंस्पायरिंग स्टोरीज के साथ मैं चाहता हूं कि आऊ और देश का नैरेटिव बदल दूं यह चलिया जो है ना 40 दिन का नहीं होता डिसिप्लिन का ये जिंदगी भर का होता है ये जनवरी से लेकर दिसंबर तक चलता है इस प्रकार का डिसिप्लिन मैं चाहता हूं लोगों के बीच में लाकर के दे सकूं और इसी प्रकार का डिसिप्लिन बिजनेस के 52 फ्रेमवर्क 52 हफ्ते 52 के 52 हफ्ते जनवरी से लेकर दिसंबर तक मैं हाथ पकड़ के लीडरशिप फल में कराता हूं ताकि आपके पास में प्रिंसिपल बिफोर प्रॉफिट खे और एग्जीक्यूशन करना जाने कि कैसे अपने बिजनेस को बड़ा करें ऐसे कैरेक्टर के साथ में भारत को बदलना चाहता हूं उन वीडियोस को शेयर कर कर है समय लगाइए इन वीडियोस को देखा करिए अपने ऊपर समय लगाइए अपनी लर्निंग पर समय लगाइए [प्रशंसा] और [संगीत]
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