Rasraj Ji Maharaj - Hanuman Chalisa, Shri Ram aur Krishna Ki Bhakti, Sundarkand Paath, Bajrang Baan

वो क्षण कौन सा था वो मेरी जानने की इच्छा है वो क्षण जिसम मैं आपने अपने आपको को हनुमान जी के चरणों में उनकी भक्ति में उनकी सेवा में अपने आप को लगा दिया जिस जो समर्पण आपने कर दिया वो क्षण क्या था हनुमान का अर्थ हुआ भगवान राम का अर्थ हुआ कृष्ण का अर्थ हुआ कि तुलसी धारण करनी आपने रुद्राक्ष धारण करिए बाथरूम में हनुमान चालीसा गा देते अ आप थोड़ा बताओ ये अपराध है या यह भगवान का बोध है भगवान राम थे उन्होंने वध कब किया रावण का दशहरे पर किया तो भगवान की जो वापसी एग्जिट थी वो दशहरे पर थी कि दिवाली पर थी जय श्री राम बोलना ठीक है या जय सियाराम बोलना ठीक है नमस्कार मैं डॉक्टर विवेक बिंद्रा फाउंडर ए सीओ बड़ बिजनेस कॉ जहां राम का नाम जप हो वहां हनुमान स्वयं चले आते हैं और जहां बात हो राम भक्त हनुमान की वहां इनके भजन सुनाए जाते हैं मैं विवेक बिंदरा आज स्वागत करता हूं डॉक्टर विवेक बंद्र श में और आज इनकी बात कर रहा हूं इनकी भक्ति करने का अंदाज बुलेट ट्रेन से कम नहीं है बोले ट्रेन से कम नहीं है जिस सुंदरकांड पाठ को पढ़ने में मिनिमम एक घंटा लगता हो वह 48 मिनट में क्षमा चाहता हूं 38 मिनट में पूरा कर लेते 27 मिनट में 11 बार हनुमान चालीसा पढ़ लिया जय हनुमान जन गुण सागर जय कप लो जागर मन तना पवित्र हो रहा है क्या बताऊ आपको इनके मुंह से निकला बजरंग बांड रातो रात सोशल मीडिया पर होना ही चाहिए वायरल होता है राम नाम की तरह इनके नाम में भी रस है स्वागत करते हैं रसराज जी महाराज का बहुत-बहुत धन्यवाद जय सियाराम कितनी जल्दी भगवान के पास जाओगे आप कितना प्यार कर लोगे भगवान से इतना प्रेम कैसे कर लेते हो आप ये मतलब कैसे निकल रहा है मतलब हम लोग भागते हमारे यहां से हाथों में से पसीना निकलता है आप भागते हो तो आपके अंदर से भजन निकलता है ये पता नहीं किसने मेरे नाम पर ठप्पा लगा दिया कि जल्दी जल्दी कर देते जल्दी जल्दी कर देते मैं तो हनुमान चालीसा इतना विलंबित गा सकता हूं जो यह पड़े हनुमान चालीसा जो यह पड़े हनुमान चालीसा हो यह सिद्धि साखी गौरी सा और ऐसे भी गा सकता हूं श्री गुरु चरण सरोज रज निमन मुगुर सुधारी र्न रघुवर विमल जस जोदा एकक पल चारी बुद्धिहीन रजान के सुमरो बन कुमारी बलु विद्या देव मोही हरो कलेश विकार जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपी लोक जागर रामदूत त बल धामा अंजनी पुत्र पवन सुत नाम महावीर विक्रम बजरंगी कुत निवास सुमत के संगी कंचन र्ण विराज सुसा कुंडल के हाथ बरा काे मने सा ज शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप जंदन विद्यावान ऐसे भी गा सकते मैं गुरुदेव एक बात बताऊ कैंडिड इंटरव्यू है कैंडिड चर्चा है ठीक है मैं थोड़ा आगे पीछे जाऊ मेरे अपराध को क्षमा कर देना क्योंकि देखो मेरे पास ज्ञान नहीं है ठीक है मैं क्या है वो कौन सा मूमेंट था वो जानना चाहता हूं वो क्षण कौन सा था वो मेरी जानने की इच्छा है वो क्षण जिसम मैं आपने अपने आपको हनुमान जी के चरणों में उनकी भक्ति में उनकी सेवा में अपने आप को लगा दिया जि जो समर्पण आपने कर दिया वो क्षण क्या था देखिए प्रभु जी मैं आपसे बिल्कुल सत्य कह रहा हूं मैं आज तक ये नहीं समझ पाया कि मैं हनुमान जी की शरण में आ गया कि कब आ गया मुझे कोई कहता है कि आप सिर्फ हनुमान जी के भक्त हो तो पीड़ा होती है मैं कैसे कह दूं कि मैं कृष्ण भक्त नहीं हूं पहने या रुद्राक्ष है मुझे देखो मैं पहनी तुलसी है हनुमान का अर्थ हुआ भगवान राम का अर्थ हुआ कृष्ण का अर्थ हुआ कि तुलसी धारण करनी है आपने रुद्राक्ष धारण करिए मैंने रुद्राक्ष की माला धारण की है सुमेरू मेरा तुलसी का है हम सुमेरू तुलसी का है वैष्णव और शैव दोनों का मेल है हम आप वैष्णव हो मैं ना मैं वैष्णव हूं ना मैं शैव हूं ले मैं क्या वैष्णव हूं ना मैं ना मैं सुनो सुनो सुनो मैं कष्ण हूं वैष्णव विष्णु के पीछे भागते हैं कष्ण कैश के पीछे भागते हैं ठीक है इसीलिए मैं इसी संसार में रह गया मैं फस गया इस चक्कर में लेकिन अब आप ज फसा नहीं है कष्ण भी भगवान लक्ष्मी मां के भक्त है अच्छा वो भी तो लक्ष्मी के अरे बचा लिया बचा लिया जय हो महाराज बचा लिया देखो वैष्णव है तो लक्ष्मी के बिना क्या किसकी कितना भी कोई कहता रहे भाई मैं लक्ष्मी नहीं लक्ष्मी नहीं लक्ष्मी नहीं लक्ष्मी नहीं लेकिन लक्ष्मी बिना किसी का गुजारा नहीं साक्षात भगवती है एक महात्मा जी पंक्ति में बैठे और जैसे ही भंडारा हुआ सबने दक्षिणा बाटनी शुरू कर 5 500 के नोट पा 500 महात्मा ने कहा ए दूर बैठ मैं छूता नहीं पैसे और जैसे ही थोड़ा आगे गया ओए इधर आ मैंने छूने को मना किया इसमें बांध दे यानी कि मैं छूता नहीं हूं मैं बांधने वाला हूं प्रैक्टिकल रहिए मेरे हनुमान जी परम रिच हनुमान है उनको जब सोने का पर्वत आ गया हनुमान ते परसा अगर हनुमान चाहते तो नहीं नहीं नहीं नहीं धन लक्ष्मी मैं नहीं छूंगा कंचन मैं नहीं छूंगा लेकिन नहीं हनुमान जी प्रैक्टिकल साधु है स्पर्श कर लेने से नहीं दिल का स्पर्श उपयोग कहां करने वाले हो बिल्कुल बिल्कुल उपयोग कहां करने उपभोग वासना में या समाज की सेवा में अच्छा एक बात बताओ गुरुदेव मैं ना थोड़ा आज अलग मूड में हूं इंटरव्यू ने के क्षमा चाहता हूं उसके लिए बाथरूम में हनुमान चालीसा गा देते अ आप थोड़ा बताओ ये अपराध है या ये भगवान का बोध है देखिए एक पाठ को पूर्ण कर लेना कहीं ना कहीं ये है कि भाई हमने एक अपना कोई एम है या लक्ष्य है हमारा भाई एक कोई इतना है कि मुझे पांच करना है वो पूर्ण कर लिया लेकिन एक होता है प्रवृत्ति में आ जाता है एक महात्मा वृंदावन के परम हरे कृष्ण मंत्र जपने वाले वो जब शौच करने बैठते तब भी उनके मुख से तो वो ऐसे पकड़ कर बैठ जाते ये सनातन गोस्वामी की बात कर रहे हैं आप जिनकी भी है तो उनको क्या कर रहे आप तब उन्होंने कहा कि भाई मैं क्या करूं हरि नाम नहीं छूट रहा मेरा तो अगर एक लक्ष्य पूरा करने के लिए तो भाई उसको बाहर करो अगर प्रवृत्ति में आ गया है तो वहां भी कल्याण है जोरदार जोरदार जोरदार क्या बताया लेसन समझ में आया लेसन यह है कि मुझे पांच हनुमान चालीसा का लक्ष्य पूरा नहीं करना प्रवृत्ति में आना चाहिए नेचर प्रकृति में आना चाहिए नेचर में आना चाहिए मैं यह बात पकड़ के चल रहा हूं मैं बिल्कुल प्रवृति में आ जाए फिर तो कहीं भी हमारे लिए सब भूमि गोपाल की अच्छा एक बात बताइए एक जगह आप बोल दिया मुझे रोज मंदिर जाना जरूरी है आप बोले तो क्या घर के बाहर वाले मंदिर की बात कर रहे हैं या घर में मंदिर की अर्चना करना भी चल जाएगा हम ऐसी जगह पर आकर के बड़े ज्ञानी बन जाते हैं हर महीने सालासर दर्शन करने चले जाएंगे बालाजी हर महीने बालाजी चले जाएंगे बालाजी सरकार की जय हर महीने वृंदावन चले जाएंगे और अगर कहो कि यह तुम्हारे पड़ोस में घर के पास में मंदिर है गली में तो उसके लिए हमारे घर में ही मंदिर है मैं बिल्कुल कहता हूं साला सर एक महीने में एक बार नहीं पांच बार जाओ मेहंदीपुर जाओ लेकिन रोज अपने घर से थोड़ी देर निकल के आसपास के घर को मंदिरों में जाओ फिर उसके बाद 152 दिन जाने के बाद अगर तुम्हें लगे कि शायद भगवान भी मेरा इंतजार कर रहा है तो जाना नहीं तो बंद कर दे एक बात बताओ एक संत है जो अपने धाम बुलाते हैं बागेश्वर धाम सरकार बाबा बागेश्वर अब क्योंकि आप लोगों की डायरेक्शन तो देखो एक ही है है ना उनके विषय में आपकी क्या समझ क्या कहते हैं सिद्धि है साधना है नहीं है क्या कहना चाहते हैं आप देखिए मैं उनसे ना कभी मिला हूं एक बार एक कथा भी मनोज तिवारी जी के द्वारा जो हुई थी वहां मैं और कन्हैया मित्तल साथ गए थे वहां पर तो वहां भी मंच पर मैं थोड़ी देर बस आरती वगैरह करके और उतर आया मैंने कभी उनको ऐसा मैं मिला नहीं लेकिन हनुमान जी की दी हुई शक्ति किसी के पास हो तो उस पर हम कभी डाउट नहीं कर सकते हनुमान जी की शक्ति मैं मैं तो कभी मिला नहीं तो मैं कमेंट कैसे कर दूं उन्हें किसने इजाजत दी गुलों से बात करने की सलीका तक नहीं जिसको चमन में पांव रखने का मैं आपको ऐसी कोई कमेंट कर दू कि सिद्धि या चमत्कार मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता लेकिन हां इतना जरूर कहना चाहता हूं कि जब दरबार देखे मैंने उनका सब कुछ देखा तो एक बात से बड़ा प्रसन्न हुआ साधु जी सीताराम तब मुझे लगता है कि यार बंदा राम नाम का प्रचार हो रहा है और राम नाम के प्रभाव से तो भरोसो एक राम नाम को तुलसीदास जी को भरोसो राम नाम का था मैं इतना भाग्यशाली क्यों मुझे ये बताओ आप इसका उत्तर दो मैं इतना भाग्यशाली क्यों आपके संतों के दर्शन कैसे हो जाते हैं क्या चक्कर है इसके पीछे इसके पीछे कारण है आपकी मां की कोक आपकी जन्म देने वाली मां जननी जन्म भूमे से स्वर्गा दी गरि से आज पूरे भारत में मैं तो खैर दो चार दिन से ही मुझे पता लगा जब आना था लेकिन जिससे भी मेरी बात हुई तो भारत में एक बहुत सम्मान से आपका नाम लिया जाता है नहीं नहीं बहुत समान हु छ महीने बहुत अपमान हुआ वो वो तो चलता है वो चलता है मोदी जी का कितना अपमान होता है लेकिन परसेंटेज होनी चाहिए इसके पीछे सबसे बड़ा मैं जिस बंदे को दुनिया में सक्सेस देखता हूं उसकी मां को प्रणाम कर देता हूं जैसे सुमित्रा को गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा था जय हो जय हो जय हो सुन जननी सोई सूत बड़ भागी हे सुन जननी सोई सूत बड़ भागी कौन जो पितु मात चरण अनुरागी जननी जने तो भक्त जन के दाता या सूर नहीं तो जननी बांज र त काहे गवावूस भी किसी ज्ञानी भक्त शूरवीर पुत्र को जन्म मिला है उसकी मां की कोक को प्रणाम कर लेना चाहिए नहीं महाराज मैं भाग्यशाली हूं मुझे ऐसा लगता है कि इसमें मां का भी आशीर्वाद है और संतों का भी आशीर्वाद है मैं तो संतो के आशीर्वाद के बिना प्रगति नहीं कर महीना मेरा बहुत बुरा बीता बहुत बुरा बीता बहुत समय मेरा खराब आया भगवान का भक्त ऐसे नहीं कहता नहीं लेकिन पता है क्या है हम तो यह देखते हैं डिफिकल्टी में अपॉर्चुनिटी हम तो देखते हैं कि वुड यू लाइक टू क्राई और ट्राई पर गुरुदेव आज एक सवाल करना चाहता हूं हिज होलीनेस श्री राम भद्राचार्य जी महाराज हनुमान चालीसा में चार त्रुटिया निकाली है उन चार त्रुटियों को मैं आपके द्वारा भी समझना चाहता हूं देखिए त्रुटिया जो उन्होंने निकाली है वो यह है शंकर सुवन के ी नंदन तेज प्रताप महा जग बंदन उन्होंने कहा भाई ये बोलो शंकर स्वयं केसरी नंदन तेज प्रताप महा जग बंदन दोनों ठीक है दोनों ठीक शिव महापुराण में उठा ले तोब जब भगवान विश्व मोहिनी का अवतार लिया तो भगवान शिव उन पर मोहित हो गए य सब लीला है मोहित होक के दौड़ पड़े उनके पीछे तो उनका वीर स्थगित हो गया उसको अंजनी माता के कर्ण मार्ग से से गर्भ में स्थापित करवा दिया गया पवन देव केसरी के द्वारा तो इस नाते वो शंकर सुवन है और जही शरीर रतिराम सो सोई सादर ही सुजान रुद्र देह तज नेह बस हरत भय हनुमान विकट वेश मुख पंच पुरारी इस नाते वो शंकर के 11वें रुद्रावतार होने के कारण शंकर स्वयं भी है दोनों ही पंक्तियां ठीक है बहुत अच्छा सुंदर आपने अर्थ दिया गुरुदेव मेरे मन में बहुत सारे प्रश्न चल रहे हैं पूछते रहिए है ना और बहुत अच्छा लग रहा है चर्चा करके और सबसे अच्छी बात आपकी कि आपने परमिशन किया कि मैं आपके सामने तर्क प्रस्तुत कर सकूं और आपने मेरे हर तर्क को स्वीकार किया देखो गुरुदेव बाल कांड की चर्चा होती है गुरुदेव अयोध्या कांड की चर्चा होती है अरण्य कांड की चर्चा होती है किष्किंदा कांड की चर्चा होती है सुंदरकांड की चर्चा होती है लंका कांड की चर्चा होती है उत्तरकांड की चर्चा होती है लेकिन सबसे ज्यादा लोग सुंदरकांड को याद रखते हैं तो क्या बाकियों को याद नहीं रखना चाहिए केवल सुंदरकांड को याद रखना चाहिए मैं अगर मेरा नाम कोई ले तो ये कहता रसराज जी महाराज सुंदरकांड वाले रसराज जी महाराज सुंदरकांड वाले लेकिन मैं डंके की चोट पर आपके पॉडकास्ट से कहना चाहता हूं कि भाई सुंदरकांड भी पढ़ो ही नहीं बालकांड पढ़ो अयोध्या कांड पढ़ो उसके बाद अरण्य कांड पढ़ो किष्किंदा कांड पढ़ो सुंदर कांड पढ़ो लंका कांड पढ़ो उत्तर कांड पढ़ो मैं कभी नहीं कहता सुंदरकांड ही पढ़ो जब तक आपको यह पता नहीं लगेगा प्रात काल उठ के रघुनाथा सनि धानी र सा भोर में जागे भगवान प्रात काल उठ के रघुनाथा क्या करते हैं मात पिता गुरु नाव माता मात पिता गुरु नाव [संगीत] माथा उसके बाद भगवान अगर नर लीला में पूरा अपनी नर लीला दिखा रहे हैं दुनिया को चाहते तो जरूरी नहीं था गुरु वशिष्ठ के वहां पढ़ने के लिए जाते लेकिन उन्होंने दिखाया भाई गुरु ग्रह गए पढन रघुराई अल्प काल विद्या सब पाए तुलसीदास जी बिल्कुल सावधान करते चल रहे भाई जो गुरु ग्रह पढ़ने के लिए रघुराई गए सुनो है कौन वो जा की सहज शवास श्रुति चारी जिसकी शवास शवास में श्रुति वेद मीमांसा सब भागता हो सो हरि पड़े यह को तुक भारी लेकिन दुनिया को दिखा रहा है भाई सबसे पहले बाल कांड में जियो प्रथम अर्जित विद्याम पहले विद्या अर्जित करो मेरे हनुमान जी ने क्या कि मनोजवम मारु तुल वेगम जितेंद्रियम बुद्धि म वषम लेकिन तुलसीदास जी उनको कहते हैं विद्यावान गुनी विद्वान नहीं है विद्वान होना अलग है द दस खो पड़ी थी रावण के पास लेकिन विद्वान कहलाया और पंच मुख वाले श्री हनुमान जी विद्यावान हो गए महाराज जी यह सुंदरकांड की इतनी चर्चा करते हैं और बहुत सुंदर भी है बहुत अच्छा अद्भुत है बाकी कांडों के नाम से पता चल जाता है किस बारे में पर सुंदर कांड को सुंदर कांड क्यों कहा जाता है देखिए इसके पीछे कई तथ्य है जैसे सुंदरकांड में आठ बार सुंदर शब्द आया है और हनुमान जी अष्ट पर बड़ा काम करते जैसे अष्ट सिद्धि हनुमा अष्टकम और आठ बार सुंदर कांड में सुंदर शब्द तो इसलिए भी सुंदर है दूसरा जब हनुमान जी महाराज सीता जी को कथा सुना रामचंद्र गुण बर नहीं लागा तो सुनत सीता कर दुख भागा लागी सुन श्रवण मन लाई आदि होते सब कथा सुनाई जैसे हनुमान जी ऊपर रामचंद्र गुण परने लागा सुनत सीता कर दुख भागा कौन है भाई जो इतनी सुंदर कथा सुना रहा है कौन है जो इतनी सुंदर कथा सुना रहा है पेड़ पर बैठे हनुमान जी बोले मां कथा ही सुंदर है कहने वाला पूरा बंदर है मां ने कहा जो भगवान की कथा इतनी सुंदर कहता मेरी नजरों में सुंदर है और इसलिए भी सुंदर कांड सुंदर है राम लक्ष्मण जान की जय बोलो हनुमान की दूसरा हनुमान जी ने विभीषण का दुख दूर किया समुंद्र की शरणागति है जितने सुंदर काम हुए हैं ज्यादा से ज्यादा सुंदर कांड में हुए हैं शरणागति के तो इसलिए भी सुंदर कांड सुंदर है मराज जी बात पूछना चाहता हूं के मैं घर में ना चैटिंग बॉक्स चलाकर रखता हूं जहा हनुमान चालीसा 24 घंटा चलती है और कभी गा भी लेता हूं लेकिन 24 घंटा चलती है उसमें जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपी लो को उजागर हर समय चलता रहता है क्या मुझे उसका लाभ होगा या नहीं होगा उसका लाभ टेप रिकॉर्डर कोई मिलेगा ब नहीं मिलेगा मिलेगा सुनने से भगवान के नाम को सुनने से कल्याण होता है लेकिन मेरा मानना इतना है कि भाई 24 घंटे हनुमान चालीसा चलाने से बढ़िया भाई थोड़ी देर 10 15 20 मिनट 22 मिनट बैठ कर के 11 बार पाठ कर लो जय हो जय हो 11 बार नहीं कर सकते तीन बार सुबह कर लो तीन बार दोपहर को कर लो तीन बार शाम को कर लो दो बार रात्रि को सोते हुए कर लो तब भी आप 24 घंटे मतलब वही स्मरण ना टूटे भगवान श्री प्रहलाद ने जो भक्ति बताई श्रवण कीर्तनम विष्णु विष्णु स्मरणम प सेवन अन वंदनम दास साख आत्म निवेदन तो उसम जो श्रवण कीर्तनम विष्णु स्मरणम चौथी भक्ति है स्मरणम श्रवण भी तो हो रहा है ना गुरुदेव श्रवण भी भक्ति है लेकिन मैं जब हम स्मरण करते हैं जब अपने मुख से वाचन करेंगे बोलेंगे तब भी तो तब तो तीनों हो रही है भक्ति जब हम वाच करते हैं स्वीकार कर लिया तो श्रवण भी हो रहा है स्वीकार कर लिया और वहां सिर्फ श्रवण हो रहा है टेप रिकॉर्ड बोल रहा है हा मोबाइल फोन बोल रहा है 24 घंटे हनुमान चालीसा चलता रहे चलता रहे चलता रहे लोग भी आपको क यार बंद कर हां और जितनी देर बैठे उतना हम मैं आपको कहूं मुझे कोई लोग कहता हम चलिया करते हैं चालीसा करते हैं यह करते हैं इतनी संकल्प 11 दिन का संकल्प मैं हैरान हो जाता हूं यार कैसे कर लेते हो आप लोग मैं तो कुछ नहीं करता हूं तो तो ये चलिया नहीं करना चाहिए करना चाहिए करना चाहिए मैं नहीं कहता नहीं करना चाहिए प्रैक्टिकल रहा हू मैं रोज मंदिर जाने के लिए दुनिया को डंके की चोट पर कहता हूं लेकिन कभी मैं फ्लाइट में हूं कभी मुझे कहीं बाहर जाना है किस दिन मंदिर नहीं जा पाता तो नहीं गया मैं रोज यज्ञ करता हूं अपने घर में रोज हनुमंत यज्ञ करता हूं लेकिन मैं फ्लाइट में हूं मैं बाहर हूं आउट ऑफ डेल्ली हूं कहीं प्रोग्राम्स में हूं नहीं हुआ नहीं हुआ मैं रोज भगवान महादेव का अभिषेक करता हूं और सोमवार को भगवान का दूध से अभिषेक करता हूं लेकिन कभी-कभी मेरी जिंदगी में ऐसा होता कि सोमवार को मुझे मंदिर जाने का टाइम नहीं होता तो मैं मंगलवार को कर लेता हूं मैं तो प्रैक्टिकल रहने के लिए कहता हूं भाई प्रैक्टिकल पर एक और प्रश्न आता मेरे मन में जो प्रश्न जो है ना मेरे सारे व्यूवर्स की तरफ से पूछना चाहता हूं आज उत्तरकांड हुआ था कि नहीं हुआ था इसको ऐसे समझते हैं अगर हुआ था तो राम जी ने सीता जी को क्यों छोड़ा और इसके पीछे भगवान की क्या माया थी इसकी इसके पीछे बहुत कंफ्यूजन चल रहा है कई जगह बताया गया कि भगवान ने मां सीता को छोड़ा ही नहीं कई जगह बताया गया कि वो धोबी वाला अपराध लगा दिया गया तो उसका ज इसका ज्ञान दीजिए हमको यहां दो बातें है एक तो है राज राज धर्म और एक है जब रामचरित मानस प्रा हो रही है तो गोस्वामी तुलसीदास जी वंदना करते हुए कहते हैं सीताराम गुण ग्राम पुण्या रण्य विहारे वंदे विशुद्ध विज्ञान कवीश्वर कपीश्वर कवीश्वर कौन वाल्मीकि वाल्मीकि जी कौन है परम साइंटिस्ट विज्ञान कवियों के ईश्वर है कवियों के ईश्वर और उनको साइंटिफिक एक म साइंटिस्ट कहा गया है पानी पर पत्थर तैरा दिए कितने दिन में पुल बना वाल्मीकि रामायण में लिखा तुलसीदास जी ने नहीं लिखा पाच दिन में पुल बना 13 योजन 14 योजन 21 योजन 20 योजन 22 योजन इ इक्वल टू 100 यह गणना वाल्मीकि की है अब जो सीता जी के गर्भ में उस समय ऊर्जा थी लव कुश ऐसी ऊर्जा थी कि जिसको शायद अयोध्या में संभालना बड़ा मुश्किल था इसलिए एक कारण यह भी है कि वाल्मीकि जी परम वैज्ञानिक है और ऊर्जा जो सीता जी के गर्भ में थी वह एक वैज्ञानिक संभाल सकता है इसका दूसरा कारण यह है कि जब राम अपनी अयोध्या का यह सब हाल सुनने लगे उन्होंने देखा कि एक धोबी ने कलंकित किया तो उस समय वहां धर्म खड़ा हो गया राज धर्म ऊपर हो गया तो इसलिए सिय निंदक अग ओघ न साए शोक विशोक बनाई बसाए जब राम जी प्रजा सहित रघुवंश मणि किम गवने निजधाम जब चलने लगे तो धोबी को भी ले गए लोगों ने कहा महाराज धोबी के लिए द्वार बंद है राम जी ने कहा डप मेरा नाम राम है रामो विग्रह वान धर्म साधु सत्य पराक्रमा अगर इसकी इस बैकुंठ में एंट्री नहीं है तो उसके लिए विशोक नाम का एक बैकुंठ और बना दिया राम ने इसलिए आज तक राम की पूजा हो रही है इसलिए यह कारण है कि एक कारण तो साइंटिफिक रीजन मान लो भगवान जो करते हैं उसके पीछे कोई ना कोई कारण होता है वो सर्व कारण कारण बस अब राम जब रावण को मारने गए तो राम उतार के पांच कारण तो मानस है कितने कारण किस कार्य के पीछे कितने हैं वह करता ही जानता है इसलिए बस यह सोच के चलना चाहिए कि राम जो करे परमात्मा जो करे वही धर्म है वही नीति है महाराज बहुत सारे मन में कंफ्यूजन चलते हैं और आप है कंफ्यूजन टू क्लेरिटी अब जो भगवान राम थे उन्होंने वध कब किया रावण का दशहरे पर किया गलत कह रहा हूं सही कह रहा हूं जी तो भगवान की जो वापसी एग्जिट थी वो दशहरे पर थी कि दिवाली पर थी दिवाली कोई उस समय फिक्स नहीं थी जब भगवान आए तभी दिवाली मनाई गई राम आए और सबने घर में घी के दीप जगाए उस दिन दिवाली हो गई तो तब से दिवाली मनाई भगवान दुरे के दिन नहीं आ गए थे उनका कोई फ्लाइट इतना स्लो थोड़ी था देखिए भगवान राम रुकते रुकते रुकते रुका आ रहे थे क्योंकि यह वो राम है जो डाउन टू अर्थ है अगर केवट ने मुझे पार उतारा तो मैंने वचन दिया था कि यार तेरे से मिलकर जाऊंगा और मिलकर नहीं तुझे अपनी विमान में चढ़ाकर लेकर जाऊंगा जिस त्रिवेणी के घाट पर सीता जी ने कहा था कि मैं अपने पति संग लौट कर के आऊ वहां त्रिवेणी के घाट पर श्रीराम ने स्नान किया था जब रावण को बाण लगा और राम जी के हाथ पर छींटे आकर के गिरे तो भगवान महादेव ने प्रार्थना की थी हे श्री राम आज तक मैंने इसको राम मंत्र कान में दिया लेकिन इसने कभी राम नहीं जपा जब जपा महादेव जटा टवी गल ज्वल प्रवाह पावितस्थले गले बलम यही गाता रहा मैं सोचता था कि मंत्र तो तुझे मैंने यार राम नाम का दिया और तू शिव नाम गाता रहता है लेकिन जब आपने अंतिम 31 वा पाण ठोका इसको तो कहां राम रण हस पचारी एक बार राम कह कर के धड़ाम धरती पर गिरा तो हे प्रभु मुझे ये लगा मेरा गुरु मंत्र सार्थक हो गया जैसे ही आए तो शिव ने कहा था प्रभु आपका तो नियम है ना कहीं नगर में स्नान ना करने का एक बार त्रिवेणी में स्नान कर लेना इसके कुल में रहा ना कुल कोई रोवन हारा आप त्रिवेणी में स्नान करेंगे ना इसका पित तर्पण हो जाएगा वहां वहां टेकते हुए आए अब हनुमान जी की राम जी की फ्लाइट लेट नहीं थी रहा एक दिन अवध कर भरत जी चिता बना कर के बैठ गए थे हनुमान को भेजा जाओ जाओ जाओ जाकर के इतने में आ ही गए हनुमान लेट नहीं थे वो लेकिन अपने 14 वर्ष की जो अवधि थी उधर भरत का संकल्प तो देखो राम कहां कहा नहीं बंधे थे यह तो देखो अगर वहां नहीं पहुंचा तो भाई मर जाएगा वो प्राण त्याग देगा हनुमान पहले तुम जाओ भाई उसके प्राण बचाओ उसको बोललो मैं आ जाऊंगा थोड़ा लेट है इतनी तो छूट दे दे यार आ रहा हूं आ रहा हूं देखो लंका से रावण बद के बाद जब आए तो आपने बताया कि भाई दशहरे प निकल गए और दिवाली तक आराम से पहुंच गए तो जय श्री राम बोलना ठीक है जय सियाराम बोलना ठीक है ठीक दोनों ही है फर्क है हनुमान जी ने किया है ये फर्क कई जगह जैसे सुंदर कांड में उड़ान भरी तो क्या किया जामवंत के वचन सुहाय सुन हनुमंत हदय अति भाए तब लग मई परखे तुम भाई सही दुख क मूल फल खाई जब लगी आव सीताई देखी ई हि काज मोई हर्ष वि सेखी कलावन को माता चले हर्ष र धर रख नाता सिंधु तीर एक भूदर सुंदर तो कोद चढ़ता परर बार बार रघुवीर संभारी क्या किया जैसे ही जिस भूदर पर खड़े होकर के छलांग लगाई तो नारा ही बदल दिया क्या बोलने लगे जय रघुवीर जय रघुवीर और जैसे कोई प्लेन एकदम टेक ऑफ करता सबने देखा नारा बदल दिया हनुमान जी आप तो राम राम राम राम राम जप रहे थे अठारी पर ये रघुवीर रघुवीर क्यों गाने लगे हनुमान जी ने कहा भाई वीरता का काम करना है इसलिए जय रघुवीर और जैसे लंक द्वार देख तो वहा भगवान नरसिंह है वहा भी नारा बदल दिया मसक समान मसक समान रूप कप धार तोम नारा क्या बदला लंक चले सुमिर नर हरी जय नरसिंहा जय नरसिंहा जय नरसिंह करते हुए प्रवेश करने लगे अ मैं आप परमिशन दो तो बताऊ मैं भगवान मा हनुमान जी ने बोला ओ उग्रम वीरम महाविष्णु जलत सर्वतो मुखम नरसिंह भीष्म भद्र मृत्यु मृत्यु नमाम अब आप ये देखो जो मृत्यु हर ले वो है नरसिंह देव हनुमान जी अनन्य भक्त है राम के लेकिन उनको नरसिंह बोलने में कोई तराज है क्योंकि वह नारायण के ही 24 अवतार में जिसको भजो सो राम की उपासना 24 अवतार क्यों मत बरा कुर्म नरसिंह राम बलराम परशुराम बुद्ध कलकी 12 है 10 है द अवतार मा चाहता हूं म रा कुर्म नरसिंह राम बलराम परशुराम ब अवतार को मुख कहा गया है लेकिन उसके बाद जो 24 अवतारों की बात हुई 24 वा कल की अभ होना 2 में जिसम भगवान बुद्ध को भी ले लिया तो व दशावतार की बात है लेकिन भागवत के अनुसार 24 अवतारों की बात है रामायण हम जब देखते हैं तो हनुमान जी का जो चरित्र है वह कभी-कभी बहुत मजाकिया भी है हनुमान जी कभी-कभी गुस्सा भी खा जाते हैं एक बार गुस्सा आ जाए तो पूरी लंका जला के आ जाते कभी करुणा से अभिभूत है बहुत प्रेम देते बहुत प्र देते तो हनुमान जी का नेचर है क्या माना क्या जाए उसको कैसे समझा जाए वो आपसे हम सीखना चाहेंगे गुरुदेव इतने शक्तिशाली हनुमान तो हनुमान ज्यादा शक्तिमान है कि बुद्धिमान है हनुमान जी को यह अवेयरनेस है कि वह शिव का रूप है या हनुमान जी भी नहीं बात करते ज्यादा बजरंग बली के जीवन से कुछ एक्शन बल निकाल के अपने जीवन में उतार सके अपने जीवन में उसको स्वीकार कर सके तो हमें तीन चीजें क्या करनी चाहिए अलग प्रकार की चर्चा हो रही है गुरुदेव आज अलग प्रकार की चर्चा हो रही है यह चर्चा हर एक के काम नहीं आएगी यह तो मैं मानता हूं और आप भी मान रहे होंगे इस बात को नहीं नहीं सबके काम आने वाली है दुनिया में हर तरह का स्तर की बुद्धि वाले लोग हैं आप प्रश्न एक और है गुरुदेव आपसे रामायण हम जब देखते हैं तो हनुमान जी का जो चरित्र है वह कभी-कभी बहुत मजाकिया भी है हनुमान जी कभी-कभी गुस्सा भी खा जाते हैं एक बार गुस्सा आ जाए तो पूरी लंका जला के आ जाते हैं हनुमान जी हनुमान जी है अपनी मौज में कभी करुणा से अभिभूत है बहुत प्रेम देते बहुत प्रेम देते हैं कभी इतना प्रेम करने वाले और कभी एक्सट्रीम है और अपने प्रेम से सबको अपना सीना चीर के दिखा दिया तो हनुमान जी का नेचर है क्या माना क्या जाए इसको कैसे समझा जाए वो आपसे हम सीखना चाहेंगे गुरुदेव देखिए हनुमान जी ने जीवन में दिखाया कि एक समय में ही पांच मुख वाले हैं और पंचमुखी का अर्थ है कि भाई एक व्यक्ति ज जहां आप रहते हो वहां पंचमुखी हनुमान मंदिर भी है मुझे कुछ नहीं पता मैं पंचमुखी हनुमान का एक अर्थ है कि एक मुख है सिंह का एक मुख हो गया वारा का एक हो गया गरुड़ का जब हनुमान जी को गति चाहिए तो गरुड़ की गति लजा जाए मनोजवम मार तुल्य बेगम और जब सिंहनाद करे समुंद्र के तट पर खड़े हो ग सिंहनाद करी बार बारा ह हड़ हड़ हड़ हड़ हड़ जय श्री राम जय श्री राम एक व्यक्ति के पास सारी उपासना है जैसे आप जब पॉडकास्ट करते हैं या आप किसी को जो ये सब देते हैं ना तो आपके भी कितने तरह के मुख होते हैं आप नहीं जानते लेकिन आपका असली स्वरूप क्या है वह आप पूछना चाह रहे हैं हनुमान जी का असली स्वरूप तो यह है कि समुंद्र के तट पर मरने को आतुर है सब कि भाई इधर तो संपात खा जाएगा वो कह रहा जल्दी मरो भूख लग खाऊ तुम्हे हा और लेकिन हनुमान जी जुज के हाथ में मुद्रिका देकर के भेजा भगवान ने पाचे पवन तने सिर नावा जा नि काज प्रभु निकट बुलावा जिसको सब काम करना है वह ऐसी अड़ी भीड़ में भी ज समुंद्र हिलोरे ले रहा है वो एक एकांत में अटारी पर चढ़ कर के राम राम राम कर रहे है हनुमान जी का स्वभाव यह है हर समय राम भजने का दूसरा आपने कहा मजाक किया आप रामानंद सागर जी की रामायण से मैं बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल सहमत हूं आप देखो जब राम जी से मिले पहली मुलाकात सुग्रीव ने कहा जाओ सुग्रीव कपीश है कौन है य हनुमान जी तो कपीश बाद में बने कपीश यानी कि बंदरों का ईश बंदरों का राजा बंदरों का भगवान हनुमान जी तो उसके नौकरी करते थे उसने ऑर्डर दिया जाओ देख कर के आओ कि बाली ने किसी मुझे मारने के लिए तो नहीं भेजा तो वहां विप्र रूप धरि का पिता गए हो मात नाई अस हो और वो जो उस समय वहा मजाक किया है श्री राम से किसी ने हनुमान जी से कहा कि तुम्हारा प्रभु पहचान परे गयो हरि चरणा कि राम को देख कर के तुम चरणों में उनके पड़ जाने वाले इंसान हो और इतना तुमने उनके साथ हस परिहास क्यों किया बोले इसलिए मेरा राम दुखी है श्री सीता जी के खो जाने के कारण शांति हो जाने के कारण विरह से इधर उधर हे खग मग हे मधुकर शैनी तुम दे सीता मृग नैनी और मेरा राम दुखी हो दुनिया में सब कुछ देख सकता हूं लेकिन रा मैं अपने राम को दुखी नहीं देख सकता कोई सेवक तो चाहिए चेहरे प मुस्कुराहट ला हा और जो उस समय मजाक किया जब लक्ष्मण की मानो लास्ट बनने वाली है बाण लगा है उस समय सुषण वैद ने आकर के कहा जाओ कोई बूटी ला दे तो ये बचेगा ये सूर्य अगर उदय हो गया राम रो रहे हैं सूर्य उदय हो गया तो लक्ष्मण गया इतना रोए राम इतना रोए क्यों कि अगर लक्ष्मण मर गया तो मैं मैं भी प्राण त्याग दूंगा बंदर भालु को सबको भेज दूंगा लेकिन मुझे एक ही दुख है विभीषण का क्या होगा हनुमान जी ने देखा प्रभु अगर बूटी दूसरे छोर पर भी है तो बूटी लेकर मैं आऊंगा मैं दुनिया में सब कुछ देख सकता हूं लेकिन आपकी आंखों में आंसू ना आए उसी समय हनुमान जी ने कहा राम जी ने कहा लक्ष हनुमान बूटी कहां है सूर्य निकल गया तो गड़बड़ हो जाएगी मेरे हनुमान जी ने कहा सूर्य मेरा स्वभाव जानता है बचपन से जानता है प्रभु बाल समय रवि भक्ष लियो निकलने नहीं दूंगा सुपर हीरो है भगवान अगर आप कहते हो कि अमृत चंद्रमा में है तो चंद्र मेंही निचोड़ चैल जो आ सुला इस चंद्रमा को ऐसे पकड़ करके निचोड़ करके अभी चंद्रमा अमृत निकाल ला तो राम लक्ष्मण जान की जय बो तीसरी बात तो मेरे हनुमान जी ने ऐसी कह दी कि भगवान शिव को पार्वती को रोकना पड़ा क्या कह रहे हैं हनुमान जी क्या कहा और अगर प्रभु आप कहो कि मृत्यु लक्ष्मण की ओर बढ़ रही है जिससे मेरे मेरे प्रभु कहते कि मैं प्राण त्याग दूंगा म म मृत्य मार मच नीच मसक सब को पाप भवा आज इस मृत्यु को पकड़ करके ऐसे करके आप समाप्त कर दू दुनिया में कोई मरेगा नहीं जिंदगी में पार्वती माता ने कहा महादेव ये क्या हो रहा है ये क्या हो रहा है क्या कह रहे हनुमान जी मृत्यु को मार देंगे शंकर ने आंखें नीची कर ली जो बोल रहा है बोलने दे यार अगर मृत्यु काल है तो मैं महाकाल हूं हनुमान जी बोले ऐसा हनुमान जी ने कहा मार हूं नीच नीच कवितावली रामायण तुलसीदास जी ने लिखी है मानो नीच नीच मु सक मृत्यु को पकड़ पकड़ के मारू दुनिया में कोई मरेगा ही नहीं प्रभु लक्ष्मण बात तो क महाराज जी इसके बाद भी अगर हनुमान चालीसा आप लोगों ने नहीं पढ़ी ना तो फिर यह जो है इना ल लगाया हुआ समय गुरुदेव का मैं ये नहीं कहूंगा व्यर्थ है पर उसका फिर थोड़ा कम अर्थ है इतना कहूंगा मैं सबसे एक बात पूछना चाहता हूं गुरुदेव इतने शक्तिशाली हनुमान तो हनुमान ज्यादा शक्तिमान है कि बुद्धिमान है एक आदमी के चार पुत्र हैं बोले कहां है भाई बोले दो जेल में है सेंट्रल जेल में और दो फरार तो भैया किसी काम के नहीं है ऐसे हनुमान जी कहते कि भाई अगर तुम्हारे पास बल ही बल है और बुद्धि नहीं लगाई तो अपना बल ही बल लगा दिया तो फिर जेल में ही जाओगे सबसे पहले जब हनुमान जी चले तो सुरसा को बल और बुद्धि की परीक्षा लेने भेजा कि भाई ये बलवान भी बहुत है और यह बुद्धिमान भी बहुत है लेकिन एक बार परीक्षा तो करें सुरसा आकर के जैसे ही खड़ी हुई और हनुमान जी ने उसके मुख में प्रवेश किया सत जोजन तेही आनन कीना तो अति लघु रूप पवन सुत लीना जब उसने बल दिखाया तो इतने बल दिखा कर के बड़े हो गए और जब बुद्धि लगाई उसने अब तो मैं 100 योजन हो गई अब ये बंदर 200 योजन होगा तो इसका एक पैर होगा लंक में एक होगा राम जी के पास हनुमान जी ने कहा तू अपनी बुद्धि लगा रही है मैं अपनी बुद्धि लगा रहा हूं तुरंत छोटे हो गए और खाने वालों के मुंह एक बार बड़े हो जाए तो इतनी जल्दी छोटे नहीं होते सुरसा को मुख बंद करने में बहुत समय लग गया लेकिन हनुमान जी बा गहरी बात बहुत गहरी बात है एक बार जोरदार हरि बोल बहुत गहरी बात क सुरसा को मुख बंद करने में समय लग गया लेकिन हनुमान जी को छोटा होने में पल की देर नहीं लगाई तब सुरसा ने कहा बंदर जब तुझे इतना बड़ा होना था तो छोटा होने की क्या जरूरत थी मां दुनिया में बड़ा वही हो सकता है जिसको बड़ा होने के बाद भी छोटा बनना आता एक बार और हरि बोल जय फिर उस सुरसा ने आशीर्वाद दिए क्या राम काज सब करी ह तुम बल बुद्धि निधान आपके प्रश्न का जवाब आप बल के और बुद्धि दोनों के निधान है बल दे निधान आशीष देई गई सो और फिर हर्ष चले हनुमान यह हनुमान जी क्वालिटी है कोई भी काम करते तो हसते हुए करते हैं प्रसन्नता से करते गुरुदेव आपने एक बात कही थी बीच में मुझे बात याद आ रही है जो शिव का भक्त है राम का क्यों नहीं जो राम का भक्त है व कृष्ण का क्यों नहीं जो कृष्ण का भक्त है वह दुर्गा का क्यों नहीं तो श्री कृष्ण ने गीता में कहा मैं सर्वशक्तिमान हू अहम सर्वस्व प्रभव मत सर्वम प्रवर्तते बुधा भाव समन 18 अध्याय समाप्त होता है तो भगवान कहते हैं सर्व धर्मा परित्यज्य मामे कम शरणम बज अम सर्व पापे मोक्ष श्याम मा कृष्ण ने इतनी डिक्लेरेशन कर दी इतना सारा डिक्लेरेशन कर दिया कह रहे मैं सर्व शक्तिमान हूं मैं परमेश्वर हूं और अवेयरनेस भी क्रिएट कर दिया मार्केटिंग भी कर दी ठीक है इंफॉर्मेशन भी स्प्रेड कर दी पूरी की पूरी ब्रांडिंग भी कर द भगवान ने पर भगवान राम ने कभी अपने आप को भगवान नहीं माना मर्यादा पुरुषोत्तम बोले गए वो नहीं माने अपने साधारण जीवन जिया उन्होंने इस प्रकार से तो हनुमान जी को यह अवेयरनेस है कि वह शिव का रूप है या हनुमान जी भी नहीं बात करते ज्यादा वो भी थोड़ा साइलेंट रहना पसंद करते हैं भगवान कृष्ण का सिस्टम अलग है उनका क्लीयरली बता दो क्लेरिटी इज पावर राम कृष्ण दो एक है अंतर नहीं निमेशे नयन गंभीर है इनके च फल विशेष जो कृष्ण कह रहे हैं समझो वही राम कह रहे हैं जो राम कह रहे हैं वही समझो कृष्ण कह रहे हैं लोगों ने एक धारणा बनाई है कि भा जो राम ने किया वो करो और कृष्ण ने जो कहा वो करो लेकिन मैं उनसे ही पूछता हूं क्या श्री कृष्ण ने ऐसा कुछ भी नहीं किया जो तुम नहीं कर सकते गोवर्धन पर्व उठाया था हम नहीं उठा पाएंगे श्री कृष्ण वो नहीं आप कर सकते ना लेकिन श्री कृष्ण सबसे पहले भोर में जागते थे महाभारत के अंतिम जीवन का जब श्री कृष्ण का सार सुनेंगे तो वहां सबसे पहले भोर में जागते जागते श्री कृष्ण स्नान करने के बाद पहले ध्यान करते हैं ध्यान करने के बाद भगवान श्री कृष्ण अपने महलों से जब बाहर निकलते हैं तो तुलसी के पौधे को हाथ लगाकर किसी शास्त्रीय शास्त्र को हाथ लगा कर के किसी ग्रंथ को किसी वेद को या जो भी उस समय कोई शास्त्रीय शास्त्र होता होगा या फिर अपने शास्त्रीय संगीत के उस बांसुरी को या कोई साज को यह सब शुभ कार्य क्या हमने कर सकते सब फिर जब निकलते थे तो हीरे मोती अशरफी लेकर के दास दासिया खड़े होते थे यह पकड़ा लुटाओ यह पकड़ा लुटाओ वही दान वाली बात ये श्री कृष्ण करते थे क्या हम नहीं कर सकते फिर करना भी चाहिए जी जी मैं यही कहना चाहता हूं कि अगर श्री कृष्ण ने कहा कि भाई मैं परमात्मा हूं तो यह राम ही कह रहे मेरी नजर में आप सब घुमा फिरा करके पूछे तो मेरे लिए राम कृष्ण दो एक है अ हनुमान जी की बात कर लेते हनुमान जी स्वयं शिव के अंश है या वो स्वयं शिव है अभी बताया मैंने आपको शंकर स्वयं केसरी नंदन भी है शंकर सुवन केशरी नंदन भी है जब भगवान नारद जी बताया नारद जी ने जब अपना रूप मांगा हरि कापन रूप देव प्रभु मोही क्यों मांगा था विश्व मोहिनी से विवाह करने के लिए तो उस समय नारद जी ने कहा जाकर के जही विधि होई परम हित ज विध होई नाथ हित मोरा करो सु बेगी दास में तोरा हे प्रभु जैसे मेरा परम हित हो वह कर दो भगवान ने कहा यार अब तू परम हित मांग रहा है हित मांग रहा है ना तो चल मैं तुझे बंदर बना देता हूं हरि बंदर को भी कहते हैं हरि नाम बंदर का भी है इसलिए जैसे ही नारद जी को बंदर बनाया तो शंकर भगवान ने पार्वती से कहा हाथ पकड़कर देवी इस कथा से आज मैं एक फैसला ले रहा हूं कि भगवान जही विधि होई परम हित नारद सुनौ तुम्हार सोई हम करब न आन कछु बचन न मशा हमार शंकर जी ने सोचा वाह नारद जी ने हित मांगा और भगवान कहते हैं परम हित करता हूं जिसका परम हित भगवान करना चाहते हैं उसको बंदर बना देते हैं इसलिए आज तुम्हारे सामने संकल्प ले रहा हूं जब राम धरती पर आएंगे ना तो मैं शंकर का रूप त्याग करके बंदर बन के जाऊंगा इसलिए और जब जब चलने लगे तो चांदी से सोने में कन्वर्ट हो गए शंकर कौन है चारु चंद्रावत अंसम हनुमान जी कौन है कंचन वण बराज सुबे सा तो उसी समय पार्वती माता ने कहा चांदी बनकर ही चले जाते सोना बनकर क्यों शंकर जी ने कहा दुनिया में दिखाना चाहता हूं जब जब कोई राम की सेवा में उतरा है वो शंकर चांदी का भी क्यों ना हो भगवान उसे सोने का बना दे पार्वती माता ने कहा मैं भी चलूंगी मुझे भी जाना है शंकर जी ने कहा नहीं जाऊंगी मैं जिद हो गई शंकर जी ने कहा दोनों ही चलते हैं पार्वती माता पूछ बन के चली इसलिए मेरे श्री हनुमान जी महाराज शंकर का अंश है 11 रुद्रावतार है वो तुम त्रिभुवन गुरु वेद बखाना आज भी संसार में है बिल्कुल है आज भी अगर हम हनुमान जी को प्रेम से हृदय से आदर से पुकारेंगे तो क्या हमारी मदद करने आएंगे करते हैं कर रहे हैं हर समय कर रहे हैं वह यह नहीं कि आपके सामने गधा लेकर के आ जाएंगे और ऐसे स्वरूप में आ जाएंगे जी मुझसे कोई कहे कि आप हनुमान जी का दर्शन किया आपने आपको होता है मैं कहता हूं मुझे कभी नहीं होता ना मुझे करना है मेरी औकात नहीं है जी तो फिर आपको कैसे एहसास होता है मैं कहता हूं भाई 24 घंटे जैसे हवा हम महसूस करते हैं उनका एहसास हर समय है महाराज पता है क्या है मैं प्रोग्राम करता हूं लीडरशिप फनल उसमें ना एग्जीक्यूशन के फ्रेमवर्क्स देता हूं बहुत मेरा काम है कोई सा भी बिजनेस ला दो मुझे कोई सा भी बिजनेस ला दो और लॉस मेकिंग को उसको प्रॉफिट मेकिंग कर दूंगा तो फ्रेमवर्क गेम चेंजर है एग्जीक्यूशन गेम चेंजर है आपसे भी आज वही प्रश्न करना चाहता हूं कि अगर कोई भगवान का भक्त है बजरंग बली का भक्त है उसके तीन लक्षण इंडिकेटर केपीआर मेंस इंडिकेटर कैसे पता चलेगा कि यार इसको भगवान का भक्त माना जा सकता है सबसे पहला लक्षण है भगवान के भक्त का अभिमान रहित दूसरा भगवान के भक्त का लक्षण है विनम्रता जी महाराज जी एक ही बात हो गई नहीं विनम्रता में और अभिमान रहित होने विनम्रता का मतलब है एक तरीके से झुकाव ठीक है अभिमान रहित हो गया भाई हम किसी भी बात को कोई हमें कहे तो फूल ना जाए किसी से मिले तो अपना एटीट्यूड ना दिखाते रहे भगवान खुद भी कभी-कभी थोड़ा सा ऐश्वर्य प्रकट कर देते हैं जब जरूरत पड़ती है जरूरी है ना हनुमान जी ने भी तो किया जब भगवान ने देखा कि अर्जुन बात नहीं सुन रहे तो थोड़ा सा आकर के बीच में ऐश्वर्य प्रकट किया उन्होंने भी एक बच्चा घर में होता है तो एक बाप को उसके सामने सब प्रकट करना पड़ता है मुनि तन भय क्रोध के चीना मुझे एक अपने बच्चे को लाइन पर लाने के लिए उसको अंगद भगवान का भक्त है अंगद भगवान का भक्त अपना ऐश्वर्य प्रकट करके आए पूरा लंका में जाके कोलंबो में गए वहां जाकर के उनका पूरा पैलेस बोले पाव हिला के दिखा दो अंगद भगवान का भक्त है यही फर्क था बल और ब वहा उसने कहा फिर राम सीता में हारी संत कहते जुए पर लगा दिया दाव लगा दिया किसको फिर राम सीता मैं हारी जी जी अगर जो मम चरण स स कही सक टार ऐसी चौपाई है अगर तुम में से कोई मेरा चरण हिला दे तो फिर राम सीता में हारी राम जी लौट जाएंगे सीता में हर जाऊंगा अब इसका दूसरा वे क्या है स कहते नहीं नहीं अंग ब समझदार है यार उसने कहा अगर मेरा चरण कोई हिला दे तो फिर ही राम सीता राम सीता तो लौट जाएंगे तुझे मार करके मैं हारी जय हो अब फर्क देखिए हनुमान जी और अंगद में रावण ने दोनों से एक जैसे प्रश्न किए रावण ने हनुमान जी से कहा क लंकेश कवन त कीसा क केवल घाल भन कीसा की धो शवन सुन मन मोई देख अति संघर्षण तोई मारे निचर की अपराधा कौसर तोई ना प्राण के बाधा छह प्रश्न रावण ने हनुमान जी से किए और हनुमान जी बोले नहीं यह है बुद्धिमानी और वहां एक ही बार का अंग से क लंकेश कवन बंदर दूसरी चौपाई तो बोलने नहीं दी अंगद ने रामदूत में सुनत स्कंदर यह फर्क है श्री हनुमान जी में और अंगद में वहा उसने पाव दव पर लगा दिया व हनुमान जी ने लंका जला करके और जब जब वहा अंगद की तो चतुराई तो देखो जब अंत में रावण उठ के आया तो जानता था यार ये तो हिला देगा अब देखो जैसे ही रावण 10 10 सिर लेकर के चला 10 10 सिर द सरता ब भुज दंडा रावण नाम वीर बरबडा जैसे ही आकर के अंगद के चरणों में पकड़ कर के जोर से हिलाना था इतने लोग हिला नहीं पाए जैसे ही झुका तो चार मुकुट नीचे गिरे और अंगद ने कहा हप मेरे चरणों में गिर रहा है ग सना राम चरण सट जाए मुक उठ गेम चेंजर गेम चेंजर चार मुकुट उठाए उठा कर के फेंके अब देखो चार मुकुट उठा कर के फेंके जैसे ही तो इधर जैसे ही श्रीराम खड़े थे देखा बंदरों ने सोचा उल्का पिंड तो नहीं आके गिर गए रावण के मुकुट थे भाई इतने में मेरे हनुमान जी ने डाई मारी चार के चार मुकुट अपने हाथ में लिए कैच किए और राम जी के चरणों में डाल दिए शंकर के रूप में हनुमान रावण के गुरु है लाख शिव लाख उसने किया हो यार लेकिन उसकी इज्जत को ऐसे धरती पर नहीं गिरने दूंगा गोद में कैच कर कच करके अपने पास नहीं रख लिए राम के चरणों में डाल दिए प्रभु जान कीन जो है आपका है जो हम भले बुरे सो तेरे शलोक बोला है भगवान युक्त हारर य कर्म युक्त स्नस योग भव दु आज मेरी थोड़ी सी अलग है महाराज जी मैं ना एक्शनेबल जरूर निकालता हूं हनुमान जी की लाइफ से अगर गुरुदेव आपसे एक्शनेबल निकालू और प्रार्थना करूं आपसे कि हमारे को कुछ एक्शनेबल दीजिए जो हम परम प्रभु बजरंग बली के जीवन से कुछ एक्शनेबल निकाल के अपने जीवन में उतार सके अपने जीवन में उसको स्वीकार कर सके तो हमें तीन चीजें क्या करनी चाहिए ऐसी सबसे पहली विद्यावान जीवन प्रारंभ हो हनुमान जी सीखो भाई हमें विद्यावान होना है दूसरा हनुमान जी से सीखो पॉजिटिविटी जब हनुमान जी सुंदरकांड में चले हैं तो क्या बोले जामवंत के वचन सुहाए सुनी हनुमंत हृदय अति बाए तब लग मोई पर केतुम भाई सही दुख कंद मूल फल खाई जब लगी आव सीताई देखी ये नहीं कहा कि यार जा रहा हूं कितना सुंदर गाते हैं आप कितना अच्छा लगता है क्या ऐसा तो नहीं यार क्या पता सीता जी मिल ही जाए बंदरवाल तो निराश खड़े हैं भूखे खड़े हैं और अब अगर वापस जाएंगे तो सुग्रीव ने कहा था मार डालूंगा हम और आगे सागर है तो बस या तो मरना है या सीता जी का पता लगा दो तो बचना है ऐसी उलझन भरी सम विकट समस्या हो जबरदस्त जबरदस्त ज जोरदार भाई ताली क्यों नहीं बजाते हो जोरदार बजाओ ताली उस समय भी हनुमान जी की पॉजिटिविटी देखो हम कुछ लोगों से हमारे साथ नेगेटिव लोग नहीं होने चाहिए बहुत खूब पॉजिटिव लोगों को रखो साथ बहुत खूब बहुत खूब अदभुत अरे ये कैसे होगा यह कैसे होगा हनुमान जी ने सबको क्या कहा भाई देखो सुनो पहले तो व्रत मत करना भूखे मत रहना हनुमान जी कभी खुश नहीं होते तुम भूखे रहो मैं तो महाराज जी ये वाली लर्निंग ले गया आपसे आज पहले आपको रोक ही दिया बीच में मैं तो इतना इस समय भाव विभोर हो गया हूं ना कि मेरे को रोकना पड़ गया आपको इतनी उलझन में फसे वापस आया तो मारा गया अब मां सीता चाहिए चाहिए लेकर के आना है इतनी बड़ी समस्या में सारे भूखे बैठे मेरे पीछे लोग इंतजार कर महाराज भूखे ये खत्म हो गया अब तो हृदय आपने जीत लिया आज भूखे मत रहना मैं नहीं कह रहा तुलसीदास जी कह रहे हैं यार सुनो राम वंश के वचन सुहाय सुनि हनुमंत हृदय अति भाए अब उसके क्या बाद अब देखो एक बात और देखो हनुमान जी सबको य कह सते सुनो लंका मैं जा रहा हूं समुद्र पार करके तुम लोग भागो यहां से चलो भागो यहां से सुग्रीव के पास क्यों नहीं तो फिर सब यह कहेंगे कि सब के सब पता लगा कर के आए हैं तुम जाओ मैं वहां के अकेले बताऊंगा कि मैं पता लगा के आया हूं लेकिन सबको क्या कहा तुम जाना मत नहीं तो यार सब मुझे ही श्रेय दे देंगे कि अकेला पता करके आया भाई खड़े रहना हम साथ में जाकर सूचना देंगे कि पता करके आया हं यह हनुमान जी काम करते खुद क्रेडिट कर देते सबको और हम लोग काम करवाते दूसरों से क तो क्या कह रहे जामवंत के वचन सुहाए सुनी हनुमंत हृदय अति भाय और फिर क्या बोला तब लगी मई परखे तुम भाई मेरा इंतजार करना ताकि क्रेडिट मुझे अकेले ना मिल जाए सही दुख दुख तो सहना पड़ेगा लेकिन भूख मत रहना कंद मूल फल खाई फिर क्या बोले जब लगी आव सी तही देखी मैं तुम्हें 100% कह रहा हूं कि जब तक सीता जी को देखकर ना आ जाओ चले मत जाना अब यह क्या हो गया या तो सारी जिंदगी मर जाओगे वो नहीं लौट करके आया तो यही खड़े खड़े मरोगे यानी कि मैं इतना पॉजिटिव मैं देखकर ही आऊंगा जब लगी आव सीता देखी और य किसी ने कहा इतनी डंके की चोट पर कैसे कह सकते हो कि तुम सीता को देखकर ही आ जाओगे पता लगाकर तो बोले होई हि काज मोई हर्ष वि से की क्योंकि मेरे अंदर सेय काम करने से पहले प्रसन्नता हो रही है जीवन में जब कोई काम शुरू करने चलो और मन में प्रसन्नता प्राप्त हो तो समझ लेना यह भगवान कार्य करके ही छोड़ेंगे एक बार जोरदार क्यों नहीं बजाते क्या अदभुत बात अदभुत बात कही है बात समझ में नहीं आई गेम इसको दोबारा सुनो क्या करो दोबारा सुनो इसको रिवाइंड करो फिर से सुनो आप अद्भुत बात कह दी यही उतार लिया जीवन में ये तीन लेसन जो बताए हनुमान जी के जीवन से मैं कह रहा हूं ऐसा पॉडकास्ट मैंने तो नहीं किया कभी भी किसी और ने किया हो तो मुझे पता नहीं श्री हनुमान जी दिखाना चाहते कि जब हम अपने घर से निकले प्रविश नगर की जय सब काजा हृदय रा कौशलपुर राजा अपने घर में भगवान को प्रणाम करके जब हम मंदिर हमारे घर में होते हैं उनको प्रणाम करके जाते प्रभु जा रहे हैं लौट के फिर प्रणाम करेंगे जब चलने लगो और मन में प्रसन्नता होती है हमारे घर में कृष्ण बलराम जी के दर्शन किए आपने कैसा लगा आपको अद्भुत गौर निताई अद्भुत अदभुत गौरंग महाप्रभु च मैंने सीधा प्रणाम किया श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद श्री हरे कृष्णा हरे राम श्री राधे गोविंदा वाह वाह प्रणाम कर लिया निताई गौर जब उनकी दोनों भुजाएं उठी मुझे दिखाई देती है तो देखता हूं शरणागति तो देखो अरे अरे अरे अरे क्या नया मीनिंग दिया आपने मैंने कभी ऐ सोचा नहीं हमारे घर में भगवान स्थापित है आपने जिस तरह से देखा और दर्शन किए वो वो गुण मेरे अंदर आ जाए जोरदार हरि बोल कमन द्रौपदी की साड़ी खींच रहा दुशासन एक हाथ से साड़ी पकड़ ली 100 हज हाथियों का बल था 100 हज हाथियों का बल एक हाथ से पकड़ी स्त्री का बल द्रौपदी अपने आप को पंजाब की बड़ी बलवान समझती थी दूसरा हाथ पकड़ लिया दोनों हाथों से साड़ी खींच लेकिन 10000 बल वाला जब खींच रहा था दोनों हाथों से साड़ी छूटी तो एक से पकड़ ली एक से भी छूटने लग तो दांतों में दबा ली और देख लिया जब अब नग्न हो जाऊंगी तब दोनों भुजाएं उठा कर के कहा जाएगी लाज तुम्हारी मुरारी जाएगी लाज तुम्हारी मुरारी मेरो का बिगरे भगवान भी कह रहे यही खड़ा हूं लेकिन आऊंगा नहीं जब तक पुकारेगी नहीं नहीं आऊंगा वैसे हर समय मुझे कृष्ण कृष्ण कृष्ण करके पुकारती है आज तेरी नगन तुझे करने को दुशासन अड़ा है और तू मुझे पुकार नहीं रही दुनिया में भेजे हुए जीव से भगवान को एक ही उम्मीद है यह गया है ना मेरा नाम बजेन बंध दीनानाथ मेरी डोरी और जैसे ही द्रौपदी ने फिर दोनों भुजाएं उठा कर के कह दिया हे केशव अब जो होगा सो देखी जाएगी तो पता ही नहीं लगा सारी है कि नारी है कि नारी बीच साड़ी है नारी की ही साड़ी है कि साड़ी की ही नारी है आप इतनी सुंदर अदभुत कलिए सूरदास जी ने गाया था फिर अच्छा द्रुपद सुदा निर्बल भई न आए निज धाम दुशासन की भुजा थकित भई और बसन रूप भए श्याम सुनेरी मैंने निर्बल केवल राम निर्बल के बलराम जब दुनिया में अप बल तप बल और बाहुबल लेकिन चौथ है बलधाम जब चारों बल हार जाते हैं सूरदास जी कहते हैं फिर हारे को हरि नाम मेरे भाई बहन जब जब व्यक्ति एकांत में बैठ कर के कितना महफूज हूं मैं इस कोने में जहां कोई तकलीफ नहीं होती मुझे तेरा नाम जपते हुए रोने में जब कोई एकांत में बैठ कर के नाम भजता है ना तो इंद्र का सिंहासन थर थर थर थर डोलने लगता है और जब उसकी आंख से फिर एक अश्रु पात होता है ना तो हजारों ब्रह्मांड चिड़ताला हुआ उस परमात्मा के चरणों में पहुंच जाता है इसलिए मैं आपको भैया बिल्कुल अपने हृदय की बात कहूं तो मुझे इस कलयुग में जो मेरे तुलसीदास जी ने कहा ना भरोसो एक राम नाम को य सब तालो की कंजी है वही हरेर नाम हरेर नाम हरेर नाम केवलम कल नास्ते नास्ते नास्ते गतिर अन्यथा महाराज जी आखरी दो प्रश्न एक पहला वो है के आप आपने मेरा कोई वीडियो देखा अभी तक हां देखा तो आप हमारा भी थोड़ा गुणगान करिए बताइए कि हम क्या ठीक कर रहे हैं क्या गलत कर रहे हैं और हमारे को कोई समीक्षा भी दीजिए हमारी परीक्षा भी लीजिए जब मैंने आपका पॉडकास्ट या उस परे डाला विवेक बिंद्रा तो उसमें भगवान श्री कृष्ण का गीता ज्ञान सुना रहे थे आप और मेरा बड़ा फेवरेट श्लोक आपने 2022 मिनट में उसको डिफाइन किया बच्चों के सामने ध्यायतो ध्यायतो विषन पुसा सतो विषन पुसा सस्ते बजते संघ का कामा क्रोध जा क्रोधा भवति सोहा सोहा समृति विभ्रम समृति भद बुद्धि नाश बुद्धि नाश प्रणेश भगवान श्री कृष्ण कहते जब बुद्धि का नाश हो जाए ना तब फिर उसको कोई नहीं बचा सकता इसलिए भगवान से प्रार्थना करते हुए मांगो ना तो अपनी जिंदगी में यह मानना हे प्रभु मुझे 10 20 30 50 100 साल की जिंदगी में किसी ऐसे बंदे से मिलवा दे जिसको तू प्रेम करता हो कोई ऐसा साधु पुरुष मिल जाए कोई ऐसा ऐसा भजनानंद व्यक्ति मिल भजना ऐसा कोई परम पुरुष मिल जाए तू प्रेम करता हो और दूसरा भगवान से कुछ मांगना तो विवेक मांगना हो अ विवेक जब दे विधाता भगवान से विवेक मांगो और भगवान से कोई ऐसा संत ऐसा बुद्ध पुरुष कोई ऐसा सरल हृदय का व्यक्ति मांगो जिसके साथ बैठो तो आपको आनंद मिले जिसको सुनो तो आनंद मिले जिसकी आंखें देखो तो करुणा से भर जाओ जिसको देख कर के आपको भगवान की याद आ जाए हे प्रभु तुझे तो हम कहां ढूंढने जाएंगे कोई अपना बंदा मिला दे बहुत बढिया बात जिससे जो तुझे प्रेम ना करता हो जिससे भगवान तू प्रेम करता ह ऐसा को मिल जाए अरे कबीर ने कहा ना कबीरा मन निर्मल भयो जो जो नीर फिर पाछे पाछे हरी फिरे कहत कबीर कबीर कबीर कबीर कबीर कबीर कबीर कभी खत्म ना हो ये पोस्ट कभी खत्म ना होय पॉडकास्ट कभी खत्म ना होय पॉडकास्ट चलता र लेकिन संपूर्ण करने के लिए जो भजन आपके दिल के करीब हो मेरा अगला आखरी प्रश्न आपसे जिससे इस पॉडकास्ट को समापन नहीं संपूर्ण किया जाए मेरा कोई फेवरेट नहीं कोई मुझसे दूर नहीं मुझसे कोई मैं समझ ही नहीं पाया मेरा कौन सा भजन फेवरेट जो गाऊ वो फेवरेट जो ना गाऊ वो ना फ मेरे लिए कुछ नहीं एक लाइन हां जब जब भी मुझ पर संकट का कोई घेरा होता है तो मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है जोरदार मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है बोलो जय बजरंग बली बोलो जय बज बजरंग बली बोलो जय बजरंग बली बोलो जय बजरंग बली जब से मेरे घर में आए घर के संकट भाग रहे हम तो सोते घर के अंदर मेरे हनुमान जी जाग रहे जब भक्त सोता या निशा सर्व भूता नाम तसम जागृति श्री कृष्ण कहते हैं मैं जागता हूं या निशा सर्व भूता नाम तसम जाग्रति संयमी इसलिए लक्ष्मण जी ने निषाद को कहा था ही जग जाग जामिनी जोगी परमारथ प्रपंच वियोगी जानिए सब जीव जग जागा जब सब विषय विलास विरागा जब से मेरे घर में आए घर के संकट भाग रहे भाई हम तो सोते घर के अंदर मेरे हनुमान जी जाग रहे जय हो मेरे मरघट वाले जाग रहे मेरे मरघट वाले जाग रहे सालासर वाले जाग रहे मेहंदीपुर वाले जाग रहे क्योंकि गली गली कूचे में [संगीत] हा गली गली कूचे में इनका पहरा होता है मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है और हनुमान जी का भजन करोगे तो सबसे बड़ा फायदा आपका क्या है मुझसे पहले रक्षा करते वो मेरे परिवार की राम के लिए दुनिया में अवतार लिया लेकिन सबसे पहले रक्षा लक्ष्मण की उसके बाद भरत की और जो सीताज अशोक वाटिका में विरह से व्याकुल है उनकी रक्षा यह हनुमान जी करते अगर हमरा परिवार सुखी है तब हम दुनिया में सुखी हो सकते हैं मुझसे पहले रक्षा करते वो मेरे परिवार की करते हैं हर दम रखवाली वो सबके घरबार की भाई जपते जपते नाम इनका जपते जपते नाम इनका सवेरा होता है मेरे दरवाजे पे हनुमान का पह पहरा होता है होता है क्योंकि राम द्वारे तुम रखवारे होत ना आज्ञा बिन पै सारे जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम राम लक्ष्मण जान की जय बोलो हनुमान की क राम लक्ष्मण जान की जय बोलो हनुमान की जय हो सब जय बोलो सब जय बोलो सब जय बोलो जय बोलो सब जय बोलो सब जय बोलो सब जय बोलो राम लक्ष्मण जान की जय बोलो परम पूजनीय गुरुदेव इस पॉडकास्ट को संपूर्ण करते वक्त मैं आपसे दोबारा अपने हृदय की बात कहना चाहता हूं कि हो सकता है कि मैंने और हुआ ऐसा कि कई बार कटाक्ष भी किया कई बार प्रश्न किए कई बार संवाद जैसा दिखने लायक विवाद किया पर मेरे अपराधों को क्षमा करिए क्योंकि आप बहुत बड़े हृदय वाले हैं और आपका पॉडकास्ट य पूरे देश दुनिया तक पहुंचे इसका लाभ उठाएं क्योंकि आप फ्रेमवर्क देने में आप हनुमान जी की एग्जीक्यूशन बल स्ट्रेटेजी देने में एक्सपर्ट है आपने बताया हनुमान जी ने हमें क्या करना चाहिए समझाया हमको आपकी हर बात इतनी मिठास है क्या है मिठास मिठास है कि आप भजन के साथ उसको गाते हैं सुनाते हैं कि सिर्फ बजरंग बाणी क्यों आपका हर वीडियो वायरल होना चाहिए [संगीत] चम चम चम चपल चलंत ओम हनु हनु हनु हनु हनुमंता ओम हम हम हा देत कप चंचल ओम सम सम सेमी पराण खलल अपने जन को तुरत यु बारो सुमिरत होई नंद हमारो हे बजरंग बाण जहि मार ताही करो कहो फिर कौन उभारे पाठ करे बजरंग बाण की हनुमत रक्षा करे प्राण की है बजरंग बाण जो जापे ताते भूत प्रेत सब कापे धूप अरु जप हमेशा ताके तन नहीं रहे कलेशा जय हनुमान जय हनुमान जय हनुमान जय जय हनुमान जय हनुमान जय हनुमान जय हनुमान जय जय हनुमान प्रेम प्रतीति कपी भजे सदा धरे उर ध्यान तेही के कारज सकल शुभ सिद्ध करे हनुमान जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय जय सियाराम जय हनुमान जय हनुमान जय हनुमान जय जय हनुमान उनकी आंख में भी आंसू आ रहे हैं अरे बिल्कुल कोई रु कहां रुक रहा है हर एक की आंख में आंसू आ रहे हैं कोई नहीं रुक पाया यह जो आपने आज मिठास दी इतनी मिठास आपके बजरंग बांड में आपके हर वीडियो में आपके हर बखान में आपके हर कथा में आपने जिस तरह से उत्तर दिए और हमारे साथ जुड़ने के लिए ना केवल हमारे साथ जुड़ने के लिए बल्कि प्रभु की आवाज से इस बहुत से लोगों को जोड़ देने के लिए आपने बहुत लोगों को जोड़ा आज बहुत लोगों को हनुमान जी की भक्ति बांटी आपने आज यह कितना बड़ा दान किया आपने माध्यम आप है मैं माध्यम नहीं हूं मैं तो केवल आपके साथ आपके पीछे बैठा आपके नीचे देखिए आपके चरणों में दास हूं निमित्त मात्र भव स साची और मेरी अपनी एक रुचि है और तो इसलिए कई बार मैं उस रुचि के चलते जिज्ञासु होने के कारण कई प्रश्न पूछता हूं और आप लोगों ने देखा होगा कि आज कई प्रश्न मैंने ऐसे किए जिनमें देखने में संवाद विवाद और संवाद के बीच का रास्ता दिखा होगा पर उसमें गुरुदेव ने हमें बहुत अच्छे उत्तर दिए इस वीडियो को ना इसलिए शेयर करना चाहिए कि लोगों में आपकी आवाज के माध्यम से प्रभु से जुड़ने की क्षमता और शक्ति प्राप्त हो प्रभु के साथ समझे इस बात को हमारे साथ जुड़े रहने के आप सबका हृदय की गहराई से प्रेम पूर्वक बहुत-बहुत धन्यवाद गुरुदेव आपका विशेष धन्यवाद खूब हनुमान जी कृपा करें सब सुख लाए तुम्हारी शरणा तुम रक्षक काहु को डरना जय सियाराम जय सियाराम [संगीत]

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