Step By Step Strategies Of Dhirubhai Ambani Tycoons Of India Case Study Dr Vivek Bindra
थोड़े दिनों में ऐसा होगा कि हर संडे काल भारत बेसब्र से इंतजार करेगा सुबह 800 बजे क्योंकि आता है टाइकून ऑफ इंडिया क्या मतलब हुआ वो ब्रिलियंस जिन्होंने बनाए कई बिलियंस नमस्कार मैं विवेक बिंद्रा फाउंडर एंड सीओ bab.com छठा एपिसोड आज बात करूंगा बादशाह की नहीं बादशाह तो राजा होता है आज बात करूंगा शहनशाह की जो राजाओं का राजा होता है आज बिजनेस के शहनशाह धीरू भाई अंबानी जिनकी सोच जिनकी फिलॉसफी बड़ी जबरदस्त थी कि भाई बड़ा सोच तेज सोचो और बहुत दूर की सोचो तीन बातें बोलते थे हमेशा क्या बड़ा सोचो बहुत तेज जल्दी से बड़ा सोचो और बहुत दूर तक इतना बड़ा सोचो और ये क्या कहते थे आइडिया किसी की बपौती नहीं है किसी के बाप की संपत्ति नहीं है आइडिया इज नोबडी मोनोपोली आइडिया सब लोग आइडिया प इंप्लीमेंट कर सकते हैं इसी सोच ने इस शहंशाह का एक साम्राज्य तैयार किया जिसका नाम था रिलायस इंडस्ट्री आज इनकी आठ स्ट्रेटजी दूंगा मैं एक के बाद एक आठ पावरफुल ऐसी के ढक्कन खोल देगी इनका नाम था धीरज लाल हीराचंद अंबानी धीरज लाल को प्यार से हीरा चंद अंबानी को धीरू प्यार से बोलते थे इसलिए धीरू भाई उनका नाम पड़ गया ri5 भाई-बहन जिसमें तीसरे नंबर पे आते थे फाइनेंशियल कंडीशन खराब थी शुरुआत से ही बिजनेस में तेल भजिया बेचने में लग गए थे लेकिन साथ-साथ इनके अंदर भारत को आगे बढ़ाने की जो भावना थी वो तब पता चली जब 1947 में भारत आजाद हुआ जूनागढ़ अभी भारत से नहीं जुड़ा था 15 अगस्त को जूनागढ़ भारत का हिस्सा नहीं था नवंबर में जाकर के बना पर सरदार पटेल के इतने बड़े फैन 15 अगस्त को झंडा फहरा दिया जूनागढ़ स्टूडेंट यूनियन का सेक्रेटरी होने के कारण नवाब ने उनको जेल में भी डाला था कुछ दिन के लिए कहानी को थोड़ा आगे बढ़ाते हैं फास्ट फॉरवर्ड अभी 17 साल के हो चुके हैं और एक दिन इनके पिता उनका नाम था हीरा चंद अंबानी उन्होंने अपने पास बुलाया बेटा धीरू मेरी बात सुनो धीरू अब मेरी ना तबीयत ठीक नहीं रहती है मैं जानता हूं तुम आगे तो पढ़ना चाहते हो तुम्हारी पढ़ाई में मन भी लगता है तुम व्यापार भी यहां करने में तुम्हारी बहुत अच्छा रहती है लेकिन अब परिवार को तुम्हारी जरूरत है यमन नाम का एक स्थान है जहां पे हमारी करेंसी के मुकाबले तुम बहुत ज्यादा पैसा कमा सकते हो अभी धीरू भाई 17 साल के थे इन्होंने उनको कन्विंसिबल जाओ बड़े भाई तुम्हारी वहां नौकरी लगवा देंगे और बड़े भाई इनके थे रमणीक लाल रमणीक लाल ने उन समय इनको 00 महीने की वहां जाकर के यमन के अंदर नौकरी भी लगवा दी यमन में ये 00 वाले आदमी थे नहीं इनका दिमाग बहुत तेज चलता रहा चाचा चौधरी से तेज दिमाग आठ स्ट्रेटेजी में पहली स्ट्रेटेजी ज्योग्राफिकल आर्बिट्राज ऑफ कमोडिटी वैल्यू छोटी उम्र में ही पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं ये इनकी पहली वहां पे बहुत बड़ी कमाई हुई यमन में नौकरी के साथ-साथ ये सब चीजों को बड़ा ध्यान से ऑब्जर्व करते थे क्या बोले बड़ा सोचो तेज सोचो बहुत आगे की सोचो दूर की सोचो कोकिला बहन से शादी करने के लिए जब ये इंडिया आए तो तब इन्होंने इंडिया में 1955 के अंदर यह किस्सा सुना कि जो भारत की जो इंडियन करेंसी है उसमें जो सिल्वर लाइन है पतली सी लाइन होती है ना जिससे पता चलता है कि नोट असली है कि नकली है देखते हो सिल्वर लाइन वो सिल्वर लाइन किसी ने ने ऐसे बोल दिया कि करेंसी नोट से भी ज्यादा महंगा होता है तीरू भाई को गजब आईडिया आया यमन में उस समय क्या स्ट्रेटजी बता रहा हूं आपको मैं ज्योग्राफिकल आर्बिट्राज ऑफ कमोडिटी वहां जो सिक्के होते थे यमन में वो रियाल कॉइंस चलते थे और वो चांदी के होते थे इन्होंने क्या किया ज्योग्राफिकल आर्बिट्राज किया उस कमोडिटी चांदी के सिक्कों को तो उन्होंने क्या किया सिक्के का वजन तोला और दुनिया भर में रिसर्च करनी शुरू कर दी मार्केट में चांदी का सबसे अच्छा भाव कहां मिल रहा है उस समय इंग्लैंड के अंदर चांदी का भाव अच्छा मिलता था रिसर्च में वैसे ही बहुत तेज था ये धीरू भाई ने कैलकुलेट किया सिल्वर का रेट जो था वो कॉइन के टोटल वैल्यू से ज्यादा था मतलब समझो अगर एक रियाल का कॉइन है तो समझ लो डेढ़ रियाल का चांदी का वजन था तो उन्होंने क्या किया चांदी के सारे सिक्के इकट्ठे करने शुरू कर दिए उनको पिघला दिया और उनको पिघला कर के मेल्ट करके सिल्वर ब्लॉक्स में बना कर के इंग्लैंड में बेचना शुरू कर दिया तीन महीने तक ये लगातार करते रहे धीरू भाई के लिए वो सिक्के सिर्फ सिक्के नहीं थे वो स्ट्रेटेजी थी जिसे जमा करके उन्होंने अपनी चांदी कर ली वो चांदी के सिक्कों से बड़ी चांदी बनाई उन्होंने और तीन महीने में इतने नोट छाप लिए इतने नोट छाप लिए कि जब तक यमन की सरकार को पता लगे तब तक ये इंडिया चुपचाप निकल लिए है जमन की सरकार ने तो सिक्के वापस ले लिए मैंने आपसे अपॉर्चुनिटी वापस नहीं लिए है सारे वीडियो प्लेलिस्ट में डाल रखे हैं कौन से टाइकून ऑफ इंडिया देख रहे हो भूलना मत ये सीरीज नहीं है ये स्ट्रेटेजी है ये वो पढ़ाई है जो आपको मैनेजमेंट कॉलेजेस में भी नहीं कराई जाएगी इसलिए पॉपकॉर्न लेकर के नहीं कॉपी पेन लेकर के बैठो भैया जब कॉपी पेन लेकर बैठोगे लाइन से सब कुछ वहां पे देख भी डालो मैं गारंटी से कह रहा हूं इतना इनलाइटें हो जाओगे कि सब्सक्राइब किए बिना आप स्विच नहीं कर पाओगे दूसरी स्ट्रेटजी प आता हूं यहां तो चांदी के सिक्के बनाए इन्होंने इधर है क्या टू सिलेक्ट वन यू शुड लर्न हाउ टू रिजेक्ट 99 फा फाइंड योर वन थिंग अब ये भारत आ चुके थे अब एक चीज सिलेक्ट करने के लिए 999 छोड़नी थी इनको धीरू भाई विदेश से गए हुए 10 साल हो चुके थे इनको उस समय यमन में इनके बेटे मुकेश पैदा भी हो चुके थे इनकी पत्नी कोकिला बन के साथ में अब व्यापार और परिवार के लिए जब ये इंडिया शिफ्ट किए तो नौकरी के साथ-साथ इन्होंने रिसर्च करनी शुरू कर दी गुजराती ट्रेडिंग फर्म में फ्री में काम किया ट्रेडिंग की सारी स्किल सीख ली इन्होंने इंडिया में क्या किया इंडिया के ज्योग्राफी इंडिया के कंप्लायंस इंडिया की पॉलिसीज उनको अच्छे से रिसर्च करना शुरू किया कि भाई मैं एक सिलेट क्या करूं मुझे एक फोकस कहां करना है वो एक फोकस कहां करना है और तभी खबर आई कि नेहरू जी ने सेकंड फाइव ईयर प्लान बना दिया 1956 से 61 की बात थी है और उस समय फोकस क्या था कि पब्लिक सेक्टर और रैपिड इंडस्ट्राइलाइज करने लग गए अब क्या रिसर्च करी सारी रिटेल की दुकानों में रिसर्च क्या बिक रहा है कितने का बिक रहा है क्या बिक रहा है कितने का बिक रहा है दूसरा इंपोर्ट एक्सपोर्ट क कंपनी को जाके रिसर्च करने लगे कहां बेच रहे हैं कितना बेच रहे हैं कितने का बेच रहे हैं कितना कमा रहे हैं तीसरा स्टॉक एक्सचेंज को जाके समझने लगे कौन कंपनी कमा रही है कौन सी कंपनी का शेयर बढ़ रहा है क्यों बढ़ रहा है कितना कमा रहा है और बिजनेस के लिए वो 100 ऑप्शन ढूंढते लेकिन 9999 को रिजेक्ट कर देते जिस बिजनेस में मार्जिन नहीं उसका कोई मतलब नहीं उन्होंने एक एमटीडी फार्मूला बनाया इस एमटीडी फॉर्मूला को सुनना जरा ध्यान से एमटीडी फॉर्मूला में पहली चीज ये धंधे में देखते थे मार्जिन किसमें ज्यादा है सारी रिसर्च के अंदर 999 रिजेक्ट करनी है एक सिलेक्ट करनी है तो पहले देखूंगा हाई मार्जिन दूसरी चीज टी टोटल मार्केट कितना है इसका भैया कितने सारे देशों में माल बेच सकता हूं भारत के अलावा कहां-कहां माल बेच सकता हूं टोटल मार्केट कितना बड़ा है एमटी डी मतलब क्या है कि उस प्रोडक्ट की डिमांड कितनी ज्यादा है और किस वाले प्रोडक्ट की डिमांड ज्यादा है तो एक मार्जिन किसमें ज्यादा है दूसरा टोटल मार्केट कितना बड़ा है तीसरा डिमांड कौन से प्रोडक्ट का ज्यादा है जब ये तीन चीजों से क्वालीफाई किया तो उसके बाद इनको समझ में आया कि भाई इंडियन मसाले जो है ना वो विदेशों में बहुत सारे देशों में इसकी डिमांड बहुत है इन्वेस्टमेंट थोड़ी है रिटर्न बहुत ज्यादा है इन्होंने इलायची उठा ली लौंग उठा लिया हल्दी उठा ली दालचीनी उठा ली उन मसालों को लेकर के वेस्टर्न एशियन कंट्रीज के अंदर मिडिल ईस्ट के अंदर सेंट्रल एशिया के अंदर एक्सपोर्ट करने शुरू कर दिया धीरू भाई भले पढ़े लिखे थे लेकिन उनका एक सॉलिड फॉर्मूला था परेटो प्रिंसिपल 99 रिजेक्ट करो एक उठाओ एमटीडी फॉर्मूला से मार्जिन होना चाहिए टोटल मार्केट होना चाहिए और डिमांड बड़ी भयंकर होनी चाहिए पहली एक्सपोर्ट कंपनी जिसका नाम रखा reliance1 पाच के छोटे कमरे से चालू किया आपने बड़े साम्राज्य की शुरुआत छोटी थी शुरू करो शुरू करो शुरू करो शुरू करो अगर आप भी देख रहे हो ना मेरे साथ में कमेंट बॉक्स तो आपका अपना प्ले फील्ड है जी ये आपका अपना प्लेग्राउंड है जितने मर्जी कमेंट करो बताओ किसके बारे में देखना चाहते हो मैं इन सारी केस स्टडी से आपको इंस्पायर करता रहूंगा इनके साथ क्या था केवल दो एंप्लॉई थे एक यह और एक इनके भाई बस दो ही एंप्लॉई हां यह इनके भाई केवल दो एंप्लॉई व एक वह दिन था एक आज का दिन है आज 4 लाख से ज्यादा एंप्लॉई हैं किसी कंपनी की भीड़ नहीं अपनी कंपनियों की भीड़ लगाने की तैयारी कर ली थी उन्होंने हां यह थी दो स्ट्रेटेजी अब तीसरी पे आते हैं तीसरी क्या है इन्वेस्ट इन द राइट नेटवर्क यू विल नॉट हैव टू फाइट फॉर र नेटवर्थ अगर आपका नेटवर्क बड़ा हो गया तो आपको नेटवर्थ के लिए लड़ना नहीं पड़ेगा नेटवर्थ अपने आप बढ़ती चली जाएगी काम के लोगों से नेटवर्क बनाओ हर एक के साथ नेटवर्क नहीं बनाना काम का लोग कौन होते हैं इस फिलॉसफी को सुनना थोड़ा इंटेलिजेंस चाहिए एकदम अटेंशन मैं रामलाल हूं मुझे अगर श्यामलाल की जरूरत पड़ती है अपने धंधे में श्यामलाल को किसकी जरूरत पड़ती है वो ढूंढो आपको जिसकी जरूरत पड़ती है उसको किसकी जरूरत पड़ती है वो ढूंढो आपको जिससे काम पड़ता है उस आदमी को किससे काम पड़ता है अगर उसको जिससे काम पड़ता है वो आपका हो गया तो ये तो अपने आप आपका हो जाएगा ये है मेन मुद्दा समझना ध्यान से एक्सपोर्ट का बिजनेस इनका चल रहा था एक्सपेंड करने की ये सोचते थे कंपनियों को जब तक चेन ना बन जाए तब तक चैन से नहीं बैठते थे और उनको अपॉर्चुनिटी कहां मिली एक अपॉर्चुनिटी हुई ये ढूंढ रहे थे सारी अपॉर्चुनिटी को तभी इंडियन गवर्नमेंट ने एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम अनाउंस कर दी और कॉटन सिंथेटिक क्लोथ्स को एक्सपोर्ट करने पे सब्सिडी मिलने लगी बड़े-बड़े ब्रांड्स उस समय एक्सपोर्ट किया करते थे गवर्नमेंट चाहती थी एक्सपोर्ट करो ताकि डॉलर आए और भारत की इकॉनमी स्टेबल हो जाए तो अंबानी समझ गए इन्होंने कैप्चर कर ली विंडो ऑफ अपॉर्चुनिटी बोला ये है विंडो ऑफ अपॉर्चुनिटी एक्सपोर्ट के धंधे के अंदर जो एक्सपोर्ट कर रहा है पहले उसको सप्लाई करता हूं वहां के थ्रू धंधा बिल्ड करूंगा बाद में मैं अपने आप भी एक्सपोर्ट कर लूंगा टेक्सटाइल बिजनेस शुरू करने का सही समय है और इंडिया में टेक्सटाइल बिजनेस शुरू करना मुश्किल बहुत था मुश्किल इसलिए था क्योंकि उस समय वहां पे जिन्होंने पांव जमा रखे थे जो अंदर बिल्कुल पैठ बना के अपनी बैठे पड़े थे जो पुराने लोग थे मजबूत लोग थे उनका नेक्सेस था वो नए ट्रेडर को रॉ मटेरियल लाने में दिक्कत पीछे सप्लायर के साथ दिक्कत आगे बेचने में दिक्कत ना पीछे से माल ले सकते ना आगे दे सकते एक आपस में उनका बुना हुआ नेक्सेस था अब मार्केट में एंटर करने के लिए कनेक्शन चाहिए और धीरू भाई कनेक्शन बनाने में माहिर थे इनके पास फाइनेंसियल कैपिटल नहीं थी पर नेटवर्क बनाने की कैपिटल तो थी ना इनके पास में नेटवर्क किसके साथ बनाना है हर एक के साथ नहीं बनाना है सही आदमी के साथ बनाना है अंबानी उस समय यमन में काम कर चुके थे मिडल ईस्ट को समझते थे थोड़ा सेंट्रल एशिया को भी समझते थे अंबानी समझते थे कि वहां टेक्सटाइल कंपनी कैसे काम करती है तो उन्होंने क्या किया इन्होने देखा जो भारत के बड़े ब्रांड्स हैं वो सेंट्रल एशिया में या यमन की तरफ या मिडिल ईस्ट के और आगे जाकर के वहां पर माल एक्सपोर्ट कर रहे हैं तो इन्होंने क्या किया अगर मेरे को बड़े ब्रांड की जरूरत पड़ती है उसको वहां पे यमन में किसकी जरूरत पड़ती है उसको मिडिल ईस्ट में किसकी जरूरत पड़ती है वहां के जितनी बड़ी कंपनी के परचेस ट थे उनके साथ रिश्ता बना लिया इन्होंने ऐसा रिश्ता बना लिया कि अब ये ब्रांड जो है ना इनको काम तो इन्हीं से पड़ता है ना तो कभी दिवाली गिफ्ट भेज दूं कभी होली गिफ्ट भेज दूं कभी कुछ भेज दूं कभी कोई मिठाई भेज दूं कभी कोई चिट्ठी भेज दूं कभी कोई रिश्ता बना लू कभी ऐसे ही हेलो बोलूं क्या हाल है सेठ जी क्या खबर है तो धीरू भाई अंबानी को टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर की जरूरत थी जो एक्सपोर्ट इनको करेगा और उनको रॉ मटेरियल देना चाहते थे बड़े ब्रांड्स को रॉ मटेरियल देना चाहते थे पर रॉ वो इनकी सुनते नहीं थे अब क्यों सुनेंगे यह किसकी सुनता है जब वो मेरे दोस्त बन गए यानी कि यमन में परचेस हेड यानी कि मिडिल ईस्ट में बड़े परचेस हेड मेरे दोस्त बन गए तो धीरू भाई अंबानी यहां समझ गए कि टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स को उन परचेस हेड की जरूरत है और परचेस हेड से इनको फोन कराया सारे बड़े-बड़े ब्रांड्स को उनको फोन करवाया और एक ऐसा समय आया कि अब सारे के सारे रॉ मटेरियल पीछे से धीरू भाई से लेने लगे क्योंकि आगे बेचने के लिए धीरू भाई के कनेक्शन है वहां पे धीरू भाई इनका माल भी बिकवा रहे हैं और बाद में धीरू भाई खुद भी डायरेक्ट भी एक्सपोर्ट करेंगे तो अगले एक साल में यह सबसे बड़े सप्लायर बन गए ये थी मेरी तीसरी स्ट्रेटेजी ये समझना कि आपको जिससे काम पड़ता है उसको किससे काम पड़ता है उसको अपना बना लो हां अपना बना ले पिया गाना सुना है ऐसे धंधे में सुनो चौथी स्ट्रेटेजी टू पी स्ट्रेटेजी क्वालिटी ऑफ परचेस जितनी अच्छी होगी क्वालिटी ऑफ प्रॉफिट उतना अच्छा होगा डायरेक्टली प्रोपोर्शनेट है क्वालिटी ऑफ परचेज से क्वालिटी ऑफ प्रॉफिट अपने आप बढ़ता चला जाता है धीरू भाई अंबानी टेक्सटाइल इंडस्ट्री में आके समझा कि जो फ्यूचर है वो फाइबर सिंथेटिक फाइबर में है धीरू भाई के जितने कंपट थे ना समय भारत में वो कॉटन का माल भी लेते थे सिंथेटिक का भी लेते थे रेन का भी लेते थे लिनन का भी लेते थे सब मिलकर के 100 टन फाइबर टोटल खरीद पाते थे ीरू भाई ने गेम चेंज कर दिया यहां पे बोला मैं पीछे जाके परचेज इतनी सस्ती कर लाऊंगा बल्क में छोटा पैसा एडवांस दूंगा लेकिन बल्ब में माल बुक कर लूंगा केवल सिंथेटिक फाइबर उन्होंने उठाया पूरी रिसर्च के बाद रिसर्च में बहुत तेज थे ये और बाकी सब 100 100 टन माल उठाते नहीं ये 10000 टन जाकर के सिंथेटिक फाइबर उठा लाए इन्होंने पहले ही जाकर के एंटीसिपेटरी सप्लाई चन समझो मेरी बात को एक तरफ बल्क में आइटम खरीदने के कारण उ बेस्ट क्वालिटी का माल मिल गया दूसरा सबसे सस्ता माल मिल गया तीसरा अंबानी ने जाकर के आगे गारमेंट मैन्युफैक्चरर क्योंकि ये तो रॉ मटेरियल लेके आ रहे हैं ना तो आगे जो कपड़ा बनाएगा उसको जाके समझाना शुरू कर दिया इसका क्या फायदा ये ये समझ लो मेरी बात को सिंथेटिक फाइबर स्ट्रेचेबल है गार्नेट मैन्युफैक्चर ए इतना ही नहीं वाटरप्रूफ है अब गवनमेंट मैन्युफैक्चरर सोच रहा है अच्छा अरे इतना ही नहीं स्टेन रेजिस्टेंट है को दाग ही नहीं लगता इस पे गवर्नमेंट मैन्युफैक्चरर सोचने लगा इन्होंने इतने फायदे समझा दिए इतने फायदे गिना दिए और तो और यह 33 पर आपको सस्ता पड़ेगा वर्सेस नेचुरल फाइबर नेचुरल फाइबर कौन सा हो गया समझो कॉटन हो गया जूट हो गया सिल्क हो गया उससे यह आपको 1/3 सस्ता भी पड़ेगा वाटरप्रूफ भी है स्ट्रेचेबल भी है स्टेन रेजिस्टेंट भी है बड़े फायदे हैं इसके और मैं आपको सस्ता दे रहा हूं इससे क्या हुआ उनका माल आपका माल अपने आप जल्दी बिकेगा इसलिए आपको मेरा माल लेना पड़ेगा अब गारमेंट मैन्युफैक्चरर उनके टर्म्स पहले धीरू भाई से अच्छे थे उनको यह बात इजली समझ में आ गई धड़ धड़ धड़ा धड़ धड़ल्ले से धीरू भाई का माल बिकने लगा धीरू भाई क्या करते थे केवल माल दो पैसा लो नहीं आगे तक की पूरी चेन को समझ के रखते थे आगे की भी पूरी वैल्यू चेन को समझ के रखते थे जिससे वो इसको इन्फ्लुएंस कर पाते थे मैन्युफैक्चरर को इन्फ्लुएंस कर दिया क्योंकि मैन्युफैक्चरर के जितने दर्द है आगे के वो उनको पहले कंपट 100 टन फाइबर नहीं बेच पाता ये 101 हज टन सिंथेटिक फाइबर बेचना शुरू कर दिया पांचवी स्ट्रेटजी पकड़ते हैं अब इन्होंने क्या किया धंधे में बड़े होने लगे हाथ में पैसा आने लगा बाजार में नाम होने लगा तो तो आगे का काम भी खुद करने लग गए पीछे का काम भी खुद करने लग गए आजूबाजू का काम भी करने लग गए फॉरवर्ड इंटीग्रेशन बैकवर्ड इंटीग्रेशन हॉरिजॉन्टल इंटीग्रेशन यानी कि पूरा का पूरा इकोसिस्टम यानी कि एक फैक्ट्री लगाई और उसमें चार फायदे कमाए धीरू भाई सिंथेटिक फाइबर्स की अ ट्रेडिंग कर रहे थे अच्छा मुनाफा कमा रहे थे अगला गोल था खाली ट्रेडिंग नहीं करेंगे पूरा इकोसिस्टम बना देंगे दुनिया भर में टेक्सटाइल में हो रही जितनी एडवांसमेंट थी सबको एनालाइज कर डाला इन्होंने सब में घुस गए बहुत डिटेल में घुस गए और डिटेल की डिटेल की डिटेल में घुस गए स्ट्रेंथ और वीकनेस को कंपेयर करना शुरू किया एंप्लॉई इस पर विश्वास करके उनको काम दे दिया खुद नहीं रिसर्च करते रहते थे एनालिसिस एनालिसिस करते रहते थे पॉलिस्टर गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग एक अपने आप में अपॉर्चुनिटी थी इनको लगा रॉ मटेरियल मेरे पास बढ़िया है अब मैं रॉ मटेरियल भी अगर खुद बनाऊं और कपड़े भी अगर खुद बनाऊं तो मैं इन्होंने उसके बाद कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस किया इस बेनिफिट को समझ में आया उसका गणित निकाला इन्होंने य क्वालिफाइड नहीं थे पढ़ाई में दिमाग से बहुत तेज थे क्या बोलते थे बड़ा सोचो तेज सोचो दूर की सोचो बड़ा सोचो तेज सोचो दूर की सोचो किसी के बाप की बपौती नहीं है यह किसी के बाप की जायदाद नहीं है बड़ा सोचना तेज सोचना दूर की सोचना यह धीरू भाई है इसीलिए बोलता हूं क्या देख रहे हो टाइकून ऑफ इंडिया देख रहे हो ये पूरी सीरीज देखनी है आपको प्लेलिस्ट में इसको ऐसे ही शेयर भी नहीं करते हैं इसको # टाइक ऑफ इंडिया लगा कर के हैशटैग लिख कर के शेयर करना ताकि लोगों को उस हैशटैग से ये सारे वीडियोस मिल जाए क्या किया इन्होंने फिर बेनिफिट उठाने के लिए 20 किमी दूर अहमदाबाद से नरोड़ा के अंदर पॉलिस्टर नमेंट की मिल एस्टेब्लिश कर दी जहां ये कपड़े खुद बनाने लगे मिल्की सक्सेस को इंश्योर करने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया अब तक वो सिर्फ पॉलीटर के थान बेचते थे कपड़े थोड़ी बनाते थे अब इन्होंने कपड़े खुद बनाना शुरू कर दिए फॉरवर्ड इंटीग्रेशन और इस मिल की तारीफ इतनी हुई दुनिया भर में कि 1975 में वर्ल्ड बैंक की टीम जब इंडिया विजिट कर रही थी तो बोली कि ग्लोबल स्टैंडर्ड से भी अच्छी मिल बना दी इन्होंने भैया और इसके ऑपरेशन और वर्किंग को देख के बहुत इंप्रेस हो गए इसकी प्रीमियम क्वालिटी र्मेंस बना कर के इन्होंने देश विदेश में एक्सपोर्ट कर यूएस इन्होंने कैप्चर किया जर्मनी इन्होंने कैप्चर किया चाइना जापान अपना एक ब्रांड बनाया इन्होंने विमल विमल थे इनके भाई का इनका एक और जो भाई था उनका पहला बच्चा उसका नाम था विमल और विमल नाम इतना हो गया इस समय इतना नाम करना शुरू कर दिया कि उस टाइम पे एक ऐड आया करती थी कि केवल विमल चलेगा और कुछ नहीं चलेगा मालूम है कौन ओनली विमल ओनली विमल पोजिशनिंग ब्रांड पोजिशनिंग जानते थे इन्होंने कोई आईएम अहमदाबाद से या टन हावर्ड से जाके पढ़ाई नहीं करी लेकिन ब्रांडिंग समझ थे दिमाग से बहुत तेज थ मैंने बोला ना चाचा चौधरी का दिमाग इतना तेज नहीं चलता नरोडा मिल्स में रिलाय इंडस्ट्री उसकी बैक बोन बनती चली गई और वैल्यू चेन के नेक्स्ट स्टेप को कंकर कर लिया अब प चले गए अब पीछे के स्टेप पे बैकवर्ड इंटीग्रेशन आसान भाषा में समझा देता हूं मान लो आप बुलंद शहर में खीर बना के बेचते हो अब खीर बनाते हो तो खीर बनाने के लिए आपको क्या चाहिए दूध चाहिए गुड़ चाहिए चावल चाहिए बाहर से मंगाते थे आप तो ये आपने खुद ही बनाना शुरू कर दिया दूध भी गुड़ भी चावल भी यानी कि आपने गाय खरीद ली धान उगा लिया और गुड़ बनाने लग गए खुद ही जब आपने गुड़ भी खुद बना लिया आपने दूध भी खुद ही अरेंज कर लिया चावल भी खुद ही अरेंज कर लिया पीछे का माल अब आपको सस्ता पड़ने लगा क्योंकि पीछे आपको मार्जिन देना पड़ता था इन्होंने क्या किया पॉलिस्टर बनता कैसे उसमें घुस गया ये निकलता था पीटीए से प्यूरिफाई टेरी पथलकुड़वा ने इनको लाइसेंस दे दिया इसी बीच धीरू भाई अंबानी के दोनों बच्चों को उन्होंने क्या किया समझाया दो बच्चे दोनों बड़े हो गए हैं अभी ये कौन-कौन मुकेश भाई अनिल भाई दोनों बड़े हो गए हैं दोनों को उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग के लिए ग्रेजुएशन के लिए भेज दिया हम और जब इन्होंने इनको भेजा तो जानबूझ के केमिकल इंजीनियरिंग कराई क्योंकि इनको पता था कि भाई केमिकल इंजीनियरिंग मेरे धंधे में काम आएगी 1983 के अंदर अंदर पताल गंगा में पॉली पॉलिस्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट इन्होंने बना दिया कि अब रॉ मटेरियल भी मैं बनाऊंगा कपड़े तो मैं बना रहा हूं रॉ मटेरियल मैं बनाऊंगा तो जो पहला बेटा था अपना केमिकल इंजीनियर बेटा मुकेश भाई उसको इस प्लांट की जिम्मेदारी दे दी कि अपनी पूरी केमिस्ट्री लगा दे तू उसके अंदर पूरी केमिस्ट्री घुसा अपने अंदर मुकेश भाई ने केमिस्ट्री लगाई यही पताल गंगा प्लांट आगे चलके भारत का लार्जेस्ट पॉलिस्टर मैन्युफैक्चरर बन गया लेकिन यहां थोड़ी रुके अब मैं बताता हूं एक तीर से चार निशाने कैसे लगाए इकोसिस्टम कैसे बिल्ड किया आगे कपड़े बना रहे थे अब पीछे रॉ मटेरियल भी खुद बनाने लगे रॉ मटेरियल बनाने के लिए मैंने आपको बताया ना प्लांट में जो पॉलिस्टर बनता था उसमें थोड़े से एक्स्ट्रा अपग्रेड की थोड़े से एडिशनल चेंजेज किए और हॉरिजॉन्टल आजू-बाजू का इंटीग्रेशन किया यानी कि पहला पॉली एस्टर बनाया दूसरा वहीं पे लैब लीनियर एल्काइन बेंजीन इली कर दूं डिटर्जेंट मैन्युफैक्चरर को जो माइल जो रॉ मटेरियल चाहिए था वो भी उसी से बनने लग गया तीसरा इसी के साथ पीवीसी पॉली विनाइल क्लोराइड ये कहां काम आता है हाई डेंसिटी पॉलीएथिलीन ये कहां काम आता है एचडीपीई के प्रोडक्शन शुरू कर द ये प्लास्टिक प्रोसेसिंग में काम आता है तो ये तीसरी आइटम हो गई देखते ही देखते उसी प्लांट से इन्होंने चौथा भी शुरू कर दिया पेट्रो केमिकल इंडस्ट्री में यूज़ होने वाला पैरासिन और एन पैराफिन और एथिलीन जैसे केमिकल भी शुरू कर दिए अब स्ट्रेटजी को यूज़ करके क्या किया समझो सराइज करता हूं चार चीजें इजी कर देता हूं भाई इजी उसी प्लांट से पॉलिस्टर निकाल रहे हैं उसी प्लांट से पेट्रो केमिकल इंडस्ट्री को कंट्रीब्यूट करने के लिए रॉ मटेरियल दे रहे हैं उसी प्लांट से प्लास्टिक प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए भी माल बना कर के दे रहे हैं उसी सी प्लांट से डिटर्जेंट इंडस्ट्री के लिए भी माल निकाल करके दे रहे हैं यानी कि एक आइटम बनाते वक्त साइड की तीन आइटम एक्स्ट्रा ऐड कर दी एक प्लांट चार काम हॉरिजॉन्टल अलोंग विद बैकवर्ड और फॉरवर्ड बैकवर्ड फॉरवर्ड तो कर दिया भाई थान भी खुद बना लिया कपड़ा भी खुद बना लिया अब आजू-बाजू भी काम करना शुरू कर दिया छठी स्ट्रेटेजी कमाल की थी इनको पैसे की जरूरत थी और एक्सपेंड करने और एक्सपेंड क्या है भाई सुन नहीं रहे क्या मैं टाइकून ऑफ इंडिया बता रहा हूं बड़ा सोचो दूर की सोचो सबसे तेज सोचो सबसे पहले सोचो ये समझा रहे थे ये कैसे समझाया इन्होंने जब बहुत ज्यादा पैसा चाहिए बैंक नहीं दे रहा इक्विटी ड्रिवन कैपिटल स्ट्रक्चर पहली बार ढंग से बड़ा पूरे देश के अंदर लेकर के आया बाकी सारी कंपनियां बैंक से कर्जा लेती थी और प्रॉफिट का एक बड़ा हिस्सा बैंक को इंटरेस्ट देने में चले जाता था जिससे प्रॉफिट कम हो जाता था अब इनको इंटरेस्ट देने में इंटरेस्ट नहीं था स्टॉक मार्केट की पावर को समझ चुके थे याद है ना जब यमन से आए थे इंडिया तो मुंबई में इन्होंने सेटलमेंट करके अपने आप को सेटल करके मुंबई में स्टॉक मार्केट के चक्कर काटा करते थे देखते थे समझते थे उसको तो बैंक लोन की बजाय इन्होंने सोचा मैं लोग पूरे देश को अपना रिश्तेदार बना लेता हूं कंपनी में और डेट फ्री कर्जा फ्री बिना कर्जे के एक्सपेंशन केवल इक्विटी के माध्यम से समझ में आ रहा है आपको 2 करोड़ का बैंक लोन लेने से अच्छा है ₹10 के 20 लाख लोगों को मैं शेयर दे दूं मेरे को ₹ करोड़ मिल जाएगा पैसा भी मिलेगा इंटरेस्ट भी नहीं देना मेरे को प्रॉफिट हुआ तो आम पब्लिक का फायदा भी हो जाएगा तो क्या किया इन्होंने मिनिमम ओनरशिप थोड़ी सी ओनरशिप को डाइल्यूट किया और मैक्सिमम लॉन्ग टर्म पैसा आ गया जो इनको वापस ही नहीं करना है समझ में नहीं आ आपको यानी कि जो कर्जा लेते हो वो पैसा आपको वापस करना पड़ता है लेकिन इक्विटी फाइनेंसिंग जो जो है आईपीओ की मार्केट है वहां का पैसा आपको बाजार में वापस नहीं करना कोई ऑब्लिगेशन नहीं है उसपे कोई इंटरेस्ट नहीं देना आपको कुछ किसी को और सबसे बड़ी बात ये है कि जब कर्जा आपकी कंपनी में बढ़ता जाता है तो इससे बाजार में रेपुटेशन खराब होती है यहां कर्जा भी नहीं है बाजार में रेपुटेशन अच्छी हो रही है क्यों क्योंकि इस समय हिस्सेदार बढ़ गए हैं तो आपके रेप धीरू भाई जानते थे आम आदमी मेहनत की कमाई लगाता है किसी तरह उसका ट्रस्ट नहीं टूटना चाहिए रिलायस नाम है उसका नाम कर दिया रिलायस खजाना 77 में ₹10 के 28 लाख शेयर अनाउंस कर दिए और देश भर में इन्होंने अलग-अलग प्रकार से लोगों को समझाया कि आप मेरे साथ में जुड़ जुड़ जुड़ जुड़ जुड़ इतने जुड़ गए कि सात गुना लोग जुड़ गए ओवर सब्सक्राइब हो गया 6000 लोगों ने हाथों हाथ शेयर्स खरीद लिए 78 में ती महीने के अंदर इनके शेयर की कीमत जो ₹10 थी वो ₹ हो गई 2.3 टाइम्स ग्रोथ मिल गया तीन ही महीने के अंदर आम लोगों को डिविडेंड भी देना शुरू कर दिया अब डिविडेंड देना भी कोई कंपल्शन नहीं होती है लेकिन उन्होंने दिया ताकि लोगों को और ट्रस्ट बढ़े लोगों के शेयर के दाम बढ़े लोगों को बोनस मिला परिवार का पार्ट बन कर के उनका एक अपने आप में प्राइड भी आ गया भाई मैं परिवार का हिस्सा हूं एनुअल जनरल मीटिंग जो करते हैं एजीएम उसमें धीरू भाई यही करते थे स्टेडियम में सबको बुलाते थे पूरी एजीएम सबके सामने स्टेडियम में करते थे शेयर होल्डर को मध्य में रखते थे धीरू भाई उनको कहते थे आपकी कंपनी आपकी कंपनी ये नहीं बोलते थे मेरी कंपनी मैं चेयरमैन रिलायस कंपनी नहीं आपकी कंपनी आपकी कंपनी बोलने का तरीका ही अलग था सोच ही अलग थी 1977 से 2002 तक जब तक धीरू भाई जिंदा रहे इनकी कंपनी 25 साल के अंदर 165 गुना ग्रो करी जो भी शेयर होल्डर की वैल्यू थी और 77 से आज 2000 24 तक 165 गुना नहीं 300 गुना बढ़ चुकी है हम धीरू भाई जिस समय उस समय जब उन्होंने किया तो अपने आप में बड़ी बात थी आज छोटे व्यापारी के लिए एमएसएमई स्टॉक मार्केट लिस्टिंग बहुत बड़ी बात नहीं है उसको हम लोग आसान करते हैं मैंने इस समय कई कंपनी एक्वायर करी हैं एक सिटी समोसा नाम की कंपनी मैंने एक्वायर करी है उसको आईपीओ तक लेके जा रहा हूं पोशाक नाम की कंपनी एक्वायर करी है उसको आईपीओ तक लेके जा रहा हूं उनके पूरे बिजनेस प्रोसेस बना रहा हूं एसओ पीज बना रहा हूं एक के बाद एक कंपनी एक्वायर करते जा रहा हूं उनको वेंडर्स उनको टेक्नोलॉजी ऑटोमेशन उनकी मैन पावर हायरिंग उनका उनका सब पूरा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट से लेकर के मर्चेंट बैंकर से लेकर के सेलिब्रिटी ब्रांड एंबेसडर से लेकर के कौन सा बॉलीवुड का ब्रांड एंबेसडर आपको चलेगा कौन सा की अकाउंट मैनेजर चलेगा उनको ग्रोथ पार्टनर देता हूं उनको पूरा लर्निंग उनका प्रमोशन सब करना उनकी ब्रांडिंग मार्केटिंग केस स्टडी रील सोशल मीडिया प्रोडक्शन हाउस कंटेंट राइटर पीआर सब करता हूं इसके साथ में आपके लिए क्या काम की बात है अगर आपका धंधा साल का 50 लाख से ज्यादा एक करोड़ से ज्यादा है और आप धंधा कर रहे हो तो मैं सेकंड अक्टूबर को इवेंट कर रहा हूं फ्री ऑफ कॉस्ट और ये इवेंट क्या है बिजनेस एक्सपेंशन रेडीस पे आइडिया डू आईपीओ पे ये उन्हीं बिजनेसमैन के लिए है जो अपने बिजनेस को एक्सपेंड कर रहे हैं अगर आप नया है तो मत आइएगा आपके लिए एंट्री नहीं है ये केवल उनके लिए है जो अपने बिजनेस को एक्सपें करने जा रहे हैं केवल उन्हीं लोग को बुला रहे हैं जो जिनका एनुअल टर्नओवर मिनिमम 50 लाख से 1 करोड़ मिनिमम है 2 करोड़ 5 करोड़ 10 करोड़ 50 करोड़ 100 करोड़ 200 करोड़ 500 करोड़ आप सब इनवाइटेड हैं लेकिन अगर आपका 50 लाख भी साल का अभी नहीं है तो अभी आपके लिए काम का नहीं है क्योंकि मैं यहां केवल बिजनेस एक्सपेंशन बताऊंगा यहां केवल मेरे साथ मार्केट एक्सपर्ट इन्वेस्टमेंट बैंकर इंडस्ट्री लीडर्स रहेंगे ये केवल आईडिया टू आईपीओ वाला ही बिजनेस के लिए जिनके लिए काम का उन्हीं के लिए आप फोन लगा के पता कर सकते हैं अब आगे चलता हूं मैं कहानी को आगे लेके धीरू भाई हमेशा कहते थे कि एक अकेला अंबानी नहीं चाहिए आपको भी अंबानी बनाना है हमने हजारों अंबानी की जरूरत है हमरे को हमारे देश में सातवी स्ट्रेटेजी पे गोरिला प्रीमियमा इजेशन ये बिना पैसा खर्च करके अपने आप को प्रीमियम दिखाते थे प्रीमियम ब्रांडिंग करते थे जीरो कॉस्टिंग पे प्रीमियम ब्रांडिंग एट जीरो कॉस्टिंग पैसा बचाने में अंबानी माहिर थे दिल्ली इनको बार-बार जाना पड़ता सबसे सस्ती टिकट लेके जाते थे और सबसे बड़ा काम क्या किया इन्होंने वहां होटल का खर्चा बचाने के लिए शका होटल जो सबसे अच्छा भारत का फाइव स्टार होटल उस समय माना जाता था और दिल्ली का तो नेचुरली सबसे अच्छा क्योंकि लुटियंस जहां सारे मंत्रालय हैं जहां सारे के सारे एम्बेसडर्स हैं जहां सारे बड़े बिजनेसमैन है उनके बीच में अशोका होटल पड़ा करता था तो दिन में काम निपटा कर के अशोका होटल में शाम को ये वापस आ जाया करते थे वो अपनी सोच पर पैसा उड़ाते थे अपने शौक पर नहीं उड़ाते थे क्योंकि शो ऑफ करने वाला उसका जल्दी गेम ऑफ हो जाता है तो अपने खाली जरूरी चीज प पैसा लगाते थे फ्लाइट भी सबसे सस्ती लेते थे इंडस्ट्री से मिलना है मिनिस्टर से मिलना है तो उसको कहां बुलाते थे अशोका होटल बुलाते थे अब इन्होंने किया क्या इन्होंने क्या किया वहां का जनरल मैनेजर और रिजर्वेशन मैनेजर उससे दोस्ती कर ली उसको कभी मिठाई खिला दिया उसका कभी उत्साह बढ़ा दिया उसको बोला अरे तुम तो सबसे इंटेलिजेंट आदमी हो थोड़ा रिश्ता बना लिया थोड़ा सा एक अच्छा गिफ्ट वाला लेनदेन का अप्रोच कर लिया अब उनके जितने भी सारे के सारे जितने भी प्रकार के उनके कस्टमर्स पॉलिटिशियन या जिन भी लोगों के साथ में बायर सप्लायर जिनसे भी मीटिंग करनी हो उनको यह बोलते थे मैं अशोका होटल में ही रहता हूं हर समय यहीं से धंधा कर करता हूं मैं अब पॉलिटिशियन का फोन आया शो का होटल में धीरू भाई से बात करा दीजिए रिजर्वेशन मैनेजर वाला बोले धीरू भाई अभी जरा बाहर तक गए आप अपना नंबर दे दीजिए आते ही कॉल बैक करा देते हैं आपको ये यहीं रुके हुए हैं क्या धीरू हां हां यही रहते ही यही है धीरू भाई अशोका होटल में ही रहते हैं हर समय अच्छा लिखो भाई हमारा नंबर कॉल बैक करा दीजिएगा अच्छा कोई बड़ा बिजनेसमैन फोन करे अशोका होटल में ये धीरू भाई कौन से कमरे में उनसे बात करें धीरू भाई अभी जरा बाहर गए हुए हैं आप अपना नंबर लिखवा दो इधर ही अशोका होटल में रुके हुए हैं नहीं नहीं यही रहते यही है अशोका होटल में ही रहते हैं अच्छा अब सामने वाले की बुद्धि चक्रा अशोका होटल में रहता है इतना बड़ा व्यापारी है ये अशोका होटल में ही रहता है वो अपना नंबर लिखवा दें अब जैसे ही धीरू भाई पहुंचे चार दिन पाच दिन बाद तो उनको सारे नंबर्स की लिस्ट एक साथ दे दी जाती है भाई इतने फोन आपके नाम प आए थे हमने बोल दिया आप यहीं रहते हैं बाहर गए हुए हैं यहीं रहते हैं बहुत बिजी रहते हैं आप अवेलेबल नहीं है हर एक से मिल नहीं पाते आप बहुत काम रहता है आपके पास में तो धीरू भाई लेकर के सबको कॉल बैक करें और बुला ले मीटिंग के लिए और मीटिंग कहां करें कमरा कभी ये ही नहीं सारी मीटिंग कॉफी शॉप में कर लेते हैं मैं कमरे से उतर कर के आ रहा हूं शाम को 5:00 बजे आपको कॉफी शॉप में मिलता हूं वहां पहुंच जाए बायर पहुंच जाए सप्लायर पहुंच जाए पॉलिटिशियन पहुंच जाए जो भी नामी ग्रामी आदमी जिससे मीटिंग करनी है उससे वही मीटिंग कर ले क्या अर्थ हुआ कस्टमर का जो परचेज एक्शन है वो ब्रांड परसेप्शन पर डिपेंड करता है कस्टमर जो आपसे माल लेता है वो ब्रांड परसेप्शन पर डिपेंड करता है और ब्रांड परसेप्शन उन्होंने बना दिया कि मैं तो अशोका होटल मेंही रहता हूं रिजर्वेशन मैनेजर जनरल मैनेजर ये इनके दोस्त ये बोलते यही रहते हैं आदमी उसी परसेप्शन अशोका होटल में रहते हैं मैं भी जरा कोर्ट वट अच्छा पहन के जाऊं और धीरु भाई अंबानी बता ही दिया कि मैं कमरे से उतर के आऊंगा कॉफी शॉप में मिलू कमरा आज तक नहीं लिया कभी भी ऐसा पैसा बचाने वाले तेज आदमी ऐसे आदमी की आठवी स्ट्रेटजी सुन लेते हैं यह काम की स्ट्रेटेजी है राइट सेलिंग अंडर सेलिंग ओवर सेलिंग सुनना ध्यान से यह क्या करते थे यह कहते थे डोंट सेव कॉस्ट एट एनी कॉस्ट धीरू भाई कहते थे जब ये यमन में रहते थे ना तो ₹10 खर्च करने से पहले भी 10 10 बारही सोचते थे अब उनका बिजनेस बड़ा हो गया है मानसिकता वही थी कि पैसे बचाओ पैसे बचा के चलो भैया फालतू खर्चा मत करो अशोका का होटल सुन लिया ना आपने तब इन्हे पता चला एक बारी कि टेलीग्राम जो विदेश से आता उस परे इनका 000 लग जाता उस समय 000 000 खर्च इनका दिमाग खराब हो गया लेकिन बोले कुछ नहीं चुप रहे एनालिसिस कैलकुलेशन करनी शुरू कर दी चाचा चौधरी से तेज दिमाग है ना इनका कैलकुलेशन करनी शुरू कर दी तो कैलकुलेशन से इनको समझ में आया कि टेलीग्राम से जो मेरे पास में चिट्ठी आती है उसमें मार्केट की पूरी रिपोर्ट होती है फिर उन्होंने कैलकुलेट किया कि मार्केट की रिपोर्ट तो मेरे बड़े काम की चीज है इसके लिए 000 का इन्वेस्टमेंट करूं ना करूं तो उसको उन्होंने कंपेयर किया कि अगर यह रिपोर्ट नहीं आए तो हो सकता है मेरे माल जो बाजार में भेजूं उसमें कुछ वेस्टेज हो जाए अगर यह रिपोर्ट नहीं आए तो दूसरा हो सकता है वेस्टेज ना हो शॉर्टेज हो जाए मैं कमी ही माल बेच दूं माल चाहिए था 1000 टन मैंने भेजा खाली 500 टन जब इन्होंने दो चीजें देखी वेस्टेज शॉर्टेज तो उनको समझ में आने लगा कि भाई 000 बचाने के चक्कर में तो बहुत बड़ा नुकसान कर जाऊंगा अगर शॉर्टेज हो गई तो कितने का नुकसान हो जाएगा वेस्टेज हो ग तो कितने का नुकसान हो जाएगा क्या मतलब हुआ सुनो ध्यान से सराइज करता हूं इजी सुनो ज्यादा माल बेचा ओवर सेलिंग किया तो कितने रुपए का वेस्टेज अंडर सेलिंग किया कम माल बेचा तो कितने रुपए का शॉर्टेज कितने रुपए का अपॉर्चुनिटी लॉस अरे भाई माल बिक सकता था मेरा 2 करोड़ का मैंने बेचा केवल ₹1 करोड़ का ₹1 करोड़ का लॉस ए 000 क्या है लगा लगा 000 लगा मुझे क्या चाहिए राइट सेलिंग चाहिए ना ओवर सेलिंग चाहिए ना अंडर सेलिंग चाहिए मुझे चाहिए राइट सेलिंग ₹ करोड़ का नुकसान 000 बचा करके मैं एक करोड़ का नुकसान करूंगा हां इतनी ते जिनकी बुद्धि काम करती थी ये सरकारी नौकरी वाली न इनकी कभी वो मानसिकता ही नहीं थी बिग पिक्चर बजटिंग करते थे बड़ी पिक्चर का बजटिंग करते थे ₹1 हाथ से चला गया ₹1 बचा लिया क्या फायदा होगा कॉस्ट बेनिफिट दोनों को कंपेयर करके गणित में सोचा करते थे ये नहीं कि मैं एक पेनी बचा लूं और एक पाउंड गवा दूं यानी कि ₹1 बचा लूं और ₹1 का नोट गवा दूं बचत के चक्कर में चपत ना लग जाए हैं कई लोग यही करते हैं बचत के चक्कर में चपत लगवा लेते हैं इनका स्ट्रेटेजिक सैक्रिफाइस होता था गणित लगाना जानते थे ये क्या है क्या देख क्या आ रहे हो टाइकून ऑफ इंडिया देख रहे हो मैंने अपनी प्रायोरिटी सेट कर ली है इस चैनल को कल्ट बिजनेस बनाना है मैंने नीचे तो कमेंट बॉक्स आपका है लिख लिखो किसके बारे में लिखना चाहते हो आप किसकी के स्टडी देखना चाहते हो कौन है टाइकून आपकी नजर में आपका हीरो कौन है आपका बिजनेस हीरो कौन है बॉलीवुड के हीरो ढूंढ रहे थे अभी तक हां हीरोइन ढूंढ रहे थे कौन है आप किसको आइडियल मानते हैं किसकी कहानी जानना चाहते हैं किसकी डेप्थ में पूरी स्ट्रेटेजी उसकी ब्रेन की ब्रिलियंस बिहाइंड बिलियन सीखना चाहते हैं मुझे कमेंट में बताइए आप उनकी स्टोरी उनकी स्ट्रेटेजी आप तक लेकर के आऊंगा कब आऊंगा हर संडे सुबह 8:00 बजे सबको बता रहा हूं वीडियो शेयर करने से पहले हैशटैग लगा देना टाइकूं ऑफ इंडिया नया एपिसोड नया लर्निंग क्योंकि लर्निंग के लिए संडे की कोई छुट्टी नहीं होती है ये लर्निंग है प्लेलिस्ट भी आपके लिए रेडी है सिर्फ स्क्रॉल मत करो बुद्धि में स्टोर भी करो खाली स्क्रॉल करते रहते हो बुद्धि में स्टोर करो नींद उड़ा देने वाली स्ट्रेटेजी दूंगा बिजनेस उठेगा भी दौड़ेगा भी क्योंकि बिजनेस का मतलब है बड़ा बिजनेस हमारे साथ जुड़े रहने के लिए सब्सक्राइब इसलिए करने के लिए आंखों में आंखें डाल के बोल रहा हूं क्योंकि इसमें फायदा आपका है आप सबका प्रेम पूर्वक हाथ जोड़ के बहुत-बहुत धन्यवाद [संगीत]
Comments
Post a Comment