Subhas Chandra Bose Biography in Hindi Dr Vivek Bindra
झाल कि एक मजबूत दीवार को अगर एक ही हथौड़े में गिरा दिया गया है तो जरूरी नहीं कि ऊंची हथौड़े से मुख्य अतिथि गुलामी की दीवार पर पहले कई हथौड़े थे आखिर यह थोड़ा जो गांधी नेहरू ने मारा जरूरी नहीं कि आजादी उन्होंने दिलाई लाला लाजपत राय बालगंगाधर तिलक भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद अशफाकुल्लाह खान उधम सिंह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस इन्होंने कहीं चोटें मारी थी जिसके कारण वह कमजोर हो पाए और उसी के बाद हमें आजादी मिल पाए नमस्कार मैं विवेक बिंद्रा फाउंडर एंड सीईओ एक बड़ा business.com सारे वीडियोस खड़े होकर बना रहा हूं ही फॉर मोटिवेशन के साथ सबको ऐलान कर दो विवेक बिंद्रा वापस फॉर्म में आ चुके हैं हथौड़े की चोट वह इतनी इंपैक्टफुल थी के गुलामी की दीवार को हिलाकर रख दिया नेताजी सुभाष चंद्र बोस पहली बार नेताजी शब्द गढ़ा गया खुद से नहीं बनाया दुनिया ने कहा शुरुआत करते हैं वह बस इनका जन्म कई जनवरी आज के दिन उन्हें 1898 में हुआ था जो कि ओडिशा में है इनके पिता जानकीनाथ बोस एजुकेशन इन्होंने यूरोपियन स्कूल से कटक में करी थी सिक्योर्ड करी 19 सेकंड रैंक दसवीं क्लास में 1913 में तभी उनका प्रेजिडेंसी कॉलेज एडमिशन हुआ एक स्पेशल कर दिया गया बाद में उनको प्रेजिडेंसी कॉलेज से क्योंकि थोड़े ना स्टंट्स थे एक्टिविस्ट्स थे उनमें से 16 मिनट को निकाल दिया गया वैसे बता दें आपको कि देशभक्ति का जुनून अवसर पर छा जाता है तभी करियर छोड़कर हर राष्ट्र की सेवा में बड़ा मजा आ जाता है ब्रिटिश सरकार ने भारत की स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल किया हुआ था इधर बुरा हाल किया व इतना नजरअंदाज कर दिया वह बड़ी बड़ी बिमारियों का स्टॉक चल रहा था और यह गरीबों की सेवा करना चाहते थे प्ले कॉल राम मलेरिया स्मालपॉक्स चिकन पॉक्स इनफ्लुएंस आफ खतरनाक बीमारियां आती थी देर रात को धरा के कारण कोलर मतलब है जा उसके कारण लगभग ढाई लाख लोगों की मौत हो चुकी थी कई बार कॉलेज और लौट के वापस अा रहा था चारों तरफ मारियो चुकी थी बुरा हाल था लाशें ऐसे पड़ी थी जिसे मक्खियां भिनभिना रही है मक्खी-मच्छरों की तरह लाशें पड़ी थे मां अपने बच्चे की लाश लेकर के युद्ध में रोए जा रही थी और दूसरी तरफ जिन्होंने देखा के बेटा अपने पिता की लास्ट में के पास बैठकर के जोर जोर से रो रहा है इनका दिल एक दंपति किया घबरा गए लावारिस पड़ी लाशों को उसके बाद लेकर जाते थे उनका अंतिम संस्कार किया करते थे वह शहर में पड़े थे वह यह प्रण लेते हैं कि मैं सब चीजों को ठीक करूंगा भारत को सपनों का भारत बनाऊंगा यह जो समय था इनके कॉलेज का समय था जब समाज सेवा किया करते थे तो जिंदगी के दो हिस्से बने शुरुआत का समाज सेवा का हिस्सा था इसको बोलते स्पिरिचुअल सर्विट्यूड बाद में बनाने का सोशल एटीट्यूड और पर समाज के दौरान भी उस समय भी यह इतने बढ़िया लीडर से कि इनको चूर्ण का मुचलका हिट बना दिया कॉलेज में और वहां पर अंग्रेज प्रोफेसर व करते थे और भारतीय बच्चों के साथ बहुत दूर व्यवहार करते थे मिस्टर और नाम के प्रोफेसर थे स्टूडेंट को बिना बात कैंडी क्रश को पीट दिया करते थे इतना पीटते थे उनको तो यह बात जब नेताजी के पास गई तो यह प्रिंसिपल के पास जाकर शिकायत करें इसके बाद यह जो अंग्रेज प्रोफेसर भारतीय बच्चों को पीटर क्यों उन्होंने प्रश्न किया तो प्रिंसिपल ने कहा उन लुट माफी मांगने को बोल दो को माफी मांगनी पड़ेगी प्रिंसिपल यार क्यों माफी मांग रहे हो डिपार्टमेंट घृत करूंगा कुछ नहीं करनी पड़ी और लाइक करें तो बात अखबारों में गई और माफी भी मांगनी पड़ी माफी मांगने के बावजूद और बच्चों को तो उल्टा को गई और सामने नहीं बनाई जाती है और कमीशन के तौर पर माफी मांगी है और सही से मुंह मोड़ना घ्र मे माफी मांगने से मना कर दिया भारतीयों के साथ भेदभाव के खिलाफ थे कमिशन गुस्सा हो जाता है उसके बाद को निष्कासित कर देते हैं इस घटना से आहत जुने बदलाव जब वह पॉलीटिकल करियर को बंद करते हैं उनका मानना था कि सबसे बड़ा अपराध अपराध नहीं अपराध जाना बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना नेशनल कॉलेज से निकाल दिए गए थे तो उनके पिता जो बैरिस्टर थे उनको बुलाया है और बड़ा बेटा सुबह-शाम जो हो गया हो गया अब एक काम करो तुम आईसीएस की तैयारी करो इंडियन सिविल सर्विस के सिविल सर्विस मतलब टॉप मोस्ट लगाएंगे 4 साल की तैयारी लगती थी और उससे में जो पढ़ाई क्यों इंडिया में थे लंदन जाकर पढ़ना पड़ता था और चाल की तैयारी कर इनको लंदन भेजा इतने बुद्धिजीवी इतने जबरदस्त बुद्धिमान के चार साल की पढ़ाई में सात महीने में कर ली और रैंक होल्डर हो गए फोर्थ टाइम को मिली अमूमन भारतीय उस समय सिविल सर्विसेज में नहीं जाते हैं अंग्रेजों को पीछे छोड़ दिया अच्छा आप यह जब वहां पर रैंक होल्डर बने इनके मन में क्या है देश लुट रहा है अंग्रेजों के हाथ में और मैं मौज खाटू उन्हीं के साथ में तो इनको बड़ा फील्ड हुआ कि मैं आईपीएस की नौकरी को इन्होंने 19 विकसित में उसी समय लात मार देगा और यह घटना जो है जंगल की आग की तरह फैल गई और अब उस अंगद की तरह फैल गई अंग्रेज बड़े हैरान हुए कि पहला आदमी भारतीय जो आईपीएस की नौकरी को लात मार रहा है किसी को विश्वास नहीं पहले कभी Bigg Boss थोड़ी नहीं थी इनके पिता ने बड़े भैया में हमने समझाया पर जब राष्ट्रप्रेम का 16 दिल में घर कर जाता है फिर दुनिया का हर सुख फीका नजर आता है इन्होंने के बाद मेरा जनम देश को लूटने के लिए नहीं बल्कि देश के लिए कुछ करने के लिए हुआ है लोग हैरान हो गए और लोग उनसे मिलना चाहते थे उनको देखना चाहते उनके विचारों को जानना चाहते थे कि कौन है वह व्यक्ति जिसे मखमली बिस्तर को छोड़कर के जयकार टो वहीं जमीन को सुनाएं केवल देश सेवा के लिए वापस जब यह पानी के रास्ते मुंबई आए तो हजारों हजारों लोगों की भीड़ आ गई हजारों लोगों को देखने के लिए कि वह कौन है यह आदमी तो मुंबई में हजारों लोगों की भीड़ देखकर उन्हें एक बात समझ आ गई छोटी सी आई खेत की नौकरी को लात मारने में इतने लोगों ने विश्वास किया अगर मैं मेहनत करूं तो पूरे देश को कट कर सकता हूं उनकी अ लीडर श्रिंकिंग प्लैटर द बॉक्स मैक्रो 13-3-13 महान व्यक्ति की पहचान है कि वह भविष्य की परिस्थितियों को वर्तमान को देखते हुए पहचान लेता है अब 1928 के दौरान कांग्रेस एक मजबूत आंदोलन बन चुका था और सुभाष चंद्र बोस गांधी और नेहरू के साथ उनके मतभेद थे पर मनभेद नहीं थे अंदर से दोस्त थे वह सम्मान करते थे गांधी को अपना गुरु मानते थे उन दिनों लॉर्ड इरविन हुआ करते थे उस समय के वाइसराय थे उन्होंने गांधी जी को कनविंस कर लिया सहमत करा लिया कि डोमिनियन स्टेटस देते हैं यह भी फ्रीडम हुए दें अब आप फ्री हो जाओगे आपको डोमिनियन स्टेटस मिल गया था आप अपनी सरकार चलाओगे तो अपने इलेक्शन करोगे और उन्होंने इस प्रस्ताव को कलकत्ता अधिवेशन में प्रस्तुत किया था कि डोमिनियन स्टेटस ले लो अच्छा यह इनको पसंद नहीं आया सुभाष चंद्र बोस डोमिनियन स्टेटस नहीं चाहिए मुझको कंपलीट फ्रीडम चाहिए उन्होंने पिसावा कंपलीट फ्रीडम के लिए बहुत झगड़ा किया तो उन्होंने समझाया कि डोमिनियन स्टेटस का मतलब है आप और ऑटोनॉमस कमेंट हो जाएगी लेकिन चलाए ब्रिटिश एंपायर और पूर्ण स्वराज कंप्लीट मतलब है कंप्लीट टोटली डिफरेंट दूसरे सरकार भारतीय चलाएंगे और पॉलिसी ब्रिटिश हुकूमत देगी तो 2 मिनट तक क्या फायदा अगर हर बस सरकार चलाने और पॉलिसी बनाने दोनों के अधिकतर भारतीयों को मिलेंगे उसी अकाउंट मारियो चाहिए क्योंकि डोमिनियन स्टेटस का एक ही मतलब है कि आप कोई टेंशन नहीं ले सकते डिफरेंस पर कमिनुकेशन पर और फॉरेन रिलेशन पर है लेकिन अगर कंपलीट फ्रीडम मिल गया तो कोई दूसरी ले सकते हो इस डोमिनियन स्टेटस का प्रभाव ऐसा पड़ता कि भारत अपनी सैन्य शक्ति पर काम कर सकता था भारत दूसरे मुल्क के साथ अगर कोई व्यापारिक रिश्ते बनाना है तो वह खुद से कर नहीं सकता ब्रिटिश एसेंबली में जाकर को परमिशन लेनी पड़ेगी तो नेता जी बिल्कुल क्लियर थे पर चाहिए तो अपने को पूरा नीचे भारत खुद से किसी भी तरीके का गैरकानूनी बना सकता ब्रिटिश हुकूमत जब चाहे तो इसको अच्छा है अबीर नेहरू तुम हटो पटेल तुम हटो कि ब्रिटिश के हाथ में था उनको नहीं चला कि जब हटा दे जब चाय रख लें तो कुल मिलाकर के इतने बड़े इनफ्लुएंसर 1928 तक बन चुके थे कि ने गांधी-नैहरू दोनों कमेंट कर लिया है और नतीजा यह हुआ कि पिछले साल तो कलकत्ता अधिवेशन में अभी तो बहस चल रही थी अभिनव ने अगले साल लाहौर अधिवेशन में 1932 के अंदर पूर्ण स्वराज का झंडा फहरा दिया फतह कर लिया वह इससे कम कुछ नहीं अपने को कंपलीट इंडिपेंडेंस चाहिए कोई डोमिनेंट हम इन्हें नहीं चाहिए अब जैसे जैसे समय बढ़ रहा था नेताजी का कद भी बढ़ता जा रहा था 1939 का समय आया और तब गांधी जी को अच्छा नहीं लग रहा था कि यह थोड़े गरम दल वाले बन रहे थे कि गांधी-नेहरू वगैरह तरह नरम दल के थे और यह चाहते थे कि भई अब दुनियाभर में लड़ाई हो रही है तो अब हम इस पर लड़ना चाहिए क्योंकि वर्ल्ड वास्तु का टाइम आ गया है इस समय अंग्रेज कमजोर हो जाएंगे क्योंकि उनको हरा दिया जाए टाइप इस टाइम को तोड़ा जाए गांधी बोले नहीं मुझे अपना तरीका पसंद नहीं क्यों इलेक्शन करा लें तो तब प्रिंट की पॉजिशन करें लक्ष्मी का समय आया अब गांधी ने क्या किया इन को हटाने के लिए उन्हें अपना आदमी लगा दिया सीतारामैया साउथ से लेकर क्या सीतारमैया को और सबको जाकर पूरे देश में बता दिया सारे के सारे कांग्रेस के जितने भी वर्किंग कमेटी जितने भी लीडर्स है उनको बोला कि किस तरह पीते तो मतलब समझो मैं जीता सीता रमैया मेरा आदमी है और उन्हें चित्र मे के लिए कैंपिंग करना शुरू कर दिया इधर नेताजी सुभाष चंद्र बोस उनका आशीर्वाद लेकर के लक्षण के लिए आगे बढ़े और जब चुनाव के नतीजे आए तो सब हैरान हो गए गांधी जी की उम्मीदों के विपरीत नतीजे आए स्थित रमेश को 1375 सीट मिली सुभाष चंद्र बोस को 1580 सीट मिली आपको यह समझना पड़ेगा यहां समझिए कि सुभाष चंद्र बोस का कट बहुत बढ़ जाता है लोग गांधी मैदान को पसंद करने लगे थे यह ध्यान देने वाली बात है गांधी जिन्ना खुश हो चुके थे वह बोले कि दरमियां के हर वक्त मेरी हार है वह चाहते नहीं थे सुभाष चंद्र बोस जीते कुछ सुभाष चंद्र बोस टर्न को नाराजगी नहीं चाहिए लेकिन दोनों के विचारधारा लोग होने के कारण गांधी उनको प्रेम तो करते थे पर चाहते हैं तक यह हैं क्योंकि गांधी प्रेम से चलाना चाहते थे गांधी बोले कि इस समय हमारा शत्रु समस्या के अंदर है वर्ल्ड वर 2 की तरफ जा रहा है तो अब हमारे को से तंग नहीं करना चाहिए सुभाषचंद्र बोले यह क्या तरीका वजह पूरी दुनिया लड़ रही है तो आप क्यों उधर थप्पड़ मार दिया थप्पड़ मार लो अब हम जीत तो चाहिए सुभाष चंद्र बोस लेकिन गांधी ने पर प्रकाश डाला कि आप डिजाइन कर दो आप इस्तीफा दे दो एक सच्चे शिष्य एकलव्य की तरह अपने गुरु महात्मा गांधी के चरणों में आकर के उन्नत याद पत्र दिया पहल सुभाष चंद्र बोस हमको बोले कि मैं जानता हूं कि हमारे रास्ते अलग हो सकते हैं हमारा मकसद एक ही है पर अभी को क्योंकि बाहर कर दिया गया तो कांग्रेस को सपोर्ट करने मृतक यह बाहर हो गए थे 12 बार इनको जेल में डाला गया अंग्रेजों इनको बहुत तंग किया यह जब बाहर आए तो उनके घर पर डिसाइड लगा दी और उनके घर पर नजर रखी जा रही थी कि सुभाष चंद्र बोस करें नहीं सुभाष चंद्र बोस सोचा कि अब देश में बात नहीं बन रही है एनरिक कांग्रेस को इनकार किया कि आप करते हो जो कर रहे हो आप गांधी को सपोर्ट करो कि इतने इंटलेक्चुअल थे इतने बुद्धिमान थे कि बाहर निकल आए देखते इन्होंने मन मन सोचा कि मैं देश से बाहर निकलकर के मैं क्यों नहीं ग्लोबल अलार्म सेट करो ग्लोबल योर पॉलीटिकल एडवांटेज लेकर हमारी बात सुनना ध्यान से उस समय वांट टू मेरा दो तरह की लड़ाई होती है एकता एक्सप्रेस लाइव एक अलाइड पॉवर है ऐसे हों तो जर्मनी इटली जापान 5वें भी हारे थे टू फ्रंट यह आ जाए एलाइड पावर में कौन था वहां पर था वहीं इंग्लैंड फ्रांस पोलैंड यूरोप से और सोवियत यूनियन है यह एक साथ ही व्वे जीते थे दोबारा एक साथ भाग गए थे अब इन्हें सोचा कि दूसरा दौर शुरू हो गया है और भारत के आगे उस पर ब्रिटेन ब्रिटेन टैबलाइड पावर अ ब्रिटेन एलाइड पॉवर है तो चीनी एक्सप्रेस में किसी का सपोर्ट ले लूं तो यह बाहरी ताकतों से समर्थन लेने के लिए गए इन्होंने सोच सही मौका है इससे में दुश्मन अभी उलझा हुआ है कमजोर है मुझे बाहर निकल जाना चाहिए अब मज़े की बात समझ तेज वह नहीं होते जो मौके का इंतजार करते हैं बल्कि वह है तो सही मौके पर वार करते हैं इंदौर से दुश्मन का दुश्मन मेरा दोस्त तो पहले दोनों ट्राफी सोवियत यूनियन पर किया उसके लिए रोना प्लैन बना शुरू कर दिया और प्लेट बनाने के लिए इन्होंने अपने एक दोस्त है कि मियां अकबर शाह उनको टेलीग्राम भेजा पेशावर में और उनको पेशावर से कोलकाता बुला लिया कि भी आप मेरी मदद करो और मियां अकबर शाह उन्होंने बोला जो आज पाकिस्तान में पड़ता है कि भई तुम मुझको किसी तरह से काबू ले में का पुल के रास्ते उधर रूस में जाऊंगा यूएसएसआर हुआ करता था भी चौरसिया है तो अपने भतीजे शिशिर फ्रेंड के उनकी मदद से इन्होंने गाड़ी लिया गाड़ी में सीआईडी से बचते-बचाते पिछली सीट के नीचे लेट के दब के छुपके यह निकले वहीं उसको कलकत्ता से दिन थोड़ा दिन बाद सिर को काबुल काबुल से मोस्को जाना था अब वही है नेताजी सुभाष चंद्र बोस वह रविंद्र नाथ टैगोर ने कहा करते थे कि जो रिपोर्ट 10 क्यों हो [संगीत] कि चोली तो उल्टा व्यक्ति ले चल पड़ते यदि तोर डाक अगर तेरी आवाज सुनने सुनके कोणासन अगर कोई नहीं आता है तो तो भैया इकला चलो रे सारे जुगत लगाते सुभाष चंद्र बोस जर्मनी पहुंच गए इधर से मिलने के लिए इधर से अपॉइंटमेंट सैनिकों ने बहुत कोशिश करी बड़ी मुश्किल से इनको पॉइंट मिली जब यह जो कि वह बाहर ड्राईंगरूम में बैठे तो अचानक एक आदमी आया मतलब हिटलर है और आकर बोले हेलो मैं एक्टर हूं और अपना हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया सुभाष चंद्र बोस जवाब देते हैं मेरा नाम सुभाष मैं भारत से आया हूं और मैं आपसे नहीं है हिटलर से मिलना चाहता हूं हिटलर हैरान हो गए कि मैं ही तो हूं करो वापस लौट चलेंगे अंदर-अंदर से दूसरा आदमी आता है फिर हल्के हाथ लाता है लोग वह इतना रूप बताइए तो सुभाष चंद्र बोस पर खड़े हो गए नमस्कार मैं सुभाष चंद्र बोस भारत यायावर मुझे आपसे ने मुझे हिट से मिलना है समय अनुकूल अरे यह क्या चक्कर हिटलर तो यह मिलने के लिए सुभाष चंद्र बोस ने अयोध्या में नियुक्त न बनना चाहता हूं अब तीन चार जब लोग आए व्हाट्सएप को उन्होंने बोल दिया मैं आपसे निवेदन आपसे मिलना चाहता हूं तो इस घटना ने असल में अपने 45 आरोपी बना रखे थे उसको अपनी जान का खतरा रहता था और सुभाष चंद्र बोस हर बार पहचान गए अब असली हिटलर को जब ये बात पता चली तो उसकी बुद्धि चकरा गई और बाहर आए उनके लिए यह पहली बार वह पूरी पृथ्वी पर किसी आदमी ने पहचान लिया कि यार यह तो असली हिटलर नहीं है तो आप करके उन्हें यह अपना दूरी से भाग खड़े हो गए और दूर पर खड़े होकर को देखने लगे कि क्या चक्कर है पहचानता कैसे तब सुभाष चंद्र बोस खड़े हो गए और दूर से खड़े हो गए और बोले कि बताइए क्या बात है क्यों मिलना चाहते हैं और तभी सुभाष चंद्र बोस मथुरा के आगे बढ़े पूरे नमस्कार मैं सुभाष चंद्र बोस भारत आया हूं मैं आपका बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं हिटलर के आपने मुझसे मिलने का मुझे अवसर दिया हिटलर हैरान क्या पहचान गया यह अ बिल्कुल ठीक पहचाना पूछा कि तुम सब मुझे पहचान रखे थे तालिबान छोड़ पहले यह बताओ हंसे खास्ता दुनिया में कोई पहचान नहीं पाया मेरे यही सारे को कॉपी जो मेरे हिटलर के होते हैं यह दुनिया भर में घूमते सारे काम कराते तुमने पहचान लिया तो तभी सुभाष चंद्र बोस बोले कि भाई मैं आपसे मदद मांगने आया था मैं आपके चौखट पर आया हूं और आपका स्वभाव थोड़ा गर्म वक्त मत होना चाहिए थोड़ा गर्म वाला होना चाहिए और आगे पहले हाथ बढ़ा देते थे कि मैं हिटलर बताइए तो मैं उसी से समझ गया कि हिटलर के 51 खुशी पराधीन देश से भारत जो कि परतंत्र है वहां से कोई मदद मांगने आया तो आपके चेहरे में वह गर्भ नहीं देख रहा था तो आपके जो प्रॉफिट है और राइट बिहेवियर एंड डिस्पले कर रहे हैं और हिटलर की बुद्धि चकरा गए बोला ऐसा इंटेलिजेंट आदमी कभी नहीं देखा इसको क्या बोलते हैं एक्यूरेट जजमेंट है और इसके बाद इस मुलाकात से इतना प्रभावित हुआ कि जो युद्धबंदी होने बना रखे थे युद्धबंदी 24 हजार ने अंग्रेजों से जीते थे उनको उन्होंने फ्री कर दिया और वहां से आजाद हिंद फौज में जॉइंट कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ में हिटलर ने एग करी और मैंने कहा कि देखो अगर आगे बढ़ना चाहते हो जीना चाहते हो भारत जर्मनी से बहुत दूर है और जब ट्रेन एक्सप्रेस पावर हम लोग के साथ की पॉवर है मैं जापान में बात करवा देता हूं आपकी कुछ सिस्टम तय करते हैं कि मैं आपको जतन भेजता हूं यहां से और वहां से आप टीम बनाई को धक्का अप की मदद करेगा जापान हम लोग के साथ का है और जापान भी अंग्रेजों के खिलाफ है तो एक बड़ा मुस्कुराए तो बहुत अच्छा लगा तो हिटलर ने इनके लिए बहुत अच्छा अरेंजमेंट कि यह आप समझ सकते हैं बाकी लोग भारत में ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे लेकिन यह दुनिया भर में इंटरनेशनलाइज्ड कर रहे थे अंग्रेजों को पता लग गया अब तक पर यह इस समय जर्मनी में है और वहां से ने पूरी तैयारी कर ली इनको हिटलर ने अपनी प्राइवेट बड़ी पनडुब्बी थी जिसमें उन्होंने अब जो जर्मनी की नौसेना की बड़ी पनडुब्बी थी और उसमें 90 दिन लगे थे वह जहां पानी के ऊपर पानी के नीचे सब तरह से ट्रेवल कर सकती थी उससे इन्होंने को सुमात्रा द्वीप में भेजा जो आजकल इंडोनेशिया थाइलैंड को जापान ने जीता हुआ था और जापानी सेना के कब्जे यहां पहुंचे नेटवर्क की मदद से पहुंचे असर के कारण पहुंचे इंजन हिटलर को इनक्रीस कर पाए तुम मात्रा से पर यह जो कि जप नहीं डालनी है अब इंडोनेशिया के पास है वहां से प्लेन से टोक्यो पहुंचे और वहां पहुंचने के बाद यह जानते थे कि जब ट्रेन एशिया के अंदर ही अपना वर्चस्व की लड़ाई कर रहा है तो जापान के प्रधानमंत्री को जाकर और इंंफ्लुएंट किया ऐसे इंटेलीजेंट रिडल नहीं थे जो इतने पढ़े लिखे थे इतने इंटेलिजेंट वहां जाकर प्रधानमंत्री को साथ में बैठाया और उनको क्या बोला देखिए भाई साहब ही देखी तो जो एक बात समझ लीजिए कि एशिया तो एशियाई लोगों का होना चाहिए ना एशिया में बाहर के गोरे कैसे आ गए हों बड़ा मुस्कुराए क्या जबरदस्त आदमी बहुत तो ठीक है वहीं ऐश्वर्या तो रिहाई का होना चाहिए तो हृदय की कोई बात अच्छी लगी उन्होंने कहा कि आपके भगवान बुद्ध और हमारे यहां भी तो भगवान बुद्ध हैं हमारी कितने पूजनीय है उस यहां से तो हम भाई-भाई हो गए भड़ाई इंप्रेस हुए उन जापानी प्रधान मंत्री थे उन्होंने जाकर पार्लिमेंट में नामित कर दिया कि हम सुभाष चंद्र पूरी मदद करने को तैयार है भारत की आजादी की लड़ाई में जापान के साथ में सुभाष चंद्र बोस जानते थे कि इनका इस समय सिंगापुर के साथ झगड़ा चल रहा है सिंगापुर में अटैच कर रहे हैं और सुभाष चंद्र बोस को मालूम था कि अंग्रेजों की सेना सिंगापुर में थी वह 85,000 ब्रिटिश सैनिक थे जिनमे से 450 टो इंडियन तो है तो इन्होंने पहले से यह योजना बना रखी थी जिसमें जापानीज को यह मैसेज मे है कि जब तुम्हें सिंगापुर में बम गिरा होंगे वह परिचय भेज दो और बम का परिचय भेज फेकू पर हवाई जहाज से हर पर्चे में लिखो हिंदी में भी तमिल में भी अंग्रेजी में भी थी कि तुम भारतीय कब तक अंग्रेजों का गुलाम बनके उनके साथ लड़ते रहोगे तुम भारतीय कब तक अंग्रेजों खिलाफ वहां पर जितने भी सिंगापुर में सैनिक थे जो भारतीय को परिचय पढ़ लेते थे और वहां पर अंदर विद्रोह चालू हो गया इनकी रणनीति सुभाष चंद्र बोस के प्रधानमंत्री जापान के साथ मिलकर काम भाई अटैक की रणनीति कुमार सफलता मिली और आईपीएल मैच इन करिए जैपनीज प्राइम मिनिस्टर कॉन्फ्रेंस कर दिया उनको तक योजना समझा दी सिंगापुर हटा करके सिंगापुर अफेक्टिंग आप ओर जापान का हो कि अ ज्योति उनका हुआ प्रधानमंत्री बनते खींचते तो वहां जब 45,000 ब्रिटिश आर्मी के अंदर इंडियन सैनिक थे उनको जैपनीज में इनको वापस कर दिया सुभाष चंद्र बोस को और वहां से तैयार हुई पूरी आर्मी रासबिहारी बोस तो वहीं पर इंडियन लोगों को तैयार किया करते थे उनके माध्यम से नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया गया और अब तैयार हो गई आजाद हिंद फौज यहां से अंग्रेजों को पता लगा कि यह बहुत बड़ी तैयारी कर रहा है जापानी सेना बल बुद्धि चुकी थी अ बर्मा में कब्जा उनका था या प्लीज टाइम निकालकर भैया बर्मा के रास्ते भारत में घुसेंगे और प्राइम मिनिस्टर ने पूरा सहयोग किया ना ज़ाणा पहाड़ियां यानि कि नॉर्थ ईस्ट जो नागालैंड है वहां से मैदानी इलाकों में जाएंगे पहाड़ों पर हिमपात से मैदानी इलाकों में जाएंगे एक पर 1944 में आजाद हिंद फौज जो यह सिंगापुर अपनी टीम तैयार करके आए थे वर्मा से टीम तैयार करके आए थे ब्रिटिश सेना को खदेड़ कर मणिपुर में जा करके पहली बार तिरंगा डाला पूरी पूरा देश हुआ है लिया उस समय एक बात आपको बता दें मानते तो दिल से गांधी है कि हमारा देश में डिवाइड रह सकता था क्या कहते हैं कि अगर आप किसी को जोड़ना चाहा प्रसाद तो उसे केवल गले नहीं दिल से लगाना चाहिए क्योंकि गांधी यह जानते थे कि जिन्ना कितना भी शोर मचा ले सारे हिंदू और मुसलमान अगर किसी 1 लीटर कोई कठिन मानते थे तो वह थे सुभाषचंद्र बोस मैं कोई कहानी बता देता हूं 1948 में जब रंगून के अंदर बर्मा में ही अपनी फौजें इकट्ठी कर रहे थे तो आजादी के लिए अपनी सोच को इकट्ठा करने के लिए सबसे योगदान मांगे और उस योगदान के दौरान वहां पर मुस्लिम व्यक्ति आया और उसने आकर के बोला के सुभाष चंद्र बोस जी में आपको अपना सब कुछ देने को तैयार हूं मेरे पास कुछ करोड़ रुपए है याद रखना उस समय कुछ घरों पर बहुत हुआ करते थे मेरे पास कुछ करोड़ रुपये अपना घर अपना परिवार है मतलब आपको देने वाला हूं तो वह सुभाष चंद्र बोस इन को बोले उस मुसलमान व्यक्ति को कि तुम क्यों मुझको अपना सब कुछ दे दोगे अगर अपना घर कैसे चलाओगे तो उसने क्या बोला अब घर थोड़ी चलाना है अब तो मैं भी मेरी पट भी मेरी बच्चे भी आपकी सेना में गांधी यह बात जानते थे इन्फेंट यह तो एक बार खुद मोहम्मद अली जिन्ना ने भी बोला था कि अगर सुभाष चंद्र बोस प्रधानमंत्री बनते हैं कि उनके साथ रहने को तैयार रुको ने पाकिस्तान के आवश्यकता नहीं मैं आपको ऐसे बताऊंगा कि गांधी की होने रिस्पेक्ट फिर भी जीवन भर करीब सिंगापुर में जो तैयारी कर तब वहां से भी एक रेडियो के अनाउंसमेंट उन्होंने बोला कि गांधी जी राष्ट्रपिता है लेकिन इंडिया में एक चैप्टर सुभाष चंद्र बोस की बहुत बड़ी थी वह इतनी बड़ी थी कि आधा वास्तव में 1945 में वह जीवित होते ना कुछ चांसेस तक इनको राष्ट्रपिता की उपाधि मिल जाती पहले प्रधानमंत्री तो है पक्का बनते ही बनते हैं उनसे कारण क्या है क्योंकि इससे ज्यादा बुद्धिमान व्यक्ति इंटलेक्चुअल जीनीयस इन से ज्यादा विजनरी दूर-दूर तक सोच सके क्योंकि बाकी सब तो ऑपरेशंस में हिंदुस्तान में लड़ रहे यह पूरी दुनिया का एलाइंस लेकर आते रहते थे जब इकॉनमी को समझना इंडस्ट्राइलाइजेशन को समझना भी रोक ऋषि को समझना सोशल सर्विस को समझ नाथ गुप्त डिप्लोमेट इंटरनेशनल रिलायंस जिओ पॉलिटिकल पार्टनरशिप इनके पास शायद बुधादित्य योग ताबूत धृत्यू गिवर होता है कि आप जब भी कुछ कहें तो पूरी दुनिया की बात मानें कि जहां जो बोलते दुनियां की बात मानती थी यह चांसेस है क्या आपके रहते तो उसके बाद पाकिस्तान बनता ही नहीं पाकिस्तान भारत में होता मैं फिर बता रहा हूं आप और दुग्गी गांधी यह बोलते थे कि आंटी वाइट चाहते थे और जिन्हें अगर कंट्रोल में आते तो केवल इन्हीं के कंट्रोल में आते सुभाष चंद्र बोस के जिन्ना और तो किसी की नहीं सुनते थे पर दुर्भाग्यवश यह के पीछे 1945 चुका था वर्ल्ड वॉर में अमेरिका ने हिरोशिमा नागासाकी पर बम डाल दिया जापान में जापानी लोग पीछे हो गए लेकिन क्या आजाद हिंद फौज की याद है हमें कुर्बानी भूलें इतिहासकारों ने नहीं लिखी उनकी कहानी जितना कर सकते थे उसे बहुत ज्यादा सपोर्ट किया जब मैंने पर आप उसने सारा सपोर्ट वापिस खींच लें क्योंकि संभव था ही नहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिन्होंने पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने महिलाओं की ब्रिगेड बनाई अब हम झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के नाम पर ब्रिगेड तैयार करी थी अब इन्होंने नॉर्थ ईस्ट सारी की सारी अपनी टीम को थोड़ा वापस बुलाया है क्योंकि पीछे से मारे को आम आम लेमिनेशन खाना वह सारी सप्लाई रुक गई थी अब सुभाष चंद्र बोस जिससे मैं अल्टरनेट प्लांट को बिल्कुल और तूने क्या सोचा वियतनाम जापान के पास है तो यह वहां से फ्लाइट लेकर के मोस्ट को जाना चाहते थे वर्ल्ड ओवर टू लगभग खत्म हो चुका था हिरोशिमा नागासाकी के बाद दो रिप्लाई किया था यूएसए तारे के साथ में न एयरलाइंस बढ़कर में कुछ नई स्ट्रैटेजी लेकर नई योजना से जब वह जाने लगे अब वियतनाम से मॉस्को जाते वक्त खबर ऐसी आई कि ताइवान रस्ते में ताइवान के एयरपोर्ट के पास उनका जहाज क्रश है उसमें देहांत हो गया फिर इसमें बहुत सारी बातें थी उनका देहांत हुआ कि नहीं वक्त की बात बाद में कर लूंगा पर भारत में अंग्रेजों ने हमारी सारी लीडरशिप को उठा लिया पकड़ लिया वह क्राइम और के तहत हमारे यहां के जो आदमी के अधिकारी थे जो आधारित पहुंच गए थे उनको सबको पकड़ा उन्होंने और देशद्रोह के आरोप में उन पर मुकदमा चलाने लगे यहां पर एक नेताजी अब तक बहुत कम कर चुके थे पूरी दुनिया में खबर फैल चुकी थी इस क्रीम का देहांत हो चुका है वह जीवित नहीं है अब यह थोड़ा मनोबल टूट रहा था लेकिन गुस्सा भी बहुत बढ़ रहा था इनकी जो तीन सबसे इंपोर्टेंट सीनियर लीडर्स हैं जिसमें शाहनवाज हुसैन गुरबख्श सिंह याद दिलाओ कि यह पंजाबी थे और पीके सहगल यह तीनों के करें जैसे थे कि जब इनको अंग्रेजों ने दिल्ली में बुलाकर तंग करना शुरू किया और उन्हें बड़ी मजबूती के साथ बोला कि हम आजाद हिंद फौज के लिए लड़की हमने ठीक किया तो वहां पर यह सब बातें अखबार में आई थी कि अखबार में आ गई अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस का देहांत हो गया यह सब पकड़े गए तो यह गुस्सा भारत में बढ़ने लगा गैस से नेताजी सुभाष चंद्र बोस सबसे बड़े कॉन्ट्रीब्यूटर माने जाएंगे हमारे देश की आजादी के लिए कैसे पता चलेगा कि तुरंत अगले हर हफ्ते में नहीं खबरें आने लगी और रॉयल नेवी जो थी तो ब्रिटिश की नीव थी ब्रिटेन की निमित्त वहां पर अंदर से ही बगावत होने लगी जितने भारतीय सैनिक थे रॉयल नेवी के पास में चने बोल दिया अब हम तुम्हारे साथ में नहीं है जब वह सब खबरें आई तो रॉयल एयर फोर्स रॉय रिपोर्ट मतलब जो ब्रिटेन के पास एयरपोर्ट थी यानी कि जिसमें भारतीय सैनिक काम करते थे वहां भी बगावत होने शुरू हो गई यह कुल मिलाकर लगभग 20 हजार सैनिकों की बगावत पब्लिक में आए और वह खिलाफ उत्तर बगावत और बड़ी तुम्हारे सैनिकों ने गुस्सा आने लगा उससे क्या हुआ था जय हिंद के नारे जब बहुत तेज हुए तो सब प्रभावित होते हुए रॉयल एयरपोर्ट बची थी वहां पर भी बगावत बड़ी ब्रायलर फूड और ऑयली फास्ट के बाद में बच्ची ब्रिटिश इंडियन आर्मी वह विद्रोह चालू हो गया अब यह विद्रोह पूरा फैल गया सारे के सारे लोग गुस्से में आ चुके थे और अंग्रेजों के अंदर लगने लगा कि भई अब इन पर भरोसा करना संभव नहीं है भारत में ब्रिटेन की जो आर मीणा सुनिएगा भारत में जो ब्रिटेन की आर्मी थी वो केवल 40,000 लोग खेती इंडियन सोल्जर परिचय खिलाते अब 40,000 जहां से अब भारतीय सैनिक 25 लाख और 259 कोई 40,000 कंट्रोल करते थे अब वह 25 लाख तो छोड़ो अब इस विद्रोह के बाद उस 25 हजार के साथ भी लड़ने लायक नहीं बचे थे ब्रिटिश अर्थ है वहां उठ दुनिया भर में लड़ाई करवा चुके थे वर्ल्ड ओवर टू के बाद में अब इनको लगा कि हमारे 40,000 उनके 25 लाख इनके 25 लाख से लड़ने के लिए हम 40 हजार को के चार लाख कर सकते हैं कि हम दोबारा इंग्लैंड से मंगा सकते थे ना अब वर्ल्ड वर टू के बाद पॉसिबल था नहीं तो वहां के लिए बड़ा कांटा फिर चित्तौड़ के भाई इन 25 लाख कौन पंखा भी दिए जा रहे हैं और यह रिपोर्ट भी किए जा रहे हैं तो उनको डी कमीशन करना शुरू किया है इनको भी निकालो अब इनको तनख्वाह देनी बंद कर दो उनको बाहर कर दो वॉल्यूम को ठीक कमीशन किया कि सैलरी कॉस्ट बहुत जल्दी पहचान के पास स्थानीय और लोग लाभ मिल सकते थे अब यहां पर विद्रोह और बढ़ गया क्योंकि उनको नौकरियों से निकाले जाने लगा अब नौकरी से निकाला और विद्रोह बढ़ गया है जो अंदर बच्चे थे वह विद्रोह कर रहे थे जो बाहर आ रहे थे वह भी विद्रोह कर रहे थे कई बार पूछते नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने क्या किया यही किया पूरे देश के अंदर पहले लोग बोलते यहां भी थप्पड़ मारो यहां बीमारों और यहां किया वह पूरी सेना ने इतने थप्पड़ मारे के अब उनको लग गया अब हम यहां रुक नहीं सकते हैं और परिस्थितियों को देखकर ब्रिटेन ने उसी समय भारत को स्वतंत्र करने की घोषणा करनी चालू करिए और यह बात कर सकूं इस घटना से मिलता है कि उस समय के जो 1956 में उस समय के जो प्रेसिडेंट हैं समा जाता हूं प्राइम मिनिस्टर करते यानि कि क्लेमंट एटली यह 1945 से 1951 के दौरान यह प्राइम मिनिस्टर हुआ करते थे यह भारत आए बाद में और जब भारत यहां पर कई लोगों से पूछा कि भाई आफ वर्ल्ड वर टू बीत गए वन भी जीत गिफ्ट अपने क्यों भारत को छोड़ दिया तो जल्दी सब कुछ आपके पक्ष में तो फिर आपने क्यों छोड़ा आ तब उन्होंने बताया कि भारतीय सैनिकों का जो विद्रोह था ना उससे हम टूट चुके थे हम तनखा भी यह हमारे लिए कॉस्ट भी तो उनका विद्रोह आया और यह विद्रोह और दूसरी तरफ कई दोबारा आजाद हिंद फौज ना आ जाए पढ़ते लेमन देख लीजिए एक बात बताइए जो नरम दल था कि गांधी-नेहरू उनसे कितना प्रभाव पड़ा क्लेमेंट एटली ने बोला उनका कोई प्रभाव था ही नहीं सारा प्रभाव कहां से आ रहा था यह मैंने आपको बताया जानते पहले लिमिट ली कौन है यह वही व्यक्ति है जिन्होंने इंडिया इंडिपेंडेंस एक्ट पर हस्ताक्षर किए थे इन्हीं के सिग्नेचर से हम लोग इंडिपेंडेंट डायरेक्टर क्यों बोलते हैं मजबूरी का नाम महात्मा गांधी आप कमेंट बॉक्स बताइएगा तो मैं गांधी पर वीडियो बनाऊं आप अब इस समय हर देश के पावरफुल पर्सनैलिटी प्रोग्राम वीडियो देखना चाहते तो मेरे YouTube चैनल पर आई है मैं बताना चाहूंगा आपको आगे चलकर कि क्या वह सारी की सारी अलग-अलग प्रकार की थ्योरी है कि कहा उन्हें या जीवित रहे या नहीं रहे बोस अब नहीं बच्चे एयरक्राफ्ट में 1945 में वह चले गए यह भी एक छोड़ी है अब बॉस को टॉर्चर किया गया जनरल जीडी बक्शी ने बताया कि अंग्रेजों ने उनको बाद में टॉर्चर किया गया हमको प्रधान उनको जेल में मार दिया गया यह भी प्रकार की चोरी है बोध जीवित थे और फ्रेंड्स सीक्रेट सर्विस में इन्वॉल्व हो गए थे यह भी एक छोर है बॉस में आगे चलकर के भगवान जी यह गुमनामी बाबा बने यह भी प्रकार की चोरी है बहुत सारी कंट्रोवर्शियल है 18 को का पेन क्रश वस्तुतः इस तारीख को की खबर क्यों हुआ यह सब मुखर्जी कमीशन के अनुसार ताइवान के अंदर कोई घटना में कोई ऐसा कोई एयरक्राफ्ट हुआ ही नहीं था दूसरा कई लोगों ने बताया कि लोग अपने बयान बदलते रहे रहमान के साथ उनके बयान बदल तरह ताइवान सरकार के पास विमान हद तक कोई दस्तावेज नहीं है उनके अस्थि कलश को आज भी रैंकोजी मंदिर मचा रखा उसका डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया तो बॉस के बारे में बहुत सारी कंफ्यूजन हमेशा रही हैं और अलग-अलग प्रकार के थ्योरी जाती रही है ऐसा नहीं कि इस पर प्रश्न नहीं उठाया अकबर प्रश्न उठा बहुत बार रिसर्च भी करने शुरू करें इंफ्रुक्ट्यूअस कि इंटेलीजेंट यह के इंटेलीजेंसी रशिया के इंटेलीजेंट सपने बड़ा जोर लगाया लेकिन रिपोर्ट में कुछ समझ में नहीं आ शहनवाज कमीशन के विधायक 1955 में उन्होंने बता दिया कि रिप्लेस कर आर्शीवाद खोसला कमीशन अगले सप्ताह में बॉयज प्लेन को राशि व मुखर्जी कमीशन 1999 में है उसको रिपोर्ट समझ में नहीं आई इस विशेष सहायक कमिश्नर आया बाद में उन्होंने बोला सिर्फ बदनामी बाबा नहीं थे तब जबकि बहुत लोगों ने माना कि गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के इसकी बहुत सारी स्टोरी में किसी से मैच ऊपर ऐसे वीडियो बनाऊंगा सुभाष चंद्र बोस जी की मौत का रहते हैं चाहे जो भी हो लेकिन वह व्यक्ति ऐसे थे जिन्होंने जीवन के जन-जन के जीवन को सार्थक बनाया है उनका देहांत हुआ है लेकिन उनके प्रति हमारा स्नेह अंत नहीं हुआ हमारी प्रेम का अंत नहीं हुआ उनका देहांत हुआ है लेकिन उनके विचारों का अंत नहीं हुआ है वैसे एक बात पक्की है कि उस समय में अस्त्र-शस्त्र से लड़ाई हुआ करती थी और उनका इंडस्ट्राइलाइजेशन पर हमेशा से बड़ा खतरा है कि मैं कैसे एप कि बनसी बना हुआ कैसे सिक्के बना वह कैसे नसलाइजेशन करूंगा मेरी कौन भी कैसे शुरू करेगी बहुत विजनरी थे इच्छा तो इतनी के इस विडियो को और एक घंटा तक चलने दूध पीना कुछ में बताना चाहता हूं कि वह रीनकानेट कर सकें उनके वृषण कोष लीडरशिप में डाल सकते हैं लेकिन आज अस्त्र-शस्त्र की लड़ाई नहीं है आज लड़ाई मार्केट शेयर किया था आपको भी सीखना वह या अपने बिजनेस इसको स्प्रेड करके दुनिया भर में अपनी कंपनी को कैसे शुरू करें कैसे आप अपने बिजनेस को अपने आईडीएस को अपने फैंस को दुनिया भर में ले करके जाएं और वहां से बिजनेस को वापस इंडिया में इस वहां से ग्लोबल रेवेन्यू को इंडिया में ले करके आए आपको भी ग्रो करना है और यह चैनल मेरा फ्री लोन क्वालिटी अब बदल चुका में पूरे जोश के साथ वापस आ चुका हूं कि शेयर करिए इस वीडियो को शेयर करिए दबा के शेयर करिए बताइए लोगों को कौन से नेता जी सुभाष चंद्र बोस इन के कारण हल्दी मिर्च केवल गांधी नेहरू के बारे में ऐसा नहीं कि मॉम का सम्मान नहीं करता हूं उनके बारे में वीडियो जरूर बताऊंगा आप प्लीज लाइक करिए मेरी मेरी बहुत मेहनत जाती है वीडियो को बनाने में एक बहुत ही फट जाता है वीडियो को बनाने में नहीं आए तो जरूर सबस्क्राइब करिए और वीडियो को शेयर में रहने के लिए हमारे साथ जुड़े रहने के लिए आप सबका मुस्कुराहट के साथ प्रेमपूर्वक बहुत-बहुत धन्यवाद [संगीत]
Comments
Post a Comment